By पं. सुव्रत शर्मा
धन्वंतरि, कुबेर, लक्ष्मी पूजा और शुभ खरीदारी का विधान

धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का आरंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार तिथि तथा मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।
नई दिल्ली की उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह लगभग 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। धनतेरस पूजा के लिए प्रदोष काल और वृषभ काल को विशेष महत्व दिया जाता है। सामान्य गणना के अनुसार पूजा का मुख्य समय शाम 6 बजकर 17 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक माना जा रहा है।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल, रसोई के पात्र, उपयोगी उपकरण, लेखा सामग्री और घर की आवश्यकता की वस्तुएं खरीदी जाती हैं। खरीदारी का उद्देश्य केवल धन संग्रह नहीं बल्कि स्वास्थ्य, उपयोगिता और समृद्धि का संतुलन होना चाहिए।
| विवरण | धनतेरस 2026 की जानकारी |
|---|---|
| पर्व | धनतेरस, धनत्रयोदशी और धन्वंतरि त्रयोदशी |
| तिथि | 6 नवंबर 2026, शुक्रवार |
| पक्ष | कार्तिक कृष्ण पक्ष |
| तिथि आरंभ | 6 नवंबर को सुबह लगभग 10 बजकर 30 मिनट |
| तिथि समाप्त | 7 नवंबर को सुबह लगभग 10 बजकर 47 मिनट |
| प्रदोष काल | स्थानीय सूर्यास्त के बाद का समय |
| पूजा मुहूर्त | लगभग शाम 6 बजकर 17 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट |
| मुख्य पूजा | धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर |
| यम दीप | संध्या समय, मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर |
| खरीदारी | धातु, आभूषण, पात्र और उपयोगी वस्तुएं |
| राहुकाल | शुक्रवार के स्थानीय राहुकाल से बचें |
| मूल भाव | स्वास्थ्य, सदुपयोग, धन अनुशासन और प्रकाश |
• दिन में घर और पूजा स्थान की सफाई करें
• खरीदारी से पहले अपनी आवश्यकता और बजट तय करें
• शाम को लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि का पूजन करें
• यम दीप मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें
• राहुकाल में नई खरीदारी से बचना हो तो स्थानीय पंचांग देखें
• ऋण लेकर केवल दिखावे के लिए वस्तु न खरीदें
• चिकित्सा, स्वास्थ्य और स्वच्छता को धन से कम महत्वपूर्ण न समझें
• पूजा के बाद अन्न, वस्त्र या स्वास्थ्य सामग्री का दान करें
समुद्र मंथन की कथा में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद, औषधि, चिकित्सा और स्वास्थ्य के देवता माने जाते हैं। उनके हाथ में अमृत कलश था, इसलिए धनतेरस को केवल धन प्राप्ति का पर्व नहीं बल्कि आरोग्य और जीवन संरक्षण का पर्व भी माना जाना चाहिए।
समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य भी जुड़ा हुआ है। लक्ष्मी समृद्धि, सौंदर्य, अन्न, व्यवस्था और शुभता की अधिष्ठात्री हैं। कुबेर धन के संरक्षण, भंडारण और प्रबंधन से संबंधित देवता माने जाते हैं।
धनतेरस की पूजा में इन तीनों शक्तियों का संयुक्त भाव दिखाई देता है।
| देवता | मुख्य भाव |
|---|---|
| भगवान धन्वंतरि | आयु, चिकित्सा और स्वास्थ्य |
| देवी लक्ष्मी | धन, अन्न, सौभाग्य और समृद्धि |
| भगवान कुबेर | धन का संरक्षण, व्यवस्था और भंडार |
| यमराज | जीवन की मर्यादा और अकाल मृत्यु से रक्षा |
| गणेश जी | बुद्धि, आरंभ और विघ्न निवारण |
