By पं. सुव्रत शर्मा
सूर्य और चंद्र के आधार पर प्रत्येक हिंदू महीने की जानकारी

आज के समय में जब कोई पूछे कि कौन सा महीना चल रहा है तो अधिकतर लोग तुरंत जनवरी या फरवरी जैसा उत्तर ही देते हैं। बच्चों को भी महीनों के नाम सिखाते समय आम तौर पर अंग्रेजी कैलेंडर ही पढ़ाया जाता है। भारत में ऐसे लोग भी हैं जो अंग्रेजी भाषा नहीं जानते लेकिन महीनों की बात आते ही उनके मन में भी जनवरी से दिसंबर तक के ही नाम आते हैं। जबकि यह सभी नाम अंग्रेजी कैलेंडर के हैं हिंदी कैलेंडर के नहीं।
हिंदू परंपरा में बहुत प्राचीन समय से अपना अलग हिंदू पंचांग चलता आया है जिसमें वर्ष के 12 महीनों के नाम और उनकी गणना सूर्य और चंद्र की गति के आधार पर होती है। इस पंचांग में चैत्र वर्ष का पहला और फाल्गुन वर्ष का अंतिम महीना माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति हिंदू नव वर्ष को सही रूप में समझना चाहता है तो इन हिंदू महीनों के नाम और उनके समय को जानना बहुत आवश्यक हो जाता है।
हिंदी कैलेंडर में महीनों की क्रमवार सूची इस प्रकार है। पहला महीना चैत्र और अंतिम महीना फाल्गुन माना जाता है।
| क्रम | हिंदी माह |
|---|---|
| 1 | चैत्र |
| 2 | वैशाख |
| 3 | ज्येष्ठ |
| 4 | आषाढ़ |
| 5 | श्रावण |
| 6 | भाद्रपद |
| 7 | अश्विन |
| 8 | कार्तिक |
| 9 | मार्गशीर्ष |
| 10 | पौष |
| 11 | माघ |
| 12 | फाल्गुन |
इन नामों के पीछे केवल भाषा का अंतर नहीं बल्कि ऋतु, त्योहारों और धार्मिक परंपराओं का पूरा संबंध जुड़ा हुआ है। प्रत्येक माह का अपना महत्व और अपना मौसम होता है जो हिंदू जीवन शैली की गति तय करता है।
चैत्र माह से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह महीना लगभग मार्च के मध्य से प्रारंभ होकर अप्रैल के मध्य तक चलता है। कई क्षेत्रों में नववर्ष का उत्सव चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मनाया जाता है। इसी समय से प्राकृतिक स्तर पर भी मौसम में परिवर्तन दिखाई देने लगता है और वसंत से आगे की ओर बढ़ने की प्रक्रिया चलती है।
इस माह को नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। पारंपरिक रूप से नए कार्य की योजना, शिक्षा का प्रारंभ और कई धार्मिक संकल्प चैत्र से ही उठाए जाते हैं।
वैशाख हिंदू वर्ष का दूसरा महीना माना जाता है। यह माह लगभग अप्रैल के मध्य से शुरू होकर मई के मध्य तक चलता है। गर्मी की शुरुआत इसी अवधि में अधिक स्पष्ट महसूस होती है।
धार्मिक दृष्टि से वैशाख स्नान, दान और तीर्थ यात्राओं के लिए शुभ माना जाता है। कई क्षेत्रों में नदियों में स्नान और व्रत की परंपराएं भी इसी महीने से जुड़ी होती हैं।
ज्येष्ठ हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना है। इसकी शुरुआत लगभग मई के मध्य में होती है और यह जून के मध्य तक चलता है। इस समय गर्मियां अपने सबसे तेज रूप में प्रायः अनुभव की जाती हैं।
लोक जीवन में इस माह को तपन और प्यास से जोड़ा जाता है। कई लोग इस समय जलदान और छाया की व्यवस्था जैसे धार्मिक कार्य भी करते हैं। हवाएं शुष्क हो जाती हैं और दोपहर का समय बाहर रहने के लिए कठिन हो सकता है।
आषाढ़ मास हिंदी कैलेंडर का चौथा महीना होता है। अंग्रेजी गणना के अनुसार यह लगभग जून के मध्य से जुलाई के मध्य तक रहता है। इस माह से ही मानसून की शुरुआत मानी जाती है।
पहली बारिश की सौंधी सुगंध, खेतों में हल चलने की तैयारी और बादलों की गर्जना इस महीने की विशेष पहचान बन जाती है। धार्मिक रूप से भी कई व्रत और चातुर्मास की तैयारी इसी माह से जुड़ती है।
श्रावण, जिसे सावन भी कहा जाता है, हिंदी कैलेंडर का पाँचवां महीना है। यह लगभग जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक चलता है। हिंदू धर्म में इस महीने को अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि इसे भगवान शिव का प्रिय माह कहा गया है।
श्रावण में शिव पूजा, जलाभिषेक, व्रत और सोमवार के उपवास व्यापक रूप से किए जाते हैं। लगातार वर्षा, हरियाली और ठंडी हवाएं वातावरण को आध्यात्मिक रूप से भी अधिक शांत और अनुकूल बनाती हैं।
भाद्रपद माह को बोलचाल में भादो भी कहा जाता है। यह महीना लगभग अगस्त के मध्य से सितंबर के मध्य तक रहता है। इस माह में तीज, गणेश चतुर्थी जैसे कई प्रमुख त्योहार आते हैं।
गणपति स्थापना, झूले, लोकगीत और व्रतों की परंपरा भाद्रपद की पहचान है। बारिश का मौसम अपने चरम से थोड़ा शांत होने लगता है और खेती के काम भी आगे बढ़ते हैं।
अश्विन हिंदू वर्ष का सातवां महीना माना जाता है। यह लगभग सितंबर के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक चलता है। इसी समय से शरद ऋतु की शुरुआत दिखाई देने लगती है।
