अनंग त्रयोदशी (मदन त्रयोदशी): चैत्र शुक्ल त्रयोदशी पर कामदेव-रति का पूजन, दांपत्य सामंजस्य और सौंदर्य संवर्धन

By पं. अमिताभ शर्मा

कामदेव-रति का पूजन, अशोक वृक्ष साधना, पंच-बाण रहस्य और दांपत्य सामंजस्य

अनंग त्रयोदशी: मदन त्रयोदशी पूजा विधि, कामदेव-रति मंत्र और कथा

पंचांग विवरण एवं अनंग त्रयोदशी की खगोलीय पृष्ठभूमि

सनातन वैदिक पंचांग और आगम संहिताओं में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को 'अनंग त्रयोदशी' अथवा 'मदन त्रयोदशी' (Ananga Trayodashi / Madana Trayodashi) के रूप में संपूर्ण शास्त्रोक्त विधि, रस और सौंदर्य-भाव के साथ मनाया जाता है। यह पावन पर्व वसंत ऋतु के चरमोत्कर्ष का उत्सव है। कामदा एकादशी के आध्यात्मिक आत्म-शोधन के उपरांत उदित होने वाली यह त्रयोदशी मानव चेतना के भीतर सुप्त प्रेम, सौंदर्य, सम्मोहन, ओज और दांपत्य आकर्षण के परिष्कार का साक्षात खगोलीय द्वार है।

खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से चैत्र शुक्ल त्रयोदशी ऋतु-परिवर्तन का वह बिंदु है जहां प्रकृति की संपूर्ण वनस्पति, पराग कण और जीव-जगत काम-ऊर्जा (Life-Force Prana) के सर्वोच्च स्पंदन पर होते हैं। इस समय भुवन भास्कर सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रविष्ट होने के संधिकाल पर होते हैं, जबकि चंद्रमा उत्तराफाल्गुनी अथवा हस्त नक्षत्र में गोचर करता है। हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्र और उत्तराफाल्गुनी का स्वामी सूर्य है। त्रयोदशी तिथि के अधिष्ठाता कामदेव (काम-तत्त्व के देवता) और देवाधिदेव महादेव शिव (काम-विजयी नटराज) दोनों माने गए हैं। ज्योतिष शास्त्र में प्रेम, शारीरिक सौंदर्य, यौन स्वास्थ्य और वैवाहिक सौहार्द का कारक ग्रह शुक्र (Venus) तथा मन का कारक ग्रह चंद्रमा (Moon) है। अनंग त्रयोदशी के दिन की गई साधना काम-ऊर्जा को कामुक विकृति से मुक्त कर उसे सात्विक, रसमयी और दीर्घकालिक दांपत्य निष्ठा में रूपांतरित करती है।

पंचांग व खगोलीय घटक शास्त्रीय, ज्योतिषीय व तात्विक विवरण
मास एवं पक्ष चैत्र मास, शुक्ल पक्ष
तिथि त्रयोदशी तिथि (प्रदोष काल व्यापिनी)
पर्व का शास्त्रीय नाम अनंग त्रयोदशी, मदन त्रयोदशी, काम-रति महोत्सव
मुख्य अधिष्ठाता सत्ता कामदेव (मन्मथ / मदन) एवं देवी रति (सौंदर्य-अधिष्ठात्री)
मुख्य नियंत्रक देव देवाधिदेव महादेव शिव एवं माता भगवती पार्वती
संबद्ध ज्योतिषीय ग्रह शुक्र देव (सौंदर्य व दांपत्य) एवं काम-अग्नि कारक मंगल
वनस्पति व वृक्ष प्रतीक अशोक वृक्ष (Saraca asoca) एवं आम्र-मंजरी (आम का बौर)
प्रमुख पारम्परिक नैवेद्य अशोक के लाल पुष्प, मदन फल, चंदन-इत्र, केसर युक्त खीर, तांबूल
अभीष्ट आध्यात्मिक फल वैवाहिक कलह शांति, आकर्षण-सिद्धि, सौंदर्य वृद्धि, काम-सुख

