By पं. अभिषेक शर्मा
महादशा और अंतर्दशा से समय को समझें

कुछ दिन ऐसे होते हैं जब हर काम अपने आप आसानी से बनता जाता है। उसी इंसान के जीवन में कुछ दिन ऐसे भी आते हैं जब जितनी कोशिश की जाए उतनी ही रुकावट सामने खड़ी हो जाती है। कभी अचानक बड़ा मौका मिलता है और कभी उतनी ही अचानक सब कुछ धीमा पड़ जाता है। यही उतार चढ़ाव ज्योतिष की भाषा में महादशा और अंतर्दशा के रूप में समझे जाते हैं।
जन्म कुंडली के ग्रह एक निश्चित क्रम के अनुसार समय समय पर जीवन के अलग अलग हिस्सों की कमान संभालते हैं। किसी काल में कोई ग्रह दोस्त की तरह सहारा देता है। किसी समय वही ग्रह कसौटी की तरह सामने आकर धैर्य और समझ की परीक्षा लेने लगता है। इन ग्रहों के खेल को समझकर इंसान अपने फैसलों को बेहतर ढंग से सम्हाल सकता है और मन को भी मजबूती दे सकता है।
जिंदगी को एक लंबी फिल्म माना जाए तो महादशा इस फिल्म के बड़े अध्याय की तरह है। हर अध्याय में एक ग्रह मुख्य पात्र बन जाता है। वही ग्रह जीवन के अनुभवों का स्वाद बदल देता है।
महादशा वह लंबा समय होता है जिसमें कोई एक ग्रह जीवन पर गहरा असर डालता है। उसी के भीतर छोटे छोटे खंड रहते हैं जिन्हें अंतर्दशा कहा जाता है। वहाँ दूसरे ग्रह मेहमान कलाकार की तरह आती जाती भूमिका निभाते हैं। कहानी की मुख्य दिशा महादशा तय करती है। उस दिशा के भीतर रोजमर्रा की उठापटक अंतर्दशा से दिखाई देती है।
महादशा की अवधि विम्शोत्तरी दशा प्रणाली के अनुसार तय होती है। इसका पूरा चक्र 120 वर्ष का माना जाता है।
| ग्रह | महादशा की अवधि (वर्ष) |
|---|---|
| सूर्य | 6 |
| चंद्रमा | 10 |
| मंगल | 7 |
| बुध | 17 |
| बृहस्पति | 16 |
| शुक्र | 20 |
| शनि | 19 |
| राहु | 18 |
| केतु | 7 |
जन्म कुंडली में ग्रह जिस भाव में स्थित हो जिस राशि में बैठा हो और जिस तरह अन्य ग्रहों से जुड़ा हो उसी के अनुसार यह अवधि सुखद भी बन सकती है और चुनौतीपूर्ण भी। महादशा जीवन की बड़ी दिशा है इसीलिए उसका चुनाव नहीं किया जा सकता पर उसकी समझ ज़रूर बढ़ाई जा सकती है।
हर महादशा के भीतर एक के बाद एक सभी ग्रह अपनी छोटी अवधि के लिए सक्रिय होते हैं। इन्हें अंतर्दशा या भुक्ति कहा जाता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी की कुंडली में बृहस्पति की महादशा चल रही हो तो उसी के भीतर कभी बृहस्पति अंतर्दशा चलेगी फिर शनि फिर बुध फिर केतु और इसी तरह क्रम से सभी ग्रह सक्रिय होते हैं। महादशा बृहस्पति की रहेगी पर इस दौरान अनुभव लगातार बदलते रहेंगे।
अंतर्दशा यह दिखाती है कि महादशा के बड़े माहौल के भीतर इस समय कौन सा ग्रह अतिरिक्त रंग भर रहा है। कभी बात करियर पर ज़्यादा जोर डालती है कभी रिश्तों पर कभी स्वास्थ्य या धन पर अधिक ध्यान खींचती है।
महादशा और अंतर्दशा को मौसम की तरह भी समझा जा सकता है। मौसम बदलते रहते हैं और इंसान को उसी के अनुसार अपने कपड़े और तैयारी बदलनी पड़ती है। वैसे ही ग्रहों की दशाएँ जीवन का मौसम बदलती हैं।
जब किसी ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो तो उस ग्रह के संकेतित विषय अधिक सक्रिय होते हैं।
इस पूरे क्रम को एक ब्रह्मांडीय घड़ी की तरह समझा जाता है जो यह बताती है कि समय की दिशा किस तरफ बह रही है। जो व्यक्ति समय के संकेत पहचान लेता है वह उसी के अनुसार अपने कदम तय कर सकता है।
