रंग ज्योतिष का गूढ़ रहस्य क्या है?

By पं. संजीव शर्मा

होली के रंगों का नवग्रह कनेक्शन और बारह राशियों के उपाय

रंग ज्योतिष: 12 राशियों के शुभ रंग, नवग्रह और होली उपाय

रंगों का ब्रह्मांडीय उद्भव और नवग्रहों की ऊर्जा तरंगे

वैदिक ज्योतिष और प्राचीन सौर विज्ञान के अनुसार इस संपूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण केवल पंच महाभूतों से ही नहीं हुआ है, अपितु यह संपूर्ण दृश्य जगत प्रकाश की विशिष्ट रश्मियों और रंगों के स्पंदन पर आधारित है। ऋग्वेद के प्रथम मंडल में भगवान भुवन भास्कर सूर्य के रथ में जुते सात घोड़ों का जो आख्यान आता है, वह आधुनिक भौतिकी के प्रकाश स्पेक्ट्रम अर्थात सात रंगों का ही प्रत्यक्ष प्रमाण है। जब श्वेत प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से विभाजित होता है, तो वह बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल इन सात प्रमुख रंगों में विभक्त हो जाता है। वैदिक काल गणना में सौरमंडल का प्रत्येक ग्रह प्रकाश की एक विशिष्ट तरंग दैर्ध्य और रंग ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। फाल्गुन मास के समापन और चैत्र मास के आरंभ में मनाया जाने वाला रंगों का महापर्व केवल आमोद प्रमोद का माध्यम नहीं है, अपितु यह नवग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने और मानव शरीर के आभामंडल को शोधित करने का एक अत्यंत वैज्ञानिक और दिव्य अवसर है।

ग्रह देवता शास्त्रीय वर्ण व रंग ऊर्जा का तात्विक स्वभाव मानव शरीर व चक्र संबंध ग्रह के प्रतिनिधि द्रव्य
भगवान सूर्य देव गहरा लाल, केसरिया, नारंगी अग्नि तत्त्व, तेज, जीवन शक्ति अनाहत व आज्ञा चक्र, अस्थि माणिक्य, तांबा, गुड़, लाल चंदन
चंद्र देव धवल श्वेत, चमकीला, चांदी जल तत्त्व, मानसिक शांति, शीतलता स्वाधिष्ठान चक्र, रक्त व मन मोती, चांदी, कच्चा दूध, श्वेत अबीर
मंगल देव रक्त वर्ण, गहरा सिंदूरी लाल अग्नि तत्त्व, पराक्रम, रक्त प्रवाह मूलाधार चक्र, मज्जा व मांसपेशियां मूंगा, मसूर दाल, रक्त गुलाल
बुध देव पन्ना समान हरा, तोतिया रंग पृथ्वी तत्त्व, तार्किक बुद्धि, वाणी अनाहत चक्र, स्नायु तंत्र, त्वचा पन्ना, कांस्य, मूंग दाल, पिस्ता
देवगुरु बृहस्पति स्वर्णिम पीला, हल्दी रंग आकाश तत्त्व, ज्ञान, धर्म, विवेक मणिपुर चक्र, यकृत व मस्तिष्क पुखराज, स्वर्ण, चने की दाल, केसर
दैत्यगुरु शुक्र चमकीला श्वेत, हल्का गुलाबी, रुपहला जल तत्त्व, सौंदर्य, आकर्षण, वीर्य स्वाधिष्ठान चक्र, हार्मोन्स व ओज हीरा, स्फटिक, सुगंधित इत्र, मिश्री
शनि देव गहरा नीला, जामुनी, श्याम वर्ण वायु तत्त्व, अनुशासन, आयु, कर्म मूलाधार चक्र, जोड़ व तंत्रिकाएं नीलम, लोहा, काले तिल, सरसों तेल
राहु ग्रह धुआंधार, स्लेटी, गहरा भूरा छाया तत्त्व, अंतर्ज्ञान, भ्रम, गति आज्ञा चक्र, अवचेतन वृत्तियां गोमेद, सिक्का, सूखा नारियल, भस्म
केतु ग्रह चितकबरा, भूरा, हल्का काला छाया तत्त्व, वैराग्य, मोक्ष, तंत्र सहस्रार चक्र, सूक्ष्म प्राण धारा लहसुनिया, दोरंगा कंबल, कुशा