अनंग त्रयोदशी के इस पावन पर्व पर कामदेव और देवी रति की कृपा प्राप्त करने, अपने व्यक्तित्व में सम्मोहन-शक्ति जगाने और दांपत्य जीवन को प्रेममय बनाने हेतु साधक को ब्रह्म मुहूर्त से ही शास्त्रीय आचार नियमों का पालन करना चाहिए।

  • प्रातः काल सूर्योदय से दो मुहूर्त पूर्व उठकर शीतल अथवा सामान्य ताजे जल में गुलाब जल, चमेली का अर्क और केसर मिलाकर स्नान करना।
  • स्नान के पश्चात स्वच्छ, बिना सिले अथवा नवीन श्वेत, गुलाबी या चमकीले लाल रंग के रेशमी वस्त्र धारण करना।
  • गृह मंदिर अथवा बगीचे में किसी पवित्र 'अशोक वृक्ष' की छाया में जाकर वेदी का निर्माण करना; अशोक के अभाव में घर के ईशान कोण में पूजा संपन्न करना।
  • पूजा वेदी पर तांबे अथवा चांदी की थाली में कामदेव और देवी रति के युगल स्वरूप की स्थापना करना अथवा उनका चित्र विराजमान करना।
  • कामदेव के सम्मुख शुद्ध गाय के घी और चंदन के तेल से युक्त दीपक प्रज्वलित करना।
  • कामदेव को आम्र-मंजरी (आम का बौर), चमेली, मोगरा, लाल कनेर अथवा अशोक के ताजे लाल पुष्प समर्पित करना।
  • कामदेव के प्रसिद्ध 'काम गायत्री' अथवा 'क्लीं' बीज मंत्र का कम से कम 108 या 1008 बार शांत चित्त से जप करना।
  • दिनभर सात्विक उपवास रखना; केवल ऋतु-अनुकूल फलाहार, दूध और केसरिया मिष्ठान्न ग्रहण करना तथा क्रोध, कलह, कटु वाणी और कामुक वासना के कुत्सित चिंतन से सर्वथा दूर रहना।
  • सायंकाल (प्रदोष काल) में भगवान शिव और माता पार्वती का पंचामृत अभिषेक कर 'उमा-महेश्वर' स्तोत्र का पाठ करना ताकि काम-ऊर्जा मर्यादित रहे।
  • पति-पत्नी द्वारा एक साथ बैठकर एक-दूसरे को चंदन, इत्र और तांबूल (मीठा पान) अर्पित कर परस्पर निष्ठा और प्रेम का संकल्प लेना।

पौराणिक पृष्ठभूमि: काम-दहन से 'अनंग' बनने और रति को वरदान का आख्यान

शिव पुराण के रुद्र संहिता (सती खंड व पार्वती खंड), मत्स्य पुराण और कालिदास कृत 'कुमारसंभवम्' में अनंग त्रयोदशी के प्राकट्य की अत्यंत रोमांचक, गूढ़ और दार्शनिक कथा प्राप्त होती है।

प्राचीन काल में जब सती के योगाग्नि में भस्म होने के उपरांत देवाधिदेव महादेव शिव हिमालय पर घोर, अचल समाधि में लीन हो गए थे तब संपूर्ण ब्रह्मांड में काम-तत्त्व का संतुलन बिगड़ गया था। उधर, 'तारकासुर' नामक महादैत्य ने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर त्रिलोकी पर अत्याचार प्रारंभ कर दिया था। उसका संहार केवल शिव-पार्वती के वीर्य से उत्पन्न आठ वर्ष के बालक (कार्तिकेय) द्वारा ही संभव था।

देवताओं की प्रार्थना पर देवराज इंद्र ने कामदेव (मदन) को आज्ञा दी कि वे अपने प्रभाव से भगवान शिव की समाधि भंग करें, ताकि महादेव का विवाह शैलपुत्री पार्वती के साथ हो सके।

कामदेव अपनी प्रिय पत्नी 'रति' और अपने अभिन्न मित्र 'वसंत' को साथ लेकर भगवान शिव के तपोवन में पहुंचे। वसंत ऋतु ने तुरंत संपूर्ण वन को सुवासित पुष्पों, भ्रमरों के गुंजन और कोयल की कूक से मोहक बना दिया। कामदेव ने अपने पुष्प-धनुष पर 'मोहन' नामक काम-बाण का संधान किया और समाधिस्थ महादेव पर प्रहार कर दिया।

