By पं. अभिषेक शर्मा
शुभ मुहूर्त, चौघड़िया, सामग्री सूची और अखंड ज्योति के कड़े नियम

सनातन वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आदिशक्ति भगवती जगदम्बा के नौ दिवसीय अनुष्ठान 'वासंती नवरात्रि' का शुभारंभ होता है। इस पावन तिथि के प्रथम प्रहर में किया जाने वाला घटस्थापन (कलश स्थापना) ब्रह्मांडीय शक्तियों का भू-मंडल पर साक्षात आह्वाहन माना गया है। खगोलीय दृष्टिकोण से यह वह संधि-वेला है जब भुवन-भास्कर सूर्य देव मीन राशि के अंतिम चरण से निकलकर मेष राशि में प्रवेश की तैयारी करते हैं, तथा चंद्रमा रेवती अथवा अश्विनी नक्षत्र के संचरण से नवीन संवत्सर का सूत्रपात करता है।
ज्योतिष शास्त्र के प्रामाणिक ग्रंथों-'मुहूर्त चिंतामणि', 'धर्मसिंधु' और 'निर्णयसिंधु'-के अनुसार घटस्थापना सदैव प्रतिपदा तिथि के प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल) अथवा मध्याह्न के सर्वाधिक प्रतिष्ठित 'अभिजित मुहूर्त' में ही संपन्न की जानी चाहिए। यदि प्रतिपदा तिथि के दिन चित्रा नक्षत्र अथवा वैधृति योग उपस्थित हो, तो उनके प्रभाव-काल को पूर्णतः त्याग देना अनिवार्य है, क्योंकि चित्रा और वैधृति में किया गया घटस्थापन कुल और गृह के लिए अनिष्टकारी माना गया है।
| पंचांग घटक | शास्त्रीय विवरण एवं नियम |
|---|---|
| मास एवं पक्ष | चैत्र मास, शुक्ल पक्ष |
| तिथि | प्रतिपदा तिथि |
| अधिष्ठाता देव | आदिशक्ति जगदम्बा दुर्गा एवं वरुण देव |
| वर्जित काल | चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग एवं राहुकाल |
| प्रशस्त मुहूर्त | प्रातःकाल (शुभ/अमृत चौघड़िया) अथवा मध्याह्न अभिजित मुहूर्त |
| मुख्य तत्त्व | पृथ्वी तत्त्व (सप्तधान्य) एवं जल तत्त्व (वरुण कलश) |
| साधना का मुख्य फल | ऐश्वर्य, कायिक-मानसिक व्याधि शमन, दारिद्र्य नाश |
घटस्थापना को निर्विघ्न और फलदायी बनाने हेतु साधक को ब्रह्म मुहूर्त से ही पवित्र आचार-संहिता का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।
कलश स्थापना केवल एक परंपरा नहीं, अपितु पंचमहाभूतों का व्यवस्थित संघटन है। इसमें प्रयुक्त प्रत्येक द्रव्य का अपना तांत्रिक एवं वानस्पतिक महत्व है।
शास्त्रोक्त रीति से कलश की प्रतिष्ठा करने के लिए निम्नलिखित चरणों का क्रमबद्ध अनुपालन करें:
नवरात्रि के नौ दिनों तक जलने वाली 'अखंड ज्योति' साधक की अंतःचेतना और देवी की निरंतर उपस्थिति का दिव्य प्रतीक है। इसे प्रज्वलित करने और नौ दिनों तक अक्षुण्ण रखने के नियम अत्यंत कठोर होते हैं:
| ज्योति का प्रकार | पात्र का चयन | स्थापना की दिशा | तात्विक एवं आध्यात्मिक प्रभाव |
|---|---|---|---|
| शुद्ध गोघृत की ज्योति | पीतल अथवा तांबा | देवी के दाईं ओर (साधक के बाईं ओर) | सात्विक ऊर्जा, मोक्ष, चित्त-शुद्धि, देव कृपा |
| तिल तेल की ज्योति | पीतल अथवा मिट्टी | देवी के बाईं ओर (साधक के दाईं ओर) | तंत्र-दोष शांति, शत्रु शमन, व्याधि नाश |
कलश के नीचे बोए गए जौ (जवारे) केवल एक वनस्पति नहीं, अपितु आगामी वर्ष की आर्थिक और आध्यात्मिक स्थिति का संकेत देते हैं।
घट साक्षात मानव शरीर है और उसके भीतर का जल आत्मा का प्रतीक है। मिट्टी का पात्र यह स्मरण कराता है कि यह देह पंचतत्वों का एक नश्वर संघात है, जिसे सप्तधान्य रूपी सत्कर्मों से सींचना आवश्यक है। कलश का नारियल मानव के अहंकार का प्रतीक है; जब अहंकार की जटाओं को समेटकर उसे भगवती के चरणों में समर्पित कर दिया जाता है, तभी भीतर का ज्ञान-अमृत प्रस्फुटित होता है। चैत्र नवरात्रि की यह घटस्थापना मनुष्य को अपनी बाह्य चंचलता त्यागकर अंतर्मुखी होने और नव संवत्सर में दिव्य चेतना के साथ प्रवेश करने की प्रेरणा देती है।
घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त का क्या महत्व है?
अभिजित मुहूर्त मध्याह्न का वह समय है जब सूर्य आकाश के केंद्र में होता है। यह मुहूर्त सभी प्रकार के पंचांग दोषों और नक्षत्र-बाधाओं को नष्ट कर कलश स्थापना को सर्वार्थ सिद्ध बना देता है।
क्या स्टील या कांच के बर्तन में घटस्थापना की जा सकती है?
कदापि नहीं। शास्त्रों में पूजा के लिए तांबा, पीतल अथवा शुद्ध मिट्टी ही मान्य है। स्टील, कांच और एल्युमिनियम को अशुद्ध और तामसिक माना गया है।
यदि अखंड ज्योति अचानक बुझ जाए तो क्या प्रायश्चित करना चाहिए?
यदि किसी कारणवश ज्योति शांत हो जाए, तो तत्काल क्षमा-प्रार्थना करते हुए सहायक दीपक से पुनः प्रज्वलित करें और माँ भगवती के सम्मुख एक माला 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जप कर घी का दान करें।
नारियल का मुख किस दिशा में होना चाहिए?
नारियल का मुख (जिस ओर तीन आंखें होती हैं) सदैव साधक की ओर होना चाहिए। नारियल का मुख ऊपर रखने से रोग, नीचे रखने से शत्रु और पीछे रखने से धन हानि होती है।
चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना क्यों वर्जित है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना करने से गृहस्वामी को धन नाश, मानसिक उद्वेग और कुल में अशांति का सामना करना पड़ता है।
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