By पं. सुव्रत शर्मा
खरमास की समाप्ति, विवाह मुहूर्त के नियम और कुंडली मिलान

पौष मास में सूर्य के धनु राशि में रहने के कारण लगा हुआ लगभग एक महीने का खरमास मकर संक्रांति के दिन समाप्त हो जाता है। इसके साथ ही माघ मास के आरंभ होते ही सनातन परंपरा में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार के शुभारंभ जैसे मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। परंपरा में माघ मास को विवाह संस्कार के लिए वर्ष के श्रेष्ठ मासों में गिना जाता है, क्योंकि इस समय सूर्य उत्तरायण में होते हैं और वसंत के आगमन से पहले का यह समय नवदंपतियों के लिए सुखद माना जाता है।
| विवाह तत्व | विवरण |
|---|---|
| खरमास की समाप्ति | मकर संक्रांति पर, जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं |
| माघ का महत्व | विवाह के लिए परंपरागत रूप से श्रेष्ठ मासों में से एक |
| अबूझ मुहूर्त | वसंत पंचमी |
| मुहूर्त की शर्तें | गुरु और शुक्र का उदय, शुभ नक्षत्र, शुभ तिथि और शुभ लग्न |
| वर्जित काल | गुरु या शुक्र का अस्त होना, भद्रा और अन्य अशुभ योग |
| कुंडली मिलान | 8 कूट, कुल 36 गुण |
| सामान्य न्यूनतम गुण | 18 गुण |
| विशेष जांच | मंगल दोष और नाड़ी दोष |
वर्ष में 2 बार खरमास आता है। पहला तब, जब सूर्य धनु राशि में होते हैं और दूसरा तब, जब सूर्य मीन राशि में होते हैं। ये दोनों राशियां देवगुरु बृहस्पति की हैं। परंपरा में माना जाता है कि जब सूर्य गुरु की राशि में होते हैं तब गुरु का शुभ प्रभाव मांगलिक कार्यों के लिए पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं होता। इसलिए इस अवधि में विवाह जैसे संस्कार नहीं किए जाते।
धनु राशि का खरमास सामान्यतः दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक, अर्थात पौष मास के अधिकांश भाग में रहता है। मकर संक्रांति पर जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास समाप्त हो जाता है। इसके बाद माघ मास में विवाह के शुभ मुहूर्त फिर से आरंभ होते हैं। यही कारण है कि जनवरी के अंत और फरवरी में विवाहों की संख्या बढ़ जाती है।
परंपरा में माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ और मार्गशीर्ष को विवाह के लिए प्रमुख शुभ मास माना गया है। इनमें माघ का विशेष स्थान है।
माघ मास के विवाह मुहूर्त हर वर्ष ग्रहों की स्थिति के अनुसार बदलते हैं। इसलिए यहां किसी एक वर्ष की तिथियां देने के स्थान पर वे नियम दिए जा रहे हैं जिनके आधार पर पंचांग में विवाह मुहूर्त निकाले जाते हैं।
| मुहूर्त का तत्व | शुभ स्थिति |
|---|---|
| मास | माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ और मार्गशीर्ष प्रमुख |
| गुरु और शुक्र | दोनों ग्रहों का उदय, अर्थात अस्त न होना |
| सूर्य | खरमास के बाहर होना |
| तिथि | रिक्ता तिथियों, अर्थात चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी से बचना, अमावस्या वर्जित |
| वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार विशेष शुभ |
| नक्षत्र | विवाह के लिए निर्धारित शुभ नक्षत्र |
| लग्न | शुभ और स्थिर लग्न, जिसमें पाप ग्रहों का प्रभाव कम हो |
| भद्रा | भद्रा काल में विवाह वर्जित |
परंपरा में विवाह के लिए कुछ विशेष नक्षत्रों को शुभ माना गया है। इनमें रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती प्रमुख हैं। विवाह मुहूर्त निकालते समय चंद्रमा का इनमें से किसी नक्षत्र में होना देखा जाता है।
सनातन परंपरा में विवाह से पहले वर और वधू की जन्मकुंडली का मिलान करने का विधान है। उत्तर भारत में प्रचलित अष्टकूट पद्धति में 8 कूटों के आधार पर कुल 36 गुणों का मिलान किया जाता है।
| क्रम | कूट | अधिकतम गुण | किसका संकेत |
|---|---|---|---|
| 1 | वर्ण | 1 | स्वभाव और कार्य प्रवृत्ति |
| 2 | वश्य | 2 | परस्पर आकर्षण और प्रभाव |
| 3 | तारा | 3 | भाग्य और स्वास्थ्य |
| 4 | योनि | 4 | शारीरिक और स्वाभाविक अनुकूलता |
| 5 | ग्रह मैत्री | 5 | मानसिक अनुकूलता और मित्रता |
| 6 | गण | 6 | स्वभाव की समानता |
| 7 | भकूट | 7 | पारिवारिक सुख और समृद्धि |
| 8 | नाड़ी | 8 | स्वास्थ्य और संतान |