हालाँकि मूल सामग्री में विशेष त्योहारों का उल्लेख नहीं है, फिर भी परंपरागत रूप से यह समय व्रत और अनुष्ठानों का माना जाता है और मौसम धीरे धीरे साफ और सुहावना होने लगता है।
कार्तिक हिंदू धर्म में वर्ष का आठवां महीना है। यह लगभग अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक चलता है। इस माह को अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।
कार्तिक में स्नान, दीप जलाना और नियमपूर्वक साधना का विशेष महत्व माना जाता है। मौसम अपेक्षाकृत ठंडा होने लगता है और दीपों की रोशनी रात को विशेष सौम्यता प्रदान करती है।
मार्गशीर्ष माह हिंदी कैलेंडर का नौवां महीना है। इसे अगहन के नाम से भी जाना जाता है। यह लगभग नवंबर के मध्य से दिसंबर के मध्य तक चलता है।
खेती के संदर्भ में यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है। हवा में ठंडक बढ़ने लगती है और शीत ऋतु का स्पष्ट आभास होने लगता है।
पौष हिंदू धर्म का दसवां महीना है। इसे पूस भी कहा जाता है। यह लगभग दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक चलता है।
इस समय सर्दी अधिक प्रबल होने लगती है। धुंध, ठंडी हवाएं और देर तक बने रहने वाली रातें इस माह की विशेषता हैं। लोग ऊनी वस्त्रों का उपयोग बढ़ा देते हैं और आग या गर्माहट की खोज स्वाभाविक हो जाती है।
माघ हिंदी कैलेंडर का ग्यारहवां महीना है। इसकी अवधि लगभग जनवरी के मध्य से फरवरी के मध्य तक मानी जाती है। ठंड अभी भी बनी रहती है लेकिन धीरे धीरे मौसम परिवर्तन की दिशा में बढ़ने लगता है।
कई तीर्थ स्थलों पर माघ स्नान की विशेष परंपरा भी देखने को मिलती है। सूर्य देव की विशेष उपासना और प्रातःकालीन स्नान को शुभ माना जाता है।
फाल्गुन हिंदू वर्ष का बारहवां और अंतिम महीना है। यह लगभग फरवरी के मध्य से मार्च के मध्य तक चलता है। इसी माह के साथ वर्ष की चक्रीय यात्रा पूर्ण होकर पुनः चैत्र की ओर लौटती है।
फाल्गुन के समय वातावरण में हल्की गर्माहट आने लगती है और वसंत के रंग दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। लोक जीवन में उल्लास और मेल मिलाप की भावना बढ़ती है और वर्ष मानो आनंद के साथ विदा होकर नए वर्ष के स्वागत की तैयारी कराता है।
| हिंदी माह | वर्ष में क्रम | अंग्रेजी कैलेंडर में अनुमानित अवधि |
|---|---|---|
| चैत्र | 1 | मध्य मार्च से मध्य अप्रैल |
| वैशाख | 2 | मध्य अप्रैल से मध्य मई |
| ज्येष्ठ | 3 | मध्य मई से मध्य जून |
| आषाढ़ | 4 | मध्य जून से मध्य जुलाई |
| श्रावण | 5 | मध्य जुलाई से मध्य अगस्त |
| भाद्रपद | 6 | मध्य अगस्त से मध्य सितंबर |
| अश्विन | 7 | मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर |
| कार्तिक | 8 | मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर |
| मार्गशीर्ष | 9 | मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर |
| पौष | 10 | मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी |
| माघ | 11 | मध्य जनवरी से मध्य फरवरी |
| फाल्गुन | 12 | मध्य फरवरी से मध्य मार्च |
हिंदू नव वर्ष किस महीने से शुरू होता है?
हिंदू नव वर्ष की शुरुआत चैत्र माह से मानी जाती है जो लगभग मार्च के मध्य से शुरू होकर अप्रैल के मध्य तक चलता है और कई क्षेत्रों में चैत्र शुक्ल पक्ष से नव वर्ष मनाया जाता है।
हिंदी कैलेंडर का आखिरी महीना कौन सा होता है?
हिंदी कैलेंडर का अंतिम और बारहवां महीना फाल्गुन होता है जो लगभग मध्य फरवरी से मध्य मार्च तक चलता है और इसके बाद पुनः चैत्र से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।
श्रावण माह को सबसे पवित्र महीनों में क्यों गिना जाता है?
श्रावण या सावन को भगवान शिव का प्रिय महीना माना गया है। यह लगभग मध्य जुलाई से मध्य अगस्त तक चलता है और इस दौरान शिव पूजा, व्रत और जलाभिषेक की परंपराएं प्रमुख रूप से निभाई जाती हैं।
कौन से महीनों में सबसे अधिक गर्मी और बारिश रहती है?
सबसे तेज गर्मी प्रायः ज्येष्ठ माह में महसूस होती है जो मध्य मई से मध्य जून तक रहता है जबकि आषाढ़ से मानसून की शुरुआत मानी जाती है और आषाढ़ तथा श्रावण के दौरान वर्षा अधिक रहती है।
हिंदी महीनों को जानना क्यों जरूरी माना जाता है?
हिंदी महीनों को जानने से हिंदू त्योहारों, व्रतों, ऋतुओं और पंचांग की समझ स्पष्ट होती है। इसके अलावा नव वर्ष, धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक संस्कृतियों का वास्तविक समय जानने में भी यह ज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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