गुजराती पंचांग और दिवाली नववर्ष

By पं. सुव्रत शर्मा

गुजरात की अमांत-विक्रम परंपरा में दिवाली के बाद नववर्ष का रहस्य

गुजराती पंचांग एवं दिवाली नववर्ष पारंपरिक ढांचा और सांस्कृतिक महत्व

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर लिखा गया है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर कुंडली बनाएं, जिसमें चंद्र राशि प्रमुख होती है।

गुजराती पंचांग भारत की पंचांग परंपरा में विशिष्ट स्थान रखता है। यह अमांत (अमावस्यांत) प्रणाली का पालन करता है और दिवाली के ठीक अगले दिन नए वर्ष ‘‘बेस्टु वरस’’ (नूतन वर्ष) का पर्व मनाता है। इस विलक्षण प्रणाली ने गुजरात की संस्कृति, कृषि, व्यापार और धार्मिक जीवन को अद्वितीय रंग दिया है।

अमांत प्रणाली और विक्रम संवत विशेषता

गुजराती कैलेंडर एक चंद्र सौर (लूनिसोलर) पंचांग है, जो विक्रम संवत (57 ई.पू.) गणना युग का अनुसरण करता है, परंतु उत्तर भारत के पंचांगों (जो पूर्णिमांत प्रणाली अपनाते हैं) से विपरीत, यह नया महीना अमावस्या के अगले दिन (शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा) से आरंभ करता है।

  • शुक्ल पक्ष: हर महीने का पहला भाग, अमावस्या के अगले दिन से पूर्णिमा तक।
  • कृष्ण पक्ष: बाद का भाग, पूर्णिमा से अगली अमावस्या तक।
  • यद्यपि विक्रम संवत पूरे उत्तर भारत में आम है, गुजरात का पंचांग दक्षिण-पश्चिमी अमांत धारा का अनुसरण करता है।
पहलू प्रकृति / विवरण
युग विक्रम संवत (57 ई.पू. से)
माह प्रणाली अमांत: अमावस्या के अगले दिन से नया महीना
नववर्ष बेस्टु वरस, दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
प्रमुख महीना कार्तिक साल का पहला महीना, मार्च अप्रैल नहीं

दिवाली के अगले दिन: गुजराती नववर्ष (बेस्टु वरस)

प्रमुख विशेषता गुजरात में नववर्ष ‘बेस्टु वरस’/‘नूतन वर्ष’ दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है, जो कार्तिक मास की शुक्ल प्रतिपदा (कार्तिक सूद एकम) होती है। इस दिन को व्यावसायिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक नए चक्र की शुरुआत माना जाता है।

  • 2025 में: बेस्टु वरस 22 अक्टूबर को, दिवाली के बाद, विक्रम संवत 2082 की शुरुआत।
  • कारोबार संबंध व्यापारी ‘चोपड़ा पूजन’ (नई बही-खातों की पूजा), शुभ-लाभ अंकन, स्वस्तिक चिन्ह और लक्ष्मी पूजा करते हैं।
  • कृषि/प्राकृतिक चक्र: मॉनसून बाद की कटाई के वक्त नववर्ष से नया कृषि व्यवसाय शुरू होता है।
  • पौराणिक संबंध: श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ाव।

बेस्टु वरस का पंचांग: पंचांग तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय/सूर्यास्त, मुहूर्त आदि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा(दिवाली के अगले दिन) के लिए दर्शाता है।

मुख्य अवयव विवरण
माह व्यवस्था अमांत अमावस्या के अगले दिन प्रारंभ
युग विक्रम संवत
नववर्ष बेस्टु वरस (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)
प्रमुख पूजन चोपड़ा पूजन, लक्ष्मी सरस्वती पूजा
पंचांग अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
व्यावसायिक आरंभ नई बही खुलती है, लाभ पंचम पर फिर शुरू

महीने का क्रम

गुजराती पंचांग में वर्षकार्तिक माह से आरंभ होता है (मार्च अप्रैल में नहीं), जिससे चैत, वैशाख इत्यादि आगे की गिनती में आते हैं:

क्रमांक गुजराती माह संस्कृत नाम ग्रेगोरियन काल
1 कार्तिक कृतिक अक्टूबर नवंबर
2 मगशर मार्गशीर्ष नव. दिसंबर
3 पोष पौष दिसंबर जनवरी
4 माहा माघ जनवरी फरवरी
5 फागण फाल्गुन फरवरी मार्च
6 चैत्र चैत्र मार्च अप्रैल
... ... ... ...