हर ग्रह का अपना स्वभाव होता है और अपना क्षेत्र होता है। कोई ग्रह सिर्फ अच्छा या सिर्फ कठिन कभी नहीं होता। उसकी दशा में जो फल मिलता है वह इस बात पर निर्भर करता है कि वह आपकी जन्म कुंडली में किस भाव में बैठा है किन ग्रहों के साथ बैठा है और आपके कर्म किस प्रकार के हैं।
नीचे सभी नौ ग्रहों के बारे में यह समझ रखा गया है कि उनकी दशा में किस तरह के अनुभव सामने आ सकते हैं।
सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। यह आत्मा आत्मविश्वास पिता सरकारी काम प्रतिष्ठा और नेतृत्व से जुड़ा है।
सूर्य जब दोस्त बनता है
सूर्य की शुभ दशा में व्यक्ति के भीतर एक साफ़ आत्मविश्वास दिखने लगता है। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। सरकारी कामों में सहयोग मिलने लगता है। करियर में उच्च पद या नेतृत्व की भूमिका के अवसर सामने आते हैं। परिवार और समाज दोनों में मान सम्मान बढ़ता है।
सूर्य जब कसौटी लेता है
अशुभ सूर्य की दशा में अहंकार बढ़ सकता है। पिता के साथ संबंधों में खिंचाव महसूस हो सकता है। हृदय रक्तचाप या आँखों से जुड़ी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। सम्मान को लेकर असुरक्षा भी बढ़ जाती है जिससे छोटी बात पर भी गुस्सा आने लगता है।
जल्दी पहचान के संकेत
सरकारी कागज़ी कामों में लगातार अड़चनें आना। सुबह उठते ही थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होना। वरिष्ठ लोगों से बेवजह टकराव होना। यह सब संकेत देते हैं कि सूर्य अपनी उपस्थिति तेज कर रहा है।
चंद्रमा मन का कारक माना जाता है। यह भावनाएँ माँ मानसिक स्थिरता जल तत्व और कल्पनाशक्ति से जुड़ा है।
चंद्र जब दोस्त बनता है
चंद्र दशा में मन हल्का और शांत महसूस हो सकता है। भावनात्मक सुरक्षा बढ़ती है। माँ के साथ संबंध मधुर रहते हैं। रचनात्मक कार्यों जैसे लेखन संगीत चित्रकला में मन अधिक लगता है। छोटी यात्राएँ अधिक सुखद बन जाती हैं।
चंद्र जब कसौटी लेता है
अशुभ चंद्र दशा में मूड स्विंग अधिक हो जाते हैं। कभी बिना कारण उदासी कभी अचानक चिड़चिड़ापन दिखाई देता है। नींद में बाधा आ सकती है। सर्दी खाँसी या फेफड़ों से जुड़ी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।
जल्दी पहचान के संकेत
रात में बहुत देर तक जागना। छोटी बात पर भी दिल भारी हो जाना। घर में पानी से जुड़ी बार बार समस्या जैसे नल का लीक होना या टंकी से परेशानी। यह सब चंद्र की संवेदनशीलता के संकेत होते हैं।
मंगल को सेनापति कहा जाता है। यह साहस शक्ति गुस्सा छोटे भाई बहन भूमि प्रॉपर्टी और तकनीकी काम से जुड़ा है।
मंगल जब दोस्त बनता है
शुभ मंगल दशा में ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है। जोखिम लेने का साहस बढ़ता है और प्रतियोगिता में जीतने का जज़्बा जगता है। भूमि वाहन और प्रॉपर्टी से लाभ की संभावना बनती है। पुलिस सेना खेल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रगति दिखती है।
मंगल जब कसौटी लेता है
अशुभ मंगल की दशा में गुस्सा बेकाबू हो सकता है। छोटी बात पर झगड़ा हो सकता है। चोट लगने दुर्घटना होने या खून से जुड़ी दिक्कतों की संभावना बढ़ जाती है। भाई बहनों से संबंधों में तकरार देखी जा सकती है।
जल्दी पहचान के संकेत
