करवा चौथ की छलनी का रहस्य

By पं. नीलेश शर्मा

चंद्रमा, मनोविज्ञान और वैवाहिक विश्वास की प्रतीक रस्म

करवा चौथ पर छलनी से चांद क्यों देखते हैं?

सामग्री तालिका

चंद्रमा से जीवनसाथी तक दृष्टि की यात्रा

करवा चौथ की रात चंद्रमा के उदय के बाद जब व्रती स्त्री छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती है तब यह दृश्य केवल एक सुंदर परंपरा नहीं रहता। इसमें प्रतीक्षा, संयम, प्रार्थना, दांपत्य विश्वास और परिवार की सामूहिक भावना एक साथ दिखाई देती है।

छलनी के छिद्रों से चंद्रमा को देखना कई लोक परंपराओं में शुभ माना गया है। इसके बाद उसी छलनी से पति का चेहरा देखने का भाव यह है कि चंद्रमा की शीतलता, स्थिरता और मंगल कामना को वैवाहिक जीवन से जोड़ा जाए। चंद्रमा आकाश का साक्षी बनता है और पति पत्नी का संबंध पृथ्वी पर उस संकल्प का रूप लेता है।

यह मान्यता प्रचलित है कि छलनी से देखने पर पति की आयु बढ़ती है या चंद्रमा की किरणों से कोई विशेष ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है। ऐसे दावों को धार्मिक प्रतीक और लोक विश्वास के रूप में समझना उचित है। चंद्र प्रकाश के छलनी से छनकर आंखों तक पहुंचने से दृष्टि, आयु या शरीर की किसी विशेष ऊर्जा में निश्चित परिवर्तन होता है, इसका प्रमाणित वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है।

छलनी की वास्तविक शक्ति उसके प्रतीक में है। वह दृष्टि को एक सीमा देती है। चंद्रमा और पति के चेहरे को एक ही क्रम में देखने से व्रत की आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण होती है। पहले आकाश, फिर संबंध। पहले प्रार्थना, फिर जीवन का साझा आधार।

करवा चौथ 2026 में छलनी की रस्म

वर्ष 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। स्थानीय पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में चंद्रोदय लगभग रात 8 बजकर 11 मिनट पर माना जा रहा है। पूजा मुहूर्त लगभग शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है।

शहर, देश और पंचांग गणना के अनुसार चंद्रोदय का समय बदल सकता है। व्रत खोलने के लिए स्थानीय चंद्र दर्शन समय को प्राथमिकता देनी चाहिए।

चरण करवा चौथ 2026 का सामान्य क्रम
सर्गी सूर्योदय से पहले
व्रत संकल्प सूर्योदय के बाद
दिन का समय कथा, पूजा और संयम
संध्या पूजा स्थानीय मुहूर्त के अनुसार
चंद्र दर्शन स्थानीय चंद्रोदय के बाद
छलनी की रस्म पहले चंद्रमा, फिर पति का दर्शन
अर्घ्य चंद्रमा को जल अर्पण
व्रत पारण जल या प्रसाद ग्रहण करके

छलनी की रस्म के मूल चरण

  1. चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा करें

  2. पूजा की थाली में जल, अक्षत और पुष्प रखें

  3. छलनी को स्वच्छ करें

  4. छलनी के पास दीपक रखें, यदि परिवार की परंपरा हो

  5. छलनी से चंद्रमा का दर्शन करें

  6. चंद्रमा को जल अर्पित करें

  7. उसी छलनी से पति का चेहरा देखें

  8. पति पत्नी एक दूसरे के स्वास्थ्य और सुख की प्रार्थना करें

  9. पति या परिवार के सदस्य के हाथ से जल ग्रहण करें

  10. प्रसाद लेकर व्रत खोलें

छलनी को बीच में क्यों रखा जाता है?

छलनी एक साधारण घरेलू वस्तु है, लेकिन करवा चौथ में यह दृष्टि और संबंध के बीच एक पवित्र माध्यम बन जाती है। इसकी जाली चंद्रमा को पूरी तरह छिपाती नहीं है। वह उसे छोटे छोटे छिद्रों के बीच से दिखाती है। इस कारण चंद्र दर्शन सीधा और सामान्य देखने से अलग अनुभव देता है।

प्रतीकात्मक रूप से छलनी के तीन अर्थ समझे जा सकते हैं।

छलनी का पक्ष प्रतीकात्मक अर्थ
अनेक छिद्र जीवन की अनेक परीक्षाएं और अनुभव
सीमित दृश्य भावनाओं पर संयम और दृष्टि की एकाग्रता
चंद्रमा से पति तक क्रम ईश्वर साक्षी और संबंध का मिलन
एक ही छलनी साझा जीवन और पारस्परिक विश्वास
जाली के पार चेहरा प्रेम को धैर्य और मर्यादा से देखना

छलनी यह भी संकेत देती है कि संबंधों को केवल बाहरी रूप से नहीं देखना चाहिए। विवाह में सुख के साथ कठिनाइयां भी होती हैं। विश्वास, संयम और संवाद उन कठिनाइयों को छानकर संबंध का सार बचाते हैं।

पौराणिक कथाओं से जुड़ी परंपरा

करवा चौथ की छलनी से जुड़ी एक लोकप्रिय कथा वीरवती की है। कथा के अनुसार वीरवती अपने भाइयों की प्रिय बहन थी। वह करवा चौथ का कठिन व्रत रखती थी। दिनभर भूख और प्यास से उसकी स्थिति कमजोर हो गई। भाइयों ने उसकी पीड़ा देखकर पेड़ की आड़ में दीपक जलाया और छलनी के माध्यम से ऐसा भ्रम पैदा किया कि चंद्रमा निकल आया है।

वीरवती ने उस संकेत को चंद्र दर्शन समझकर व्रत खोल दिया। इसके बाद उसके पति पर संकट आया। कथा के आगे के रूपों में पश्चाताप, प्रार्थना और व्रत की पुनः पूर्णता का वर्णन मिलता है।

इस कथा को शाब्दिक इतिहास की तरह नहीं बल्कि नैतिक शिक्षा की तरह समझना अधिक उचित है। इसका संदेश है कि व्रत में जल्दबाजी, अधूरी जानकारी और भावनात्मक दबाव से बचना चाहिए। साथ ही यह कथा परिवार के प्रेम और सुरक्षा भावना को भी दर्शाती है।

करवा चौथ की कथाएं क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं। कहीं करवा माता की कथा सुनाई जाती है। कहीं सावित्री और सत्यवान का स्मरण किया जाता है। कहीं शिव पार्वती के दांपत्य आदर्श को केंद्र बनाया जाता है। इन सभी कथाओं का भाव निष्ठा, साहस, प्रार्थना और संबंधों की रक्षा से जुड़ा है।

चंद्रमा का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावना, स्मृति, मातृत्व, जल और मानसिक शांति का कारक है। करवा चौथ का व्रत चंद्र दर्शन पर पूर्ण होता है। इससे चंद्रमा की भूमिका इस पर्व में विशेष हो जाती है।

चंद्रमा का प्रकाश मन को शीतलता का प्रतीक देता है। दिनभर के व्रत के बाद चंद्रमा को देखने की प्रतीक्षा मन में धैर्य और एकाग्रता का अभ्यास कराती है। अर्घ्य देने से भक्त अपनी भावनाओं को एक पवित्र दिशा देता है।

चंद्र तत्त्व करवा चौथ में भाव
मन व्रत में धैर्य और प्रतीक्षा
जल अर्घ्य और जीवन का पोषण
शीतलता क्रोध और तनाव का संतुलन
स्मृति पति, परिवार और विवाह का संकल्प
मातृत्व परिवार की रक्षा और देखभाल
भावनाएं प्रेम और विश्वास की अभिव्यक्ति

जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती है। यदि चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो तो व्रत के दौरान चिंता, चिड़चिड़ापन और कमजोरी अधिक महसूस हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य की रक्षा और मानसिक शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए।

छलनी से चंद्र दर्शन का मनोवैज्ञानिक अर्थ

करवा चौथ का व्रत एक लंबी प्रतीक्षा से बना है। सुबह से चंद्रमा के उदय तक व्रती स्त्री भोजन और जल से दूर रहती है। इस अवधि में मन बार बार चंद्रमा की ओर जाता है। जब छलनी हाथ में आती है तो वह प्रतीक्षा एक निश्चित अनुष्ठान में बदल जाती है।

छलनी देखने की प्रक्रिया मन को एक केंद्र देती है। चंद्रमा को देखने के बाद पति का चेहरा देखना भावनात्मक संक्रमण पैदा करता है। पूरे दिन की तपस्या किसी प्रिय व्यक्ति की उपस्थिति में पूर्ण होती है। इससे राहत, कृतज्ञता और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव हो सकता है।

मनोवैज्ञानिक स्तर पर यह रस्म निम्न प्रभाव पैदा कर सकती है।

• प्रतीक्षा को अर्थ देती है

• व्रत की समाप्ति का स्पष्ट संकेत देती है

• पति पत्नी के बीच भावनात्मक संवाद बढ़ाती है

• परिवार को एक साझा क्षण में जोड़ती है

• प्रार्थना को व्यक्तिगत संबंध से जोड़ती है

• दांपत्य जीवन के महत्व को पुनः स्मरण कराती है

यह प्रभाव किसी चमत्कारी ऊर्जा से नहीं बल्कि प्रतीक, भावनात्मक तैयारी, परिवार और सांस्कृतिक विश्वास के मेल से उत्पन्न होता है।

क्या छलनी की जाली चंद्रमा की किरणों को शुद्ध करती है?

लोक मान्यता में कहा जाता है कि छलनी के छिद्रों से होकर आने वाली चंद्र किरणें छनकर अधिक शुभ या शीतल हो जाती हैं। प्रकाशिकी की दृष्टि से छलनी चंद्रमा के प्रकाश को कई छोटे दृश्यों या छवियों में विभाजित कर सकती है। वह आंखों के सामने एक दृश्य सीमा बनाती है।

लेकिन सामान्य चंद्र प्रकाश में ऐसा कोई प्रमाणित प्रभाव नहीं है कि छलनी से देखने पर किरणें औषधीय, ऊर्जात्मक या विशेष रूप से शुद्ध बन जाती हैं। चंद्रमा की रोशनी सूर्य के प्रकाश की तुलना में बहुत कमजोर होती है। सामान्य परिस्थितियों में चंद्रमा को देखने से आंखों को सूर्य की तरह नुकसान नहीं होता। फिर भी छलनी को आंखों की सुरक्षा का वैज्ञानिक उपकरण नहीं माना जाना चाहिए।

इस परंपरा को सबसे सुंदर रूप में इस तरह समझा जा सकता है। छलनी चंद्रमा को बदलती नहीं है। वह देखने वाले की दृष्टि को व्यवस्थित करती है। बाहरी प्रकाश वही रहता है, लेकिन अनुभव अधिक केंद्रित और अनुष्ठानिक हो जाता है।

छलनी से पति का चेहरा देखने का दांपत्य अर्थ

चंद्रमा को देव साक्षी मानकर पति का चेहरा उसी छलनी से देखना वैवाहिक जीवन में दैवी साक्षी और व्यक्तिगत संबंध का संगम दर्शाता है। पत्नी पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करती है। पति पत्नी के तप, प्रेम और श्रम का सम्मान कर सकता है।

