By पं. सुव्रत शर्मा
36 वर्षीय चक्र आठ दिव्य स्त्री ऊर्जा लाभ अशुभ रूपांतरण

यह लेख चंद्र राशि के आधार पर तैयार किया गया है। वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि आपकी मानसिक एवं भावनात्मक प्रकृति को दर्शाती है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए आपको अपनी जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान की आवश्यकता होती है।
वैदिक ज्योतिष के गूढ़ परिदृश्य में, योगिनी दशा प्रणाली आठ दिव्य स्त्रीलिंग ऊर्जाओं द्वारा शासित एक शक्तिशाली 36 वर्षीय कर्मिक चक्र का अनावरण करती है। भगवान शिव द्वारा कलियुग में इसकी सटीकता के लिए प्रकट की गई मानी जाने वाली यह प्रणाली, योगिनियां केवल ग्रहीय अवधि नहीं बल्कि शक्तिशाली आद्यरूप हैं जो हमारे जीवन को आकार देने वाली सूक्ष्म कर्मिक शक्तियों को प्रकट करती हैं गहरे आशीर्वाद से तीव्र चुनौतियों तक।
योगिनी एक पवित्र स्त्रीलिंग शक्ति है, महादेवी का एक पहलू, जो सृजनात्मक तथा विनाशकारी दोनों सार्वभौमिक ऊर्जाओं को अवतार करती है। दशा प्रणाली के संदर्भ में, आठ योगिनियां इस दिव्य शक्ति के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, तथा व्यक्ति के जीवन पर उनका क्रमिक प्रभाव उनके भाग्य का एक गतिशील रोडमैप प्रकट करता है। उनकी दशाएं तीव्र तथा स्पष्ट परिणाम देने के लिए जानी जाती हैं।
योगिनी दशा का 36 वर्षीय चक्र आठ अलग अवधियों के माध्यम से प्रकट होता है, प्रत्येक अपने शासक, अवधि, तथा गुप्त महत्व के साथ। यात्रा शुभ मंगला से शुरू होती है तथा संकट के रूपांतरणकारी परीक्षणों में समाप्त होती है।
| क्रमांक | योगिनी नाम | शासक ग्रह | अवधि | लाभ/अशुभ | चरित्र |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | मंगला | चंद्र | 1 वर्ष | लाभकारी | ऊर्जा, जीवन शक्ति, आध्यात्मिक संलग्नता |
| 2 | पिंगला | सूर्य | 2 वर्ष | अशुभ | ताप, तीव्रता, अहंकार चुनौतियां |
| 3 | धन्य | गुरु | 3 वर्ष | लाभकारी | प्रचुरता, भाग्य, ज्ञान विस्तार |
| 4 | भ्रामरी | मंगल | 4 वर्ष | अशुभ | कार्रवाई, आक्रामकता, संघर्ष ऊर्जा |
| 5 | भद्रिका | बुध | 5 वर्ष | लाभकारी | संचार, बुद्धि, वाणिज्य |
| 6 | उल्का | शनि | 6 वर्ष | अशुभ | सीमा, अनुशासन, कर्तव्य |
| 7 | सिद्ध | शुक्र | 7 वर्ष | लाभकारी | पूर्णता, आनंद, पूर्ति |
| 8 | संकट | राहु/केतु | 8 वर्ष | अशुभ | भ्रम, भ्रम, संकट |
| कुल | 36 वर्ष | 4 लाभ, 4 अशुभ | एक पूर्ण चक्र |
1+2+3+4+5+6+7+8 = 36 वर्ष, एक पूर्ण त्रिकोणीय प्रगति बनाते हुए जो लौकिक डिजाइन सिद्धांतों को दर्शाता है।
मंगला योगिनी चंद्रमा द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के पहले वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा लाभकारी, शुभ अवधि के रूप में कार्य करती है।
मंगला योगिनी लाती है:
आध्यात्मिक जागृति: धार्मिक प्रथाओं, समारोहों, तथा अनुष्ठानों में बढ़ी हुई संलग्नता। आंतरिक शांति तथा आध्यात्मिक गहराई व्यक्ति की चेतना में प्रवेश करती है।
परिवार सामंजस्य: सहायक जीवनसाथी, अच्छे व्यवहार वाले बच्चे, शांतिपूर्ण परिवार वातावरण। पारिवारिक संबंध सद्भाव तथा पारस्परिक समर्थन के साथ फलते-फूलते हैं।
