By अपर्णा पाटनी
हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान गायत्री और अन्य शक्तिशाली मंत्रों के माध्यम से डर, थकान और बाधाओं को भीतर से संभालने की विस्तृत मार्गदर्शिका

हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ऐसे दौर आते हैं जब भीतर से थकान हड्डियों तक उतर जाती है। बाहर से सब कुछ संभालते हुए भी अंदर ही अंदर टूटन महसूस होती है। जिम्मेदारियां, अपेक्षाएं और हर समय ठीक दिखने का दबाव मन को घेर लेता है। ऐसे समय में केवल सलाह या तर्क काम नहीं आते, एक गहरी आध्यात्मिक पकड़ की जरूरत महसूस होती है।
हनुमान साधना ठीक इसी बिंदु पर सहारा देती है। हनुमान न तो केवल “वानर देवता” की कहानी भर हैं, न ही केवल शक्ति के प्रतीक। हनुमान वह ऊर्जा हैं जो बिना दिखावे के समर्पण देती है, वह साहस हैं जो शोर नहीं करता और वह शक्ति हैं जो दूसरों को सहारा देकर स्वयं शांत खड़ी रहती है। हनुमान से जुड़े सात प्रमुख मंत्र जीवन की बड़ी उलझनों को भीतर से हल करने का रास्ता बन सकते हैं, यदि उन्हें सही भावना और धैर्य के साथ अपनाया जाए।
हनुमान से जुड़ी मंत्र साधना का मूल उद्देश्य केवल “समस्या खत्म हो जाए” इतना भर नहीं होता। इन मंत्रों का काम होता है
सातों मंत्र अलग अलग स्तर पर काम करते हैं
आम तौर पर हनुमान साधना में यह तीन बातें आधार मानी जा सकती हैं
नीचे दी गई सारणी इन सात मंत्रों को एक दृष्टि में समझने में मदद कर सकती है।
| क्रम | मंत्र | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1 | हनुमान चालीसा | समग्र संरक्षण, संकट में स्थिरता |
| 2 | ॐ हं हनुमते नमः | त्वरित बल, मानसिक थकान में सहारा |
| 3 | हनुमान गायत्री मंत्र | स्पष्टता, एकाग्रता और दिशा |
| 4 | श्री बजरंग बाण | तीव्र बाधा निवारण, नकारात्मकता की काट |
| 5 | ॐ नमो भगवते अञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा | आत्मबल, गरिमा और धैर्य |
| 6 | ॐ श्री हनुमते नमः | संरक्षण, यात्रा और नए काम में शक्ति |
| 7 | हनुमान अष्टक | भावनात्मक गहराई में सहारा, संवेदनशीलता की रक्षा |
॥ श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
हनुमान चालीसा चालीस चौपाइयों का स्तोत्र है। इसमें
कई बार ऐसा होता है कि मन इतना उलझा होता है कि अर्थ पकड़ में नहीं आता। वहां हनुमान चालीसा का गुण यही है कि यह जप करने वाले से यह अपेक्षा नहीं रखती कि वह हर शब्द का अर्थ जानता ही हो। अपेक्षा यह है कि
धीरे धीरे
ऐसा नहीं कि हर बार “चमत्कार” दिखेगा। पर यह तय है कि अंदर की जड़ें धीरे धीरे मजबूत होती चली जाएंगी।
ॐ हं हनुमते नमः
यह बीज मंत्र छोटा है, पर ध्वनि में तीखापन और जागृति लिए हुए है।
तो यह मंत्र एक तरह से “मानसिक लाइफलाइन” जैसा काम कर सकता है।
यदि दिन में कई बार
इस मंत्र का जप किया जाए, तो
यह मंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें जल्दी घबराहट, ओवरथिंकिंग या अचानक डर की लहरें पकड़ लेती हैं।
ॐ अञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥
इस मंत्र में तीन मुख्य सूत्र छिपे हैं
यह मंत्र उन क्षणों के लिए बहुत उपयुक्त है जब
हनुमान गायत्री के नियमित जप से
| समय | अभ्यास |
|---|---|
| सुबह | 11 या 21 बार हनुमान गायत्री मंत्र जप |
| शाम | एक बार हनुमान चालीसा का पाठ |
| संकट के समय | कुछ मिनट “ॐ हं हनुमते नमः” का जप |
इस संयोजन से दिनभर का मनोबल और स्थिरता दोनों बढ़ सकते हैं।
|| श्री बजरंग बाण ||
निशिचर बंधु महाबली, सुरभूपति सुरभार।
