By पं. अमिताभ शर्मा
विद्वानों की व्याख्या, पाठ्य विरोधाभास और संतुलित दृष्टिकोण

सनातन धर्म में विवाह केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं बल्कि भाग्य और संस्कारों का पवित्र संयोग माना जाता है। श्रीराम और माता सीता का विवाह हिंदू परंपरा में सबसे आदर्श दांपत्य के रूप में पूजनीय है। परंतु आधुनिक काल में एक विवादास्पद प्रश्न उठता है: विवाह के समय राम और सीता की वास्तविक आयु क्या थी?
एक प्रचलित मान्यता यह है कि राम-सीता का विवाह सीता के स्वयंवर में शिव धनुष (पिनाक) तोड़ने के तुरंत बाद हुआ। किंतु यह कथा, यद्यपि अनेक पुनर्कथनों में मिलती है, मूल वाल्मीकि रामायण से भिन्न है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, राम-सीता का विवाह पहले हो चुका था, जब महाराज जनक उन्हें शिवजी के अवशेषों के दर्शन हेतु मंदिर ले गए। वहीं राम द्वारा धनुष को छूते समय वह आकस्मिक रूप से टूट गया। अतः धनुष तोड़कर सीता को पाने की कथा प्रतीकात्मक है, जबकि वास्तविक विवाह इससे पूर्व संपन्न हुआ था।
वाल्मीकि रामायण के अयोध्या काण्ड में राम की आयु का स्पष्ट संकेत मिलता है। जब राम वन जाने की तैयारी कर रहे थे, तो माता कौशल्या ने कहा:
"दश सप्त च वर्षाणि जातस्य तव राघव,
अतीतानि प्रकांक्षन्त्या मया दुःख परीक्षयम्।"
(वाल्मीकि रामायण, अयोध्या काण्ड, सर्ग 20, श्लोक 45)
कौशल्या बताती हैं कि राम के उपनयन (यज्ञोपवीत संस्कार) के समय वे 17 वर्ष के थे। रामायण में वनवास के समय राम की आयु 27 वर्ष बताई गई है, अर्थात इन दो महत्वपूर्ण घटनाओं के मध्य एक दशक का अंतर है।
तुलसीदास के रामचरितमानस में लिखा है:
"वर्ष अठारह की सिया, सत्ताईस के राम,
कीन्हो मन अभिलाष तब, करनो है सुर काम।"
यह दोहा स्पष्ट करता है कि वनवास के समय सीता 18 वर्ष की और राम 27 वर्ष के थे।
अरण्य काण्ड में सीता ने रावण से कहा:
"मम भर्ता महातेजा वयसा पञ्चविंशकः।
अष्टादश हि वर्षाणि मम जन्मनि गण्यते।।"
यहाँ सीता स्पष्ट रूप से कहती हैं:
सीता आगे कहती हैं: "उषित्वा द्वादश समा इक्ष्वाकूणाम् निवेशने।"
अर्थात विवाह के बाद मैंने अयोध्या में 12 वर्ष व्यतीत किए।
यदि इन श्लोकों को शाब्दिक रूप से लें तो:
अनेक संस्कृत विद्वान इस गणना को गलत मानते हैं। उनके अनुसार:
कुछ विद्वान मानते हैं कि प्राचीन काल में द्विजों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) की आयु उपनयन संस्कार के बाद से गिनी जाती थी। इस आधार पर वनवास के समय राम की "17 वर्ष" की आयु का अर्थ है उपनयन के बाद के वर्ष, न कि जन्म से।
प्राचीन भारत में:
कई आधुनिक व्याख्याकार इन श्लोकों को गलत समझते हैं और बाल विवाह का समर्थन या विरोध करने के लिए उनका दुरुपयोग करते हैं।
वाल्मीकि रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि राम-सीता के विवाह की आयु के संबंध में:
आधुनिक समाज में हमें इन कथाओं से प्रेम, त्याग, धर्म और आदर्श जीवन के संदेश ग्रहण करने चाहिए, न कि विवादास्पद गणनाओं में उलझना चाहिए।
प्रश्न 1. राम-सीता के विवाह की वास्तविक आयु क्या थी?
उत्तर: विभिन्न ग्रंथों में विरोधाभास है; विद्वान मानते हैं राम 25 और सीता 16-18 वर्ष की थीं।
प्रश्न 2. क्या प्राचीन काल में बाल विवाह प्रचलित था?
उत्तर: विवाह संस्कार और गृहस्थ आश्रम में अंतर था; वास्तविक दाम्पत्य उपयुक्त आयु में आरंभ होता था।
प्रश्न 3. वाल्मीकि रामायण में आयु विरोधाभास क्यों है?
उत्तर: विभिन्न आयु गणना पद्धतियां, पाठ्य भ्रष्टता और प्रक्षेप के कारण।
प्रश्न 4. आधुनिक व्याख्या की क्या समस्या है?
उत्तर: संस्कृत भाषा, सामाजिक संदर्भ और प्रतीकात्मकता की अनदेखी से गलतफहमी होती है।
प्रश्न 5. राम-सीता विवाह से क्या शिक्षा लेनी चाहिए?
उत्तर: प्रेम, त्याग, धर्मपरायणता और आदर्श दाम्पत्य जीवन के संदेश महत्वपूर्ण हैं।
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