By अपर्णा पाटनी
अलक्ष्मी का निष्कासन, श्री सूक्त हवन और कनकधारा का वरदान

माघ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महानंदा नवमी कहा जाता है। यह दिन माघ गुप्त नवरात्रि का समापन दिवस भी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता महालक्ष्मी के परम कल्याणकारी और शांत स्वरूप की पूजा की जाती है, जो घर से दरिद्रता और दुर्भाग्य की देवी अलक्ष्मी को बाहर निकालकर स्थायी समृद्धि का वास कराती हैं। अंग्रेजी कैलेंडर में यह तिथि सामान्यतः जनवरी के अंत से फरवरी के बीच आती है।
| पर्व तत्व | विवरण |
|---|---|
| तिथि | माघ शुक्ल नवमी |
| विशेषता | माघ गुप्त नवरात्रि का समापन दिवस |
| प्रमुख आराध्य | माता महालक्ष्मी |
| मुख्य भाव | अलक्ष्मी का निष्कासन और लक्ष्मी का स्वागत |
| प्रमुख कर्म | घर की सफाई, मुख्य द्वार पर दीपक, श्री सूक्त से हवन |
| प्रमुख पाठ | श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र |
| प्रमुख अर्पण | कमल या लाल पुष्प, खीर, सफेद मिठाई और कमलगट्टे |
| समापन | गुप्त नवरात्रि का हवन और कन्या पूजन |
सनातन परंपरा में समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी हैं, जो भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं। उनके विपरीत एक और शक्ति का वर्णन मिलता है, जिसे अलक्ष्मी या ज्येष्ठा कहा गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी से पहले अलक्ष्मी प्रकट हुई थीं, इसलिए उन्हें लक्ष्मी की बड़ी बहन माना जाता है।
अलक्ष्मी दरिद्रता, कलह, आलस्य, अस्वच्छता और दुर्भाग्य की प्रतीक हैं। परंपरा में माना जाता है कि वे उन घरों में निवास करती हैं जहां गंदगी हो, झगड़े होते हों, सूर्योदय के बाद तक लोग सोते हों, बड़ों का अपमान होता हो और अन्न का अनादर होता हो। इसके विपरीत माता लक्ष्मी स्वच्छता, शांति, परिश्रम, सदाचार और आपसी प्रेम वाले घरों में स्थायी रूप से वास करती हैं।
| लक्ष्मी का वास | अलक्ष्मी का वास |
|---|---|
| स्वच्छ और सुगंधित घर | गंदा और अव्यवस्थित घर |
| प्रातः जल्दी उठने वाले परिवार | देर तक सोने वाले परिवार |
| प्रेम और मधुर वाणी | कलह और कटु वचन |
| परिश्रम और ईमानदारी | आलस्य और छल |
| अन्न का सम्मान | अन्न की बर्बादी |
| बड़ों और स्त्रियों का आदर | बड़ों और स्त्रियों का अपमान |
| संध्या को दीपक | संध्या को अंधकार |
यह तालिका स्पष्ट करती है कि लक्ष्मी और अलक्ष्मी केवल पौराणिक देवियां नहीं बल्कि जीवन जीने के दो अलग अलग ढंगों के प्रतीक हैं। महानंदा नवमी का वास्तविक संदेश यही है कि घर और मन दोनों से अलक्ष्मी के गुणों को बाहर निकालकर लक्ष्मी के गुणों को अपनाया जाए।
महानंदा शब्द महा और आनंद से बना है, अर्थात परम आनंद। यह नाम बताता है कि लक्ष्मी की कृपा केवल धन तक सीमित नहीं है। सच्ची समृद्धि वह है जिसमें धन के साथ शांति, संतोष, स्वास्थ्य और परिवार का प्रेम भी हो। जिस घर में धन तो बहुत हो पर शांति न हो, वहां लक्ष्मी नहीं, अलक्ष्मी का वास माना जाता है।
इस दिन का माघ गुप्त नवरात्रि के समापन पर आना भी अर्थपूर्ण है। 9 दिनों की शक्ति साधना के बाद साधक को महानंद अर्थात परम आनंद की प्राप्ति होती है। दस महाविद्याओं में 10वीं महाविद्या कमला हैं, जो स्वयं लक्ष्मी का स्वरूप हैं। इस प्रकार गुप्त नवरात्रि की साधना लक्ष्मी के आशीर्वाद के साथ पूर्ण होती है।
| क्रम | पूजा चरण | विधि |
|---|---|---|
| 1 | अलक्ष्मी निष्कासन | प्रातः पूरे घर की सफाई करें और टूटे बर्तन, फटे वस्त्र तथा बेकार वस्तुएं बाहर निकालें |
