By पं. अमिताभ शर्मा
दो दशा प्रणालियों का एकीकृत संयोजन और भविष्य पूर्वानुमान

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए जन्म के समय चंद्रमा किस राशि में स्थित था, यह देखें। जिस राशि में जन्म के समय चंद्रमा स्थित हो, वही आपकी चंद्र राशि मानी जाती है।
वैदिक ज्योतिष में विम्शोत्तरी दशा और योगिनी दशा को एक साथ देखना ऐसा है जैसे किसी एक वस्तु को दो आँखों से देखना। एक ही घटना का चित्र अधिक गहरा, स्पष्ट और त्रि‑आयामी हो जाता है। विम्शोत्तरी दशा जीवन के लगभग एक सौ बीस वर्ष के व्यापक नक्शे को दिखाती है जिसे प्रमुख दशा कहा जाता है। योगिनी दशा छत्तीस वर्ष का संक्षिप्त कर्म चक्र दिखाती है जिसे वर्तमान युग में त्वरित और तीव्र फल देने वाला माना जाता है। जब दोनों का संयुक्त विश्लेषण किया जाता है तो विम्शोत्तरी व्यापक दिशा देती है और योगिनी सूक्ष्म विस्तार, इससे भविष्य‑वाणी अधिक सटीक हो जाती है।
ये दोनों दशा पद्धतियाँ अलग समय‑मान और अलग अधिष्ठात्री शक्तियों पर चलती हैं, इसीलिए एक‑दूसरे का विरोध नहीं बल्कि पूरक बनती हैं।
| विशेषता | विम्शोत्तरी दशा | योगिनी दशा |
|---|---|---|
| चक्र की अवधि | १२० वर्ष | ३६ वर्ष |
| अधिपति | नौ ग्रह | आठ योगिनी शक्तियाँ |
| मुख्य ध्यान | सम्पूर्ण जीवन, दीर्घकालिक प्रवृत्तियाँ | निकट भविष्य के कर्म‑उद्गार, तेज परिणाम |
| स्वभाव | विस्तृत, कहानी जैसा, विस्तार देने वाला | संक्षिप्त, तेज, घटना‑केन्द्रित |
शक्ति
पालन‑पोषण और संवेदनशीलता की शक्ति।
जीवन पर प्रभाव
घर‑परिवार, भावनात्मक पुनरारंभ, विचारों की उर्वरता, नई शुरुआत का समय मजबूत होता है।
अनुसंधान और साधना
नींद का संतुलन, माता की सेवा, चंद्र मंत्र और मन की शांति पर काम करना।
शक्ति
तेज, प्रकाश और व्यक्तित्व की चमक।
जीवन पर प्रभाव
प्रतिष्ठा, जिम्मेदारी, संकल्प, प्रतिज्ञा और आत्म‑प्रकाश से जुड़े प्रसंग उभरते हैं।
अनुसंधान और साधना
अहंकार को सेवा से जोड़ना, नियमित सूर्य को अर्घ्य, शरीर और आत्मविश्वास दोनों की देखभाल करना।
शक्ति
धर्म, ज्ञान और समृद्धि की शक्ति।
जीवन पर प्रभाव
गुरु‑संबंध, शिक्षा, सही मार्गदर्शन, आर्थिक और मानसिक विस्तार के अवसर बढ़ते हैं।
अनुसंधान और साधना
पढ़ाई, मार्गदर्शन देना, लेखन या प्रकाशन, दान और विवेकपूर्ण धन‑प्रबंधन का अभ्यास।
शक्ति
साहस, रक्षा और कर्मशीलता की शक्ति।
जीवन पर प्रभाव
कर्म, संघर्ष, स्थान परिवर्तन, जोखिम और निर्णायक कदमों के प्रसंग तेज हो जाते हैं।
अनुसंधान और साधना
क्रोध की उष्णता को अनुशासन में बदलना, सीमा‑निर्धारण करना और उर्जा को सही दिशा देना।
शक्ति
सीखने, समझने और संवाद की शक्ति।
जीवन पर प्रभाव
शिक्षा, व्यापार, लेखन, सौदे‑बाज़ी, भाषण और तर्क शक्ति से जुड़े अवसर बढ़ते हैं।
अनुसंधान और साधना
कौशल को निखारना, व्यवस्था और योजना बनाना, वाणी में सत्य और विनम्रता का संतुलन रखना।
शक्ति
धैर्य, सहनशक्ति और कर्म‑फल की परिपक्वता।
जीवन पर प्रभाव
दबाव, कर्तव्य, सीमाएँ, संरचना, कर्ज और जिम्मेदारी वाले विषयों में गहराई आती है।
अनुसंधान और साधना