चोपड़ा पूजन और लाभ पंचम

चोपड़ा पूजन नए खाता बही की पूजा, लक्ष्मी व सरस्वती देवी के आह्वान, "शुभ-लाभ", "स्वस्तिक" और समृद्धि के प्रतीकों के साथ नई शुरुआत।

  • दुकानें: दिवाली को बंद रहतीं, लाभ पंचम पर पुनः खुलती हैं।

लाभ पंचम कार्तिक शुक्ल पंचमी, बेस्टु वरस के पांचवें दिन, पहले कार्यदिवस के रूप में व्यवसाय आरंभ। यह दिन भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

दिन तिथि उदाहरण (2025) महत्व
बेस्टु वरस 22 अक्टूबर नववर्ष आरंभ, चोपड़ा पूजन
लाभ पंचम 26 अक्टूबर व्यापार का पुनः आरंभ, शुभ मुहूर्त

पौराणिक संदर्भ और पर्व कथा

नववर्ष गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के साथ जुड़ा है, जिसमें भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर श्रीगोकुलवासियों को इंद्र के क्रोध से बचाने की कथा है। इस कथा की स्मृति में दिवाली के बाद नव आरंभ का उत्सव गुजरात में विशेष रूप से मनाया जाता है।

धार्मिक/सांस्कृतिक एवं आर्थिक जीवन में महत्व

  • धार्मिक: मंदिरों में विशेष पूजा, आरती, परिवार का साथ।
  • सांस्कृतिक: रंगोली, दीप सज्जा, नए वस्त्र पहनना, बड़ों से आशीर्वाद।
  • भोजन: मोहन्थल, घारी, शकरपारा, फाफड़ा जलेबी, थेपला, लापसी आदि व्यंजन विशेष।
  • समाज/व्यापार: व्यापारी वर्ग के लिए वर्षारंभ; शुभ-लाभ अंकन, लाभ पंचम पर नई शुरुआत, परिवार व्यवसाय दोनों का मिलन।

पंचांग के पांच अंग और उपयोग

  • वार, तिथि, नक्षत्र, योग, करण प्रत्येक शुभ कार्य, उत्सव, विवाह, नए कारोबार के मुहूर्त के लिए अनिवार्य।
  • अन्य सूचनाएं: होरा, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय/सूर्यास्त, पर्व तिथियां सभी पंचांग में दर्शाए जाते हैं।

प्रमुख गुजराती पर्व

  • मकर संक्रांति (उत्तरायण), होली, राम नवमी, रथयात्रा, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली, बेस्टु वरस

विस्तार और समकालीन प्रासंगिकता

गुजराती पंचांग आज भी धार्मिक, सामाजिक, व्यावसायिक एवं कृषि-रूप से अत्यंत प्रासंगिक है। नूतन वर्ष शुरुआत और व्यापारिक संस्कृति इसकी अमांत विक्रम आधार संरचना का जीता-जागता उदाहरण है। दिवाली के बाद नववर्ष की परंपरा गुजरात की अद्वितीय पंचांग-चेतना का द्योतन करती है, जिसमें वेद आधारित खगोलीयता और स्थानीय जीवनशैली का गहन संगम दिखाई देता है।

बारंबार पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजराती पंचांग किस पंचांग प्रणाली का पालन करता है?

अमांत विक्रम संवत प्रणाली; हर महीना अमावस्या के अगले दिन आरंभ होता है।

नववर्ष (बेस्टु वरस) दिवाली के बाद क्यों मनाया जाता है?

पारंपरिक पंचांग में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को नया वित्त-वर्ष, धार्मिक और सामाजिक चक्रों की शुरुआत मानी जाती है।

कारोबार में चोपड़ा पूजन का क्या महत्व है?

यह नए खातों, कार्य और लक्ष्मी-संपन्नता की शुरुआत है, जिसमें शुभ-लाभ अंकन होता है।

लाभ पंचम दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?

यह बेस्टु वरस के पांचवें दिन, व्यापार और नई गतिविधियों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।

पंचांग किन पांच अंगों पर आधारित है?

वार (सप्ताह), तिथि, नक्षत्र, योग, करण हर धार्मिक, सामाजिक कार्य के लिए ये अनिवार्य हैं।

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लेखक

पं. सुव्रत शर्मा

पं. सुव्रत शर्मा (63)


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इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

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