बाण के लगते ही भगवान शिव की समाधि टूट गई। जब महादेव ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि उनकी समाधि भंग करने का दुस्साहस किसने किया है, तो उनके ललाट पर स्थित तीसरा नेत्र (ज्ञानाग्नि) अचानक प्रज्वलित हो उठा। उस तीसरे नेत्र की भीषण ज्वाला ने कामदेव को क्षणभर में जलाकर भस्म के ढेर में बदल दिया।

घटनाक्रम सोपान पौराणिक एवं आध्यात्मिक विवरण अंतर्निहित दार्शनिक संदेश
कामदेव का बाण प्रहार भगवान शिव की समाधि पर पुष्प-बाण का संधान स्थूल वासना जब समाधि को छूती है, तो विक्षोभ होता है
शिव का तीसरा नेत्र क्रोधाग्नि द्वारा कामदेव का तत्काल भस्म होना ज्ञान और विवेक की अग्नि से ही वासना का नाश संभव है
देवी रति का विलाप भस्म की ढेरी पर बैठकर रति का दारुण रुदन सौंदर्य और प्रेम का आधार जब नष्ट होता है, तो शोक उपजता है
माता पार्वती की प्रार्थना शिव-विवाह के उपरांत पार्वती द्वारा रति पर दया करुणामयी शक्ति ही नष्ट हुए प्रेम को पुनः जीवन देती है
अनंग स्वरूप का वरदान बिना शरीर (अ-अंग) के संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त होना प्रेम भौतिक देह नहीं, अपितु एक सर्वव्यापी सूक्ष्म भाव है
मदन त्रयोदशी की प्रतिष्ठा चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को काम-रति के पुनरुद्धार की घोषणा वसंत के संधिकाल पर काम-ऊर्जा का सात्विक पुनर्जन्म

कामदेव के भस्म होते ही देवी रति विलाप करने लगीं। उन्होंने अपने केश नोच डाले और उस भस्म को अपने शरीर पर मलकर रोने लगीं। जब भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से संपन्न हो गया तब माता पार्वती ने महादेव से प्रार्थना की: "हे प्रभु! कामदेव ने यह कार्य अपने स्वार्थ के लिए नहीं, अपितु देवताओं के कल्याण और हमारे मिलन के लिए किया था। अतः देवी रति पर कृपा कीजिए और कामदेव को पुनः जीवनदान दीजिए।"

भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा:

"हे देवी! कामदेव की भौतिक देह तो भस्म हो चुकी है, परंतु आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से वह 'अनंग' (बिना शरीर वाला) होकर संपूर्ण चराचर सृष्टि में व्याप्त रहेगा। वह प्रत्येक प्राणी के मन, विचारों और प्रेम-भाव में निवास करेगा। द्वापर युग में जब मैं और नारायण अवतरित होंगे तब यह कामदेव भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र 'प्रद्युम्न' के रूप में पुनः भौतिक शरीर धारण करेगा।"

भगवान शिव के इस वरदान से देवी रति का संताप शांत हुआ और उन्होंने इसी पावन तिथि पर कामदेव के सूक्ष्म, अमूर्त स्वरूप का पूजन कर संपूर्ण जगत में प्रेम और सौंदर्य की पुनः स्थापना की। तभी से यह दिन 'अनंग त्रयोदशी' अथवा 'मदन त्रयोदशी' के नाम से विख्यात हो गया।


कामदेव के पंच-बाण और प्रेम मनोविज्ञान का तात्विक रहस्य

सनातन तंत्र और काम-शास्त्र में कामदेव को मात्र कामुकता का प्रतीक नहीं, अपितु मानवीय भावनाओं, संवेदनाओं और चित्त की वृत्तियों का सूक्ष्म शासक माना गया है। कामदेव के स्वरूप का प्रत्येक अंग एक गहन मनोवैज्ञानिक सत्य को प्रकट करता है:

  • इक्षु-धनुष (गन्ने का धनुष): कामदेव का धनुष गन्ने का बना होता है, जिसकी डोरी भौरों और शहद की मधुमक्खियों की पंक्ति से निर्मित होती है। यह दर्शाता है कि प्रेम का स्वाद गन्ने की भांति अत्यंत मधुर होता है, परंतु उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया मधुमक्खियों के डंक की भांति कष्टप्रद और एकाग्रता-युक्त होती है।
  • पुष्प-बाण (पंच बाण): कामदेव के तरकश में पांच दिव्य पुष्प-बाण होते हैं, जो मानव मस्तिष्क के पांच विशिष्ट भावनात्मक केंद्रों पर आघात करते हैं:
काम-बाण का नाम प्रयुक्त पुष्प प्रभावित चक्र / केंद्र मनोवैज्ञानिक व शारीरिक प्रभाव
१. अरविंद (कमल) श्वेत/रक्त कमल हृदय केंद्र (अनाहत) मन में आकर्षण, जागृति और सौंदर्य की चाह
२. अशोक (अशोक पुष्प) लाल अशोक के फूल स्वाधिष्ठान चक्र वियोग-दुख का नाश, तीव्र अनुराग व मिलन की तड़प
३. चूत (आम्र मंजरी) आम का बौर (मंजरी) कंठ केंद्र (विशुद्ध) वाणी में माधुर्य, संकोच का त्याग व प्रणय-निवेदन
४. नवमल्लिका (चमेली) चमेली / मोगरा आज्ञा चक्र (भ्रमध्य) चेतना में मदमस्तता, सम्मोहन और चित्त की चंचलता
५. नीलोत्पल (नील कमल) नीला कमल संपूर्ण स्नायु तंत्र कामोन्माद, संपूर्ण समर्पण और देह-विस्मृति
  • तोता (शुक वाहन): कामदेव का वाहन हरा तोता है। तोता वाणी के माधुर्य, रटन और प्रेम-संदेश का प्रतीक है।
  • मकर ध्वज: कामदेव की ध्वजा पर 'मकर' (घड़ियाल/मगरमच्छ) का चिन्ह होता है। मकर जल-तत्त्व और कामुक वासनाओं के अगाध, गहरे और छिपे हुए वेग का प्रतीक है, जो शांत दिखाई देने पर भी अत्यंत शक्तिशाली होता है।

अशोक वृक्ष के नीचे पूजन का वैज्ञानिक एवं तांत्रिक रहस्य

अनंग त्रयोदशी के दिन शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि कामदेव और रति की पूजा किसी खिले हुए 'अशोक वृक्ष' (Saraca asoca) के नीचे संपन्न की जानी चाहिए:

अशोक शोकशमनः कामदः कामवर्धनः।
त्वां नमामि विशालाक्ष कामदेवप्रियाय वै॥

1. वानस्पतिक एवं रासायनिक विज्ञान

  • शोकरहित करने की क्षमता: संस्कृत में अशोक का शाब्दिक अर्थ है-'जहाँ कोई शोक न रहे' (अ + शोक)। आयुर्वेद के अनुसार अशोक के वृक्ष से निकलने वाली सुगंध और उसकी छाल में ऐसे कार्बनिक यौगिक (फाइटोएस्ट्रोजेन्स और टैनिन्स) होते हैं जो स्त्रियों के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और गर्भाशय स्वास्थ्य को सीधा पोषण देते हैं।
  • फेरोमोन्स का संतुलन: चैत्र मास में जब अशोक वृक्ष लाल-केसरी फूलों से भर जाता है, तो उसके पराग कण वातावरण में एक विशेष प्राकृतिक सुगंध छोड़ते हैं। यह गंध मानव मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस को उत्तेजित कर तनाव कम करती है और प्रेम-हार्मोन्स (ऑक्सीटोसिन और डोपामाइन) के स्राव को बढ़ाती है।

2. तांत्रिक ऊर्जा क्षेत्र

तंत्र शास्त्रों के अनुसार अशोक वृक्ष यक्षों और गंधर्वों का परम प्रिय निवास स्थान है। इस वृक्ष के नीचे बैठकर जब साधक काम-गायत्री मंत्र का जप करता है, तो वातावरण में उपस्थित सूक्ष्म प्राण-तरंगें साधक के आभामंडल (Aura) में चुंबकीय आकर्षण और सौंदर्य का संचार कर देती हैं।


