मीन संक्रांति का द्वादश राशियों पर प्रभाव क्या है?

By पं. नरेंद्र शर्मा

सूर्य के गोचर से चमकेगी किस्मत या बरतनी होगी सावधानी

मीन संक्रांति राशिफल: 12 राशियों पर प्रभाव और सूर्य उपाय

मीन संक्रांति का खगोलीय आधार और ग्रहों के राजा का राशि परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के अधिपति, जीवनदाता और आत्मा के कारक भगवान सूर्य देव का राशि परिवर्तन संक्रांति कहलाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में जब भुवन भास्कर सूर्य देव अपने पुत्र शनि की वायु तत्त्वीय राशि कुंभ को छोड़कर देवगुरु बृहस्पति की द्विस्वभाव जल तत्त्वीय राशि मीन में प्रवेश करते हैं, तो यह खगोलीय घटना मीन संक्रांति कहलाती है। यह संपूर्ण संवत्सर का अंतिम सौर गोचर होता है। सूर्य देव कालपुरुष की कुंडली में पंचम भाव अर्थात बुद्धि, पूर्व पुण्य और संतान के स्वामी हैं। वहीं मीन राशि कालपुरुष की कुंडली का द्वादश भाव अर्थात व्यय, वैराग्य, शयन सुख, विदेश यात्रा और परम मोक्ष की राशि मानी जाती है।

ज्योतिषीय घटक शास्त्रीय विवरण
गोचर कर्ता ग्रह भगवान भुवन भास्कर सूर्य देव (आत्मा, पिता व सत्ता कारक)
प्रस्थान राशि कुंभ राशि (स्थिर वायु तत्त्व, शनि शासित)
प्रवेश राशि मीन राशि (द्विस्वभाव जल तत्त्व, गुरु शासित)
कालपुरुष भाव कालपुरुष की कुंडली का द्वादश भाव (मोक्ष व व्यय स्थान)
गोचर अवधि लगभग 30 दिन (चैत्र मास तक खरमास काल)
मित्र-शत्रु संबंध सूर्य और गुरु के मध्य नैसर्गिक मित्रता का संबंध
मुख्य प्रभाव भौतिक विस्तार में ठहराव, आध्यात्मिक चेतना का उदय

जब अग्नि तत्त्वीय आत्मा का कारक सूर्य जल तत्त्वीय और आध्यात्मिक ज्ञान की प्रतीक मीन राशि में प्रवेश करता है, तो सांसारिक वासनाओं की अग्नि शांत होने लगती है और मनुष्य के अंतःकरण में वैराग्य, आत्मनिरीक्षण और परोपकार की भावना जाग्रत होती है। यह गोचर सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन में व्यक्तिगत जन्म कुंडली के अनुसार अत्यंत गहरे, व्यापक और युगान्तरकारी परिवर्तन लेकर आता है।

इस एक माह के गोचर काल के दौरान सभी राशि के जातकों को अपनी जन्म पत्रिका में सूर्य देव के प्रभाव को संतुलित और बलवान बनाए रखने के लिए विशिष्ट दैनिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।

  • नित्य प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व शैया का त्याग करके शीतल जल से स्नान करना और लाल अथवा श्वेत वस्त्र धारण करना।
  • तांबे के एक शुद्ध लोटे में जल, अक्षत, रोली, पीला चंदन और लाल कनेर अथवा गुड़हल का पुष्प डालकर उदीयमान सूर्य को तीन बार अर्घ्य देना।
  • अर्घ्य देते समय जल की गिरती हुई धार के मध्य से भगवान सूर्य के बिंब का दर्शन करना और ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार स्पष्ट जप करना।
  • प्रतिदिन अपने पिता, गुरु और घर के वृद्ध जनों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करना क्योंकि सूर्य साक्षात पिता के कारक हैं।
  • प्रत्येक रविवार के दिन बिना नमक का सात्विक भोजन करना और सूर्य देव के बारह पावन नामों का स्मरण करना।
  • किसी भी निर्धन व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार गेहूं, तांबा, गुड़, लाल चंदन अथवा पीले वस्त्र का आदरपूर्वक दान करना।
  • अहंकार, कटु वाणी, असत्य भाषण और राजसत्ता अथवा उच्चाधिकारियों के साथ व्यर्थ के विवादों से सर्वथा दूर रहना।
  • संध्या वेला में गायत्री महामंत्र अथवा वाल्मीकि रामायण में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र का एकाग्रचित्त होकर पाठ करना।

