By पं. अभिषेक शर्मा
रूप चौदस, अभ्यंग स्नान और अपमृत्यु से रक्षा का विधान

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस और कई क्षेत्रों में काली चौदस भी कहा जाता है। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। दीपावली से ठीक पहले आने वाला यह पर्व स्वास्थ्य, सौंदर्य, दीर्घायु और अकाल मृत्यु के भय से रक्षा की कामना से जुड़ा है।
वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को प्रातः लगभग 10 बजकर 47 मिनट से प्रारंभ होकर 8 नवंबर को प्रातः लगभग 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। भारत में कई पंचांग गणनाओं के अनुसार संध्याकालीन यम दीपदान और छोटी दिवाली का मुख्य आयोजन 7 नवंबर, शनिवार को किया जाएगा। अभ्यंग स्नान कई स्थानों पर 8 नवंबर की ब्रह्म मुहूर्त में किया जाएगा क्योंकि सूर्योदय के समय चतुर्दशी उसी प्रातः उपलब्ध रहेगी।
स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग पद्धति के अनुसार तिथि तथा मुहूर्त बदल सकते हैं। इसलिए अंतिम निर्णय अपने नगर के पंचांग से लेना चाहिए।
| विवरण | नरक चतुर्दशी 2026 की जानकारी |
|---|---|
| पर्व | नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, रूप चौदस |
| संध्या आयोजन | 7 नवंबर 2026, शनिवार |
| अभ्यंग स्नान | कई क्षेत्रों में 8 नवंबर प्रातः |
| पक्ष | कार्तिक कृष्ण पक्ष |
| तिथि | चतुर्दशी |
| तिथि आरंभ | 7 नवंबर को प्रातः लगभग 10 बजकर 47 मिनट |
| तिथि समाप्त | 8 नवंबर को प्रातः लगभग 11 बजकर 27 मिनट |
| अभ्यंग स्नान मुहूर्त | सूर्योदय से पहले, दिल्ली में लगभग 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट |
| यम दीप | संध्या या प्रदोष काल, मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा |
| मुख्य पूजा | यमराज, धन्वंतरि भाव, कृष्ण विजय स्मरण |
| विशेष स्नान | तिल तेल से अभ्यंग और उबटन |
| मूल भाव | आरोग्य, सौंदर्य, दीर्घायु और प्रकाश |
• सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करें, यदि स्वास्थ्य अनुमति दे
• शरीर पर तिल का तेल या हल्का उबटन लगाएं
• संध्या समय यम दीप जलाएं
• दीपक मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें
• यम तर्पण परिवार की परंपरा और पात्रता के अनुसार करें
• घर की सफाई और प्रकाश व्यवस्था पूरी करें
• बच्चों और बुजुर्गों की अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें
• अत्यधिक पटाखों और प्रदूषण से बचें
नरक चतुर्दशी की सबसे प्रसिद्ध कथा नरकासुर के वध से जुड़ी है। पौराणिक परंपरा के अनुसार नरकासुर ने अनेक स्त्रियों को बंदी बनाया और देवताओं तथा लोकों को कष्ट दिया। भगवान कृष्ण ने सत्यभामा के साथ नरकासुर का वध किया और बंदी स्त्रियों को मुक्त किया।
इस विजय के बाद प्रातःकाल स्नान और शुद्धिकरण की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। कथा का आध्यात्मिक अर्थ केवल किसी असुर का अंत नहीं है। नरक शब्द भीतर के अंधकार, क्रोध, लोभ, हिंसा और अज्ञान का भी संकेत देता है। जब व्यक्ति इन प्रवृत्तियों को नियंत्रित करता है तब छोटी दिवाली का प्रकाश सार्थक होता है।
कुछ क्षेत्रों में इस दिन देवी काली की उपासना भी की जाती है। काली अंधकार और आसुरी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली शक्ति मानी जाती हैं। रूप चौदस नाम इसलिए भी प्रचलित है क्योंकि अभ्यंग स्नान और उबटन से शरीर की शुद्धि तथा कांति बढ़ाने की कामना की जाती है।