परंपरा में सामान्यतः 18 या उससे अधिक गुण मिलने पर विवाह को अनुकूल माना जाता है। परंतु केवल गुणों की संख्या पर्याप्त नहीं है। दोनों कुंडलियों में ग्रहों की स्थिति, सप्तम भाव, शुक्र और बृहस्पति की स्थिति, मंगल दोष और नाड़ी दोष की भी जांच की जाती है।
इन दोषों का निर्णय केवल योग्य और अनुभवी ज्योतिषी से ही कराना चाहिए। अधूरी जानकारी के आधार पर किसी संबंध को अस्वीकार करना या भय बनाना उचित नहीं है।
| पक्ष | सावधानी |
|---|---|
| मुहूर्त | उस वर्ष के प्रामाणिक पंचांग और योग्य आचार्य से मुहूर्त निकलवाएं |
| कुंडली मिलान | केवल गुणों पर नहीं, पूरी कुंडली के विश्लेषण पर ध्यान दें |
| आपसी सहमति | वर और वधू की सहमति और परस्पर समझ को प्राथमिकता दें |
| स्वास्थ्य | विवाह से पहले आवश्यक स्वास्थ्य जांच को भी महत्व दें |
| व्यय | दिखावे के स्थान पर सामर्थ्य के अनुसार सादगी से आयोजन करें |
| संस्कार | सप्तपदी और विवाह के मंत्रों के अर्थ को समझकर संस्कार करें |
विवाह केवल एक आयोजन नहीं बल्कि दो आत्माओं और दो परिवारों का पवित्र संस्कार है। सप्तपदी के 7 फेरों में वर और वधू एक दूसरे को जीवन भर साथ निभाने के 7 वचन देते हैं। इन वचनों का अर्थ समझकर विवाह करना उसे और भी पवित्र और स्थायी बनाता है।
वैदिक ज्योतिष में विवाह और वैवाहिक सुख के लिए कई ग्रह और भाव महत्वपूर्ण हैं। सप्तम भाव जीवनसाथी का भाव है। शुक्र वैवाहिक सुख और प्रेम का कारक है और स्त्री की कुंडली में बृहस्पति पति का कारक माना जाता है।
| लक्ष्य | संबंधित ग्रह या भाव | उपाय |
|---|---|---|
| विवाह में विलंब | पीड़ित सप्तम भाव या गुरु | गुरुवार को पीले वस्त्र और माँ कात्यायनी की उपासना |
| वैवाहिक सुख | शुक्र | शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा और श्वेत वस्त्र का दान |
| मंगल दोष | मंगल | मंगलवार को हनुमान पूजा और योग्य आचार्य से परामर्श |
| परस्पर प्रेम | शुक्र और चंद्रमा | वसंत पंचमी पर दंपत्ति द्वारा साथ में पूजा |
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| प्रामाणिक पंचांग से मुहूर्त निकलवाएं | खरमास और गुरु शुक्र अस्त काल में विवाह न करें |
| पूरी कुंडली का विश्लेषण कराएं | केवल गुणों की संख्या पर निर्णय न लें |
| वर वधू की सहमति को महत्व दें | मंगल दोष के नाम पर अनावश्यक भय न फैलाएं |
| सामर्थ्य के अनुसार सादगी से आयोजन करें | दिखावे और कर्ज में डूबकर विवाह न करें |
| विवाह मंत्रों के अर्थ को समझें | संस्कार को केवल औपचारिकता न बनाएं |
माघ मास वह समय है जब प्रकृति सर्दियों की लंबी नींद से जागने लगती है और हर ओर नए जीवन की आहट सुनाई देती है। इसी समय जब घरों में शहनाइयां गूंजती हैं और नवदंपति अपने जीवन की नई यात्रा आरंभ करते हैं, तो यह प्रकृति और मनुष्य के नवसृजन का सुंदर मेल बन जाता है।
जो परिवार इस शुभ मास में सही मुहूर्त, सही मिलान और सबसे बढ़कर प्रेम, सम्मान और समझ के साथ विवाह संस्कार करता है, उसके घर में सुख का वसंत लंबे समय तक बना रहता है। मुहूर्त शुभ आरंभ देता है, परंतु विवाह को सफल बनाने वाला वास्तविक मुहूर्त पति पत्नी का आपसी विश्वास और समर्पण है।
खरमास कब समाप्त होता है?
पौष मास में धनु राशि का खरमास मकर संक्रांति के दिन समाप्त होता है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसके बाद मांगलिक कार्य फिर आरंभ होते हैं।
माघ मास विवाह के लिए शुभ क्यों माना जाता है?
माघ मास में सूर्य उत्तरायण में होते हैं, खरमास समाप्त हो चुका होता है और वसंत का आगमन निकट होता है। परंपरा में यह विवाह के श्रेष्ठ मासों में से एक है।
माघ मास में विवाह की तिथियां कैसे जानें?
विवाह मुहूर्त हर वर्ष ग्रहों की स्थिति के अनुसार बदलते हैं। उस वर्ष के प्रामाणिक पंचांग या योग्य आचार्य से ही मुहूर्त निकलवाएं।
कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए?
अष्टकूट पद्धति में कुल 36 गुण होते हैं। परंपरा में सामान्यतः 18 या उससे अधिक गुण मिलने पर विवाह अनुकूल माना जाता है, परंतु पूरी कुंडली का विश्लेषण भी आवश्यक है।
क्या वसंत पंचमी पर बिना मुहूर्त देखे विवाह हो सकता है?
वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए परंपरा में इस दिन विवाह के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं मानी जाती।
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