कैरियर प्रगति: पेशेवर उन्नति, पदोन्नति, सफल परियोजना पूर्णता। यह वह समय है जब कड़ी मेहनत मान्यता तथा पुरस्कार में अनुवाद करती है।
बाधा हटाना: चुनौतियां प्रबंधनीय हो जाती हैं; बाधाएं न्यूनतम प्रयास के साथ घुल जाती हैं। जो कभी दुर्जेय लगा वह अब आसानी से हल हो जाता है।
सामाजिक मान्यता: सम्मान, प्रतिष्ठा, नाम तथा प्रसिद्धि प्राप्त करना। सामाजिक घेरे विस्तारित होते हैं तथा प्रशंसा स्वाभाविक रूप से आती है।
शैक्षणिक उत्कृष्टता: छात्र उच्च ग्रेड तथा बौद्धिक उपलब्धि प्राप्त करते हैं। सीखना सहज हो जाता है तथा समझ गहरी होती है।
समग्र समृद्धि: सभी जीवन क्षेत्रों में सफलता तथा उपलब्धि। यह एक स्वर्ण काल है जहां सब कुछ सहजता से प्रवाहित होता है।
चंद्रमा की कोमल लेकिन महत्वपूर्ण ऊर्जा भावनात्मक स्थिरता, पोषण, तथा सुरक्षात्मक देखभाल की नींव बनाती है, 36 वर्षीय चक्र को सहायक गति के साथ शुरू करती है।
पिंगला योगिनी सूर्य द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के दूसरे वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा अशुभ, चुनौतीपूर्ण अवधि के रूप में कार्य करती है।
पिंगला योगिनी लाती है:
ताप तथा तीव्रता: शाब्दिक रूप से मजबूत ताप (स्वास्थ्य मुद्दे) तथा लाक्षणिक रूप से (भावनात्मक तीव्रता)। शरीर तथा मन दोनों बढ़े हुए तापमान का अनुभव करते हैं।
अहंकार चुनौतियां: बढ़ा हुआ गर्व, अहंकार, या अहंकार-चालित संघर्ष। व्यक्तित्व परीक्षा से गुजरता है जो विनम्रता सिखाता है।
प्राधिकरण चुनौतियां: अधिकार आंकड़ों के साथ कठिनाइयां; नेतृत्व संघर्ष। नेतृत्व भूमिकाएं दबाव तथा अपेक्षाओं के साथ आती हैं।
शारीरिक ताप: बुखार, सूजन, गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य मुद्दे। शरीर आंतरिक असंतुलन के संकेत देता है।
प्रतिस्पर्धी दबाव: बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा; स्वयं को साबित करने की आवश्यकता। हर क्षेत्र में प्रतिद्वंद्विता तीव्र हो जाती है।
जल्दबाजी के फैसले: आवेगपूर्ण कार्रवाई की प्रवृत्ति; परिणामों को जल्दी लाना। धैर्य एक दुर्लभ वस्तु बन जाता है।
सीमित धैर्य: शांत बनाए रखने में कठिनाई; चिड़चिड़ापन बढ़ता है। छोटी झुंझलाहट प्रमुख प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करती है।
सूर्य की तीव्र, अग्नि ऊर्जा गर्मी तथा दबाव के माध्यम से चुनौतियां बनाती है, लचीलापन तथा विनम्रता का परीक्षण करती है। हालांकि, पिंगला का सफल नेविगेशन बाद की अवधियों के लिए शक्ति तथा आत्मविश्वास बनाता है।
धन्य योगिनी गुरु द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के तीसरे वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा लाभकारी, अत्यधिक शुभ अवधि के रूप में कार्य करती है।
धन्य योगिनी लाती है:
प्रचुरता तथा समृद्धि: वित्तीय विकास, धन संचय, सफल निवेश। धन स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होता है।
ज्ञान तथा ज्ञान: शैक्षिक उन्नति, आध्यात्मिक सीखना, दार्शनिक गहराई। समझ कई स्तरों पर विस्तारित होती है।
