वैशाख माह का संपूर्ण पंचांग कैलेंडर: सभी 30 दिनों की तिथियां, नक्षत्र, योग और अंग्रेजी तारीखें

By पं. संजीव शर्मा

वैशाख पंचांग कैलेंडर, 30 तिथियां, कृष्ण व शुक्ल पक्ष सारणी, प्रमुख व्रत-त्योहार व खगोलीय गणना

वैशाख माह पंचांग कैलेंडर: सभी 30 दिन की तिथियां व त्योहार

पंचांग विवरण एवं वैशाख पंचांग कैलेंडर की खगोलीय पृष्ठभूमि

सनातन वैदिक पंचांग, सूर्य सिद्धांत तथा निर्णयसिंधु के अनुसार वैशाख मास वर्ष का द्वितीय चांद्र मास है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा, दान-पुण्य और महापर्वों की दृष्टि से सर्वाधिक समृद्ध माना गया है। वैशाख मास का आरंभ चैत्र पूर्णिमा के अगले दिन यानी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है और इसका समापन वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) पर होता है। सौर गणना के अनुसार यह संपूर्ण मास भुवन भास्कर भगवान सूर्य देव के मेष (Aries) तथा मास के उत्तरार्ध में वृषभ (Taurus) राशि संचरण का कालखंड होता है।

खगोलीय और तात्विक दृष्टिकोण से वैशाख मास का यह कैलेंडर संपूर्ण ग्रीष्म ऋतु के संधिकाल, ऋतु-परिवर्तन और जल-संरक्षण के अनुष्ठानों को रेखांकित करता है। इस एक महीने की 30 तिथियों में वरुथिनी एकादशी, वैशाख अमावस्या, अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती, गंगा सप्तमी, सीता नवमी, मोहिनी एकादशी, नृसिंह जयंती और वैशाख पूर्णिमा जैसे महान पर्व घटित होते हैं। यह सारणीबद्ध पंचांग पाठकों को दोनों पक्षों की प्रत्येक तिथि, उसके अधिपति देव, संबद्ध नक्षत्र, प्रमुख योग और शास्त्रीय अनुष्ठान की संपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है।

पंचांग घटक शास्त्रीय, ज्योतिषीय व काल-गणना विवरण
मास क्रम व नाम द्वितीय चांद्र मास | वैशाख (माधव मास)
खगोलीय सौर स्थिति सूर्य देव का मेष राशि में उच्च गोचर एवं मास के अंत में वृषभ संक्रांति
चांद्र पक्ष विभाजन कृष्ण पक्ष (15 तिथियां) एवं शुक्ल पक्ष (15 तिथियां) = कुल 30 तिथियां
प्रमुख अवतरण पर्व परशुराम जयंती, नृसिंह जयंती, सीता नवमी, गंगा सप्तमी, बुद्ध पूर्णिमा
प्रमुख व्रत व उपवास वरुथिनी एकादशी, मोहिनी एकादशी, वैशाख अमावस्या, वैशाख पूर्णिमा, प्रदोष
विशिष्ट स्वयंसिद्ध पर्व अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया - अबूझ मुहूर्त)
नक्षत्र चक्र संचरण स्वाति, विशाखा, अनुराधा से लेकर अश्विनी, भरणी, रोहिणी तक का चक्र
अभीष्ट आध्यात्मिक फल समस्त संचित पापों का क्षय, पितृ तृप्ति, ज्ञान-बुद्धि वृद्धि, अक्षय पुण्य

वैशाख कृष्ण पक्ष पंचांग सारणी (प्रतिपदा से अमावस्या: 15 तिथियां)

