By पं. अभिषेक शर्मा
पालचा युग, तिब्बती बौद्ध और त्रिपुराब्द प्रणाली की व्यापक खोज

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर तैयार किया गया है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए अपनी जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति देखें। चंद्रमा जिस राशि में स्थित है, वही आपकी चंद्र राशि है। यह आपकी मानसिक और भावनात्मक प्रकृति को दर्शाती है।
भारत के छोटे पूर्वोत्तर राज्यों के कम ज्ञात पंचांग प्रणालियां विशिष्ट खगोलीय और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं जो प्रमुख हिंदू कैलेंडर ढांचे से स्वतंत्र रूप से विकसित हुई हैं। ये तीन राज्य मणिपुर, सिक्किम और त्रिपुरा प्रत्येक अद्वितीय पंचांग परंपराएं बनाए रखते हैं जो उनके विशिष्ट भौगोलिक, जातीय और आध्यात्मिक संदर्भों को दर्शाती हैं। इन प्रणालियों में परिष्कृत समय गणना तंत्र हैं जो स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों में निहित हैं।
मैतेई कैलेंडर जिसे मणिपुरी कैलेंडर, कांगलेइपाक कैलेंडर या पालचा राजवंश गणना के रूप में भी जाना जाता है, भारत की सबसे पुरानी स्वदेशी कैलेंडर प्रणालियों में से एक है। यह कैलेंडर प्रणाली सम्राट मलियाफाम पालचा द्वारा उन्नीस सौ सत्तानवे ईसा पूर्व में औपचारिक रूप से स्थापित की गई थी, जिससे पालचा युग का आरंभ हुआ। यह मणिपुर की कैलेंडर प्रणाली लगभग तीन हजार चार सौ वर्ष पुरानी है, जिससे यह भारत की सबसे पुरानी ज्ञात प्रणालियों में से एक बनाती है।
शुद्ध चंद्र संरचना: मैतेई कैलेंडर बारह चंद्र महीनों के साथ कार्य करता है जो कुल तीस सौ चौवन दिन बनाते हैं। यह अधिकांश भारतीय कैलेंडर से भिन्न है जो चंद्र सौर हैं।
अमावस्या से अमावस्या गणना: महीनों की गणना अमावस्या से अमावस्या तक की जाती है, जिससे यह एक शुद्ध चंद्र प्रणाली बन जाती है जिसमें सौर मौसमी संकेतकों का एकीकरण नहीं है।
कृषि नामकरण आधार: कई महीने कृषि कार्यों या किंवदंती के किसान नायक से व्युत्पन्न नामों को धारण करते हैं। दूसरा, तीसरा, चौथा, छठा और सातवां महीने इन कृषि से संबंधित नामों को धारण करते हैं, जो कैलेंडर की कृषि समाज में गहरी जड़ों को दर्शाता है।
थारोन्नबा अंतः मास प्रणाली: मौलिक रूप से चंद्र होने के बावजूद मैतेई कैलेंडर लगभग हर दो दशमलव सात से तीन वर्षों में अंतः मास जोड़ता है। यह हाइब्रिड विशेषता इसे शुद्ध चंद्र और चंद्र सौर के बीच की स्थिति में रखती है।
| मैतेई महीने नाम | ग्रेगोरियन अवधि | परंपरागत संबंध | कृषि और सांस्कृतिक महत्व |
|---|---|---|---|
| साजिबु | अप्रैल से मई | नववर्ष महीना | कृषि चक्र की शुरुआत साजिबु चैराओबा |
| कालेन | मई से जून | पहली कृषि गतिविधि | प्रारंभिक मानसून तैयारी जुताई का मौसम |