बिना वजह तेज बोले जाने की आदत। रोज़मर्रा में छोटे छोटे कट छिलन का होना। वाहन ज़्यादा तेज चलाने का मन करना। शरीर में लगातार गर्मी महसूस होना। यह सब मंगल के असंतुलन की ओर संकेत करते हैं।
बुध बुद्धि वाणी व्यापार संचार शिक्षा और तर्क से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
बुध जब दोस्त बनता है
बुध की शुभ दशा में दिमाग तेजी से काम करता है। बोलचाल में स्पष्टता आती है। व्यापार में समझदारीपूर्ण निर्णयों के कारण लाभ की संभावना बढ़ती है। लेखन पढ़ाई पढ़ाने कंसल्टिंग और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए यह समय लाभदायक हो सकता है।
बुध जब कसौटी लेता है
अशुभ बुध के समय निर्णयों में भ्रम बढ़ सकता है। गलत जानकारी पर भरोसा करने की आदत बन सकती है। त्वचा नसों या तंत्रिका तंत्र से संबंधित दिक्कतें सामने आ सकती हैं। दस्तावेज़ों में गलती या धोखे की आशंका भी रहती है।
जल्दी पहचान के संकेत
मोबाइल और कंप्यूटर बार बार खराब होना। संदेश गलत समझे जाना। हिसाब किताब में लगातार गलती। बात करते समय अचानक शब्दों में अटक जाना। यह सब बुध की चुनौतियों की तरफ इशारा करते हैं।
बृहस्पति को गुरु भी कहा जाता है। यह ज्ञान धन संतान धर्म भाग्य और गुरुजनों से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
बृहस्पति जब दोस्त बनता है
शुभ बृहस्पति दशा को बहुत बार जीवन के सुनहरे समय के रूप में देखा जाता है। धन की स्थिति मजबूत होती है। पढ़ाई रिसर्च अध्यापन और आध्यात्मिकता की तरफ झुकाव बढ़ता है। संतान सुख और गुरु कृपा प्राप्त होती है। सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
बृहस्पति जब कसौटी लेता है
अशुभ बृहस्पति अधिक आशावाद की ओर धकेल सकता है। बिना जांच के बड़े निवेश करवाकर नुकसान की स्थिति बना सकता है। लीवर पाचन और मोटापे की समस्या बढ़ सकती है। धर्म के नाम पर भ्रम या कठोरता भी दिखाई दे सकती है।
जल्दी पहचान के संकेत
अचानक खर्चों का बढ़ जाना। सलाह लेने से बचना। पेट की गड़बड़ी। हर विषय पर बिना पूछे ज्ञान बांटने की आदत। यह सब संकेत बताते हैं कि बृहस्पति किसी बात की ओर ध्यान दिला रहा है।
शुक्र प्रेम भौतिक सुख कला विवाह विलासिता और सुंदरता से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
शुक्र जब दोस्त बनता है
शुभ शुक्र दशा में प्रेम संबंध मजबूत होते हैं। आकर्षण शक्ति बढ़ती है। कला संगीत फैशन मनोरंजन या डिज़ाइन से जुड़े लोगों को अच्छा फल मिलता है। घर वाहन और सुख सुविधा की वस्तुओं की प्राप्ति के योग बनते हैं। विवाहित जीवन में मधुरता और आनंद बढ़ता है।
शुक्र जब कसौटी लेता है
अशुभ शुक्र दशा में संबंधों में गलतफहमियों का दौर शुरू हो सकता है। अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। विलासिता की आदतें स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। त्वचा गुर्दे या प्रजनन तंत्र से जुड़ी दिक्कतें भी दिख सकती हैं।
जल्दी पहचान के संकेत
प्रेम संबंधों में लगातार खिंचाव। बाहरी चमक पर अधिक खर्च। सौंदर्य प्रसाधनों से एलर्जी। मीठा खाने की अत्यधिक इच्छा। यह सब शुक्र की कसौटी के संकेत माने जा सकते हैं।
शनि कर्म न्याय अनुशासन संघर्ष देरी और दीर्घायु से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
शनि जब दोस्त बनता है