यदि धन हो लेकिन स्वास्थ्य न हो तो समृद्धि अधूरी है। यदि आय हो लेकिन धन का प्रबंधन न हो तो संपत्ति टिकती नहीं। यदि धन हो लेकिन विवेक न हो तो वही धन तनाव का कारण बन सकता है। धनतेरस इन सभी पक्षों का संतुलन सिखाती है।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का आदिदेव माना जाता है। धनतेरस पर उनकी पूजा करते समय व्यक्ति को स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार होने का संकल्प लेना चाहिए। केवल दीपक जलाकर स्वास्थ्य की चिंता समाप्त नहीं होती। उचित आहार, स्वच्छता, नियमित जांच, व्यायाम, नींद और समय पर उपचार भी धन्वंतरि पूजा का हिस्सा हैं।
धन्वंतरि पूजा में निम्न भाव रखे जा सकते हैं।
• रोग से बचाव की प्रार्थना
• शरीर के प्रति सम्मान
• औषधि का उचित उपयोग
• चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों का सम्मान
• भोजन में संयम
• नशे और अस्वस्थ आदतों का त्याग
• परिवार के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः।
इस मंत्र का भाव भगवान धन्वंतरि को नमस्कार करना है, जो अमृत कलश धारण करते हैं, रोगों का नाश करने वाले और समस्त लोकों के पालनकर्ता हैं। मंत्र का उच्चारण स्पष्टता और श्रद्धा से करें।
कुबेर को धन के देवता और उत्तर दिशा के अधिपति माना जाता है। उनकी पूजा धन को आकर्षित करने से अधिक उसे सुरक्षित, व्यवस्थित और धर्मपूर्ण बनाने का संदेश देती है।
कुबेर पूजा में तिजोरी, बहीखाता, व्यापारिक दस्तावेज, धन रखने का स्थान और घर की आर्थिक व्यवस्था को स्वच्छ किया जा सकता है। व्यापार करने वाले लोग अपने लेखा स्थान पर गणेश, लक्ष्मी और कुबेर का स्मरण कर सकते हैं।
तिजोरी या लेखा स्थान साफ करें
लाल या पीले वस्त्र पर कुबेर का चित्र रखें
गणेश जी का स्मरण करें
दीपक और धूप जलाएं
अक्षत, कुमकुम, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें
धन के सदुपयोग का संकल्प लें
व्यापारिक आय और खर्च का लेखा देखें
किसी जरूरतमंद को अन्न या धन सहायता दें
कुबेर मंत्र का जप करें
पूजा के बाद धन को केवल संग्रह नहीं, सेवा का साधन मानें
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यपदये धनसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
इस मंत्र का भाव कुबेर से धन, अन्न और समृद्धि की प्रार्थना करना है। जप करते समय लोभ के बजाय संतुलित और धर्मपूर्ण समृद्धि का संकल्प रखें।
धनतेरस पर धातु खरीदने की परंपरा सबसे अधिक प्रसिद्ध है। सोना और चांदी समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। तांबा और पीतल स्वास्थ्य, अग्नि और गृहस्थ जीवन से जुड़े माने जाते हैं। रसोई का नया पात्र अन्न और घर की पोषण शक्ति का प्रतीक हो सकता है।
खरीदारी की वस्तु उपयोगी और आर्थिक क्षमता के भीतर होनी चाहिए।
| वस्तु | पारंपरिक भाव | व्यावहारिक उपयोग |
|---|---|---|
| सोना | स्थायी संपत्ति और समृद्धि | निवेश या आभूषण |
| चांदी | चंद्र शांति और शीतलता | आभूषण या पात्र |
| तांबा | सूर्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा | पात्र और पूजा सामग्री |
| पीतल | अग्नि, गृहस्थी और परंपरा | रसोई या पूजा पात्र |
| स्टील | उपयोगिता और स्थिरता | रसोई के पात्र |
| लेखा सामग्री | व्यापार व्यवस्था | बही और दस्तावेज |
| औजार | कर्म और उत्पादन | व्यवसायिक उपयोग |