होलिकोत्सव के पावन अवसर पर अपनी जन्म कुंडली के नवग्रहों को अनुकूल बनाने और रंगों के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए साधक को विशिष्ट वैदिक नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।

  • प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर शीतल जल में थोड़ा सा गंगाजल और सुगंधित चंदन मिलाकर स्नान करना।
  • अपनी जन्म राशि और लग्न के स्वामी ग्रह के अनुकूल रंग के प्राकृतिक गुलाल को एक स्वच्छ ताम्र अथवा चांदी के पात्र में रखना।
  • सर्वप्रथम अपने ईष्ट देव और गृह मंदिर में स्थित विग्रहों के चरणों में उस शुभ रंग को श्रद्धापूर्वक अर्पित करना।
  • माता पिता और परिवार के वरिष्ठ जनों के चरणों में वही गुलाल लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना।
  • रासायनिक, कृत्रिम, कांच मिले और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले अपवित्र रंगों का पूरी तरह बहिष्कार करना।
  • पलाश के फूलों से बने केसरिया जल, शुद्ध अबीर, हल्दी, चंदन और चुकंदर के रस से बने रंगों का ही प्रयोग करना।
  • अपनी शत्रु राशि के हानिकारक रंगों से बचना और उस रंग के गुलाल को अपने मस्तक पर धारण न करना।
  • सायंकाल के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना और अपनी राशि के स्वामी मंत्र का कम से कम 108 बार मानसिक जप करना।

मेष, वृषभ और मिथुन राशि के लिए शुभ रंग और ग्रह संतुलन

मेष राशि के स्वामी ग्रह भूमिपुत्र मंगल देव हैं जो अग्नि तत्त्व और अदम्य साहस के अधिष्ठाता हैं। मेष राशि के जातकों के लिए गहरा लाल, सिंदूरी और नारंगी रंग अत्यंत शुभ और ऊर्जावान माना गया है। इस रंग के प्राकृतिक गुलाल से होली खेलने पर मेष राशि के जातकों का रक्त संचार संतुलित रहता है, आत्मबल में वृद्धि होती है और कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इन्हें गहरे काले, नीले और स्लेटी रंगों से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि ये रंग मंगल के शत्रु शनि और राहु के प्रतीक हैं।

वृषभ राशि के स्वामी ग्रह दैत्यगुरु शुक्र देव हैं जो सौंदर्य, आकर्षण, भौतिक ऐश्वर्य और कला के कारक हैं। वृषभ राशि के जातकों के लिए हल्का गुलाबी, चमकीला श्वेत, चांदी जैसा रुपहला और हल्का फिरोजी रंग सर्वोत्तम फल प्रदान करता है। इन रंगों के प्रयोग से इनके दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, व्यक्तित्व का सम्मोहन बढ़ता है और आर्थिक संपन्नता में वृद्धि होती है। वृषभ राशि के जातकों को गहरे लाल और भड़कीले नारंगी रंगों से परहेज करना चाहिए क्योंकि मंगल शुक्र के साथ शत्रुता का भाव रखता है।

मिथुन राशि के स्वामी ग्रह वाणी और तार्किक बुद्धि के अधिष्ठाता बुध देव हैं जो पृथ्वी तत्त्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। मिथुन राशि के जातकों के लिए गहरा हरा, तोतिया हरा और हल्का पीला रंग अत्यंत भाग्यशाली सिद्ध होता है। हरे रंग की तरंगें मिथुन राशि के जातकों के स्नायु तंत्र को शांत करती हैं, वाणी दोष को दूर करती हैं और व्यापारिक निर्णय लेने की क्षमता को तीव्र बनाती हैं। इन्हें गहरे लाल और काले रंगों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

जन्म राशि राशि स्वामी परम शुभ व भाग्यशाली रंग सर्वथा वर्जित व अशुभ रंग अभीष्ट ज्योतिषीय लाभ
मेष राशि मंगल देव गहरा लाल, सिंदूरी, नारंगी काला, गहरा नीला, स्लेटी आत्मबल में वृद्धि, रक्त संचार संतुलन
वृषभ राशि शुक्र देव हल्का गुलाबी, रुपहला, श्वेत गहरा लाल, तेज नारंगी दांपत्य सुख, आकर्षण, धन लाभ
मिथुन राशि बुध देव गहरा हरा, तोतिया, हल्का पीला गहरा लाल, काला वाणी में ओज, व्यापारिक विवेक