सौभाग्य तथा समकालिकता: स्वतःस्फूर्त प्रकट होने वाले भाग्यशाली अवसर। ब्रह्मांड सक्रिय रूप से सफलता का समर्थन करता है।
विस्तार तथा विकास: कैरियर उन्नति, व्यापार विस्तार, संबंध गहराना। हर क्षेत्र वृद्धि का अनुभव करता है।
आध्यात्मिक विकास: बढ़ी हुई आध्यात्मिक अभ्यास, ध्यान गहराई, धार्मिक झुकाव। आंतरिक जीवन खिलता है।
सामाजिक उन्नयन: बढ़ी हुई प्रतिष्ठा, सम्मान, सामाजिक उन्नति। समाज में स्थिति ऊपर जाती है।
परिवार आशीर्वाद: बच्चों की सफलता, जीवनसाथी समर्थन, परिवार सद्भाव। घरेलू जीवन खुशी से भर जाता है।
गुरु की विस्तारित, उदार ऊर्जा स्वाभाविक रूप से अनुकूल परिस्थितियां बनाती है जहां प्रयास गुणित परिणाम उत्पन्न करता है तथा सौभाग्य न्यूनतम प्रतिरोध के साथ प्रवाहित होता है।
भ्रामरी योगिनी मंगल द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के चौथे वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा अशुभ, चुनौतीपूर्ण अवधि के रूप में कार्य करती है।
भ्रामरी योगिनी लाती है:
आक्रामक कार्रवाई: पूरा करने के लिए तीव्र ड्राइव; लक्ष्यों का बलपूर्वक पीछा। ऊर्जा स्तर तीव्र हैं।
संघर्ष तथा प्रतिस्पर्धा: बढ़े हुए तर्क, विवाद, प्रतिस्पर्धी चुनौतियां। हर बातचीत टकराव का संभावना रखती है।
शारीरिक ऊर्जा तथा दुर्घटनाएं: उच्च ऊर्जा स्तर लेकिन दुर्घटना जोखिम भी; चोट संभावना। सावधानी आवश्यक है।
संबंध तनाव: जीवनसाथी, भाई-बहन, व्यापार भागीदारों के साथ संघर्ष। व्यक्तिगत संबंध तनाव से गुजरते हैं।
वित्तीय हानि: संघर्ष, कानूनी विवाद, या आक्रामक उद्यमों के माध्यम से हानि। वित्तीय सावधानी महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य मुद्दे: बुखार, सूजन, शारीरिक चोट जोखिम। शरीर अतिरिक्त तनाव के अधीन है।
साहस आवश्यकताएं: स्थितियां बहादुरी की मांग करती हैं; भय-सामना अवधि। आंतरिक शक्ति परीक्षण से गुजरती है।
मंगल की आक्रामक, लड़ाकू ऊर्जा उच्च-दबाव स्थितियां बनाती है जिन्हें सफलतापूर्वक नेविगेट करने के लिए साहस तथा रणनीतिक ज्ञान की आवश्यकता होती है। जो लोग इस अवधि को मास्टर करते हैं वे असाधारण साहस तथा रणनीतिक क्षमता विकसित करते हैं।
भद्रिका योगिनी बुध द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के पांचवें वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा लाभकारी, भाग्यशाली अवधि के रूप में कार्य करती है।
भद्रिका योगिनी लाती है:
प्रभावी संचार: बोलने, लिखने, बातचीत में सफलता; शब्द शक्ति लेते हैं। अभिव्यक्ति स्पष्ट हो जाती है।
बौद्धिक सफलता: अध्ययन, सीखना, बौद्धिक खोज में उत्कृष्टता। मानसिक शक्ति शिखर पर है।
व्यापार तथा वाणिज्य: व्यापारिक सफलता, वाणिज्यिक उद्यम फलते हैं। वित्तीय लेन-देन सुचारू चलते हैं।
बहुमुखी प्रतिभा तथा अनुकूलन क्षमता: कई अवसर; कई परियोजनाओं को संभालने की क्षमता। लचीलापन प्रमुख शक्ति है।
सामाजिक कौशल: बढ़े हुए नेटवर्किंग, मित्रता विस्तार, सामाजिक संबंध। संबंध आसानी से बनते हैं।
यात्रा तथा आंदोलन: लाभकारी यात्राएं, स्थानांतरण सफलता। गति सकारात्मक परिणाम लाती है।
मानसिक स्पष्टता: तीक्ष्ण सोच, त्वरित समस्या-समाधान, रणनीतिक योजना। बुद्धि बढ़ती है।
बुध की संवादात्मक, बौद्धिक ऊर्जा ज्ञान-आधारित खोज के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती है, जन्मजात को विचारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने तथा शब्दों तथा चतुराई के माध्यम से अवसरों को आकर्षित करने में सक्षम बनाती है।
उल्का योगिनी शनि द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के छठे वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा अशुभ, प्रतिबंधात्मक अवधि के रूप में कार्य करती है।
उल्का योगिनी लाती है:
विलंब तथा बाधाएं: परियोजनाएं अधिक समय लेती हैं; सभी खोज में विलंब। प्रगति धीमी है।
कड़ी मेहनत आवश्यकताएं: तीव्र प्रयास मामूली परिणाम उत्पन्न करता है; कोई शॉर्टकट उपलब्ध नहीं। हर उपलब्धि अर्जित की जानी चाहिए।
हानि तथा कमी: वित्तीय हानि, स्थिति में कमी, संकुचन। संसाधन सीमित हो जाते हैं।
संबंध तनाव: संबंधों में ठंडक, प्रियजनों से दूरी। भावनात्मक अलगाव महसूस होता है।
स्वास्थ्य गिरावट: पुरानी समस्याएं, संयुक्त समस्याएं, सामान्य कमजोरी। शरीर बोझ के अधीन है।
कर्तव्य तथा जिम्मेदारी: भारी दायित्व; कर्तव्य मांग बढ़ती है। जिम्मेदारियां भारी महसूस करती हैं।
सीमा तथा प्रतिबंध: सीमाएं कसती हैं; स्वतंत्रता कम होती है। पसंद सीमित दिखाई देती है।
शनि की प्रतिबंधात्मक, सीमित ऊर्जा कर्मिक प्रसंस्करण अवधि बनाती है जहां प्रयास को केवल मामूली मान्यता मिलती है। हालांकि, इस अवधि के दौरान लगातार अखंडता अटल चरित्र बनाती है तथा भविष्य के विकास के लिए दृढ़ नींव स्थापित करती है।
सिद्ध योगिनी शुक्र द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के सातवें वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा लाभकारी, अत्यधिक शुभ अवधि के रूप में कार्य करती है।
सिद्ध योगिनी लाती है:
पूर्णता तथा पूर्णता: परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण होती हैं; लक्ष्य मटीरियलाइज करते हैं। सभी प्रयास फलन प्राप्त करते हैं।
आनंद तथा विलासिता: आराम, विलासिता अधिग्रहण, भौतिक समृद्धि। जीवन की सुंदर चीजें उपलब्ध हैं।
संबंध सफलता: विवाह, रोमांस, साझेदारी सद्भाव। प्रेम खिलता है।
कलात्मक उपलब्धि: रचनात्मक सफलता, कलात्मक मान्यता, सौंदर्य प्रशंसा। रचनात्मकता अपनी शिखर अभिव्यक्ति प्राप्त करती है।
शारीरिक आकर्षण: बढ़ी हुई आकर्षकता, आकर्षण, चुंबकीय व्यक्तित्व। उपस्थिति चमकती है।
यौन जीवन शक्ति: स्वस्थ कामुकता, प्रजनन क्षमता, प्रजनन। शारीरिक आनंद बढ़ाया जाता है।
पूर्ति: जीवन संतोष, इच्छाओं की उपलब्धि। सब कुछ संतुलन में आता है।
शुक्र की आनंद-देने वाली, सामंजस्यकारी ऊर्जा स्वाभाविक रूप से अनुकूल परिस्थितियां बनाती है जहां संवेदी आनंद, रचनात्मक अभिव्यक्ति, तथा संबंध सफलता सहज रूप से प्रवाहित होती है। यह 36 वर्षीय चक्र में सबसे भाग्यशाली अवधियों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।
संकट योगिनी राहु/केतु द्वारा शासित है, 36 वर्षीय चक्र के अंतिम आठवें वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है तथा अशुभ, अत्यधिक चुनौतीपूर्ण अवधि के रूप में कार्य करती है।