तिथि संख्या व नाम पक्ष व दिवस मुख्य नक्षत्र प्रमुख योग धार्मिक पर्व एवं शास्त्रीय अनुष्ठान
1. कृष्ण प्रतिपदा कृष्ण पक्ष | दिवस 1 विशाखा / अनुराधा वज्र / सिद्धि वैशाख मास स्नान व जल-दान संकल्प प्रारंभ; माधव पूजन
2. कृष्ण द्वितीया कृष्ण पक्ष | दिवस 2 अनुराधा व्यतीपात अशून्य शयन व्रत संकल्प; भगवान विष्णु को शीतल जल अर्पण
3. कृष्ण तृतीया कृष्ण पक्ष | दिवस 3 ज्येष्ठा वरीयान् तृतीया देवी पूजन; राहगीरों के लिए प्याऊ (प्रपा) सेवा
4. कृष्ण चतुर्थी कृष्ण पक्ष | दिवस 4 मूल परिघ विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत; मयूरवाहन गणेश पूजन व चंद्र अर्घ्य
5. कृष्ण पंचमी कृष्ण पक्ष | दिवस 5 पूर्वाषाढ़ा शिव पंचमी पितृ तर्पण; मूक पक्षियों के लिए परिंडे बांधना
6. कृष्ण षष्ठी कृष्ण पक्ष | दिवस 6 उत्तराषाढ़ा सिद्ध स्कंद षष्ठी पूजन; भगवान कार्तिकेय को शीतल पुष्प अर्पण
7. कृष्ण सप्तमी कृष्ण पक्ष | दिवस 7 श्रवण साध्य भानु सप्तमी/सूर्य अर्घ्य; तांबे के पात्र से जल-दान
8. कृष्ण अष्टमी कृष्ण पक्ष | दिवस 8 धनिष्ठा शुभ कालभैरव अष्टमी; शीतला माता पूजन व बासी अन्न भोग
9. कृष्ण नवमी कृष्ण पक्ष | दिवस 9 शतभिषा शुक्ल नवमी देवी आराधना; छायादार वृक्षों में जल-सिंचन
10. कृष्ण दशमी कृष्ण पक्ष | दिवस 10 पूर्वाभाद्रपद ब्रह्म धर्मराज दशमी; यम के निमित्त दीपदान व जल सेवा
11. कृष्ण एकादशी कृष्ण पक्ष | दिवस 11 उत्तराभाद्रपद ऐन्द्र वरुथिनी एकादशी व्रत; भगवान वराह पूजन व खरबूजा दान
12. कृष्ण द्वादशी कृष्ण पक्ष | दिवस 12 रेवती वैधृति वरुथिनी पारण; तुलसी दल व सत्तू दान; ब्राह्मण भोजन
13. कृष्ण त्रयोदशी कृष्ण पक्ष | दिवस 13 अश्विनी विष्कुम्भ वैशाख कृष्ण प्रदोष व्रत (सोम/भौम); शिवलिंग पर शीतलोपचार
14. कृष्ण चतुर्दशी कृष्ण पक्ष | दिवस 14 भरणी प्रीति मासिक शिवरात्रि; रुद्राभिषेक व हलाहल दाह शमन
15. कृष्ण अमावस्या कृष्ण पक्ष | दिवस 15 कृत्तिका आयुष्मान् वैशाख दर्श अमावस्या / सतुवाई अमावस्या; पितृ तर्पण, महादान

वैशाख शुक्ल पक्ष पंचांग सारणी (प्रतिपदा से पूर्णिमा: 15 तिथियां)

