By पं. नीलेश शर्मा
तामसिक भोजन से बचाव के उपाय

सावन के महीने में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का त्याग करने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे केवल धार्मिक कारण नहीं है बल्कि यह आयुर्वेद और ज्योतिष का एक अनूठा विज्ञान है। वर्षा ऋतु में हमारी जठराग्नि यानी पाचन क्रिया मंद हो जाती है और शरीर में तमस या सुस्ती बढ़ने लगती है। ज्योतिष में तामसिक भोजन राहु और शनि की नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति के विचार अशुद्ध होते हैं और वह गलत निर्णय लेने लगता है। सावन में सात्विक भोजन करने से बृहस्पति और चंद्रमा बलवान होते हैं जो व्यक्ति के स्वास्थ्य और भाग्य दोनों को चमकाते हैं।
| पदार्थ | प्रभाव |
|---|---|
| प्याज और लहसुन | तामसिक ऊर्जा बढ़ाते हैं और मन को अस्थिर करते हैं |
| मांस और अंडा | पाचन को भारी बनाते हैं और जठराग्नि को मंद करते हैं |
| मदिरा और नशा | बुद्धि को भ्रमित करते हैं और निर्णय शक्ति को कमजोर करते हैं |
| बासी भोजन | नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बनता है और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है |
आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ जाती है जिसका सीधा प्रभाव हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। इस समय हमारी जठराग्नि अर्थात पाचन शक्ति सबसे अधिक कमजोर होती है। बारिश के मौसम में शरीर में वात दोष बढ़ जाता है जिससे पाचन संबंधी समस्याएं जैसे गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में यदि व्यक्ति भारी या तामसिक भोजन करता है, तो उसका शरीर उसे पचा नहीं पाता और विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में भोजन को तीन गुणों में वर्गीकृत किया गया है सात्विक, राजसिक और तामसिक। तामसिक भोजन में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और बासी भोजन शामिल हैं। ये पदार्थ शरीर और मन में तमस गुण को बढ़ाते हैं जिससे व्यक्ति में सुस्ती, आलस्य और नकारात्मक विचार आने लगते हैं।
| ग्रह | प्रभाव |
|---|---|
| राहु | भ्रम और मोह बढ़ाता है जिससे व्यक्ति गलत मार्ग पर चल सकता है |
| शनि | कठोरता और निराशा लाता है जिससे जीवन में संघर्ष बढ़ता है |
| दोनों ग्रह | तामसिक भोजन से इनकी नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है |
जब व्यक्ति तामसिक भोजन करता है, तो राहु की ऊर्जा बढ़ती है जो भ्रम और मोह पैदा करती है। शनि की ऊर्जा से व्यक्ति में निराशा और कठोरता आती है। इसी कारण सावन में इन पदार्थों का त्याग करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।
सात्विक भोजन में फल, सब्जी, दही, दूध, घी और अनाज शामिल हैं। ये पदार्थ शरीर और मन को शुद्ध रखते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। ज्योतिष में बृहस्पति ज्ञान और भाग्य का कारक है जबकि चंद्रमा मन और भावनाओं का स्वामी है।
सावन के महीने में भोजन का संयम केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारणों से भी आवश्यक है। जब व्यक्ति सात्विक भोजन करता है, तो उसका मन शांत रहता है और वह आध्यात्मिक कार्यों के लिए तैयार होता है। इस समय भगवान शिव की उपासना की जाती है और सात्विक भोजन से पूजा का फल अधिक मिलता है।
आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों ही विद्याएं एक दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। आयुर्वेद शरीर और स्वास्थ्य की देखरेख करता है जबकि ज्योतिष ग्रहों और भाग्य का विश्लेषण करता है। सावन में भोजन संयम इन दोनों विद्याओं का अनूठा समन्वय है।
जब व्यक्ति सावन में सात्विक भोजन करता है, तो उसके स्वास्थ्य और भाग्य दोनों में सुधार होता है। शरीर में ऊर्जा बढ़ती है, मन शांत रहता है और ग्रहों का शुभ प्रभाव मिलता है। इससे व्यक्ति का जीवन सुखमय और सफल बनता है।
क्या सावन में प्याज लहसुन नहीं खाना चाहिए
हाँ, सावन में प्याज और लहसुन तामसिक माने जाते हैं इसलिए इनका त्याग करना चाहिए
क्या मांस खाने से ग्रह अशुभ होते हैं
ज्योतिष के अनुसार मांस तामसिक है और राहु शनि की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है
सात्विक भोजन के क्या लाभ हैं
यह बृहस्पति और चंद्रमा को बलवान करता है जिससे स्वास्थ्य और भाग्य सुधरता है
क्या सावन में बासी भोजन नहीं करना चाहिए
हाँ, बासी भोजन नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है और इसे त्यागना चाहिए
क्या भोजन संयम से भाग्य चमकता है
हाँ, सात्विक भोजन से ग्रह शुभ होते हैं और भाग्य में सुधार होता है
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