शुभ शनि दशा में व्यक्ति भीतर से मजबूत होता है। जिम्मेदारी का बोध बढ़ता है। लंबे समय से जारी मेहनत का फल धीरे धीरे दिखने लगता है। करियर में स्थिरता और गंभीरता बढ़ती है। जीवन के प्रति दृष्टि व्यावहारिक होती जाती है।
शनि जब कसौटी लेता है
अशुभ शनि की दशा में कामों में देरी बढ़ जाती है। हर काम में बाधा महसूस होती है। अकेलापन और उदासी का भाव भी बढ़ सकता है। हड्डियों घुटनों और नसों से जुड़ी समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
जल्दी पहचान के संकेत
अचानक पुराने सामानों का टूटना। योजनाओं का बार बार टलना। शरीर में भारीपन और जकड़न। यह सब शनि की ओर से धैर्य की परीक्षा का संकेत हो सकता है।
राहु को माया भ्रम अचानक घटनाएँ विदेश संपर्क और राजनीति से जोड़कर देखा जाता है।
राहु जब दोस्त बनता है
शुभ राहु दशा में असाधारण अवसर मिल सकते हैं। विदेश यात्रा विदेश में काम या ऑनलाइन माध्यम से बड़ा लाभ मिल सकता है। भीड़ में अलग पहचान बनने के अवसर आते हैं। नई तकनीक और नए प्रयोगों से सफलता मिल सकती है।
राहु जब कसौटी लेता है
अशुभ राहु दशा में भ्रम और डर बढ़ता है। कानूनी उलझनें धोखा और ग़लत संगत की संभावना बढ़ जाती है। नशे या अत्यधिक कल्पनाओं की आदत से नुकसान हो सकता है।
जल्दी पहचान के संकेत
अजीबोगरीब सपने। बिना कारण मन में डर। हर व्यक्ति पर शक। अचानक बहुत बड़ा लाभ फिर उतना ही तेज नुकसान। यह सब राहु की अस्थिर ऊर्जा के संकेत होते हैं।
केतु मोक्ष अलगाव आध्यात्मिकता अंतर्ज्ञान और अदृश्य रोगों से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
केतु जब दोस्त बनता है
शुभ केतु की दशा में ध्यान जप साधना और भीतर की खोज का भाव बढ़ता है। रिसर्च और गहरे अध्ययन वाले कार्यों में प्रगति दिखाई देती है। पुराने कर्मों से मुक्ति का अनुभव होने लगता है।
केतु जब कसौटी लेता है
अशुभ केतु की दशा में अकेलापन और असमंजस बढ़ सकता है। कुछ ऐसी शारीरिक परेशानियाँ सामने आ सकती हैं जिनका कारण आसानी से समझ न आए। लक्ष्य अचानक बदलने लगते हैं।
जल्दी पहचान के संकेत
लोगों से दूरी बनाना। शरीर में चलायमान खुजली या अजीब दर्द। किसी चीज़ में अचानक दिलचस्पी खत्म हो जाना। यह सब केतु की सक्रियता के संकेत माने जा सकते हैं।
दशा संधि वह समय है जब एक महादशा समाप्त होने के करीब होती है और दूसरी महादशा शुरू होने वाली होती है। इसे जीवन का पुल भी कहा जा सकता है जहाँ पुरानी ऊर्जा धीरे धीरे विदा होती है और नई ऊर्जा अपना स्थान बनाने लगती है।
इस समय में स्थिति थोड़ी अस्थिर महसूस हो सकती है। पुरानी महादशा पूरी तरह से साथ छोड़ नहीं रही होती और नई महादशा अभी तक पूरी तरह संभाल नहीं पाती।
इस काल में अक्सर
ऐसे समय में अच्छे से सोचकर ही बड़ा फैसला लेना बेहतर माना जाता है। नौकरी बदलना भारी निवेश करना या किसी संबंध को तोड़ने बनाने जैसे निर्णयों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। साथ ही ध्यान जप और शरीर की देखभाल पर भी ज़्यादा ध्यान देना बुद्धिमानी होती है।
जब किसी ग्रह की दशा या अंतर्दशा कसौटी की तरह काम करने लगे तो घबराने के बजाय सही दिशा में छोटे छोटे उपाय जीवन को संतुलित कर सकते हैं।
जिस ग्रह की दशा चल रही हो उसके मंत्र को सुनना या जप करना मन और ऊर्जा दोनों के लिए सहायक माना जाता है।
क्या करें
क्यों लाभकारी है