| ईनागा | जून से जुलाई | दूसरी कृषि गतिविधि | पूरा मानसून धान की बुवाई |
| ईनगेन | जुलाई से अगस्त | तीसरी कृषि गतिविधि | मध्य मानसून फसल वृद्धि |
| थौवान | अगस्त से सितंबर | चौथी कृषि गतिविधि | मानसून शिखर चावल परिपक्व होने लगे |
| लांगबान | सितंबर से अक्टूबर | पाँचवीं कृषि गतिविधि | मानसून वापसी कटाई का मौसम शुरु |
| मेरा | अक्टूबर से नवंबर | पालचा काल के बाद | प्रमुख कटाई का महीना भंडार खोलना |
| हीयांगेई | नवंबर से दिसंबर | सर्दी शुरु होती है | कटाई के बाद भाई बहन उत्सव |
| पोइनु | दिसंबर से जनवरी | सर्दी जारी रहती है | ठंड का मौसम भंडारण और तैयारी |
| वाकचिंग | जनवरी से फरवरी | सर्दी घटती है | शीतकालीन संक्रांति क्षेत्र पूर्वज पूजा |
| फैरेल | फरवरी से मार्च | वसंत उभरती है | वसंत आता है खेत की तैयारी |
| लामता | मार्च से अप्रैल | वसंत पूर्ण खिल गई | वसंत उत्सव होली समकक्ष |
| मैतेई नाम | खगोलीय शासक | रोमन समकक्ष | अर्थ |
|---|---|---|---|
| नोंगमाइजिंग | सूर्य | रविवार | सूर्य का दिन |
| निंगथौकाबा | चंद्रमा | सोमवार | चंद्रमा का दिन |
| लेइबाकपोकपा | मंगल | मंगलवार | मंगल का दिन |
| यूम्सकेइसा | बुध | बुधवार | बुध का दिन |
| सागोलसेन | बृहस्पति | गुरुवार | बृहस्पति का दिन |
| ईराई | शुक्र | शुक्रवार | शुक्र का दिन |
| थांगजा | शनि | शनिवार | शनि का दिन |
साजिबु महीने के पहले दिन मई में साजिबु चैराओबा मनाया जाता है। यह उत्सव मैतेई चंद्र कैलेंडर वर्ष की शुरुआत को चिह्नित करता है। यह शब्द विभिन्न तत्वों को मिलाता है:
त्योहार पारिवारिक एकता, नवीकरण और कृषि गतिविधियों की शुरुआत पर जोर देता है। परंपरागत प्रथाओं में घर की सफाई, नई पोशाकें, पारिवारिक भोजन और आध्यात्मिक पूजा शामिल है।
मौलिक रूप से चंद्र होने के बावजूद मैतेई कैलेंडर हाइब्रिड विशेषताएं प्रदर्शित करता है। प्रणाली मौसमी संरेखण बनाए रखने के लिए अंतः मास जोड़ती है। कुछ समुदाय साजिबु चैराओबा की गणना सौर वर्ष गणना का उपयोग करके करते हैं जबकि अन्य चंद्र गणना का उपयोग करते हैं। यह कभी कभी विवाद पैदा करता है कि नववर्ष को चंद्र अमावस्या पर मनाया जाए या सौर संरेखित तारीख पर।
सिक्किम जो एकमात्र उत्तर पूर्वी राज्य है जिसमें बौद्ध बहुसंख्यक जनसंख्या और महत्वपूर्ण जातीय विविधता है, कई अतिव्यापी कैलेंडर प्रणालियों को नियोजित करता है। ये प्रणालियां इसकी जटिल जनसांख्यिकी को दर्शाती हैं।
सिक्किम में प्रमुख कैलेंडर प्रणाली तिब्बती चंद्र कैलेंडर का अनुसरण करती है, विशेष रूप से बौद्ध अनुष्ठानों के लिए। लोसार यानी तिब्बती नववर्ष तिब्बती चंद्र कैलेंडर के पहले महीने के पहले दिन मनाया जाता है, आमतौर पर फरवरी में पड़ता है।
कैलेंडर संरचना:
सिक्किम विशिष्ट चंद्र कैलेंडर तारीखों से जुड़े त्योहारों को निर्धारित करता है न कि निश्चित ग्रेगोरियन तारीखें।