संकट योगिनी लाती है:
भ्रम तथा भ्रम: सत्य को असत्य से अलग करने में कठिनाई; भटकाव। स्पष्टता दुर्लभ है।
संकट परिस्थितियां: प्रमुख जीवन संकट; अचानक उथल-पुथल। जीवन नाटकीय रूप से बदल सकता है।
जुनूनी पैटर्न: बाध्यकारी व्यवहार; जाने देने में असमर्थता; दोहराव पैटर्न। व्यसन सतह हो सकते हैं।
अचानक हानि: अप्रत्याशित वित्तीय या व्यक्तिगत हानि। स्थिरता कम होती है।
स्वास्थ्य संकट: गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां; चिकित्सा आपात स्थिति। शरीर तनाव संकेत भेजता है।
संबंध विघटन: अलगाव, तलाक, साझेदारी विघटन। संबंध टूट सकते हैं।
आध्यात्मिक संकट: आत्मा की अंधेरी रात; अस्तित्व संबंधी प्रश्नोत्तरी; विश्वास परीक्षण। जीवन के अर्थ पर सवाल उठाया जाता है।
राहु/केतु की छायादार, भ्रमात्मक ऊर्जा 36 वर्षीय चक्र की सबसे चुनौतीपूर्ण अवधि बनाती है, पूर्ण जीवन पुनर्गठन तथा भ्रम से अलगाव को बल देती है। हालांकि, इस अवधि से बचना गहरी आध्यात्मिक जागृति तथा झूठे आसक्ति से मुक्ति उत्पन्न करता है।
36 वर्षीय चक्र जानबूझकर 40% लाभकारी तथा 60% अशुभ ऊर्जा आवंटित करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि जन्मजात भाग्य तथा प्रतिकूलता के यथार्थवादी मिश्रण का अनुभव करते हैं। यह संतुलन निरंतर भाग्य से आत्मसंतोष तथा अंतहीन चुनौती से निराशा दोनों को रोकता है।
अपनी वर्तमान योगिनी निर्धारित करने के लिए:
प्रत्येक योगिनी अवधि के लिए:
प्रश्न 1: कौन सी योगिनी सबसे भाग्यशाली है?
सिद्ध योगिनी (शुक्र, 7 वर्ष) सबसे भाग्यशाली है, जो पूर्णता, विलासिता, संबंध सफलता, तथा रचनात्मक उपलब्धि लाती है। धन्य योगिनी (गुरु, 3 वर्ष) भी अत्यधिक अनुकूल है, प्रचुरता तथा ज्ञान प्रदान करती है।
प्रश्न 2: सबसे चुनौतीपूर्ण योगिनी कौन सी है?
संकट योगिनी (राहु/केतु, 8 वर्ष) सबसे चुनौतीपूर्ण है, संकट, भ्रम, तथा प्रमुख जीवन उथल-पुथल लाती है। हालांकि, यह गहरे आध्यात्मिक रूपांतरण तथा मुक्ति के लिए भी अवसर प्रदान करता है।
प्रश्न 3: क्या योगिनी दशा के प्रभाव को कम किया जा सकता है?
हां अशुभ योगिनी (पिंगला, भ्रामरी, उल्का, संकट) के दौरान, मंत्र, ध्यान, दान, तथा शासक ग्रह की पूजा प्रभाव को नरम कर सकती है। जागरूकता तथा तैयारी भी चुनौतियों को प्रबंधनीय बनाती है।
प्रश्न 4: क्या योगिनी दशा विमशोत्तरी दशा से बेहतर है?
न तो बेहतर वे पूरक हैं। विमशोत्तरी जीवन-स्तर के रुझानों के लिए उत्कृष्ट है; योगिनी कलियुग में तीव्र, अल्पकालीन घटनाओं के लिए अधिक सटीक है। दोनों का एक साथ उपयोग सर्वश्रेष्ठ अंतर्दृष्टि देता है।
प्रश्न 5: योगिनी चक्र कितनी बार दोहराता है?
योगिनी चक्र हर 36 वर्ष में दोहराता है। 108 वर्ष के जीवन काल में, आप तीन पूर्ण चक्रों का अनुभव करेंगे। प्रत्येक पुनरावृत्ति समान योगिनी अनुक्रम लाती है लेकिन संचित परिपक्वता तथा ज्ञान के साथ।
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कुंडली बनाएं
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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