By पं. अभिषेक शर्मा
चंद्रमा वृषभ वृश्चिक उच्च नीच फल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का एक विशेष अवस्था होती है। किसी भी राशि में वह विशेष अवस्था उसे उच्च या नीच का बना देती है। ऐसा सभी ग्रहों के साथ होता है। चंद्रमा भी ऐसा ही एक ग्रह है। खगोलीय दृष्टिकोण से चंद्रमा एक उपग्रह है लेकिन ज्योतिष शास्त्र में उसे एक ग्रह के रूप में ही देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है और वह किसी भी राशि में लगभग सवा दो दिन तक रहता है। चंद्रमा का यही गुण व्यक्ति के भीतर भी तीव्रता, परिवर्तन, मूड में होने वाले बदलाव को दिखाता है। चंद्रमा को वृश्चिक राशि में नीच अवस्था का कारक माना जाता है और वृषभ राशि में वह उच्च अवस्था में होता है। आइए जानते हैं कि चंद्रमा का कुंडली में उच्च और नीच का क्या प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह ज्ञान आवश्यक है।
हर ग्रह राशि और नक्षत्र के अनुसार ही अपनी स्थिति उच्च या नीच बना पाता है। इसी तरह चंद्रमा भी कृतिका नक्षत्र में और वृषभ राशि में उच्च अवस्था में विराजमान रहता है। वृषभ राशि राशिचक्र की दूसरी राशि है। यह राशि द्वितीय भाव से संबंधित वस्तुएं दर्शाती है। धन संपत्ति, वित्त, विलासिता और कुटुंब इसी भाव से संबंधित है। वृषभ राशि में ढाई नक्षत्र होते हैं कृतिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र और मृगशिरा नक्षत्र।
चंद्रमा के उच्च होने के कारण लोग धैर्यवान होते हैं। कुंडली में जहां कहीं भी चंद्रमा होता है, यदि उस भाव, राशि, नक्षत्र से संबंधित गुणों में खुद को शामिल करता है तो मन को शांत रहता है और वह जीवन में संतुलन भी बना पाता है। जब चंद्रमा उच्च में होता है, तो यह व्यक्ति वित्त, धन, जीवन के ऐश्वर्य के बारे में ज्यादा विचार नहीं करता। भविष्य की चिंता किए बिना, चंद्र की स्थिति व्यक्ति को मजबूत आयाम देती है। व्यक्ति स्थिरता प्राप्त करता है।
रोहिणी नक्षत्र सौंदर्य और सृजन से जुड़ा रहता है। उच्च चंद्रमा कलात्मक प्रवृत्ति बढ़ाता है। पारिवारिक सुख और माता से प्रेम संबंध मजबूत होते हैं। धन संचय में सहायक सिद्ध होता है।
जैसा कि ज्ञात है चंद्रमा मन, भावनाओं, माता, मन की शांति, गृह पर्यावरण, जल, दूध आदि का प्रतिनिधित्व करता है। विशाखा नक्षत्र में वृश्चिक राशि का कुछ अंश समाहित होता है, इसलिए वृश्चिक राशि और उसका प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वृश्चिक राशि राशि चक्र की आठवीं राशि होती है, इसलिए यह कुंडली के अष्टम भाव से संबंधित चीजों और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। अष्टम भाव रहस्य और परिवर्तन से जुड़ा है।
चंद्र नीच का होने से जातक बेहद भावुक और छोटी-छोटी बातों पर शोक मनाने वाला होता है। जन्मकुंडली में चंद्र किसी ग्रह से पीड़ित हो तो यह व्यक्ति को मानसिक रोग और डिप्रेशन देता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में पीड़ित और अशुभ चंद्रमा के कारण व्यक्ति को मानसिक पीड़ा होती है। व्यक्ति की स्मृति कमजोर हो जाती है और उसे डिप्रेशन की समस्या होती है, साथ ही जातक की मां को किसी न किसी प्रकार की दिक्कत बनी रहती है। चंद्रमा अगर कुंडली में नीच का है तो जल से भय लगता है, मन में अवसाद के कारण कई बार आत्महत्या के विचार भी आते हैं।
अशुभ चंद्रमा से खांसी-जुकाम, अस्थमा, सांस या फेफड़ों से संबंधित बीमारियां परेशान करती हैं। एकाग्रता की कमी, नींद न आना और दिमाग को विचलित करने वाली सभी समस्याओं की वजह भी चंद्र का अशुभ होना ही है। श्वास संबंधी रोग बढ़ जाते हैं। नेत्र ज्वर भी संभव।
| अवस्था | राशि नक्षत्र | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|
| उच्च | वृषभ कृतिका | धैर्य संतुलन पारिवारिक सुख |
| नीच | वृश्चिक विशाखा | भावुकता मानसिक पीड़ा स्वास्थ्य हानि |
चंद्रमा उच्च नीच से जुड़े सामान्य प्रश्न
चंद्रमा उच्च नीच राशि कौन सी हैं?
वृषभ में उच्च कृतिका नक्षत्र। वृश्चिक में नीच विशाखा अंश।
उच्च चंद्रमा का प्रभाव क्या है?
धैर्यवान मन शांत संतुलन। वित्त चिंता कम मजबूत आयाम।
नीच चंद्रमा से क्या हानि होती है?
भावुकता डिप्रेशन मानसिक रोग। मां दिक्कत जल भय श्वास समस्या।
चंद्रमा मन का कारक क्यों है?
ज्योतिष में मन भावना माता शांति का प्रतिनिधित्व। सवा दो दिन राशि निवास।
पीड़ित चंद्रमा के उपाय क्या हैं?
शिव पूजा चंद्र यंत्र मंत्र जप। माता सेवा।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें