By पं. नीलेश शर्मा
पारगमन और ग्रहीय अवधियों का संयुक्त विश्लेषण

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति देखें। जिस राशि में जन्म के समय चंद्रमा स्थित हो, वही आपकी चंद्र राशि होती है।
वैदिक ज्योतिष में दोहरी भविष्यवाणी का नियम जीवन की घटनाओं के सही समय निर्धारण के लिए मूल सिद्धांत माना जाता है। इस नियम के अनुसार कोई घटना तभी प्रबल रूप से घटने योग्य होती है जब वह एक साथ दशा और गोचर दोनों से संकेतित हो। दशा पद्धति जन्म कुंडली में निहित कर्म के फल के परिपक्व होने का समय बताती है और गोचर ग्रह उस फल को जमीन पर उतारने वाला वास्तविक प्रेरक बनता है।
इसे डाक से पार्सल आने की प्रक्रिया की तरह समझा जा सकता है।
यह उस सूचना की तरह है कि पार्सल भेज दिया गया है और अमुक समय सीमा के भीतर पहुँचेगा। इससे पता चलता है कि जन्म कुंडली में छिपी संभावना सक्रिय हो चुकी है। महादशा स्वामी व्यापक जीवन‑अध्याय तय करता है और अंतरदशा स्वामी घटना के स्वरूप को और विशिष्ट बना देता है।
यह उस क्षण जैसा है जब पार्सल वास्तव में आपके दरवाज़े पर पहुँचे। यह ग्रहों की वर्तमान गति है, विशेषकर गुरु और शनि जैसे धीमी चाल वाले ग्रह जब जन्म कुंडली के संवेदनशील बिंदुओं से होकर गुजरते हैं।
कोई भी घटना विवाह, पदोन्नति या स्वास्थ्य‑संकट जैसी हो, उसे घटने के लिए दोनों चाबियाँ साथ चाहिए। यदि दशा घटना का योग देती है पर गोचर समर्थन न करे, तो घटना टल सकती है, हल्की हो सकती है या बिल्कुल न भी घटे। यदि गोचर बहुत शक्तिशाली हो पर चल रही दशा उस प्रकार की घटना के पक्ष में न हो, तो वह गोचर बिना किसी बड़े परिणाम के निकल सकता है।
सूक्ष्म भविष्यवाणी के लिए तीन स्तरों को एक साथ देखना आवश्यक है।
यह कई वर्ष तक प्रभाव देने वाला मुख्य ग्रह होता है जो जीवन के बड़े अध्याय का विषय तय करता है।
यह उसी महादशा के भीतर कुछ महीनों से कुछ वर्ष तक सक्रिय रहने वाला ग्रह है जो विषय को और सटीक रूप देता है।
यह कुछ सप्ताह से कुछ महीनों तक चलने वाला सूक्ष्म स्तर है जो वास्तविक घटना की खिड़की दिखाता है।
इन तीनों को गोचर में एक साथ देखना आवश्यक है।
जब ये तीनों गोचर उस घटना के अनुकूल भावों से जुड़े हों, तो घटना की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
पहला चरण
पहले यह देखें कि इस समय कौन सी महादशा, अंतरदशा और प्रत्यंतर दशा चल रही है।
उदाहरण: मंगल महादशा, चंद्र अंतरदशा, शुक्र प्रत्यंतर (विवाह के संदर्भ में)।
दूसरा चरण
तीनों दशा स्वामियों की गोचर स्थिति लग्न से देखें।
तीसरा चरण
यह जाँचें कि क्या ये भाव उस घटना के अनुकूल हैं।
यदि गोचर मंगल सप्तम भाव में (संबंध), चंद्र लाभ भाव में और शुक्र पंचम या सप्तम भाव में हो, तो विवाह के लिए प्रबल संकेत बनते हैं। यदि इसके विपरीत मंगल आठवें, चंद्र बारहवें और शुक्र षष्ठ भाव में हो, तो यह संयोजन विवाह में देरी, उलझन या संबंध टूटने की आशंका दिखाता है।
यह अधिक सूक्ष्म पद्धति है जिसमें गोचर ग्रहों का उनके जन्म स्थान से संबंध देखा जाता है।
पहला चरण
जन्म कुंडली में तीनों दशा स्वामियों के भाव देखें।
उदाहरण:
दूसरा चरण
अब देखें कि वर्तमान गोचर में यही ग्रह अपनी जन्म स्थिति से कितने भाव दूर हैं।
तीसरा चरण
इन दूरियों और दृष्टियों से यह समझा जाता है कि संबंधों में सक्रियता, परीक्षा, भावनात्मक तीव्रता या निर्णय का समय किस प्रकार बन रहा है। यह चित्र केवल सीधे भाव देखने से अलग और गहरा हो सकता है।
विवाह के लिए सबसे प्रबल संकेत तब बनते हैं जब:
जब इस प्रकार की दशा चल रही हो और गुरु, शुक्र तथा अन्य शुभ ग्रह अनुकूल गोचर कर रहे हों, तो विवाह की संभावना कुछ महीनों के भीतर अत्यंत अधिक हो जाती है।
उच्च पद या पदोन्नति के लिए संकेत तब प्रबल होते हैं जब:
आमतौर पर पदोन्नति जैसी घटनाएँ उस समय दिखाई देती हैं जब दशा का समर्थन और गोचर गुरु की अनुकूलता दो से चार सप्ताह की खिड़की में एक साथ सक्रिय हो।
मुख्य सिद्धांत यह है कि महादशा, अंतरदशा और प्रत्यंतर दशा स्वामी का गोचर अन्य ग्रहों के गोचर से अधिक महत्वपूर्ण होता है। यही तीन ग्रह उस समय का सक्रिय अध्याय चला रहे होते हैं, इसलिए उनकी गति और स्थिति सबसे अधिक वजन रखती है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के लिए गुरु सप्तम भाव से अनुकूल गोचर कर रहा हो, पर चल रही अंतरदशा का स्वामी शनि आठवें भाव से गुजर रहा हो, तो शनि का गोचर परिणामों को मिश्रित और भारी बना सकता है। ऐसी स्थिति में गुरु का शुभ फल मिलता तो है, पर शनि के कारण उसमें परीक्षा, देरी या अतिरिक्त जिम्मेदारी जुड़ जाती है।
जब चल रहे दशा स्वामी या मुख्य गोचर ग्रह वक्री हों, तो फल निर्णय थोड़ी सावधानी से करना पड़ता है।
अच्छा अभ्यास यह है कि वक्री ग्रह के मार्गी होते ही दो से चार सप्ताह के भीतर घटना के उभरने की संभावना अधिक मानी जाए।
कभी ऐसा होता है कि दशा किसी घटना का समर्थन करती है और गोचर बाधा दिखाता है या इसके विपरीत। ऐसे समय कुछ क्रम याद रखना उपयोगी होता है।
यदि गोचर अनुकूल हो पर दशा प्रतिकूल हो, तो अक्सर छोटी‑मोटी उपलब्धि मिलती है, पर दीर्घकालिक स्थिर परिणाम नहीं बनते।
दोहरी भविष्यवाणी के नियम का उपयोग कर सप्ताह‑दर‑सप्ताह निर्णय लेने की सरल प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
ऐसे अनुकूल दिनों में आरंभ किए काम सामान्यतः अधिक सहजता से पूर्ण होते हैं, जबकि इनके बाहर किए कामों में बाधा, देरी या अनपेक्षित मोड़ अधिक दिखते हैं।
किसी बड़े निर्णय से पहले तीन बातों की जाँच उपयोगी रहती है।
इनके आधार पर मोटा‑मोटी संभावना इस प्रकार समझी जा सकती है।
| संगति | सफलता की संभावना | उचित कदम |
|---|---|---|
| तीनों का हाँ होना | बहुत अधिक | आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं |
| दो का हाँ, एक का नहीं | मध्यम | सावधानी से आगे बढ़ें, अतिरिक्त प्रयास और सम्पन्न योजना आवश्यक |
| केवल एक या कोई भी नहीं | कम | बड़े निर्णय से बचें, तैयारी और सुधार पर ध्यान देना उचित |
प्रश्न 1: क्या केवल गोचर से ही घटनाएँ देखी जा सकती हैं
केवल गोचर को देखने से चित्र अधूरा रहता है। गोचर तब ही वास्तविक फल देता है जब वह चल रही दशा के योग से मेल खाए।
प्रश्न 2: यदि दशा और गोचर उल्टा संकेत दें तो किस पर भरोसा करें
दशा मूल ढाँचा और वादा है। गोचर उसी वादे के भीतर देरी, मोड़ या तीव्रता को समझाता है। बड़े परिणाम के लिए दोनों का एक समान होना बेहतर माना जाता है।
प्रश्न 3: क्या कमजोर दशा में भी मजबूत गोचर से प्रयास कर सकते हैं
छोटे कामों या अस्थायी लाभ के लिए किया जा सकता है, पर टिकाऊ परिणाम के लिए दशा का समर्थन आवश्यक है। केवल गोचर के भरोसे लिए निर्णय बाद में ढीले पड़ सकते हैं।
प्रश्न 4: सबसे अधिक प्रभावी गोचर किन ग्रहों के माने जाते हैं
गुरु और शनि का गोचर अधिक समय तक एक भाव में रहता है, इसलिए उनका प्रभाव गहराई से दिखाई देता है। तेज ग्रह दिन‑प्रतिदिन की स्थिति और सूक्ष्म समय निर्धारण में महत्त्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न 5: क्या मुहूर्त सबसे प्रमुख कारक है
मुहूर्त महत्वपूर्ण है पर उससे पहले दशा और गोचर की अनुकूलता अधिक ज़रूरी है। यदि दशा और गोचर मजबूत हों, तो सामान्य मुहूर्त में भी कार्य सफल हो सकता है। जब तीनों एक साथ अनुकूल हों तब परिणाम और अधिक परिपक्व और स्थिर दिखाई देते हैं।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्रअनुभव: 25
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इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
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