परंपरागत भाषा में पति को देवता के समान देखने का भाव मिलता है। आधुनिक दांपत्य दृष्टि में इस भाव को पारस्परिक सम्मान के रूप में समझना अधिक संतुलित है। पत्नी पति का सम्मान करे और पति पत्नी के त्याग, श्रम, भावनाओं और स्वास्थ्य का सम्मान करे। तभी रस्म दांपत्य धर्म का रूप लेती है।

दांपत्य के लिए छलनी का संदेश

• संबंध को जल्दबाजी से न देखें

• एक दूसरे की कमियों को करुणा से समझें

• संवाद को अहंकार से ऊपर रखें

• स्वास्थ्य की जिम्मेदारी साझा करें

• आर्थिक निर्णयों में पारदर्शिता रखें

• व्रत को एकतरफा अपेक्षा न बनाएं

• प्रेम को केवल समारोह तक सीमित न रखें

छलनी पर दीपक रखने की परंपरा

कुछ परिवारों में छलनी पर छोटा दीपक रखकर चंद्रमा का दर्शन किया जाता है। दीपक प्रकाश, मंगल और जागरूकता का प्रतीक है। चंद्रमा की शीतल रोशनी और दीपक की अग्नि मिलकर मन में संतुलन का भाव उत्पन्न करते हैं।

दीपक रखते समय अग्नि सुरक्षा आवश्यक है। छलनी धातु की हो और दीपक स्थिर हो। हवा तेज हो तो दीपक न रखें। सूती कपड़े, घूंघट या सजावटी सामग्री को दीपक से दूर रखें।

दीपक का प्रतीकात्मक अर्थ यह हो सकता है।

दीपक अर्थ
लौ चेतना और आशा
घी या तेल समर्पण और पोषण
बाती व्रत का संकल्प
चंद्रमा मन और शीतलता
छलनी संयमित दृष्टि
पति का दर्शन साझा जीवन का सम्मान

करवा चौथ की सही पूजा विधि

छलनी की रस्म पूजा का अंतिम और भावपूर्ण चरण है। उससे पहले करवा माता, गौरी, गणेश, शिव और कार्तिकेय का स्मरण किया जाता है।

सरल पूजा क्रम

  1. सूर्योदय से पहले सर्गी लें

  2. व्रत का संकल्प करें

  3. दिनभर अपनी क्षमता के अनुसार संयम रखें

  4. शाम को स्नान करके पूजा वस्त्र धारण करें

  5. चौकी पर गौरी और गणेश की स्थापना करें

  6. करवा में जल भरें

  7. रोली, अक्षत, पुष्प और दीप अर्पित करें

  8. करवा चौथ कथा सुनें

  9. परिवार की परंपरा के अनुसार आरती करें

  10. चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा करें

  11. छलनी से चंद्रमा का दर्शन करें

  12. चंद्रमा को अर्घ्य दें

  13. पति का चेहरा उसी छलनी से देखें

  14. पति पत्नी एक दूसरे के लिए प्रार्थना करें

  15. जल ग्रहण करके व्रत खोलें

पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। किसी एक लोक परंपरा को सभी लोगों के लिए अनिवार्य मानना आवश्यक नहीं है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने का क्रम

चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले करवा या तांबे के पात्र में जल लें। उसमें अक्षत और पुष्प डाल सकते हैं। चंद्रमा की ओर मुख करके हाथ जोड़ें और मन में पति पत्नी तथा परिवार के स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

अर्घ्य की सरल विधि

• छलनी से चंद्रमा को देखें

• छलनी नीचे रखकर जल पात्र दोनों हाथों में लें

• चंद्रमा को जल अर्पित करें

• ॐ सोमाय नमः मंत्र का जप करें

• पति का चेहरा छलनी से देखें

• पति का आशीर्वाद लें

• जल या प्रसाद ग्रहण करें

अर्घ्य देते समय सड़क, बिजली के तार या जल स्रोत को गंदा न करें। पूजा सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखें।

यदि चंद्रमा दिखाई न दे?