किसी भी ग्रह की दशा में उस ग्रह के संकेतित विषयों से जुड़ी सेवा और दान को बहुत प्रभावी उपाय माना जाता है।
क्या करें
क्यों लाभकारी है
प्रकृति के साथ समय बिताना खुद में एक बड़ा उपाय है। ग्रहों से जुड़े पौधे लगाना और उनकी सेवा करना बहुत शांत प्रभाव देता है।
| ग्रह | पौधा या वृक्ष |
|---|---|
| सूर्य | धूप पसंद आक आदि पौधे |
| चंद्र | चमेली जैसे सफेद पुष्प वाले पौधे |
| मंगल | गुड़हल जैसे लाल फूल वाले पौधे |
| बुध | तुलसी या हरे सुगंधित पौधे |
| बृहस्पति | पीपल या पीले फूल वाले पौधे |
| शुक्र | गुलाब बेला और सुगंधित पुष्प |
| शनि | शमी या पीपल |
| राहु | गहरे रंग की पत्तियों वाले पौधे |
| केतु | छोटे मिश्रित रंगों वाले पौधे |
इन पौधों को रोज़ पानी देना उनकी मिट्टी ठीक करना और पास बैठकर कुछ देर शांत रहना मन को स्थिर करता है।
हर ग्रह का एक ऊर्जा रंग माना जाता है। कपड़ों और आसपास की चीज़ों में इन रंगों का संतुलित उपयोग भी समय को सहारा दे सकता है।
ये रंग मनोदशा पर प्रभाव डालते हैं और सकारात्मक भावनाएँ बढ़ाने में मदद करते हैं।
ग्रहों की चुनौती का असर सबसे पहले दिनचर्या पर पड़ता है। यदि दिनचर्या में थोड़ी स्थिरता लाई जाए तो कई कठिनियाँ वैसे ही हल्की महसूस होने लगती हैं।
क्या करें
इन सरल आदतों से मन मजबूत होता है और महादशा अंतर्दशा का दबाव कम महसूस होता है।
प्रश्न 1 महादशा और अंतर्दशा में मुख्य अंतर क्या है
महादशा लंबा समय होता है जिसमें एक ग्रह मुख्य रूप से जीवन पर असर डालता है। अंतर्दशा उसी महादशा के भीतर छोटा समय होता है जिसमें दूसरा ग्रह सह भूमिका निभाकर घटनाओं का स्वरूप बदलता है। महादशा जीवन की बड़ी दिशा दिखाती है और अंतर्दशा उसी दिशा के अंदर रोजमर्रा के मोड़ बताती है।
प्रश्न 2 क्या हर शुभ ग्रह की महादशा हमेशा अच्छा समय ही देती है
ऐसा जरूरी नहीं है। यदि वही ग्रह कुंडली में कमजोर पीड़ित या दोष से घिरा हो तो उसकी महादशा मिश्रित या चुनौतीपूर्ण परिणाम भी दे सकती है। फल को समझने के लिए ग्रह का स्थान भाव राशि दृष्टि और योग सब एक साथ देखने पड़ते हैं।
प्रश्न 3 दशा संधि का समय हमेशा कठिन क्यों महसूस होता है
दशा संधि में पुरानी महादशा का असर कम हो रहा होता है और नई महादशा का असर अभी पूरी तरह स्थिर नहीं होता। दो तरह की ऊर्जा के मिलने से मन में अस्थिरता और परिस्थितियों में बदलाव स्वाभाविक है। सही समझ यह है कि इस समय थोड़ा धैर्य रखा जाए और जल्दबाजी से बड़े निर्णय न लिए जाएँ।
प्रश्न 4 क्या साधारण उपाय जैसे मंत्र दान पौधे सच में असर डालते हैं
ये उपाय ग्रह को बदलने के बजाय व्यक्ति के मन और कर्म को संतुलित करते हैं। जब सोच शांत हो जाती है और व्यवहार में अनुशासन तथा करुणा बढ़ती है तो वही ग्रह जो पहले कठोर लग रहा था धीरे धीरे मार्गदर्शक की तरह काम करने लगता है। इस तरह परिणामों की गुणवत्ता बदलने लगती है।
प्रश्न 5 अपनी चल रही दशा और आने वाली दशा को सही तरीके से कैसे जाना जा सकता है
इसके लिए सही जन्म तिथि समय और स्थान के आधार पर कुंडली बनती है। विश्वसनीय ज्योतिषी से परामर्श लेकर महादशा अंतर्दशा की सूची और उनकी व्याख्या ली जा सकती है। ऑनलाइन साधनों से भी सूची मिल जाती है पर विस्तृत समझ और उपाय के लिए व्यक्तिगत विश्लेषण अधिक उपयोगी रहता है।
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