यमराज को धर्मराज भी कहा जाता है। वे केवल मृत्यु के देवता नहीं, कर्मफल और न्याय के अधिष्ठाता माने जाते हैं। नरक चतुर्दशी पर यम दीप जलाने का भाव अकाल मृत्यु के भय से रक्षा, जीवन की मर्यादा का स्मरण और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता से जुड़ा है।
यम दीप सामान्यतः घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है क्योंकि दक्षिण दिशा यम से संबंधित मानी जाती है। कुछ परिवार धनतेरस पर भी यम दीप जलाते हैं और कुछ नरक चतुर्दशी पर। दोनों परंपराएं क्षेत्र के अनुसार प्रचलित हैं।
| दीपदान | स्थान | भाव |
|---|---|---|
| यम दीप | मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा | अकाल मृत्यु से रक्षा |
| घर के दीप | पूजा स्थल और आंगन | छोटी दिवाली का प्रकाश |
| तुलसी दीप | तुलसी के पास | शुभता और भक्ति |
| चौमुखी दीप | परिवार परंपरा अनुसार | चार दिशाओं में रक्षा भाव |
चौमुखी दीपक की परंपरा कुछ घरों में विशेष रूप से दिखाई देती है। चार बातियों का दीपक चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक माना जाता है। यदि चौमुखी दीपक उपलब्ध न हो तो एक स्थिर दीपक भी पर्याप्त है। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण हैं श्रद्धा, सुरक्षा और स्वच्छता।
यम दीपदान संध्या समय या प्रदोष काल में किया जाता है। स्थानीय सूर्यास्त के बाद का समय देखें।
ॐ यमाय नमः
इसका अर्थ है यम देव को नमस्कार।
ॐ धर्मराजाय नमः
इसका अर्थ है धर्म और न्याय के स्वामी को नमस्कार।
ये मंत्र सरल हैं और सामान्य गृहस्थ जप कर सकता है।
अभ्यंग स्नान का अर्थ है शरीर पर तेल लगाकर किया जाने वाला स्नान। नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले तिल के तेल से मालिश करके स्नान करना शुभ माना जाता है। कई परिवार उबटन भी लगाते हैं।
उबटन में सामान्यतः बेसन, हल्दी, दूध या दही, चंदन और हल्के सुगंधित द्रव्य मिलाए जा सकते हैं। त्वचा की संवेदनशीलता के अनुसार सामग्री चुनें। किसी भी नई सामग्री से एलर्जी हो तो उसका प्रयोग न करें।
अत्यधिक ठंडे जल में जबरन स्नान आवश्यक नहीं है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती स्त्रियों और रोगी व्यक्तियों को गुनगुना जल उपयोग करना चाहिए। हृदय रोग, रक्तचाप या त्वचा रोग में चिकित्सकीय सलाह लें।
यम तर्पण में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित किया जाता है। कई परंपराओं में यम के चौदह नामों का उच्चारण करके तिल मिश्रित जल से तर्पण किया जाता है।
ॐ यमाय नमः
ॐ धर्मराजाय नमः
ॐ मृत्यवे नमः
ॐ अन्तकाय नमः
ॐ वैवस्वताय नमः
ॐ कालाय नमः
ॐ सर्वभूतक्षयाय नमः
ॐ औदुम्बराय नमः
ॐ दध्नाय नमः
ॐ नीलाय नमः
ॐ परमेष्ठिने नमः
ॐ वृकोदराय नमः
ॐ चित्राय नमः
ॐ चित्रगुप्ताय नमः
प्रत्येक नाम के साथ जल अर्पित करने की परंपरा है। कुछ आचार्य प्रत्येक नाम तीन बार बोलने की सलाह देते हैं। परिवार की परंपरा और शारीरिक क्षमता के अनुसार सरल रूप भी अपनाया जा सकता है।
यम तर्पण का भाव मृत्यु भय से घबराकर कर्मकांड करना नहीं है। इसका भाव जीवन की सीमा समझना, समय का सम्मान करना और धर्मपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लेना है।