अनंग त्रयोदशी की सम्पूर्ण शास्त्रीय पूजन विधि

चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन घर में दांपत्य कलह के शमन, आकर्षण वृद्धि और प्रेम-सौहार्द की स्थापना हेतु निम्नलिखित क्रमबद्ध विधि से पूजन संपन्न करें:

  1. वेदी निर्माण एवं आसन शुद्धि: पूजा स्थल पर लाल अथवा गुलाबी रेशमी वस्त्र बिछाएं। उस पर अक्षत (चावल) से षट्कोण यंत्र अथवा अष्टदल कमल बनाएं। वेदी पर तांबे या चांदी की थाली में कामदेव और रति के चित्र अथवा दो सुपारी (काम-रति के प्रतीक रूप में) स्थापित करें।
  2. काम-रति आवाहन एवं ध्यान: दोनों हाथ जोड़कर सुगंधित पुष्प लेकर कामदेव और रति का ध्यान करें:

    ॐ कामदेवाय विद्महे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंगः प्रचोदयात्॥
    ध्यायेत् कामं स-चापं कुसुम-मय-शरं सर्व-लोकैक-कान्तं,
    रत्या युक्तं वसन्त-प्रिय-सखम्-अमलं पुष्प-केतुं प्रसन्नम्।

  3. षोडशोपचार पूजन विधान:
    • सुगंधित जल स्नान: गुलाब जल और केवड़े के इर्क से मिश्रित जल से काम-रति को प्रतीकात्मक स्नान कराएं।
    • अंग-राग व इत्र समर्पण: चंदन, कस्तूरी और गुलाब का असली इत्र अर्पित करें।
    • पुष्प व मंजरी अर्पण: आम का बौर (आम्र-मंजरी), लाल गुलाब, चमेली और अशोक के ताजे पुष्प अर्पित करें।
  4. महा-नैवेद्य एवं तांबूल: गाय के दूध में बनी केसरिया खीर, मिश्री, ताजे लाल फल (अनार, सेब) और विशेष रूप से लौंग-इलायची युक्त मीठा पान (तांबूल) अर्पित करें।
  5. काम-गायत्री एवं बीज मंत्र जप: स्फटिक अथवा कमल-गट्टे की माला पर निम्नलिखित मंत्रों में से किसी एक का न्यूनतम 108 या 1008 बार जप करें:

    ॐ क्लीं कामदेवाय नमः।
    अथवा
    ॐ कामदेवाय विद्महे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंगः प्रचोदयात्॥

  6. उमा-महेश्वर पूजन (काम का संयम): कामदेव की पूजा के तत्काल पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें और उन पर गंगाजल व बिल्वपत्र अर्पित करें। यह अनिवार्य नियम है ताकि काम-ऊर्जा अनियंत्रित होकर अमर्यादित न बने, अपितु शिव-पार्वती की भांति पवित्र दांपत्य निष्ठा में रूपांतरित हो।
  7. दंपत्ति अर्चन एवं दीपदान: पति और पत्नी एक-दूसरे के मस्तक पर चंदन लगाएं, एक-दूसरे को पुष्प भेंट करें और मिलकर कर्पूर से आरती करें।

दांपत्य कलह निवारण और आकर्षण वृद्धि के अचूक शास्त्रीय उपाय

वैवाहिक जीवन में यदि निरसता आ गई हो, आपसी आकर्षण समाप्त हो गया हो अथवा निरंतर अकारण कलह होती रहती हो, तो अनंग त्रयोदशी के दिन निम्नलिखित उपाय अमृत के समान सिद्ध होते हैं:

वैवाहिक समस्या ज्योतिषीय व तात्विक कारण अनंग त्रयोदशी पर अचूक शास्त्रीय उपाय
पति-पत्नी में निरंतर कलह कुंडली में सूर्य-शुक्र या मंगल-शुक्र द्वंद्व काम-रति को अर्पित इत्र का 40 दिन तक नित्य नाभि व कंठ पर लेपन
शारीरिक आकर्षण की कमी शुक्र ग्रह का क्षीण अथवा नीच होना अशोक वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध व केसर जल अर्पित कर 7 परिक्रमा
विवाह में असाध्य विलंब गुरु-शुक्र का संबंध न बनना, मांगलिक दोष शिव-पार्वती को लाल रेशमी कलावा से गठबंधन कर 108 बार क्लीं जप
दांपत्य अविश्वास व तनाव राहु-केतु द्वारा सप्तम भाव की पीड़ा दो मीठे पान (तांबूल) में गुलाब की पंखुड़ियां रखकर काम-रति को भोग