तिथि संख्या व नाम पक्ष व दिवस मुख्य नक्षत्र प्रमुख योग धार्मिक पर्व एवं शास्त्रीय अनुष्ठान
16. शुक्ल प्रतिपदा शुक्ल पक्ष | दिवस 16 रोहिणी सौभाग्य शुक्ल पक्ष स्नान नियम; सूर्य नारायण को तांबे से अर्घ्य
17. शुक्ल द्वितीया शुक्ल पक्ष | दिवस 17 मृगशिरा शोभन चंद्र दर्शन पर्व; शीतलोपचार व मटके का प्रथम दान
18. शुक्ल तृतीया शुक्ल पक्ष | दिवस 18 रोहिणी / मृगशिरा अतिगण्ड / सुकर्मा अक्षय तृतीया (आखा तीज), परशुराम जयंती, चारधाम कपाट उद्घाटन
19. शुक्ल चतुर्थी शुक्ल पक्ष | दिवस 19 आर्द्रा धृति वैशाख शुक्ल विनायक चतुर्थी; मध्याह्न वरद विनायक पूजन
20. शुक्ल पंचमी शुक्ल पक्ष | दिवस 20 पुनर्वसु शूल आद्य शंकराचार्य जयंती, सूरदास जयंती; ज्ञान यज्ञ
21. शुक्ल षष्ठी शुक्ल पक्ष | दिवस 21 पुष्य गण्ड रामानुजाचार्य जयंती; पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण व जलपात्र क्रय
22. शुक्ल सप्तमी शुक्ल पक्ष | दिवस 22 अश्लेषा वृद्धि गंगा सप्तमी (गंगा जयंती); जाह्नवी अवतरण स्नान व दीपदान
23. शुक्ल अष्टमी शुक्ल पक्ष | दिवस 23 मघा ध्रुव माँ बगलामुखी जयंती; पीतांबरा साधना व शत्रु शमन
24. शुक्ल नवमी शुक्ल पक्ष | दिवस 24 पूर्वाफाल्गुनी व्याघात सीता नवमी (जानकी जयंती); माता सीता व प्रभु श्री राम पूजन
25. शुक्ल दशमी शुक्ल पक्ष | दिवस 25 उत्तराफाल्गुनी हर्षण धर्मराज दशमी; दस महाविद्या पूजन व जल-सेवा
26. शुक्ल एकादशी शुक्ल पक्ष | दिवस 26 हस्त वज्र मोहिनी एकादशी व्रत; भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप का अर्चन
27. शुक्ल द्वादशी शुक्ल पक्ष | दिवस 27 चित्रा सिद्धि मोहिनी एकादशी पारण; तुलसी विवाह संकल्प व गौ-दान
28. शुक्ल त्रयोदशी शुक्ल पक्ष | दिवस 28 स्वाति व्यतीपात वैशाख शुक्ल प्रदोष व्रत; नृसिंह चतुर्दशी व्रत पूर्वसंध्या
29. शुक्ल चतुर्दशी शुक्ल पक्ष | दिवस 29 विशाखा वरीयान् भगवान नृसिंह जयंती (प्रदोष व्यापिनी); खंभ-फाड़ अवतार पूजन
30. शुक्ल पूर्णिमा शुक्ल पक्ष | दिवस 30 विशाखा परिघ / शिव वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा, कूर्म जयंती); महास्नान व जल-कुंभ दान

वैशाख मास के प्रमुख महापर्वों का विशिष्ट काल-निर्णय

वैशाख मास के 30 दिनों में सनातन धर्म के कई महत्वपूर्ण पर्व आते हैं, जिनका संक्षेप में शास्त्रीय मर्म इस प्रकार है:

  1. वरुथिनी एकादशी (कृष्ण एकादशी): यह व्रत समस्त प्रकार के दुर्भाग्य और कायिक पापों का कवच बनकर रक्षा करता है; इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा और खरबूजे का दान अनिवार्य है।
  2. वैशाख अमावस्या (सतुवाई अमावस्या): ग्रीष्मकाल में पितरों के उद्धार का यह सबसे बड़ा दिन है। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल और जल से तर्पण करने से गया श्राद्ध का पुण्य मिलता है।
  3. अक्षय तृतीया (शुक्ल तृतीया): यह संपूर्ण वर्ष का सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त है। इस दिन सोना खरीदना, नए व्यवसाय की शुरुआत, विवाह संस्कार और जल से भरे घड़े (उदकुंभ) का दान अक्षय रहता है। इसी दिन भगवान परशुराम का अवतरण हुआ था।
  4. गंगा सप्तमी (शुक्ल सप्तमी): पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि जह्नु ने अपने कान से मां गंगा को पुनः प्रकट किया था, जिससे वे 'जाह्नवी' कहलाईं। इस दिन गंगा स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  5. सीता नवमी (शुक्ल नवमी): वैशाख शुक्ल नवमी को पुष्य नक्षत्र में महाराजा जनक को हल जोतते समय भूमि से माता सीता प्राप्त हुई थीं। यह तिथि अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाली है।
  6. मोहिनी एकादशी (शुक्ल एकादशी): समुद्र मंथन के पश्चात अमृत वितरण हेतु भगवान विष्णु ने इसी दिन मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमरत्व प्रदान किया था। यह व्रत मोह-माया के बंधनों को काटता है।
  7. नृसिंह जयंती (शुक्ल चतुर्दशी): भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु के संहार हेतु भगवान विष्णु का नृसिंह रूप में खंभे से प्राकट्य इसी दिन सायंकाल (प्रदोष काल) में हुआ था।
  8. वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा व कूर्म जयंती): यह वैशाख मास का चरम शिखर है। इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, संबोधि और महापरिनिर्वाण हुआ था तथा समुद्र मंथन हेतु भगवान विष्णु ने 'कूर्म' (कछुआ) अवतार धारण किया था।

दार्शनिक निष्कर्ष: 30 दिनों की काल-यात्रा में चेतना का रूपांतरण

वैशाख मास का यह पंचांग कैलेंडर केवल तिथियों की गणना नहीं है बल्कि यह मानव चेतना को भौतिक ताप से उठाकर आध्यात्मिक शीतलता की ओर ले जाने वाली 30 दिनों की साधना यात्रा है:

"वैशाख का प्रत्येक सूर्योदय हमें परोपकार का संदेश देता है और प्रत्येक सूर्यास्त हमें यह स्मरण कराता है कि जीवन का वास्तविक मूल्य केवल स्वयं जीने में नहीं, अपितु दूसरों के संताप को हरने में है।"

प्रतिपदा से आरंभ होकर पूर्णिमा तक चलने वाली यह यात्रा हमें सिखाती है कि कैसे भीषण से भीषण विपरीत परिस्थितियों (ग्रीष्म का ताप) में भी संयम, जल-सेवा, मंत्र जप और सात्विक आहार के माध्यम से अंतःकरण को शांत और स्थिर रखा जा सकता है।

आइए, वैशाख मास के इस संपूर्ण कैलेंडर का अनुसरण करते हुए प्रत्येक तिथि के महत्व को समझें, शास्त्रसम्मत व्रतों का पालन करें और अपने जीवन को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलन से परिपूर्ण बनाएं।


FAQ

वैशाख मास का पंचांग कैलेंडर सामान्यतः अंग्रेजी महीनों के किस समय आता है?
यह कैलेंडर सामान्यतः सौर संक्रांति और चांद्र गणना के अनुसार 14/15 अप्रैल से 14/15 मई के मध्य आता है।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में कौन-से तीन सबसे बड़े अवतार पर्व आते हैं?
वैशाख शुक्ल पक्ष में भगवान परशुराम जयंती (तृतीया), माता सीता प्राकट्य (नवमी) तथा भगवान नृसिंह जयंती (चतुर्दशी) के महापर्व आते हैं।

वैशाख मास की दोनों एकादशियों के नाम क्या हैं?
कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'वरुथिनी एकादशी' तथा शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'मोहिनी एकादशी' कहा जाता है।

वैशाख पूर्णिमा को किन-किन महान घटनाओं के लिए पूजा जाता है?
इस दिन भगवान बुद्ध का जन्मोत्सव व संबोधि दिवस (बुद्ध पूर्णिमा), भगवान विष्णु का कूर्म अवतार तथा धर्मराज के निमित्त जल-कुंभ दान का महाविधान होता है।

अक्षय तृतीया किस तिथि को मनाई जाती है और इसका मुख्य नियम क्या है?
यह वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है; इस दिन जल से भरा मटका, सत्तू, पंखा और सुवर्ण दान करने का शास्त्रीय नियम है।

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लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


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