कर्क, सिंह और कन्या राशि के लिए शुभ रंग और ग्रह संतुलन

कर्क राशि के स्वामी ग्रह मन और जल तत्त्व के अधिष्ठाता चंद्र देव हैं। कर्क राशि के जातकों के लिए दूध जैसा धवल श्वेत, हल्का चमकीला चांदी और हल्का पीला रंग अत्यंत कल्याणकारी होता है। चूंकि श्वेत रंग कोई गुलाल नहीं होता, अतः कर्क राशि के जातक सुगंधित श्वेत अबीर, चंदन चूर्ण अथवा हल्के पीले रंग के हर्बल गुलाल का उपयोग कर सकते हैं। यह रंग इनके संवेदनशील मन को स्थिरता प्रदान करता है, मानसिक तनाव और अनिद्रा की समस्या को समाप्त करता है। कर्क राशि वालों को गहरे काले और गहरे नीले रंगों से सख्त परहेज करना चाहिए क्योंकि शनि की यह तरंगे चंद्रमा को पीड़ित करके विष योग का निर्माण करती हैं।

सिंह राशि के स्वामी ग्रह संपूर्ण सौरमंडल के राजा और आत्मा के कारक भगवान सूर्य देव हैं। सिंह राशि के जातकों के लिए स्वर्णिम पीला, गहरा नारंगी, केसरिया और माणिक्य समान लाल रंग सर्वोत्तम माना गया है। इन रंगों के उपयोग से सिंह राशि के जातकों के मान सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता में भारी विस्तार होता है। पिता के साथ संबंधों में मधुरता आती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इन्हें नीले, काले और गहरे भूरे रंगों से बचना चाहिए।

कन्या राशि के स्वामी ग्रह भी बुध देव हैं जो द्विस्वभाव पृथ्वी तत्त्व राशि के रूप में जाने जाते हैं। कन्या राशि के जातकों के लिए गहरा हरा, हल्का हरा, हल्का आसमानी और मयूर पंख समान रंग अत्यंत शुभ फलदायी होते हैं। इन रंगों के प्रयोग से कन्या राशि के जातकों की एकाग्रता बढ़ती है, त्वचा संबंधी विकार शांत होते हैं और अध्ययन तथा शोध कार्यों में सफलता मिलती है। इन्हें लाल और गहरे सिंदूरी रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

जन्म राशि राशि स्वामी परम शुभ व भाग्यशाली रंग सर्वथा वर्जित व अशुभ रंग अभीष्ट ज्योतिषीय लाभ
कर्क राशि चंद्र देव श्वेत अबीर, चांदी रंग, हल्का पीला काला, गहरा नीला मानसिक शांति, अनिद्रा से मुक्ति
सिंह राशि सूर्य देव गहरा नारंगी, केसरिया, स्वर्णिम गहरा नीला, काला, स्लेटी प्रतिष्ठा वृद्धि, नेतृत्व क्षमता का विकास
कन्या राशि बुध देव हरा, हल्का आसमानी, तोतिया गहरा सिंदूरी, रक्त लाल एकाग्रता, त्वचा विकारों का शमन

तुला, वृश्चिक और धनु राशि के लिए शुभ रंग और ग्रह संतुलन

तुला राशि के स्वामी ग्रह भी दैत्यगुरु शुक्र देव हैं जो वायु तत्त्व की राशि मानी जाती है। तुला राशि के जातकों के लिए हल्का गुलाबी, सफेद, रुपहला और हल्का बैंगनी रंग अत्यंत शुभ होता है। इन रंगों की तरंगे तुला राशि के जातकों के भीतर मानसिक संतुलन स्थापित करती हैं, दांपत्य जीवन के विवादों को शांत करती हैं और साझेदारी के व्यापार में बड़ा लाभ दिलाती हैं। इन्हें गहरे पीले और गहरे लाल रंगों से बचना चाहिए।

वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह भी मंगल देव हैं परंतु यह जल तत्त्वीय मंगल का स्वरूप है। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मैरून, गहरा लाल, चॉकलेटी और सिंदूरी रंग अत्यंत लाभकारी माना गया है। वृश्चिक राशि के लोग अत्यंत भावुक और रहस्यमयी स्वभाव के होते हैं। गहरे लाल रंग का गुलाल इनकी दबी हुई ऊर्जा को रचनात्मक दिशा प्रदान करता है और इनके गुप्त शत्रुओं के षड्यंत्रों को निष्फल करता है। इन्हें हरे और नीले रंगों से बचना चाहिए क्योंकि बुध और शनि इनके लिए अनुकूल नहीं माने जाते।

धनु राशि के स्वामी ग्रह देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं जो अग्नि तत्त्वीय धर्म की राशि है। धनु राशि के जातकों के लिए विशुद्ध पीला, हल्दी रंग, केसरिया और हल्का नारंगी रंग अत्यंत फलदायी होता है। इन रंगों के प्रयोग से धनु राशि के जातकों के ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक चेतना और भाग्य में भारी वृद्धि होती है। उच्च शिक्षा और न्यायिक कार्यों में सफलता मिलती है। इन्हें काले, नीले और गहरे लाल रंगों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

जन्म राशि राशि स्वामी परम शुभ व भाग्यशाली रंग सर्वथा वर्जित व अशुभ रंग अभीष्ट ज्योतिषीय लाभ
तुला राशि शुक्र देव हल्का गुलाबी, श्वेत, हल्का बैंगनी गहरा पीला, गहरा लाल मानसिक संतुलन, व्यापारिक साझेदारी लाभ
वृश्चिक राशि मंगल देव मैरून, गहरा लाल, सिंदूरी गहरा हरा, नीला गुप्त शत्रुओं का शमन, ऊर्जा का संतुलन
धनु राशि बृहस्पति देव शुद्ध पीला, हल्दी रंग, केसरिया काला, गहरा नीला भाग्य वृद्धि, ज्ञान व विवेक का विस्तार

मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए शुभ रंग और ग्रह संतुलन

मकर राशि के स्वामी ग्रह कर्म फल दाता शनि देव हैं जो चर पृथ्वी तत्त्व की राशि है। मकर राशि के जातकों के लिए गहरा नीला, आसमानी, जामुनी और स्लेटी रंग अत्यंत अनुकूल सिद्ध होता है। इन रंगों के प्रयोग से मकर राशि के जातकों के जीवन में स्थिरता आती है, करियर में चल रही बाधाएं दूर होती हैं और जोड़ों तथा हड्डियों के दर्द से राहत मिलती है। मकर राशि वालों को गहरे लाल, पीले और नारंगी रंगों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए क्योंकि सूर्य और मंगल शनि के परम शत्रु माने जाते हैं।

कुंभ राशि के स्वामी ग्रह भी शनि देव हैं परंतु यह स्थिर वायु तत्त्व की राशि है। कुंभ राशि के जातकों के लिए हल्का नीला, आसमानी, बैंगनी और चमकीला सलेटी रंग अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है। ये रंग कुंभ राशि के जातकों की दार्शनिक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समाज सेवा की भावना को बलवान बनाते हैं। अनावश्यक मानसिक तनाव और भटकाव से मुक्ति दिलाते हैं। इन्हें गहरे लाल और सिंदूरी रंगों का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

मीन राशि के स्वामी ग्रह देवगुरु बृहस्पति हैं जो द्विस्वभाव जल तत्त्व की मोक्ष राशि है। मीन राशि के जातकों के लिए पीला, केसरिया, हल्का नारंगी और समुद्री हरा रंग अत्यंत भाग्यशाली माना गया है। इन रंगों के उपयोग से मीन राशि के जातकों की आध्यात्मिक साधना सफल होती है, अंतर्ज्ञान का विकास होता है और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है। मीन राशि के जातकों को गहरे काले, नीले और स्लेटी रंगों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

जन्म राशि राशि स्वामी परम शुभ व भाग्यशाली रंग सर्वथा वर्जित व अशुभ रंग अभीष्ट ज्योतिषीय लाभ
मकर राशि शनि देव गहरा नीला, आसमानी, जामुनी लाल, नारंगी, पीला करियर में स्थिरता, शनि पीड़ा से शांति
कुंभ राशि शनि देव हल्का नीला, बैंगनी, आसमानी गहरा लाल, सिंदूरी मानसिक तनाव से मुक्ति, तार्किक क्षमता
मीन राशि बृहस्पति देव शुद्ध पीला, केसरिया, समुद्री हरा काला, गहरा नीला, स्लेटी अंतर्ज्ञान का विकास, मोक्ष मार्ग प्रशस्त