जीवन को सरल बनाना, सीमा को सम्मान देना, नियमित साधना या अनुशासन के माध्यम से दबाव को प्रतिष्ठा में बदलना।
शक्ति
कृपा, प्रेम, सौंदर्य और आनंद की शक्ति।
जीवन पर प्रभाव
संबंध, विवाह, सहयोग, सौंदर्य, भोग और संसाधन से जुड़े शुभ अवसर बढ़ते हैं।
अनुसंधान और साधना
न्याय और संतुलन के साथ निर्णय लेना, आसक्ति नियंत्रित रखना, संबंधों की सेवा और आदर को साधना मानना।
शक्ति
मर्यादा को चुनौती देने और परिवर्तन की शक्ति।
जीवन पर प्रभाव
पुनराविष्कार, विदेश, प्रौद्योगिकी, वर्जित विषय, अचानक मोड़ और असामान्य अवसर उभरते हैं।
अनुसंधान और साधना
सुरक्षा‑रेखाएँ बनाना, स्वयं के प्रति ईमानदारी रखना, परिवर्तन की शक्ति को लोकहित और धर्म के अनुरूप दिशा देना।
सबसे पहले यह देखें कि इस समय विम्शोत्तरी दशा में कौन‑सी महादशा और अंतरदशा चल रही है और साथ‑साथ योगिनी में कौन‑सा मुख्य और उप काल सक्रिय है।
उदाहरण: आयु लगभग पैंतीस वर्ष
संकेत
दोनों पद्धतियाँ मिलकर यह दिखाती हैं कि इस समय निर्णायक कार्य, तीव्र भावनात्मक अनुभव, नेतृत्व से जुड़े संघर्ष या सार्वजनिक जीवन में तेज मोड़ संभव हैं।
अब यह देखना आवश्यक है कि जन्म कुंडली में ये ग्रह किन भावों के स्वामी हैं और किन भावों में स्थित हैं।
उदाहरण
संयुक्त संकेत
ऐसे संयोजन में घर‑परिवार या संपत्ति से जुड़े मामलों में तनाव या संघर्ष संभव है, पर धैर्य और सही दिशा से वही स्थिति भविष्य में लाभ या मजबूत आधार में बदल सकती है।
जब दोनों दशा पद्धतियाँ संकेत दे रही हों, तब भी वास्तविक घटना के लिए ग्रह‑गोचर को प्रवेश द्वार की तरह देखना आवश्यक है। यदि उसी समय गुरु चौथे भाव से या उस पर शुभ दृष्टि से गुजर रहा हो, तो परिवार के विवाद समाधान, घर की खरीद, स्थान परिवर्तन या भावनात्मक स्थिरता जैसे शुभ परिणाम आ सकते हैं। यदि शनि कठोर स्थिति में हो तो वही विषय अनुशासन, समय और गंभीरता के साथ हल होंगे।
विम्शोत्तरी संकेत
दशम भाव के स्वामी या कर्म से जुड़े ग्रह की दशा चल रही हो।
योगिनी संकेत
साथ‑साथ धान्या (गुरु) या भद्रिका (बुध) योगिनी का काल चल रहा हो।
संयुक्त प्रभाव
कार्य‑क्षेत्र में अवसर, पदोन्नति, नई नौकरी, व्यवसाय विस्तार या मान‑सम्मान के अवसर तीव्रता से दिखाई देते हैं।
व्यवहारिक कदम
महत्वपूर्ण आवेदन, साक्षात्कार और प्रस्ताव उसी अवधि में रखें जब इन दोनों के साथ‑साथ गुरु का गोचर भी दशम भाव या उससे अनुकूल स्थान पर हो।
विम्शोत्तरी संकेत
सप्तम भाव, शुक्र या गुरु की दशा/अंतरदशा चल रही हो।
योगिनी संकेत
साथ में सिद्धा (शुक्र) या मंगल योगिनी (चंद्र) का काल हो।
संयुक्त प्रभाव
विम्शोत्तरी विवाह की खिड़की खोलती है और योगिनी भावनात्मक readiness और शुभ ऊर्जा प्रदान करती है जिससे रिश्ता स्थिर रूप ले सके।
व्यवहारिक कदम
सगाई, विवाह और संबंध में निर्णायक निर्णय उन्हीं महीनों में रखें जब दोनों दशा स्तर अनुकूल हों और साथ में शुभ गोचर भी समर्थन दे।
विम्शोत्तरी संकेत
छठे या अष्टम भाव से जुड़े, कमजोर या पीड़ित ग्रह की दशा चल रही हो।
योगिनी संकेत
साथ में उल्का (शनि), संकट (राहु) या पिंगला (सूर्य) योगिनी का काल हो।