| 2 | स्नान | स्नान करके स्वच्छ श्वेत, पीले या गुलाबी वस्त्र पहनें |
| 3 | स्थापना | चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाकर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें |
| 4 | गणेश पूजन | सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें |
| 5 | संकल्प | घर से दरिद्रता दूर होने और स्थायी समृद्धि के लिए संकल्प लें |
| 6 | अर्पण | कमल या लाल पुष्प, कुमकुम, अक्षत, कमलगट्टे और इत्र अर्पित करें |
| 7 | भोग | खीर, सफेद मिठाई, मखाने और मौसमी फल का भोग लगाएं |
| 8 | पाठ | श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें |
| 9 | हवन | श्री सूक्त की 16 ऋचाओं से घी, कमलगट्टे और खीर की आहुति दें |
| 10 | दीपक | संध्या को मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक जलाएं |
| 11 | आरती | माता लक्ष्मी की आरती करके प्रसाद वितरित करें |
श्री सूक्त ऋग्वेद के खिल भाग में आने वाला माता लक्ष्मी का अत्यंत प्राचीन और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसका आरंभ "हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्" से होता है, जिसमें देवी को स्वर्ण वर्ण वाली, स्वर्ण और रजत की माला धारण करने वाली कहा गया है। परंपरा में श्री सूक्त की 16 ऋचाओं से हवन करने का विधान है। प्रत्येक ऋचा के अंत में स्वाहा बोलकर घी, कमलगट्टे या खीर की आहुति दी जाती है।
श्री सूक्त की एक ऋचा में अलक्ष्मी के निष्कासन की स्पष्ट प्रार्थना है। इसमें साधक प्रार्थना करता है कि भूख, प्यास, मलिनता और दरिद्रता रूपी ज्येष्ठा अलक्ष्मी उसके घर से दूर हो जाए। इसीलिए महानंदा नवमी पर श्री सूक्त का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
कनकधारा स्तोत्र की रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसके पीछे एक अत्यंत मार्मिक कथा है। बाल्यकाल में शंकराचार्य भिक्षा मांगने के लिए एक निर्धन ब्राह्मणी के द्वार पर पहुंचे। उस ब्राह्मणी के घर में भोजन का एक दाना भी नहीं था। फिर भी वह द्वार पर आए बालक संन्यासी को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहती थी। उसने घर में पड़ा एकमात्र सूखा आंवला बड़े संकोच के साथ भिक्षा में दे दिया।
उसकी इस निःस्वार्थ दानशीलता और गहरी दरिद्रता को देखकर बालक शंकर का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने वहीं खड़े होकर माता लक्ष्मी की स्तुति में 21 श्लोकों की रचना की। कथा के अनुसार उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उस निर्धन ब्राह्मणी के घर पर स्वर्ण के आंवलों की वर्षा कर दी। कनक का अर्थ है स्वर्ण और धारा का अर्थ है वर्षा। इसी से इस स्तोत्र का नाम कनकधारा पड़ा।
इस कथा में एक गहरी सीख छिपी है। लक्ष्मी की कृपा उस ब्राह्मणी पर इसलिए हुई क्योंकि अभाव में भी उसने देने का भाव नहीं छोड़ा। जो व्यक्ति अपनी सीमित क्षमता में भी दूसरों की सहायता करता है, लक्ष्मी उसके द्वार पर स्वयं आती हैं।
जो परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज और व्यापारिक घाटे से जूझ रहे हैं, उनके लिए परंपरा में महानंदा नवमी को विशेष अवसर माना गया है। इस दिन व्रत रखने और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने को संजीवनी के समान फलदायी कहा गया है।