रूप चौदस नाम शरीर की शुद्धि और कांति से जुड़ा है। तेल मालिश से त्वचा में नमी रह सकती है। उबटन से मृत त्वचा कण साफ हो सकते हैं। स्नान से ताजगी मिलती है। लेकिन इसे चमत्कारी सौंदर्य उपचार न समझें।
सौंदर्य का गहरा अर्थ केवल त्वचा की चमक नहीं है। स्वच्छ वस्त्र, सात्विक आहार, पर्याप्त नींद, क्रोध का नियंत्रण और प्रसन्न मन भी रूप बढ़ाते हैं। नरक चतुर्दशी व्यक्ति को बाहर और भीतर दोनों की शुद्धि का स्मरण कराती है।
| अभ्यास | बाहरी लाभ | आंतरिक भाव |
|---|---|---|
| तेल मालिश | त्वचा नमी | आत्म देखभाल |
| उबटन | स्वच्छता | पुरानी मलिनता हटाना |
| स्नान | ताजगी | पाप भाव से मुक्ति का संकल्प |
| स्वच्छ वस्त्र | सुंदरता | मर्यादा |
| दीपदान | प्रकाश | अज्ञान का नाश |
| तर्पण | परंपरा | कृतज्ञता और धर्म |
धार्मिक भाषा में कहा जाता है कि यम दीपदान से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। यह आध्यात्मिक आश्वासन और प्रार्थना का रूप है। किसी दीपक से दुर्घटना, रोग या अकाल मृत्यु का निश्चित निवारण सिद्ध नहीं होता।
फिर भी इस परंपरा का व्यावहारिक मूल्य है। दीप जलाने से व्यक्ति जीवन के प्रति सावधान होता है। परिवार स्वास्थ्य, सुरक्षा, वाहन सावधानी, सही उपचार और अनुशासन की ओर ध्यान देता है। प्रार्थना मन को स्थिर करती है।
अपमृत्यु के भय को केवल कर्मकांड से नहीं बल्कि इन उपायों से भी संतुलित करें।
• नियमित स्वास्थ्य जांच
• नशा और लापरवाही से दूरी
• सड़क सुरक्षा
• घर में अग्नि और बिजली की सावधानी
• मानसिक तनाव में सहायता
• बुजुर्गों और बच्चों की देखभाल
• सत्य और अहिंसक जीवन
नरक चतुर्दशी को दीपावली की तैयारी का दिन भी माना जाता है। घर की सफाई, दीपों की व्यवस्था, रंगोली और परिवार का मिलन इस दिन विशेष रूप से दिखाई देता है।
• प्रातः अभ्यंग स्नान
• घर और आंगन की अंतिम सफाई
• टूटे दीपक और गंदे स्थान हटाना
• पूजा सामग्री व्यवस्थित करना
• संध्या यम दीपदान
• परिवार के साथ सात्विक भोजन
• अगले दिन की लक्ष्मी पूजा की तैयारी
• बच्चों को सुरक्षा के नियम समझाना
पटाखों का अत्यधिक प्रयोग वायु प्रदूषण, शोर और दुर्घटना बढ़ाता है। यदि परिवार पटाखे जलाता है तो सुरक्षित स्थान, वयस्क निगरानी और सीमित उपयोग रखें।
ज्योतिष में चतुर्दशी तिथि को कई बार उग्र, तीव्र और शुद्धि से जोड़ा जाता है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी में मन पुराने बोझ, भय और नकारात्मक आदतों को छोड़ने की ओर जा सकता है। यम का संबंध शनि, धर्म, कर्मफल और समय से भी प्रतीकात्मक रूप में जोड़ा जाता है।
| तत्त्व | संकेत |
|---|---|
| चतुर्दशी | तीव्रता और शुद्धि |
| कृष्ण पक्ष | भीतर की सफाई |
| यम | कर्म, न्याय और समय |
| दक्षिण दिशा | यम तत्त्व |
| तिल और तेल | शनि शांति और स्निग्धता |
| दीप | सूर्य अग्नि और चेतना |
| स्नान | पाप भाव से मुक्ति का संकल्प |
व्यक्तिगत आयु या अपमृत्यु योग का निर्णय केवल इस तिथि से नहीं होता। जन्म कुंडली, दशा, गोचर और वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का समग्र अध्ययन आवश्यक है।
नरकासुर की कथा में अत्याचार, बंधन और मुक्ति के भाव हैं। आधुनिक जीवन में नरक बाहर की किसी जगह से अधिक भीतर की अवस्था हो सकता है। क्रोध जब नियंत्रण से बाहर हो, लोभ जब संबंध तोड़ दे, ईर्ष्या जब मन जलाए और आलस्य जब स्वास्थ्य बिगाड़ दे तब व्यक्ति मानो अपने ही बनाए नरक में रहता है।
