By पं. अभिषेक शर्मा
ये हनुमान मंत्र मानसिक शांति, स्थिरता और एकाग्रता बढ़ाने के लिए सबसे प्रभावी माने जाते हैं

तनाव और चिंता के समय में मन को शांत करने का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम जाप है। जब ध्वनि, विश्वास और नियम मिलते हैं तब वह साधना बन जाती है। हनुमान जी के मंत्र इसी साधना का सशक्त रूप हैं। यह मंत्र न केवल भावनात्मक स्थिरता देते हैं बल्कि मस्तिष्क की तरंगों को भी संतुलित करते हैं। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, जब व्यक्ति एकाग्र होकर एक ही ध्वनि का बार‑बार उच्चारण करता है, तो मस्तिष्क में अल्फा और थीटा प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं जो तनाव को कम कर देती हैं। साथ ही शरीर का “विश्रांति और पाचन” तंत्र सक्रिय होता है जिससे श्वास और हृदय की गति सामान्य रहती है और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।
हनुमान उपासना केवल शक्ति की साधना नहीं है, यह आत्मनियंत्रण और संतुलन का अभ्यास भी है। आइए जानें वे पाँच हनुमान मंत्र और स्तोत्र जो मन को शांत करते हैं और व्याकुलता से मुक्ति दिलाते हैं।
इस मंत्र का अर्थ है - "श्री हनुमान को नमन, जो स्वयं बल, एकाग्रता और निर्भयता के स्वरूप हैं।" जब विचार अनियंत्रित हो जाते हैं तब यह मंत्र मन को स्थिरता प्रदान करता है और स्मरण कराता है कि भय केवल मन की रचना है। यह मंत्र मानसिक प्रकाश को पुनः केंद्रित करता है और क्लांत विचारों को शांति देता है।
जप की संख्या
परंपरागत रूप से इसे प्रतिदिन 108 बार जपना श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि 108 संख्या पूर्ण माला का प्रतिनिधित्व करती है जो अनुशासन और सुरक्षा का प्रतीक है। कुछ अनुशासित साधक विशेष काल में इसे 108 × 11 (1,188) बार भी करते हैं।
उत्तम समय
इसका सर्वश्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) या सूर्यास्त के बाद का समय माना गया है जब मन शांत और ग्रहणशील होता है।
गोस्वामी तुलसीदास रचित 40 छंदों की यह रचना केवल भक्तिपूर्ण काव्य नहीं बल्कि ध्वनि और अर्थ का ऐसा संयोजन है जो हृदय और मस्तिष्क को जोड़ देता है। इसका नियमित पाठ मन को स्थिर करता है और विचारों की गति को शांत करता है।
जप की संख्या
सामान्य रूप से इसे प्रतिदिन एक बार पढ़ा जाता है, जबकि विशेष अवसरों पर इसे 3, 7 या 11 बार भी किया जाता है।
उत्तम समय
प्रातः स्नान के बाद या संध्या के समय भोजन से पूर्व इसका पाठ सर्वोत्तम माना गया है। यह अभ्यास दिनचर्या में आध्यात्मिक लय लाता है।
राम रक्षा स्तोत्र एक प्राचीन संस्कृत स्तुति है जो भगवान राम के संरक्षण भाव को जागृत करती है। यद्यपि यह हनुमान जी का मंत्र नहीं है, परंतु इसका पाठ हनुमान की उपासना को पूरक करता है क्योंकि हनुमान को श्रीराम का संदेशवाहक और अनन्य भक्त माना गया है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ मन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना स्थापित करता है।
जप की संख्या
इसे प्रतिदिन एक बार पढ़ना पर्याप्त माना गया है।
उत्तम समय
सोने से पूर्व इसका पाठ मानसिक शांति और रात्रि के लिए रक्षण प्रदान करता है।
यह स्तोत्र हनुमान जी के तेजस्वी, प्रचंड और अदम्य रूप की आराधना के रूप में किया जाता है। जब व्यक्ति को लगता है कि उसके विचार या परिस्थितियाँ रुकावट बन गई हैं तब बजरंग बाण का पाठ उन आंतरिक अवरोधों को तोड़ता है। “बजरंग” शब्द स्वयं शक्ति का प्रतीक है और “बाण” मतलब ऊर्जा की दिशा जो अवरोधों को भेदकर मार्ग बनाती है।
जप की संख्या
इसे सामान्यतया मंगल या शनिवार जैसे शुभ दिनों पर एक बार किया जाता है। अत्यंत अनुशासित साधक इसे सीमित काल के लिए नियमित रूप से करते हैं।
उत्तम समय
सुबह 10 बजे से पहले या सूर्यास्त के पहले का समय सर्वोत्तम माना गया है।
रामायण का यह अंश हनुमान जी की यात्रा, साहस और भक्ति की गाथा है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार उन्होंने असंभव सी प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में भी समाधान खोजा। सुंदरकांड का पाठ केवल कथा नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक सीख है कि अपने भीतर के संकटों का सामना साहस से करना ही समाधान का मार्ग है।
जप की संख्या
सप्ताह में एक बार, विशेषकर मंगलवार को इसका पाठ उत्तम होता है।
उत्तम समय
मंगलवार को शांत वातावरण में, ध्यानपूर्वक इसका पाठ सर्वोत्तम फल देता है।
मंत्र जाप या पाठ हमेशा स्वच्छ और शांत वातावरण में किया जाना चाहिए। मोबाइल या किसी विचलित करने वाली वस्तु के साथ जप करने से एकाग्रता भंग होती है। भोजन के तुरंत बाद या क्रोध की अवस्था में जप नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थितियों में ऊर्जा असंतुलित हो जाती है।
सात्त्विक आहार, सद्विचार और स्वच्छता को बनाए रखना इस साधना का आवश्यक भाग माना गया है। जिन्होंने अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र जैसे बजरंग बाण का दीर्घकालिक पाठ करना हो, उन्हें गुरु या विद्वान की सलाह अवश्य लेनी चाहिए क्योंकि यह अभ्यास अत्यंत ऊर्जावान माना जाता है।
हनुमान मंत्र केवल भय से मुक्ति नहीं देते बल्कि मनोबल को दृढ़ कर जीवन में शांति लाते हैं। इनका अभ्यास हमें यह समझाता है कि स्थिरता किसी बाहरी चीज़ में नहीं बल्कि भीतर के संतुलन में निहित है।
1. ॐ श्री हनुमते नमः मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
इसे प्रतिदिन 108 बार जपना शुभ माना गया है और विशेष साधना में 1,188 बार तक भी किया जा सकता है।
2. हनुमान चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
सुबह स्नान के बाद या शाम के समय पढ़ना उचित है क्योंकि इन समयों में मन स्वच्छ और शांत रहता है।
3. बजरंग बाण का पाठ कौन से दिन करना श्रेयस्कर है?
मंगल या शनिवार को इसका पाठ शुभ माना गया है।
4. सुंदरकांड के पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
यह हमें बताता है कि कठिनाइयों से भागने के बजाय उनका सामना करने से ही मार्ग मिलता है।
5. मंत्र जाप करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
स्वच्छ स्थान पर, ध्यानपूर्वक, भोजन के तुरंत बाद या क्रोध की अवस्था में नहीं करना चाहिए।
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