| औषधि | धन्वंतरि तत्त्व | स्वास्थ्य देखभाल |
| दीपक | प्रकाश और मंगल | पूजा तथा घर की रोशनी |
धनतेरस पर नई वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन अनावश्यक खरीदारी करना आवश्यक नहीं है। घर में पहले से मौजूद वस्तु का सम्मानपूर्वक उपयोग भी समृद्धि का ही रूप है।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न को शुभ माना जाता है। 2026 में नई दिल्ली के लिए उपलब्ध गणनाओं में शाम के समय वृषभ काल को लक्ष्मी पूजा और स्थायी वस्तु खरीदने के लिए अनुकूल बताया गया है।
मुहूर्त का समय शहर के अनुसार बदल सकता है। खरीदारी का निर्णय स्थानीय पंचांग और दुकान के समय के अनुसार लें। यदि कोई व्यक्ति सोना, चांदी, वाहन, भूमि या बड़ी संपत्ति खरीद रहा है तो व्यक्तिगत कुंडली और वित्तीय सलाह का विचार करना उचित है।
• वस्तु की वास्तविक आवश्यकता देखें
• बजट और भुगतान की क्षमता जांचें
• बिल और प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें
• सोने और चांदी की शुद्धता की जांच करें
• ऋण की ब्याज दर समझें
• वाहन या मशीन की सुरक्षा और वारंटी देखें
• मुहूर्त के लिए स्वास्थ्य या कानूनी कार्य न रोकें
• राहुकाल और स्थानीय पंचांग की जानकारी लें
राहुकाल को दैनिक पंचांग का अशुभ समय माना जाता है। शुक्रवार को राहुकाल सामान्यतः सुबह के समय आता है, लेकिन इसकी अवधि स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदलती है। धनतेरस की खरीदारी या पूजा के लिए स्थानीय राहुकाल की जांच की जा सकती है।
राहुकाल से बचना एक मुहूर्त संबंधी परंपरा है। यदि चिकित्सा, यात्रा, नौकरी, भुगतान या किसी आवश्यक कार्य का समय राहुकाल में आ जाए तो उसे रोकना हमेशा संभव नहीं होता। आवश्यक कार्य को केवल भय के कारण टालना उचित नहीं है।
नई खरीदारी के लिए यदि परिवार राहुकाल से बचता है तो प्रदोष काल या स्थानीय शुभ चौघड़िया का उपयोग किया जा सकता है। अंतिम निर्णय स्थानीय पंचांग से लें।
धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा है। संध्या के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर एक दीपक जलाया जाता है। यह दीपक सामान्यतः दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
यम दीप का भाव अकाल मृत्यु से रक्षा, जीवन की मर्यादा और पूर्वजों के प्रति स्मरण से जुड़ा है। इसे भय फैलाने के लिए नहीं बल्कि जीवन के प्रति कृतज्ञता और सावधानी के लिए जलाया जाता है।
मिट्टी का दीपक लें
उसमें सरसों का तेल या परंपरा अनुसार तेल डालें
बाती रखें
संध्या समय दीपक जलाएं
इसे मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें
यमराज से परिवार की रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करें
दीपक के आसपास ज्वलनशील वस्तु न रखें
कुछ परिवार चार बातियों वाला दीपक जलाते हैं। कुछ परिवार एक बाती का दीपक रखते हैं। दीपक की संख्या और आकार क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।
धनतेरस पर देवी लक्ष्मी का स्वागत स्वच्छता, प्रकाश और सदाचार से किया जाता है। घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थान और उत्तर या पूर्व दिशा के स्वच्छ भाग में दीपक जलाना कई परिवारों में शुभ माना जाता है।
यम दीप के लिए दक्षिण दिशा का प्रयोग किया जाता है। लक्ष्मी पूजा का मुख्य दीपक पूजा स्थान या घर के स्वच्छ और सुरक्षित भाग में रखें। दिशा के साथ अग्नि सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
