By पं. सुव्रत शर्मा
तिथि भाव और राशि अनुसार जोखिम संकेत तथा सरल उपाय

आकाशीय घटनाएँ समय और कर्म की भाषा मानी जाती हैं। 30 अगस्त 2025 को सिंह राशि में बुध और केतु का संयोग बन रहा है। बुद्धि व वाणी के कारक बुध के साथ केतु का अलगाव और कर्मफल का संकेत जुड़ने पर निर्णय क्षमता में धुंध दिखती है। इस प्रभाव की गूँज सितंबर 2025 तक रहती है। इसलिए आर्थिक और व्यावसायिक कदम सोच समझकर उठाने चाहिए।
इस अवधि में शब्दों के अर्थ गलत समझे जा सकते हैं। संदेश गलत पहुँच सकता है। जल्दबाजी में सौदा करने पर पश्चाताप संभव है। विवेक और धैर्य ही सुरक्षा कवच बनते हैं।
बुध: संचार, व्यापार, विश्लेषण, सीखने की क्षमता
केतु: वैराग्य, अतीत के संस्कार, अनपेक्षित घटनाएँ
सिंह: आत्मप्रदर्शन, अहं का विषय, सूर्य का क्षेत्र
सिंह में बुध केतु का मेल बुद्धि और अहं के बीच टकराहट बढ़ा सकता है। बोलचाल में तीखापन आ सकता है। गलतफहमी से अनावश्यक वाद विवाद भी हो सकता है। साधकों के लिए यह समय मन को भीतर मोड़ने और विनम्रता से अंतर्दृष्टि पाने का अवसर भी देता है।
यह संयोग ऐसी घड़ी में बनता है जब धर्म और मार्गदर्शन की चाह प्रबल रहती है। युति चेताती है कि नम्र बने रहें और सजग निर्णय लें। पुराने विषय फिर सामने आ सकते हैं। कुछ रिश्तों में तनातनी और मन का चंचलपन भी उभर सकता है। अनुशासन और साधना से यह समय सीख और उन्नति में बदल सकता है।
बोले कम और सुने अधिक। कोमल वाणी और धैर्य से स्थितियाँ सरल होती हैं।
नीचे दी गई राशियाँ मुख्य रूप से प्रभावित दिखती हैं। भाव और विषय अलग अलग रहेंगे। सारणी पढ़कर प्राथमिक सावधानी स्पष्ट हो जाती है।
| राशि | प्रभावित भाव | मुख्य क्षेत्र | संभावित जोखिम | सुझाव |
|---|---|---|---|---|
| वृषभ | चतुर्थ | घर, वाहन, संपत्ति, मानसिक सुकून | पारिवारिक असहमति, कागजी उलझन | सौम्य बोली, धैर्य, घी का दीपक घर के पूजास्थान पर प्रज्वलित करें |
| सिंह | प्रथम | व्यक्तित्व, वाणी, निर्णय | अतिआत्मविश्वास, बात का गलत अर्थ | मौन साधना, अधिक सुनना, आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ |
| कन्या | द्वादश | व्यय, निद्रा, एकांत | अनावश्यक खर्च, बेचैनी | जोखिम से दूर रहें, ध्यान और जप से मन स्थिर करें |
| वृश्चिक | दशम | करियर, छवि, वरिष्ठ | संचार अंतर, परियोजना में विलंब | नम्रता रखें, गुरुवार को कार्यस्थल पर दीपक जलाएँ, हनुमान चालीसा पाठ |
| मकर | अष्टम | आकस्मिक विषय, साझा धन | अचानक आर्थिक उतार चढ़ाव | धन निर्णय टालें, महामृत्युंजय मंत्र जप, शिव अर्चन |
| मीन | षष्ठ | कार्य, स्वास्थ्य, प्रतिस्पर्धा | सहकर्मियों से तकरार, पाचन तनाव | शांत दक्षता, विष्णु सहस्रनाम जप, दिनचर्या में अनुशासन |
चतुर्थ भाव सक्रिय होता है। छोटे मुद्दे बढ़ सकते हैं। संपत्ति वाहन या घरेलू जिम्मेदारी से तनाव संभव। मृदु वाणी और धैर्य से वातावरण शांत रखें।
पहला भाव प्रभावित है। तीखे शब्द उलटे पड़ सकते हैं। स्वनियंत्रण और मौन का अभ्यास लाभ देता है। सुबह सूर्य स्तुति से संतुलन बढ़ता है।
द्वादश भाव से अनावश्यक खर्च और बेचैनी उभरती है। ध्यान साधना और दान सेवा से मन हल्का होता है। बड़े निवेश टालें।
दशम भाव सक्रिय होने से वरिष्ठों के साथ समझभ्रम या देरी संभव। निरंतरता और विनम्रता से राह बनती है।
संयुक्त धन और अचानक परिवर्तन। कागजी निर्णय जल्दबाजी में न लें। शिव आराधना से भय शांत होता है।
षष्ठ भाव से प्रतिस्पर्धा और संचार तनाव। तर्क से अधिक परिणाम पर ध्यान दें। अनुशासित दिनचर्या सुरक्षा देती है।
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| विषय | सरल उपाय | उद्देश्य |
|---|---|---|
| चंचल मन | गायत्री मंत्र जप या ऊँ नमः शिवाय का शांत उच्चारण | विचार स्थिरता |
| संचार भ्रम | अनावश्यक बहस से दूरी, लिखकर योजना बनाना | स्पष्टता |
| धन निर्णय | गुरुवार को पीले फल दान, विद्यार्थियों को स्टेशनरी देना | सद्बुद्धि और शुभ फल |
| मोह जाल | घी का दीपक गणेश जी के समक्ष, नारियल अर्पण | मिथ्या भ्रम से रक्षा |
| दिनचर्या | तय समय पर भोजन, हल्की सैर, नींद की स्वच्छ आदत | मानसिक स्फूर्ति |
प्रश्न 1: सबसे संवेदनशील दिन कौन से माने जाएँ?
उत्तर: 30 अगस्त के आसपास और सितंबर के प्रथम पखवाड़े में विवेक से निर्णय लें। बड़े वित्तीय समझौते में समय लें।
प्रश्न 2: क्या सभी राशियों को नुकसान होगा?
उत्तर: नहीं। प्रभाव विषयानुसार अलग होता है। सजगता से लाभ सुरक्षित रहता है।
प्रश्न 3: व्यवसाय में क्या रणनीति सही रहेगी?
उत्तर: मौजूदा परियोजनाएँ पूरा करें। नया उच्च जोखिम सौदा टालें। लिखित अनुबंध स्पष्ट रखें।
प्रश्न 4: स्वास्थ्य में किस पर ध्यान दें?
उत्तर: पाचन और तनाव प्रबंधन। सादा भोजन और जल सेवन पर्याप्त रखें।
प्रश्न 5: परिवार में शांति कैसे बनी रहे?
उत्तर: वाणी में कोमलता। निर्णय सामूहिक चर्चा से। प्रतिदिन दीपक और प्रार्थना से वातावरण शांत रहता है।
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