इन उपायों के साथ एक व्यावहारिक सत्य को भी समझना आवश्यक है। लक्ष्मी चंचल कही गई हैं, अर्थात वे वहीं टिकती हैं जहां उनका सम्मान होता है। आय और व्यय का हिसाब रखना, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण, ईमानदारी से परिश्रम और कर्ज लेने में संयम, ये सब भी लक्ष्मी की पूजा के ही रूप हैं। पूजा मन को स्थिर करती है और सही निर्णयों की ओर ले जाती है, परंतु परिश्रम और विवेक का स्थान कोई उपाय नहीं ले सकता।
वैदिक ज्योतिष में धन और समृद्धि के प्रमुख कारक शुक्र और बृहस्पति हैं। कुंडली का द्वितीय भाव संचित धन से, एकादश भाव आय और लाभ से और नवम भाव भाग्य से जुड़ा होता है। जब इन भावों या उनके स्वामियों पर पाप ग्रहों का प्रभाव हो, तो धन संचय में बाधा, अचानक खर्च और कर्ज जैसी स्थितियां देखी जा सकती हैं।
| समस्या | ज्योतिषीय संकेत | महानंदा नवमी पर उपाय |
|---|---|---|
| धन का न टिकना | पीड़ित द्वितीय भाव | श्री सूक्त से हवन और तिजोरी पूजन |
| आय में रुकावट | कमजोर एकादश भाव | कनकधारा स्तोत्र का पाठ |
| कर्ज का बोझ | षष्ठ भाव का अशुभ प्रभाव | संध्या को मुख्य द्वार पर घी का दीपक |
| व्यापार में घाटा | कमजोर शुक्र या बुध | कमलगट्टे की माला से लक्ष्मी मंत्र जप |
| घर में कलह | चंद्रमा और शुक्र का असंतुलन | घर की सफाई, सुगंध और मधुर वाणी का संकल्प |
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| पूरे घर की सफाई करें | घर में टूटी और बेकार वस्तुएं न रखें |
| संध्या को मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं | संध्या के समय घर में अंधेरा न रखें |
| स्त्रियों और कन्याओं का सम्मान करें | घर की स्त्रियों का अपमान न करें |
| अन्न का सम्मान करें | भोजन की बर्बादी न करें |
| श्री सूक्त और कनकधारा का पाठ करें | इस दिन कलह और कटु वचन से बचें |
| जरूरतमंदों को दान दें | किसी से छल या बेईमानी न करें |
महानंदा नवमी यह सिखाती है कि समृद्धि बाहर से नहीं, भीतर से आरंभ होती है। जब घर स्वच्छ होता है, मन शांत होता है, वाणी मधुर होती है और हाथ परिश्रम तथा दान दोनों के लिए खुले रहते हैं तब लक्ष्मी स्वयं उस द्वार पर आकर ठहर जाती हैं। अलक्ष्मी को बाहर निकालने का अर्थ केवल घर से कूड़ा निकालना नहीं बल्कि मन से आलस्य, ईर्ष्या और कलह को भी विदा करना है।
जो परिवार इस दिन श्रद्धा से माता महालक्ष्मी की पूजा करता है, मुख्य द्वार पर दीपक जलाता है और अपने जीवन में लक्ष्मी के गुणों को अपनाने का संकल्प लेता है, उसके घर में केवल धन ही नहीं बल्कि महानंद अर्थात परम आनंद का स्थायी वास हो जाता है।
महानंदा नवमी कब मनाई जाती है? महानंदा नवमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। यह माघ गुप्त नवरात्रि का समापन दिवस भी है।
महानंदा नवमी पर किसकी पूजा होती है? इस दिन माता महालक्ष्मी के कल्याणकारी स्वरूप की पूजा होती है, जो घर से दरिद्रता की देवी अलक्ष्मी को दूर करके स्थायी समृद्धि का वास कराती हैं।
अलक्ष्मी कौन हैं? अलक्ष्मी दरिद्रता, कलह, आलस्य और अस्वच्छता की प्रतीक हैं। मान्यता है कि वे गंदे और कलह वाले घरों में रहती हैं और स्वच्छता से दूर होती हैं।
महानंदा नवमी पर कौन सा पाठ करना चाहिए? इस दिन श्री सूक्त और आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। श्री सूक्त की 16 ऋचाओं से हवन भी किया जाता है।
आर्थिक संकट दूर करने के लिए महानंदा नवमी पर क्या करें? संध्या को मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक जलाएं, कनकधारा स्तोत्र पढ़ें और घर की सफाई करें। साथ ही आय व्यय में संयम और ईमानदार परिश्रम भी आवश्यक है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