अभ्यंग स्नान शरीर को साफ करता है। यम दीप जीवन की सीमा याद दिलाता है। तर्पण कृतज्ञता और Immortality की झूठी चाह के स्थान पर धर्म की याद दिलाता है। छोटी दिवाली सिखाती है कि बड़े प्रकाश से पहले छोटी शुद्धि आवश्यक है।
तिल तेल और उबटन हर त्वचा के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होते।
• संवेदनशील त्वचा पर नया उबटन पहले छोटी जगह पर आजमाएं
• आंखों और घाव पर तेल या उबटन न लगाएं
• बहुत गर्म जल से स्नान न करें
• फिसलन वाले स्थान पर सावधानी रखें
• बुजुर्गों को अकेले स्नान में सहायता दें
• अस्थमा या एलर्जी में धूप और तेज सुगंध से बचें
• दीपक को पर्दे और कागज से दूर रखें
• पटाखों से जलन या चोट लगे तो तुरंत चिकित्सा लें
धर्म शरीर की रक्षा के विरुद्ध नहीं है। स्वास्थ्य की उपेक्षा करके किया गया कोई भी विधान अधूरा माना जाना चाहिए।
कुछ परिवार नरक चतुर्दशी को पितृ स्मरण से भी जोड़ते हैं। यम के माध्यम से मृत्यु और परलोक का स्मरण आता है। यह भय का विषय नहीं, जिम्मेदारी का विषय है। व्यक्ति सोचता है कि उसके बाद परिवार के लिए क्या संस्कार, क्या व्यवस्था और क्या प्रेम शेष रहेगा।
इस दिन दान करना शुभ माना जाता है।
• तिल
• तेल
• कंबल
• अन्न
• वस्त्र
• दीपक
• जरूरतमंद को भोजन
दान देते समय प्राप्तकर्ता का सम्मान रखें।
• अभ्यंग स्नान
• घर की सफाई
• यम दीपदान
• सात्विक भोजन
• परिवार से मधुर संवाद
• दीपावली की शांत तैयारी
• स्वास्थ्य का ध्यान
• अनावश्यक झगड़ा
• अत्यधिक पटाखे
• नशा
• असुरक्षित दीप व्यवस्था
• गंदगी फैलाना
• शरीर को कठोर ठंड में धकेलना
• अपमृत्यु के नाम पर भय फैलाना
नरक चतुर्दशी सिखाती है कि दिवाली का बड़ा प्रकाश तभी टिकता है जब पहले भीतर का अंधकार साफ हो। यम दीप दक्षिण दिशा में जलता है और व्यक्ति को समय की याद दिलाता है। अभ्यंग स्नान शरीर को स्पर्श करता है और आत्म देखभाल सिखाता है। तर्पण जल के माध्यम से कृतज्ञता जगाता है।
अकाल मृत्यु का भय मंत्र से कम, सावधानी और धर्मपूर्ण जीवन से अधिक शांत होता है। जब घर स्वच्छ हो, शरीर स्वस्थ हो, मन शांत हो और परिवार में करुणा हो तब छोटी दिवाली का दीपक केवल आंगन नहीं, जीवन को भी प्रकाशित करता है।
नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?
वर्ष 2026 में नरक चतुर्दशी का संध्या आयोजन प्रायः 7 नवंबर, शनिवार को माना जा रहा है। अभ्यंग स्नान कई स्थानों पर 8 नवंबर प्रातः होगा। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
यम दीप किस दिशा में जलाना चाहिए?
यम दीप मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाना शुभ माना जाता है।
अभ्यंग स्नान कैसे करें?
सूर्योदय से पहले तिल के तेल से मालिश करें, इच्छा अनुसार उबटन लगाएं और गुनगुने जल से स्नान करें। स्वास्थ्य के अनुसार जल का तापमान रखें।
यम तर्पण क्या होता है?
यम तर्पण में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यम के नामों का उच्चारण कर तिल मिश्रित जल अर्पित किया जाता है। यह जीवन, कर्म और धर्म के स्मरण का विधान है।
क्या यम दीप से अपमृत्यु का भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है?
धार्मिक मान्यता में यम दीप रक्षा का प्रतीक है। व्यावहारिक रूप से स्वास्थ्य सावधानी, सुरक्षित जीवन और समय पर उपचार भी आवश्यक हैं।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