काम-ऊर्जा का उदात्तीकरण: वासना से प्रेम और समाधि की यात्रा

अनंग त्रयोदशी का सर्वोच्च दार्शनिक संदेश काम-ऊर्जा का दमन (Suppression) करना नहीं, अपितु उसका 'उदात्तीकरण' (Sublimation) करना है।

सनातन धर्म ने कभी भी काम (Desire/Love) को पाप नहीं माना; यही कारण है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-इन चार पुरुषार्थों में 'काम' को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण स्वयं कहते हैं: "धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ" अर्थात हे अर्जुन! समस्त प्राणियों में धर्म के अनुकूल जो काम है, वह साक्षात मेरा ही स्वरूप है।

  • वासना (Lust): जब काम-ऊर्जा केवल शारीरिक उपभोग, स्वार्थ और दूसरों के शोषण तक सीमित रहती है, तो वह मनुष्य को पशु बना देती है और अंततः विनाशकारी 'काम-क्रोध' को जन्म देती है।
  • प्रेम (Love): जब वही काम-ऊर्जा त्याग, समर्पण, एक-दूसरे के सम्मान और आत्मा के मिलन में रूपांतरित होती है, तो वह 'रति और मदन' का सात्विक रूप धारण कर लेती है।
  • समाधि (Enlightenment): जब प्रेम की यह ऊर्जा और अधिक सूक्ष्म होकर संपूर्ण चराचर जगत और परमात्मा के प्रति एकाकार हो जाती है, तो वह भगवान शिव के तीसरे नेत्र का 'ज्ञान-अमृत' बन जाती है।

कामदेव का 'अनंग' (अमूर्त) होना यह सिखाता है कि प्रेम का वास्तविक निवास स्थूल शरीर की त्वचा और अंगों में नहीं है; प्रेम का वास्तविक निवास मन, आत्मा और चेतना के सूक्ष्म स्पंदनों में है। जो प्रेम देह के आकर्षण पर टिकता है, वह झुर्रियों और बुढ़ापे के साथ समाप्त हो जाता है; परंतु जो प्रेम आत्मा की मर्यादा और शिव-पार्वती की निष्ठा पर आधारित होता है, वह अनंग की भांति अमर और अविनाशी रहता है।


FAQ

अनंग त्रयोदशी किस तिथि को मनाई जाती है?
अनंग त्रयोदशी प्रतिवर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को वसंत ऋतु के चरम संधिकाल पर मनाई जाती है।

कामदेव को 'अनंग' क्यों कहा जाता है?
भगवान शिव के तीसरे नेत्र की क्रोधाग्नि से शरीर के भस्म हो जाने के बाद, महादेव के वरदान से कामदेव बिना शरीर (अ-अंग) के सूक्ष्म रूप में संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त हो गए, इसलिए उन्हें अनंग कहा जाता है।

अनंग त्रयोदशी के दिन किस वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है?
इस दिन 'अशोक वृक्ष' (Saraca asoca) के नीचे पूजा करने का विशेष महत्व है, क्योंकि यह वृक्ष समस्त शोकों का शमन कर प्रेम और आकर्षण को बढ़ाता है।

कामदेव के पांच पुष्प-बाण कौन-कौन से हैं?
कामदेव के पांच बाण हैं: अरविंद (कमल), अशोक, चूत (आम्र मंजरी), नवमल्लिका (चमेली) और नीलोत्पल (नील कमल)।

दांपत्य सुख के लिए इस दिन किस मंत्र का जप सर्वोत्तम माना गया है?
दांपत्य सुख और आकर्षण हेतु काम-गायत्री मंत्र: "ॐ कामदेवाय विद्महे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंगः प्रचोदयात्" अथवा काम बीज मंत्र "ॐ क्लीं कामदेवाय नमः" का जप सर्वोत्तम माना गया है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

पं. अमिताभ शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