बादल, धुंध, वर्षा या शहरी भवनों के कारण कई बार चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में व्रती स्त्री को घबराने की आवश्यकता नहीं है। स्थानीय पंचांग में दिए चंद्रोदय समय के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार चंद्र स्मरण करके पूजा पूर्ण की जा सकती है।

स्वास्थ्य संकट होने पर निर्जला व्रत जारी रखना उचित नहीं है। जल ग्रहण करना व्रत की भावना का अपमान नहीं है। व्रत का उद्देश्य श्रद्धा, संयम और संबंधों में शुभ भावना है। शरीर को नुकसान पहुंचाना नहीं।

क्या यह रस्म केवल महिलाओं के लिए है?

करवा चौथ की पारंपरिक पहचान विवाहित स्त्रियों के व्रत से जुड़ी है। लेकिन आज कई पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं। कुछ दंपती जल, भोजन और घरेलू जिम्मेदारियां साझा करते हैं। इससे पर्व में समानता और पारस्परिक प्रेम बढ़ सकता है।

किसी स्त्री को सामाजिक दबाव में व्रत रखने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। अविवाहित स्त्रियां भी अपनी परंपरा के अनुसार भविष्य के दांपत्य सुख की प्रार्थना कर सकती हैं। पुरुष भी पत्नी के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

व्रत का आध्यात्मिक मूल्य त्याग की तुलना से नहीं, संबंध में करुणा और सम्मान से तय होता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से छलनी की रस्म

करवा चौथ में छलनी की रस्म को चंद्रमा और शुक्र के प्रतीकों से समझा जा सकता है। चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतीक है। शुक्र प्रेम, दांपत्य, आकर्षण और सौंदर्य का कारक है। छलनी का जाल मन की बिखरी हुई भावनाओं को एक केंद्र पर लाने का प्रतीक बन सकता है।

तत्व ज्योतिषीय भाव
चंद्रमा मन, भावनाएं और दांपत्य शांति
शुक्र प्रेम, आकर्षण और वैवाहिक सुख
छलनी दृष्टि, संयम और चयन
दीपक चेतना और शुभ संकल्प
जल अर्घ्य भावनात्मक शुद्धि
पति का दर्शन दांपत्य संबंध का सम्मान

व्यक्तिगत वैवाहिक फल के लिए सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, गुरु, चंद्रमा और नवांश का अध्ययन आवश्यक है। केवल छलनी से देखने की रस्म किसी कुंडली दोष को स्वतः समाप्त नहीं करती।

मनोवैज्ञानिक रूप से यह रस्म क्यों प्रभावशाली है?

किसी भी लंबे व्रत का अंतिम चरण भावनात्मक रूप से गहरा होता है। जब व्यक्ति लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहा हो और फिर एक निश्चित संकेत के बाद व्रत पूरा करे तो मन में राहत और संतोष उत्पन्न होता है।

छलनी उस संकेत को दृश्य रूप देती है। चंद्रमा को देखना आकाश से जुड़ना है। पति को देखना व्यक्तिगत संबंध से जुड़ना है। दोनों को एक ही फ्रेम में देखना मन में यह भाव बनाता है कि दांपत्य जीवन को भी किसी उच्च मूल्य, विश्वास और संयम से जोड़कर रखना चाहिए।

यह मनोवैज्ञानिक प्रभाव निम्न कारणों से मजबूत हो सकता है।

• लंबे समय की प्रतीक्षा

• परिवार की सामूहिक भागीदारी

• बचपन से सुनी हुई परंपरा

• पूजा और कथा से तैयार हुई भावनात्मक स्थिति

• पति पत्नी के बीच प्रत्यक्ष संवाद

• व्रत पूर्ण होने का स्पष्ट संकेत

इसलिए छलनी की रस्म को केवल अंधविश्वास या केवल विज्ञान कहकर सीमित करना उचित नहीं है। यह एक सांस्कृतिक प्रतीक है जिसमें भावनात्मक और सामाजिक अर्थ जुड़े हैं।

किन स्वास्थ्य सावधानियों को न भूलें?