| दीपक | दिशा या स्थान | भाव |
|---|---|---|
| यम दीप | मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा | अकाल मृत्यु से रक्षा |
| लक्ष्मी दीप | पूजा स्थान | धन और शुभता |
| तुलसी दीप | तुलसी के पास | विष्णु भक्ति और प्रकृति |
| आंगन दीप | सुरक्षित स्वच्छ स्थान | घर का प्रकाश |
| व्यवसाय दीप | दुकान या लेखा स्थान | व्यापार और व्यवस्था |
दीपक को पर्दे, कागज, कपड़े और बच्चों की पहुंच से दूर रखें। हवा तेज हो तो दीपक का स्थान बदलें।
धनतेरस की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है। घर और पूजा स्थान को दिन में ही साफ कर लेना चाहिए।
घर, दुकान और पूजा स्थान की सफाई करें
मुख्य द्वार पर रंगोली या शुभ चिह्न बनाएं
पूजा चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं
धन्वंतरि, लक्ष्मी, कुबेर और गणेश जी की स्थापना करें
जल, अक्षत, कुमकुम और पुष्प अर्पित करें
दीपक और धूप जलाएं
धन्वंतरि मंत्र का जप करें
लक्ष्मी और कुबेर मंत्र का जप करें
नई खरीदी वस्तु को पूजा में रखें
बहीखाता या व्यापारिक दस्तावेज अर्पित करें
आरती करें
यम दीप जलाएं
अन्न, वस्त्र या स्वास्थ्य सामग्री का दान करें
पूजा में नई वस्तु रखना शुभ माना जाता है। लेकिन यदि नई वस्तु न खरीदी जाए तो घर में उपयोग हो रही किसी उपयोगी वस्तु को भी सम्मानपूर्वक पूजा में रखा जा सकता है।
धनतेरस का सबसे गहरा संदेश यह है कि स्वास्थ्य धन से पहले आता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा व्यक्ति को अपनी जीवन शैली की समीक्षा करने का अवसर देती है।
स्वास्थ्य के लिए धनतेरस पर निम्न संकल्प लिए जा सकते हैं।
• नियमित स्वास्थ्य जांच
• संतुलित भोजन
• नशे से दूरी
• पर्याप्त नींद
• प्रतिदिन हल्का व्यायाम
• औषधि का सही सेवन
• घर में स्वच्छ जल और स्वच्छ भोजन
• परिवार के बुजुर्गों की देखभाल
• मानसिक तनाव में सहायता लेना
यदि व्यक्ति धनतेरस पर महंगा आभूषण खरीदता है लेकिन स्वास्थ्य की उपेक्षा करता है तो पर्व का आध्यात्मिक संतुलन अधूरा रह जाता है।
धनतेरस पर दान करने से लक्ष्मी तत्त्व को गतिशील माना जाता है। धन केवल जमा करने से सुरक्षित नहीं होता। उसका एक भाग सेवा में लगाने से लोभ कम होता है और संपत्ति का सामाजिक अर्थ विकसित होता है।
दान में निम्न वस्तुएं दी जा सकती हैं।
• अन्न
• गर्म वस्त्र
• औषधि
• अस्पताल या स्वास्थ्य सहायता
• शिक्षा सामग्री
• दीपक और तेल
• जरूरतमंद परिवार को राशन
• श्रमिक को उचित पारिश्रमिक
दान देते समय प्राप्तकर्ता का सम्मान बनाए रखें। दान की तस्वीर लेकर प्रदर्शन करना या किसी की गरीबी को सार्वजनिक करना उचित नहीं है।
व्यापारी धनतेरस पर अपने बहीखाते, तिजोरी, दुकान और व्यापारिक उपकरणों की पूजा करते हैं। यह केवल धन की पूजा नहीं बल्कि आर्थिक अनुशासन का अवसर है।
व्यापारी इन बातों की समीक्षा कर सकते हैं।
• पुराने बकाया भुगतान
• कर और कानूनी दायित्व
• कर्मचारियों का वेतन
• व्यापारिक ऋण
• माल की गुणवत्ता
• ग्राहक सेवा
• खर्च और लाभ का संतुलन
• आने वाले वर्ष की योजना
कुबेर पूजा का वास्तविक अर्थ धन का सदुपयोग और संरक्षण है। यदि व्यापार में धोखा, अनुचित मुनाफा या श्रमिक शोषण हो तो केवल पूजा से समृद्धि स्थायी नहीं हो सकती।