रंगों की रासायनिक शुद्धि और आभामंडल का आध्यात्मिक शोधन

रंग ज्योतिष का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष केवल राशि के अनुसार रंग चुनना ही नहीं है, अपितु उन रंगों की प्राकृतिक और रासायनिक शुद्धि का ध्यान रखना भी है। आज के समय में बाजारों में मिलने वाले अधिकांश रासायनिक गुलाल में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइट और एस्बेस्टस जैसे घातक रसायनों का मिश्रण होता है। ये रासायनिक रंग मानव त्वचा के संपर्क में आते ही शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा केंद्रों और आभामंडल को पूरी तरह विकृत कर देते हैं, जिससे व्यक्ति को सिरदर्द, त्वचा की एलर्जी और लंबे समय तक चलने वाला मानसिक अवसाद घेर लेता है।

वैदिक परंपरा में सदैव प्राकृतिक और वनस्पति जन्य रंगों के प्रयोग का आदेश दिया गया है:

  • लाल और सिंदूरी रंग के लिए सूखे रक्त चंदन का चूर्ण अथवा चुकंदर के उबाले हुए रस का प्रयोग करें।
  • पीले रंग के लिए शुद्ध पिसी हुई हल्दी में थोड़ा सा बेसन अथवा अरारोट मिलाकर हर्बल गुलाल बनाएं।
  • हरे रंग के लिए सूखे नीम के पत्तों का बारीक चूर्ण अथवा पिसी हुई मेंहदी और पालक के पत्तों का रस उपयोग करें।
  • नीले रंग के लिए अपराजिता के सूखे फूलों को पानी में उबालकर एक अत्यंत दिव्य और औषधीय रंग तैयार करें।
  • नारंगी और केसरिया रंग के लिए पलाश अर्थात टेसू के फूलों को रातभर पानी में भिगोकर उबालें।

जब कोई साधक अपनी राशि के अनुकूल इन प्राकृतिक रंगों से होली खेलता है, तो उसके शरीर के सातों चक्र जाग्रत होते हैं और उसका आभामंडल अत्यंत देदीप्यमान हो जाता है। यह दिव्य आभामंडल संपूर्ण वर्ष जातक को नकारात्मक ऊर्जा, नजर दोष और तांत्रिक बाधाओं से एक अभेद्य सुरक्षा कवच की भांति सुरक्षित रखता है।

FAQ

रंग ज्योतिष में रंगों का नवग्रहों से क्या संबंध है?
सौरमंडल का प्रत्येक ग्रह प्रकाश की एक विशिष्ट तरंग और रंग का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे मानव शरीर का अंतःस्रावी तंत्र और आभामंडल सीधे प्रभावित होता है।

मेष और वृश्चिक राशि के लिए होली का सबसे शुभ रंग कौन सा है?
मेष और वृश्चिक दोनों राशियों के स्वामी मंगल देव हैं, अतः इनके लिए गहरा लाल, सिंदूरी और नारंगी रंग अत्यंत शुभ और ऊर्जावर्धक माना गया है।

शनि शासित मकर और कुंभ राशि वालों को किस रंग से होली खेलनी चाहिए?
मकर और कुंभ राशि के जातकों को नीले, आसमानी और जामुनी रंग के गुलाल से होली खेलनी चाहिए तथा लाल व पीले रंग से बचना चाहिए।

कर्क राशि के जातकों के लिए कौन सा रंग वर्जित माना गया है?
कर्क राशि के जातकों के लिए गहरा काला और गहरा नीला रंग पूरी तरह वर्जित है क्योंकि यह चंद्रमा को पीड़ित करके मानसिक अशांति लाता है।

प्राकृतिक हर्बल रंग बनाने के लिए किन औषधीय पदार्थों का उपयोग करना चाहिए?
हल्दी, बेसन, पलाश के फूल, चंदन, मेंहदी, नीम की पत्तियां और अपराजिता के फूलों का उपयोग करके पूर्णतः शुद्ध और सात्विक रंग बनाए जा सकते हैं।

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लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


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