मेष, वृषभ और मिथुन राशि पर मीन संक्रांति का प्रभाव

मेष राशि के जातकों के लिए भगवान सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर व्यय तथा मोक्ष के द्वादश भाव में गोचर करेंगे। पंचमेश का द्वादश भाव में जाना विद्यार्थियों और बौद्धिक वर्ग के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आता है। जो जातक उच्च शिक्षा अथवा अनुसंधान के लिए विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके लिए यह गोचर अत्यंत शुभ रहेगा और वीजा संबंधी बाधाएं दूर होंगी। परंतु सांसारिक दृष्टि से यह गोचर नेत्र विकार, अनिद्रा, सिरदर्द और आकस्मिक चिकित्सा व्यय में वृद्धि कर सकता है। इस अवधि में सट्टेबाजी, शेयर बाजार और जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह बचना चाहिए।

वृषभ राशि के जातकों के लिए सूर्य देव चतुर्थ भाव के स्वामी होकर एकादश भाव अर्थात लाभ और आय के स्थान में गोचर करेंगे। वृषभ राशि के लिए सूर्य का यह गोचर अत्यंत कल्याणकारी और धनवर्धक सिद्ध होगा। एकादश भाव में सूर्य का संचरण आय के नए स्रोत खोलता है, बड़े भाइयों अथवा वरिष्ठ अधिकारियों से लाभ कराता है और लंबे समय से अटके हुए सरकारी कार्य पूर्ण करवाता है। भूमि और भवन की बिक्री से भारी आर्थिक लाभ के योग बनेंगे।

मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य देव तृतीय भाव के स्वामी होकर दशम भाव अर्थात कर्म, व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा के स्थान में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में दशम भाव में सूर्य को दिशाबल प्राप्त होता है। मिथुन राशि के जातकों को करियर में अप्रत्याशित सफलता, पदोन्नति, स्थानांतरण में लाभ और नवीन अधिकार प्राप्त होंगे। जो जातक प्रशासनिक सेवा अथवा राजनीति से जुड़े हैं, उनका प्रभाव और वर्चस्व समाज में बढ़ेगा। पिता के साथ संबंधों में सुधार होगा, परंतु कार्यक्षेत्र में अत्यधिक अहंकार से बचना अनिवार्य होगा।

राशि गोचर भाव जीवन के प्रभावित क्षेत्र शास्त्रीय उपाय
मेष राशि द्वादश भाव विदेश यात्रा, गुप्त व्यय, नेत्र विकार, अनिद्रा तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्घ्य व लाल चंदन दान
वृषभ राशि एकादश भाव आय में वृद्धि, पद लाभ, बड़े भाई से सहयोग आदित्य हृदय स्तोत्र का नित्य 3 बार पाठ करें
मिथुन राशि दशम भाव करियर में उन्नति, प्रशासनिक प्रभाव, पदोन्नति गाय को प्रतिदिन गेहूं और गुड़ अपने हाथों से खिलाएं

कर्क, सिंह और कन्या राशि पर मीन संक्रांति का प्रभाव

कर्क राशि के जातकों के लिए सूर्य देव द्वितीय भाव अर्थात धन और कुटुंब के स्वामी होकर नवम भाव अर्थात भाग्य, धर्म और तीर्थ यात्रा के स्थान में गोचर करेंगे। कर्क राशि के लिए सूर्य परम मित्र हैं। नवम भाव में सूर्य का गोचर भाग्य में वृद्धि करेगा। धार्मिक अनुष्ठानों और तीर्थ यात्राओं के अवसर प्राप्त होंगे। समाज में मान प्रतिष्ठा का विस्तार होगा और पिता के सहयोग से बड़े आर्थिक लाभ होंगे। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह समय स्वर्णिम रहेगा।

सिंह राशि के जातकों के लिए भगवान सूर्य स्वयं उनकी राशि के स्वामी अर्थात लग्नेश हैं और वे अष्टम भाव अर्थात आयु, आकस्मिक संकट और अनुसंधान के स्थान में प्रवेश करेंगे। लग्नेश का अष्टम भाव में जाना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। सिंह राशि के जातकों को इस अवधि में पित्त जनित रोग, रक्तचाप, हृदय विकार और पेट की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। गुप्त शत्रुओं के षड्यंत्र से सावधान रहें। हालांकि गूढ़ विद्याओं, ज्योतिष और तंत्र साधना के साधकों के लिए यह गोचर अतींद्रिय ज्ञान के द्वार खोलेगा।

कन्या राशि के जातकों के लिए सूर्य देव द्वादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव अर्थात दांपत्य जीवन, विवाह और साझेदारी के स्थान में गोचर करेंगे। द्वादशेश का सप्तम भाव में बैठना वैवाहिक जीवन में तनाव, विचारों में मतभेद और जीवनसाथी के स्वास्थ्य में विकार उत्पन्न कर सकता है। व्यापारिक साझेदारों के साथ छोटी छोटी बातों पर अविश्वास बढ़ सकता है। कन्या राशि के जातकों को अपनी वाणी पर कठोर संयम रखना चाहिए और किसी भी नए अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पूर्व भली भांति विचार कर लेना चाहिए।