धनतेरस के दिन कुछ लोग भय और दिखावे में अनावश्यक खर्च कर देते हैं। इन बातों से बचना चाहिए।
• केवल मुहूर्त के नाम पर बजट से अधिक खर्च न करें
• नकली या बिना प्रमाणित आभूषण न खरीदें
• कर्ज लेकर दिखावे की खरीदारी न करें
• राहुकाल को लेकर अत्यधिक भय न रखें
• घर में झगड़ा करके लक्ष्मी पूजा न करें
• दीपक को असुरक्षित स्थान पर न रखें
• पूजा के बाद कचरा और प्लास्टिक न फैलाएं
• स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को न टालें
• धन को केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन का साधन न बनाएं
धनतेरस में शुक्र, गुरु, बुध, चंद्रमा और सूर्य के तत्त्वों का प्रतीकात्मक संबंध देखा जा सकता है। शुक्र धन, सौंदर्य और भौतिक सुविधा से जुड़ा है। गुरु विस्तार, धर्म और संरक्षण का कारक है। बुध व्यापार, लेखा और गणना से संबंधित है। चंद्रमा गृहस्थ सुख और मानसिक शांति का संकेत देता है। सूर्य स्वास्थ्य और आत्मबल से जुड़ा है।
| ग्रह | धनतेरस में संकेत |
|---|---|
| शुक्र | धन, सौंदर्य और समृद्धि |
| गुरु | विस्तार, धर्म और संरक्षण |
| बुध | व्यापार, लेखा और बुद्धि |
| चंद्रमा | गृहस्थ सुख और मन |
| सूर्य | आरोग्य और आत्मबल |
| कुबेर तत्त्व | धन का संरक्षण और प्रबंधन |
मुहूर्त का चयन करते समय तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न और स्थानीय समय का विचार किया जाता है। व्यक्तिगत खरीदारी के लिए व्यक्ति की कुंडली और वास्तविक वित्तीय स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
धनतेरस पर खरीदा गया बर्तन, दीपक, आभूषण या उपकरण बाहरी समृद्धि का प्रतीक है। लेकिन वास्तविक धन स्वास्थ्य, विश्वास, परिवार, ज्ञान, श्रम और संतुलित धन व्यवस्था में है।
भगवान धन्वंतरि शरीर की रक्षा का संदेश देते हैं। देवी लक्ष्मी स्वच्छता, सदुपयोग और सौंदर्य सिखाती हैं। कुबेर धन के प्रबंधन का पाठ देते हैं। यम दीप जीवन की सीमितता और सावधानी का स्मरण कराता है।
धनतेरस की पूजा तब पूर्ण होती है जब व्यक्ति इस दिन केवल वस्तु नहीं खरीदता बल्कि एक शुभ जीवन शैली का संकल्प भी लेता है। घर में दीप जलता है, लेकिन उसके साथ विवेक भी जागता है। तिजोरी में धन आता है, लेकिन उसके साथ दान और जिम्मेदारी भी आती है। यही धनतेरस का वास्तविक प्रकाश है।
धनतेरस 2026 में कब मनाई जाएगी?
धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है।
धनतेरस 2026 का पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए मुख्य पूजा मुहूर्त लगभग शाम 6 बजकर 17 मिनट से 8 बजकर 15 मिनट तक माना जा रहा है। स्थानीय पंचांग में अंतर हो सकता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
सोना, चांदी, तांबा, पीतल, रसोई के पात्र, दीपक, उपयोगी उपकरण, लेखा सामग्री और औषधि जैसे उपयोगी सामान खरीदे जा सकते हैं।
धनतेरस पर यम दीप किस दिशा में जलाना चाहिए?
यम दीप सामान्यतः घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है। इसे अकाल मृत्यु से रक्षा और जीवन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस पर राहुकाल से कैसे बचें?
शुक्रवार के स्थानीय राहुकाल की जानकारी पंचांग से लें। नई खरीदारी या पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थानीय शुभ समय का उपयोग किया जा सकता है।
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