संयुक्त प्रभाव
देह और मन में पहले से मौजूद कमजोरी किसी स्पष्ट रोग, शल्य‑क्रिया, दुर्घटना या ऊर्जा‑संकट के रूप में सामने आ सकती है।
व्यवहारिक कदम
समय से पूर्व जाँच, जीवन‑शैली में सुधार, उपचार‑योजना और आवश्यक कार्यों की तिथि शुभ गोचर के भीतर चुनना अधिक सुरक्षित रहता है।
विम्शोत्तरी का एक सौ बीस वर्ष का चक्र योगिनी के लगभग तीन पूर्ण चक्रों और एक अतिरिक्त भाग में विभाजित हो सकता है।
इस अनुपात से समझ में आता है कि योगिनी चक्र विम्शोत्तरी के भीतर अध्याय की तरह काम करते हैं। एक व्यापक पुस्तक के भीतर अलग‑अलग खंड।
| जीवन क्षेत्र | विम्शोत्तरी संकेत | योगिनी संकेत | संभावित परिणाम |
|---|---|---|---|
| कार्य उन्नति | सूर्य, गुरु, शुक्र, बुध या दशम भाव से जुड़े योग | धान्या, भद्रिका, सिद्धा | साक्षात्कार, पदोन्नति, नए परियोजना या कार्य का आरंभ |
| विवाह | शुक्र, गुरु या सप्तम भाव स्वामी | सिद्धा, धान्या, मंगल | प्रस्ताव, रिश्ता पक्का होना, विवाह आयोजन |
| कठिन परिश्रम के साथ लाभ | शनि से जुड़ी दशा | उल्का | विलंब के साथ ठोस लाभ, परीक्षा के बाद स्थायी उपलब्धि |
| नवाचार और परिवर्तन | राहु से जुड़ी दशा | संकट | पुनराविष्कार, नई दिशा, तकनीकी या असामान्य क्षेत्र में प्रगति, पर संयम और सीमा आवश्यक |
सबसे अधिक सटीक भविष्यवाणी तब बनती है जब तीन स्तर एक साथ अनुकूल हों।
सम्भावना का अनुमान
प्रश्न १: क्या योगिनी दशा विम्शोत्तरी से अधिक सटीक है
योगिनी दशा स्वयं में गहरी है, पर विम्शोत्तरी मूल ढाँचा मानी जाती है। योगिनी उसी ढाँचे के भीतर समय को सूक्ष्म रूप से स्पष्ट करती है। जब दोनों एक दिशा में हों, तब आत्मविश्वास अधिक होता है।
प्रश्न २: यदि विम्शोत्तरी और योगिनी अलग‑अलग संकेत दें तो क्या मानें
विम्शोत्तरी व्यापक विषय तय करती है, योगिनी दिखाती है कि उसी विषय के भीतर घटना जल्दी आएगी या धीरे, सीधी होगी या घुमावदार। ऐसे समय मिश्रित परिणाम और बीच‑बीच में उलट‑फेर की संभावना मानी जाती है।
प्रश्न ३: क्या निजी योजना के लिए योगिनी को देखना आवश्यक है
जी हाँ, विम्शोत्तरी के साथ योगिनी को जोड़कर बारह महीने की योजना बनाने से यह स्पष्ट होता है कि किन महीनों में अवसर अधिक हैं और किनमें तैयारी, अध्ययन या उपचार पर ध्यान देना बेहतर है।
प्रश्न ४: क्या मुहूर्त तय करते समय योगिनी को अलग से टालना चाहिए
मुहूर्त चुनते समय पहले दशा और गोचर की अनुकूलता देखना आवश्यक है, उसके बाद पंचांग से शुभ दिन और घड़ी चुनना। योगिनी केवल यह बताती है कि उस काल की मूल ऊर्जा कैसी है। राहु काल और अशुभ करण से बचना फिर भी आवश्यक रहता है।
प्रश्न ५: क्या संकट या उल्का जैसे योगिनी काल विवाह या कार्य आरंभ के लिए हमेशा खराब हैं
ऐसे काल परिवर्तन, दबाव और अचानक मोड़ लेकर आते हैं, इसलिए विवाह या बड़े कार्य के लिए अधिक सावधानी और चरणबद्ध योजना की आवश्यकता होती है। यदि विम्शोत्तरी और गोचर बहुत मजबूत हों, तो इन्हीं कालों में भी शुभ फल मिल सकते हैं, पर बिना तैयारी के कदम उठाना उचित नहीं माना जाता।
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