राशि गोचर भाव जीवन के प्रभावित क्षेत्र शास्त्रीय उपाय
कर्क राशि नवम भाव भाग्य वृद्धि, तीर्थ यात्रा, पिता से सहयोग तांबे के पात्र में गुड़ रखकर शिव मंदिर में दान करें
सिंह राशि अष्टम भाव स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव, आकस्मिक बाधाएं महामृत्युंजय मंत्र का नित्य 108 बार पाठ करें
कन्या राशि सप्तम भाव दांपत्य कलह, व्यापारिक साझेदारी में तनाव रविवार को नमक का त्याग करें व श्री सूक्त पढ़ें

तुला, वृश्चिक और धनु राशि पर मीन संक्रांति का प्रभाव

तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य देव एकादश भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव अर्थात रोग, ऋण और शत्रु के स्थान में गोचर करेंगे। षष्ठ भाव में क्रूर ग्रहों का गोचर अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला सिद्ध होगा। न्यायालय में चल रहे मुकदमों में निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है। पुराने रोगों से मुक्ति मिलेगी और बैंक से ऋण प्राप्त करने में आ रही बाधाएं दूर होंगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को उत्तम सफलता प्राप्त होगी।

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य देव दशम भाव अर्थात कर्म स्थान के स्वामी होकर पंचम भाव अर्थात बुद्धि, विद्या, प्रेम संबंध और संतान के स्थान में गोचर करेंगे। दशमेश का पंचम भाव में जाना एक अत्यंत शक्तिशाली केंद्र त्रिकोण राजयोग का निर्माण करता है। वृश्चिक राशि के जातकों की निर्णय क्षमता प्रखर होगी। रचनात्मक कार्यों, शोध, लेखन और कला से जुड़े जातकों को बड़ी प्रसिद्धि मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होगा। हालांकि प्रेम संबंधों में अपने साथी पर अपना प्रभुत्व जमाने का प्रयास न करें, अन्यथा संबंधों में दरार आ सकती है।

धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य देव नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान के स्वामी होकर चतुर्थ भाव अर्थात माता, भूमि, भवन और वाहन के स्थान में गोचर करेंगे। भाग्येश का चतुर्थ भाव में बैठना भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि का संकेत देता है। भूमि और नवीन संपत्ति क्रय करने के योग बनेंगे। परंतु चतुर्थ भाव में सूर्य का क्रूर प्रभाव माता के स्वास्थ्य में कुछ विकार और सीने में संक्रमण ला सकता है। पारिवारिक वातावरण में अहंकार के कारण अशांति हो सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा अक्षुण्ण बनी रहेगी।

राशि गोचर भाव जीवन के प्रभावित क्षेत्र शास्त्रीय उपाय
तुला राशि षष्ठ भाव शत्रु विजय, रोग मुक्ति, मुकदमे में सफलता सूर्य गायत्री मंत्र का नित्य 1 माला जप करें
वृश्चिक राशि पंचम भाव बौद्धिक विकास, संतान सुख, यश व प्रतिष्ठा भगवान विष्णु को पीले पुष्प व चने की दाल अर्पित करें
धनु राशि चतुर्थ भाव भूमि भवन लाभ, माता का स्वास्थ्य, मानसिक तनाव प्रतिदिन प्रातः सूर्य नमस्कार के 12 चक्र संपन्न करें

मकर, कुंभ और मीन राशि पर मीन संक्रांति का प्रभाव

मकर राशि के जातकों के लिए सूर्य देव अष्टम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव अर्थात पराक्रम, साहस, छोटे भाई बहनों और लघु यात्राओं के स्थान में गोचर करेंगे। तृतीय भाव में सूर्य देव अत्यंत बलवान हो जाते हैं। मकर राशि के जातकों के आत्मबल और पुरुषार्थ में भारी वृद्धि होगी। आपके द्वारा किए गए साहसिक निर्णय व्यापार में बड़ा लाभ प्रदान करेंगे। खेल, सेना, पुलिस और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष सम्मान प्राप्त होगा। छोटे भाई बहनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा और व्यर्थ की यात्राओं से बचना होगा।

कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य देव सप्तम भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव अर्थात धन, वाणी और पैतृक संपत्ति के स्थान में प्रवेश करेंगे। द्वितीय भाव में सूर्य का गोचर वाणी में कटुता और तीखापन ला सकता है, जिससे परिवार के सदस्यों के साथ अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकता है। आर्थिक दृष्टि से संचित धन में उतार चढ़ाव आ सकता है। खानपान में अनियमिता के कारण मुख और नेत्र रोग हो सकते हैं। इस अवधि में अपनी वाणी को अत्यंत विनम्र और मधुर रखना ही सफलता की कुंजी सिद्ध होगा।

मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य देव षष्ठ भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात उनकी स्वयं की लग्न राशि में ही प्रवेश करेंगे। षष्ठेश का लग्न में आना जातक के व्यक्तित्व में तेज, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता तो भरता है, परंतु इसके साथ ही शरीर में पित्त दोष, अत्यधिक पसीना, ज्वर, सिरदर्द और स्वभाव में अनावश्यक चिड़चिड़ापन भी लाता है। मीन राशि के जातकों को इस अवधि में अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सचेत रहना चाहिए। गरिष्ठ, तैलीय और तीखे भोजन का त्याग करना चाहिए। कार्यक्षेत्र में आपके विरोधी आपके तेज के समक्ष नतमस्तक होंगे।

राशि गोचर भाव जीवन के प्रभावित क्षेत्र शास्त्रीय उपाय
मकर राशि तृतीय भाव पराक्रम वृद्धि, व्यापारिक साहस, लघु यात्राएं बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें
कुंभ राशि द्वितीय भाव वाणी दोष, संचित धन व्यय, पारिवारिक विवाद लाल चंदन की माला से गायत्री मंत्र का जप करें
मीन राशि प्रथम भाव आत्मविश्वास, स्वभाव में उग्रता, सिरदर्द प्रतिदिन प्रातः सूर्य देव को केसर मिश्रित जल चढ़ाएं

सूर्य शांति के अचूक वैदिक और तांत्रिक उपाय

मीन संक्रांति के इस एक मास की अवधि में सभी राशियों के जातकों को अपनी जन्म कुंडली में सूर्य देव की स्थिति के अनुसार निम्नलिखित अचूक उपायों का अनुष्ठान करना चाहिए जिससे अनिष्टकारी फलों का शमन हो सके और जीवन में सात्विक प्रकाश का उदय हो:

  • माणिक्य रत्न धारण करने का विचार केवल किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह पर ही करें, परंतु प्राकृतिक रूप से सूर्य को बलवान बनाने के लिए तांबे का छल्ला अपनी अनामिका उंगली में रविवार के दिन धारण करना सर्वथा सुरक्षित और कल्याणकारी होता है।
  • प्रत्येक रविवार के दिन तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन, साबुत अक्षत और गुड़ मिलाकर ॐ सूर्याय नमः का उच्चारण करते हुए बरगद अथवा पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करें।
  • जो जातक मानसिक तनाव अथवा अपयश से जूझ रहे हैं, वे 800 ग्राम गेहूं और 800 ग्राम गुड़ को एक लाल सूती वस्त्र में बांधकर रविवार की दोपहर में किसी बहती हुई पवित्र नदी में प्रवाहित करें।
  • नेत्र ज्योति की रक्षा और सिरदर्द से मुक्ति के लिए नेत्रोपनिषद का नित्य प्रातः पाठ करना अत्यंत चमत्कारी प्रभाव दिखाता है।
  • घर के मुख्य द्वार के ठीक ऊपर तांबे का एक सुंदर सूर्य यंत्र स्थापित करें, जिससे भवन के भीतर प्रवेश करने वाली नकारात्मक और अमंगलकारी तरंगें उसी क्षण जलकर भस्म हो जाती हैं।

FAQ

मीन संक्रांति पर सूर्य देव किस राशि में गोचर करते हैं?
सूर्य देव अपने पुत्र शनि की कुंभ राशि की यात्रा समाप्त करके देवगुरु बृहस्पति की जल तत्त्वीय मीन राशि में गोचर करते हैं।

मीन संक्रांति से किन राशियों को सबसे अधिक आर्थिक लाभ होता है?
वृषभ, कर्क, तुला और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह गोचर करियर में उन्नति और धन लाभ की दृष्टि से सर्वाधिक अनुकूल माना गया है।

किस राशि के जातकों को स्वास्थ्य के प्रति सर्वाधिक सचेत रहना चाहिए?
सिंह राशि (अष्टम भाव) और मीन राशि (लग्न भाव) के जातकों को पित्त दोष, सिरदर्द और रक्तचाप से संबंधित स्वास्थ्य विकारों से विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

मीन संक्रांति के दिन सूर्य अर्घ्य में कौन सी वस्तुएं मिलानी चाहिए?
तांबे के लोटे में शुद्ध जल के साथ रोली, साबुत अक्षत, पीला चंदन, थोड़ा सा गुड़ और लाल कनेर का पुष्प मिलाना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

क्या मीन संक्रांति के गोचर काल में नए व्यापार का अनुबंध करना उचित है?
चूंकि इस संक्रांति से खरमास प्रारंभ हो जाता है, अतः नए व्यापार का अनुबंध करने के स्थान पर पुराने कार्यों को सुदृढ़ करना ही शास्त्र सम्मत है।

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पं. नरेंद्र शर्मा

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