| त्योहार | चंद्र तारीख | महीना (अनुमानित ग्रेगोरियन) | महत्व |
|---|---|---|---|
| लोसार | पहले महीने का पहला दिन | फरवरी | तिब्बती बौद्ध नववर्ष |
| पांग लाबसोल | सातवें महीने का पंद्रहवां दिन | सितंबर | पर्वत देवताओं को सम्मानित करना कंचनजंघा पूजा |
| लाबाब ध्वचेन | नवें महीने का बाईस दिन | नवंबर | बुद्ध का स्वर्ग से आगमन |
| मोनलाम | पहले महीने का पहला से पंद्रहवां दिन | फरवरी से मार्च | महान प्रार्थना महोत्सव |
सिक्किम के स्वदेशी लेप्चा लोग तिब्बती बौद्ध धर्म से पहले की अलग कैलेंडर परंपराओं को बनाए रखते हैं। पांग लाबसोल लेप्चा स्वदेशी पूजा का संश्लेषण दर्शाता है, जो प्रकृति देवताओं और कंचनजंघा पर्वत की पूजा को बौद्ध प्रथाओं के साथ जोड़ता है। लेप्चा शामान पुजारी बौद्ध भिक्षुओं के साथ अनुष्ठान करते हैं। त्योहार पारिस्थितिक संतुलन और प्राकृतिक शक्तियों के प्रति श्रद्धा पर जोर देता है।
त्रिपुरी कैलेंडर जिसे त्रिपुराब्द युग या त्विप्र युग के रूप में भी जाना जाता है, इसका मूल तारीख पंद्रहवीं अप्रैल पांच सौ नब्बे ईस्वी में स्थापित करता है। परंपरागत त्रिपुरी इतिहास के अनुसार यह तारीख वह है जब एक सौ अठारहवां त्रिपुरी राजा हामतोर फा ने बंगाल पर विजय प्राप्त की।
समकालीन अनुसंधान दर्शाता है कि त्रिपुरी कैलेंडर बंगाली कैलेंडर की तरह वास्तव में सम्राट अकबर द्वारा पंद्रहवीं सौ तिरसठ ईस्वी में प्रस्तुत की गई मुगल फसली युग से लिया गया है। राजा गोविंद मणिक्य के शासन काल में त्रिपुरी ने इस प्रणाली को अपनाया, विशेषता तीन वर्षीय बदलाव पहली बार उनके उत्तराधिकारी राजा छत्रमणिक्य के शासन काल में दर्ज किया गया।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| प्रकार | सौर कैलेंडर |
| नववर्ष तारीख | वैशाख का पहला दिन चौदह या पंद्रह अप्रैल ग्रेगोरियन |
| मास प्रणाली | बारह महीने संस्कृत व्युत्पन्न नाम |
| युग आयु | एक हजार चार सौ उन्तीस वर्ष वर्तमान |
| महीने के नाम | वैशाख ज्येष्ठ आषाढ़ श्रावण भाद्रपद आश्विन कार्तिक मार्गशीर्ष पौष माघ फाल्गुन चैत्र |
त्रिपुरा के भारतीय गणराज्य में विलय के साथ उन्नीस सौ उनचास में, राज्य प्रशासन में त्रिपुरी कैलेंडर का आधिकारिक उपयोग बंद कर दिया गया। लेकिन कैलेंडर को सांस्कृतिक पुनरुद्धार प्रयासों का सामना करना पड़ा:
एक हजार नौ सौ इक्यानवे: त्रिपुरी युग को पहली बार राज्य सरकार कैलेंडर और आधिकारिक डायरी में फिर से शामिल किया गया।
दो हजार एक: त्रिपुरा जनजाति क्षेत्रों स्वायत्त जिला परिषद ने त्रिपुरी कैलेंडर का जश्न मनाने के लिए खुमुलवंग में एक तीन दिवसीय त्रिंग त्योहार का आयोजन किया।
त्रिपुरी कैलेंडर त्रिपुरी जातीय भाषाई पहचान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। जबकि आधिकारिक राज्य प्रशासन में उपयोग नहीं किया जाता है, यह बनी हुई है:
| पहलू | मैतेई मणिपुर | सिक्किम | त्रिपुरी त्रिपुरा |
|---|---|---|---|
| कैलेंडर प्रकार | चंद्र अंतः मास के साथ | चंद्र तिब्बती बौद्ध | सौर |
| युग मूल | उन्नीस सौ सत्तानवे ईसा पूर्व पालचा | तिब्बती बौद्ध परंपरा | पांच सौ नब्बे ईस्वी हामतोर फा |
| आयु परंपरा | तीन हजार चार सौ वर्ष | तिब्बती बौद्ध परंपरा | एक हजार चार सौ पैंतीस आधिकारिक |
| नववर्ष उत्सव | साजिबु चैराओबा अप्रैल | लोसार फरवरी | वैशाख पहला अप्रैल चौदह पंद्रह |
| महीनों की संख्या | बारह चंद्र तीस चार दिन | बारह तेरह चंद्र | बारह सौर तीस पाँच दिन |
| प्राथमिक उपयोगकर्ता | मैतेई जातीय समुदाय | बौद्ध बहुसंख्यक | त्रिपुरी जातीय समुदाय |
| आधुनिक स्थिति | सक्रिय रूप से बनाए रखा ऐप्स उपलब्ध | धार्मिक अनुष्ठान बौद्ध प्रथा | सांस्कृतिक प्रतीक सीमित आधिकारिक |
| विशिष्ट विशेषताएं | थारोन्नबा अंतः मास कृषि नामकरण | बहु परंपरा संश्लेषण बौद्ध लेप्चा | सौर संरचना औपनिवेशिक इतिहास |
आधुनिक मैतेई कैलेंडर अनुप्रयोग निम्नलिखित प्रदान करते हैं:
मैतेई प्रणालियों की तुलना में कम डिजिटलीकृत होने के बावजूद सिक्किम की कैलेंडर सक्रिय रूप से अभ्यास में रहती है:
दशकों की बंदी के बावजूद त्रिपुरी कैलेंडर पुनरुद्धार प्रयासों में शामिल हैं:
शुद्ध चंद्र प्रणालियों से कम प्रलेखित होने के बावजूद मैतेई कैलेंडर में निम्नलिखित शामिल हैं:
सिक्किम की तिब्बती खगोलीय गणनाओं का अंगीकरण दर्शाता है:
त्रिपुरी कैलेंडर बनाए रखता है:
ये छोटी प्रणालियां चुनौतियों का सामना करती हैं:
सकारात्मक विकास में शामिल हैं:
मैतेई कैलेंडर अन्य भारतीय कैलेंडर से कैसे भिन्न है?
मैतेई कैलेंडर शुद्ध चंद्र है जबकि अधिकांश भारतीय कैलेंडर चंद्र सौर हैं। इसके महीनों के नाम कृषि गतिविधियों से लिए गए हैं न कि राशियों से।
सिक्किम किन दो कैलेंडर प्रणालियों का उपयोग करता है?
सिक्किम तिब्बती बौद्ध कैलेंडर का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए करता है और हिंदू पंचांग का उपयोग हिंदू त्योहारों के लिए करता है।
त्रिपुरी कैलेंडर का युग कब स्थापित हुआ था?
त्रिपुरी कैलेंडर का युग पांच सौ नब्बे ईस्वी में स्थापित किया गया था जब हामतोर फा ने बंगाल पर विजय प्राप्त की।
क्या ये कैलेंडर आज भी उपयोग किए जाते हैं?
मैतेई कैलेंडर सक्रिय रूप से उपयोग किया जाता है। सिक्किम के बौद्ध समुदाय तिब्बती कैलेंडर का उपयोग करते हैं। त्रिपुरी कैलेंडर को सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में पुनः प्राप्त किया जा रहा है।
थारोन्नबा क्या है?
थारोन्नबा मैतेई कैलेंडर में अंतः मास है जो हर बत्तीस दशमलव सात वर्षों में जोड़ा जाता है मौसमी संरेखण बनाए रखने के लिए।
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