बजरंग बलि की भक्ति से, भागें संकट हजार॥
बजरंग बाण को साधारणतया “तीव्र” पाठ माना जाता है।
बजरंग बाण के साथ यह सावधानी भी प्रचलित है कि
यह पाठ
विशेषकर शनिवार, मंगलवार या बहुत कठिन समय में सप्ताह में एक या दो बार भाव से पाठ किया जा सकता है।
ॐ नमो भगवते अञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा
यह मंत्र “महाबल” यानी महान बल को संबोधित करता है। यह बल केवल शरीर का नहीं,
भी है।
अक्सर जीवन में ऐसा समय आता है जब
इस मंत्र का जप ठीक ऐसी ही स्थिति में सहारा बनता है।
इसे सुबह या किसी महत्वपूर्ण काम से पहले 11, 21 या 108 बार जपा जा सकता है।
ॐ श्री हनुमते नमः
यह मंत्र विशेष रूप से
से पहले जपने के लिए अत्यंत सरल और प्रभावी माना जाता है।
यह साधक को यह स्मरण कराता है कि
इस मंत्र का जप
में सहायक माना जाता है।
|| हनुमान अष्टक ||
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो॥
हनुमान अष्टक भावनात्मक रूप से अत्यंत गहरा स्तोत्र है।
उनके लिए यह स्तोत्र एक भावनात्मक सहारा बन सकता है।
अष्टक के श्लोक बताते हैं कि
निरंतर जप से
दैनिक जीवन में सबके लिए विस्तृत साधना संभव नहीं होती। फिर भी थोड़ी सी योजना से इन मंत्रों को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
| समय | अभ्यास |
|---|---|
| सुबह | 11 बार हनुमान गायत्री, 11 बार ॐ श्री हनुमते नमः |
| दिन में | आवश्यकता के अनुसार ॐ हं हनुमते नमः का जप |
| मंगलवार/शनिवार | एक बार हनुमान चालीसा, इच्छा हो तो बजरंग बाण |
| रात | सोने से पहले 1-2 श्लोक हनुमान अष्टक के, शांत बैठना |
इस तरह साधना
मंत्र जीवन के कार्यभार, बिल, समय सीमाएं या संबंधों की सभी उलझनें तुरंत खत्म नहीं करते।
जब व्यक्ति
तब हनुमान मंत्र यह याद दिलाते हैं कि
मंत्रों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे
1. क्या हनुमान मंत्र केवल मंगलवार और शनिवार को ही जपने चाहिए
नहीं, हनुमान मंत्र किसी भी दिन जपे जा सकते हैं। मंगलवार और शनिवार को विशेष बल माना जाता है, पर यदि मन किसी और दिन अधिक सजग हो, तो उसी दिन से शुरुआत करना और भी अच्छा है।
2. क्या हनुमान चालीसा का अर्थ समझे बिना जप करना ठीक है
शुरू में केवल ध्वनि और लय के साथ जप करना भी लाभकारी है। धीरे धीरे हर सप्ताह 2-4 पंक्तियों का अर्थ समझते जाएं, तो कुछ समय बाद पूरा स्तोत्र भीतर से भी स्पष्ट होने लगता है। भावना और नियमितता अर्थ से पहले आती है।
3. बजरंग बाण का पाठ कितनी बार और कब करना उचित है
बजरंग बाण शक्तिशाली पाठ माना जाता है, इसलिए रोजाना नहीं बल्कि विशेष कठिन समय, नकारात्मकता या गहन भय के दौर में सप्ताह में 1-2 बार पर्याप्त माना जा सकता है। पाठ से पहले मन को संयत और शांत करना जरूरी है।
4. यदि उच्चारण में गलती हो जाए तो क्या मंत्र का असर कम हो जाएगा
सामान्य और अनजानी त्रुटियां साधारण साधक के लिए बाधक नहीं होतीं, जब तक कि भावना सच्ची हो और गलत उच्चारण का अहंकार न हो। समय के साथ सही उच्चारण सीखने का प्रयास अवश्य करना चाहिए, पर शुरुआत में अत्यधिक डरने की आवश्यकता नहीं।
5.क्या इन मंत्रों के साथ कोई विशेष नियम या निषेध भी पालन करने चाहिए
न्यूनतम रूप से सत्य बोलने की कोशिश, नशे से दूरी, हिंसक व्यवहार से बचाव और दूसरों की निंदा कम करना ऐसे नियम हैं जो मंत्र साधना की शक्ति को बढ़ाते हैं। जितना जीवन सरल और सच्चा होगा, उतनी ही जल्दी मंत्रों की शांति और बल भीतर उतरता महसूस होगा।
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