By पं. अभिषेक शर्मा
कोजागरी लक्ष्मी को जागर्ति का रहस्य, लक्ष्मी पूजा, खीर और रात्रि जागरण

आश्विन मास की पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा, कोजागरी लक्ष्मी व्रत या कौमुदी पूर्णिमा कहा जाता है। कोजागरी शब्द संस्कृत के प्रश्न को जागर्ति से जुड़ा है, जिसका सरल अर्थ है कौन जाग रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर भक्ति, साधना तथा सदाचार करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
वर्ष 2026 में कोजागरी लक्ष्मी पूजा 25 अक्टूबर की रात की जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को प्रातः लगभग 11:55 बजे आरंभ होकर 26 अक्टूबर को प्रातः लगभग 9:41 बजे समाप्त होने की गणना मिलती है। चंद्र उदय लगभग 4:55 बजे माना जा रहा है और निशीथ पूजा का समय लगभग 11:40 बजे से 12:31 बजे तक बताया जाता है। स्थान और पंचांग पद्धति के अनुसार समय में अंतर संभव है।
| समय | अनुष्ठान | मुख्य सामग्री |
|---|---|---|
| प्रातः | स्नान, संकल्प और घर की सफाई | जल, स्वच्छ वस्त्र और पूजा सामग्री |
| संध्या | लक्ष्मी पूजा की तैयारी | चौकी, लाल वस्त्र, दीपक और पुष्प |
| चंद्रोदय के बाद | चंद्र दर्शन और अर्घ्य | जल, अक्षत और पुष्प |
| रात्रि | लक्ष्मी पूजा और खीर भोग | खीर, कमल, धूप और दीपक |
| निशीथ काल | विशेष कोजागरी पूजा | मंत्र, श्रीसूक्त और नैवेद्य |
| रात्रि जागरण | भजन, कथा और ध्यान | दीपक, पुस्तक और माला |
| अगले प्रातः | प्रसाद वितरण और पारण | खीर, फल और सात्विक भोजन |
कोजागरी व्रत का सबसे प्रसिद्ध भाव है को जागर्ति, अर्थात कौन जाग रहा है। धार्मिक कथा के अनुसार माँ लक्ष्मी आधी रात को पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना, ध्यान, भजन या सत्कर्म में लगा है।
यहां जागरण का अर्थ केवल नींद छोड़ देना नहीं है। इसका अर्थ है जीवन के प्रति जागरूक होना। जो व्यक्ति अपने धन का सही उपयोग करता है, घर को स्वच्छ रखता है, समय का सम्मान करता है, कर्म में ईमानदारी रखता है और जरूरतमंदों की सहायता करता है, वह वास्तविक अर्थ में जागृत माना जा सकता है।
रात भर जागकर केवल मनोरंजन करना कोजागरी साधना नहीं है। जागरण का उद्देश्य मन को व्यर्थ विषयों से हटाकर देवी स्मरण, आत्मचिंतन और सद्भाव की ओर ले जाना है।
माँ लक्ष्मी को स्वच्छता, व्यवस्था, प्रकाश और सद्भाव से जोड़ा जाता है। कोजागरी लक्ष्मी पूजा से पहले घर की सफाई करने की परंपरा इसलिए है क्योंकि अव्यवस्था केवल बाहरी रूप से नहीं, मानसिक रूप से भी भारीपन पैदा करती है।
घर का मुख्य द्वार, पूजा स्थान, रसोई, तिजोरी और कार्यस्थल विशेष रूप से साफ किए जा सकते हैं। टूटे हुए सामान, अनुपयोगी वस्तुएं और अत्यधिक अव्यवस्था हटाना भी लक्ष्मी साधना का व्यावहारिक रूप है।
धन की देवी की पूजा के साथ धन के प्रति अनुशासन भी आवश्यक है। बिना योजना खर्च करना और फिर लक्ष्मी पूजा से आर्थिक स्थिरता की उम्मीद रखना संतुलित दृष्टि नहीं है।
लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं हैं। श्री का व्यापक अर्थ सुंदरता, स्वास्थ्य, समृद्धि, संतोष, प्रतिष्ठा, ज्ञान और शुभ अवसर भी है। कोजागरी व्रत व्यक्ति को यह समझाता है कि धन तभी मंगलकारी है जब उसका उपयोग धर्म, परिवार और सेवा के लिए किया जाए।
भगवान विष्णु का स्मरण लक्ष्मी साधना के साथ किया जाता है क्योंकि विष्णु संरक्षण, संतुलन और व्यवस्था के देवता हैं। लक्ष्मी बिना विष्णु तत्व के अस्थिर हो सकती हैं और विष्णु तत्व बिना श्री के कठोर व्यवस्था बन सकता है। दोनों का संतुलन गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।
कोजागरी व्रत का संकल्प प्रातःकाल लिया जा सकता है। व्रत का स्वरूप व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार होना चाहिए।
संकल्प में व्रत का उद्देश्य स्पष्ट रखें। यदि किसी परिवार में कोजागरी व्रत केवल रात्रि पूजा के रूप में मनाया जाता है, तो कठोर उपवास आवश्यक नहीं। श्रद्धा के साथ संयमित आहार भी स्वीकार्य है।
कोजागरी रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। चंद्रमा मन, जल, भावना और पोषण का कारक माना जाता है। चंद्र दर्शन के बाद खीर का भोग लगाया जा सकता है।
दूध और चावल की खीर को स्वच्छ पात्र में बनाकर कुछ समय चांदनी में रखा जाता है। धार्मिक रूप से यह चंद्र कृपा का प्रसाद है। भोजन सुरक्षा की दृष्टि से खीर को पतले स्वच्छ कपड़े या खाद्य सुरक्षा जाली से ढकना उचित है।