व्रत के दौरान शरीर में जल और ऊर्जा की कमी हो सकती है। इसलिए सर्गी पौष्टिक हो, दिनभर अनावश्यक शारीरिक परिश्रम कम हो और चंद्र दर्शन के बाद धीरे धीरे भोजन किया जाए।

विशेष सावधानी

• गर्भवती स्त्रियां चिकित्सक की सलाह लें

• मधुमेह में निर्जला व्रत न रखें

• रक्तचाप या हृदय रोग में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें

• स्तनपान के दौरान जल और पोषण की कमी न होने दें

• माइग्रेन या बार बार चक्कर में व्रत सरल करें

• बेहोशी या भ्रम में तुरंत सहायता लें

• बहुत अधिक तला और मीठा भोजन लेकर व्रत न खोलें

• पहले जल, फल या हल्का भोजन लें

धर्म में करुणा का स्थान है। अपनी स्थिति के अनुसार व्रत रखना आस्था की कमी नहीं है।

छलनी से देखने की परंपरा का सार

करवा चौथ की छलनी चंद्रमा की किरणों को कोई जादुई औषधि नहीं बनाती। वह पति की आयु को वैज्ञानिक रूप से नहीं बढ़ाती। वह शरीर की किसी प्रमाणित ऊर्जा को स्वतः संतुलित नहीं करती। लेकिन उसका अर्थ इससे कम सुंदर नहीं है।

छलनी दृष्टि को केंद्र देती है। वह कहती है कि संबंधों को धैर्य से देखो। चंद्रमा मन को शांत करने का प्रतीक है। वह कहता है कि प्रेम में शीतलता रखो। पति का चेहरा जीवनसाथी के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वह कहता है कि दांपत्य को प्रतिदिन संभालो। अर्घ्य जल भावनाओं को पवित्र दिशा देता है। दीपक आशा और जागरूकता का संकेत देता है।

जब व्रती स्त्री छलनी से चंद्रमा और फिर पति को देखती है तब वह केवल एक रस्म नहीं निभाती। वह आकाश, मन, प्रेम और साझा जीवन को एक क्षण में जोड़ती है। यही इस परंपरा का पौराणिक सौंदर्य, मनोवैज्ञानिक गहराई और ज्योतिषीय प्रतीक है।

FAQ

करवा चौथ पर छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति को क्यों देखा जाता है?

यह परंपरा चंद्रमा की शीतलता, प्रार्थना और दांपत्य संबंध को जोड़ती है। पहले चंद्रमा को साक्षी मानकर देखा जाता है और फिर उसी दृष्टि से पति का दर्शन किया जाता है।

क्या छलनी से देखने पर चंद्रमा की किरणें आंखों के लिए सुरक्षित हो जाती हैं?

छलनी प्रकाश को छोटे दृश्यों में विभाजित करती है और देखने का अनुभव बदलती है। लेकिन इसे आंखों की सुरक्षा का वैज्ञानिक उपकरण या औषधीय माध्यम नहीं माना जा सकता।

क्या छलनी की रस्म पति की आयु बढ़ाती है?

धार्मिक मान्यता में इसे पति की दीर्घायु और सौभाग्य की प्रार्थना से जोड़ा जाता है। वैज्ञानिक रूप से छलनी से देखने पर आयु बढ़ने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

करवा चौथ 2026 में छलनी की रस्म कब होगी?

2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर को है। छलनी की रस्म स्थानीय चंद्रोदय के बाद होगी। नई दिल्ली में चंद्रोदय लगभग रात 8 बजकर 11 मिनट पर माना जा रहा है।

क्या पुरुष भी करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?

हां। परंपरागत रूप से यह व्रत विवाहित स्त्रियों से जुड़ा है, लेकिन पति पत्नी एक दूसरे के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए साथ व्रत रख सकते हैं।

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लेखक

पं. नीलेश शर्मा

पं. नीलेश शर्मा (63)


अनुभव: 20

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इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

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