रात्रि जागरण में लक्ष्मी मंत्र, श्रीसूक्त, विष्णु सहस्रनाम, भजन, कथा, ध्यान और शांत संवाद किए जा सकते हैं। जागरण का उद्देश्य मन को साधना में लगाना है।
रात भर जागने से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। बच्चों, वृद्धों, गर्भवती महिलाओं और रोगियों को जागरण के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। कुछ समय की जागरूक पूजा भी पर्याप्त हो सकती है।
व्रत का भोजन व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और परंपरा अनुसार होना चाहिए। निर्जल व्रत सबके लिए उचित नहीं।
मधुमेह, रक्तचाप, गर्भावस्था, पाचन समस्या या नियमित औषधि की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लें। व्रत का उद्देश्य स्वास्थ्य बिगाड़ना नहीं है।
कोजागरी लक्ष्मी व्रत में अन्न, दूध, चावल, सफेद वस्त्र, खीर, दीपक और जल का दान शुभ माना जाता है। दान का उद्देश्य माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के नाम पर प्रदर्शन करना नहीं बल्कि समृद्धि को समाज के साथ बांटना है।
दान अपनी क्षमता के अनुसार करें। कर्ज लेकर या परिवार की आवश्यकताओं की उपेक्षा करके दान करना उचित नहीं है।
पूर्णिमा का चंद्रमा मन और भावनाओं की पूर्णता का प्रतीक है। लक्ष्मी पूजा शुक्र, चंद्रमा और गुरु से जुड़े गुणों को संतुलित करने का आध्यात्मिक माध्यम बन सकती है। शुक्र सुख, सौंदर्य और समृद्धि का, चंद्रमा मन और पोषण का तथा गुरु धर्म और ज्ञान का संकेत देता है।
कोजागरी पूजा के दौरान दीपक सूर्य और चेतना का, चंद्र अर्घ्य मन की शांति का और लक्ष्मी पूजा धन के शुद्ध उपयोग का प्रतीक बनती है।
किसी ग्रह दोष के लिए केवल कोजागरी व्रत को निश्चित उपाय न मानें। कुंडली, दशा और जीवन परिस्थिति के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन आवश्यक हो सकता है।
आज के समय में जागना केवल रात भर जागते रहना नहीं है। व्यक्ति को अपने धन, स्वास्थ्य, संबंध, समय और जिम्मेदारियों के प्रति जागना चाहिए।
जो व्यक्ति रात भर पूजा करे लेकिन दिन में धन का दुरुपयोग करे, वह कोजागरी के वास्तविक अर्थ से दूर है। जागरण का फल जागरूक जीवन में दिखाई देना चाहिए।
कोजागरी व्रत में माँ लक्ष्मी के प्रश्न को जागर्ति का अर्थ यह नहीं कि देवी केवल सोए हुए व्यक्ति को धन नहीं देंगी। इसका गहरा संदेश है कि जीवन में जो जागरूक है, वही समृद्धि को संभाल सकता है।
धन कमाना एक बात है और धन को सुरक्षित, धर्मपूर्ण तथा उपयोगी बनाना दूसरी बात। लक्ष्मी स्थिर तभी मानी जाती हैं जब घर में स्वच्छता, ईमानदारी, मधुरता, अनुशासन और सेवा का वातावरण हो।
आश्विन पूर्णिमा की रात लक्ष्मी पूजा करते समय खीर का प्रसाद बनाएं, चंद्रमा को अर्घ्य दें, मंत्र जप करें और सामर्थ्य अनुसार दान करें। लेकिन सबसे बड़ा कोजागरी व्रत यह है कि व्यक्ति अपने जीवन की गलतियों, धन के उपयोग और परिवार की जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहे।
जो जागता है, वह केवल रात में जागने वाला नहीं। जो अपने धर्म, कर्म, धन, स्वास्थ्य और संबंधों के प्रति सजग रहता है, वही वास्तव में कोजागरी साधना का अधिकारी बनता है।
कोजागरी लक्ष्मी व्रत 2026 कब है?
कोजागरी लक्ष्मी पूजा 2026 में 25 अक्टूबर की रात की जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर से 26 अक्टूबर की सुबह तक रहने की गणना मिलती है। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
को जागर्ति का अर्थ क्या है?
को जागर्ति का अर्थ है कौन जाग रहा है। धार्मिक मान्यता में माँ लक्ष्मी जागरण और साधना करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
कोजागरी व्रत में कौन सी पूजा करनी चाहिए?
माँ लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा, चंद्र अर्घ्य, खीर भोग, लक्ष्मी मंत्र, श्रीसूक्त और रात्रि जागरण किया जा सकता है।
क्या कोजागरी व्रत में पूरी रात जागना जरूरी है?
पूरी रात जागना सभी के लिए आवश्यक नहीं। स्वास्थ्य और सामर्थ्य अनुसार कुछ समय मंत्र जप, भजन और ध्यान करना भी पर्याप्त है।
कोजागरी लक्ष्मी व्रत में क्या दान करें?
चावल, दूध, खीर, सफेद वस्त्र, अन्न, जल, पुस्तक, औषधि और जरूरतमंदों को भोजन का दान किया जा सकता है।
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