By पं. नरेंद्र शर्मा
ग्रहों के गोचर का प्रभाव और गोचर का उपाय विस्तार से

आकाश में चलते ग्रह दूर से शांत दिखाई देते हैं पर उनकी सूक्ष्म चाल भीतर बहुत कुछ बदल रही होती है। कभी बिना कारण मन भारी हो जाता है कभी अचानक आत्मविश्वास लौट आता है। कहीं छोटी बात पर गुस्सा उभर आता है और कहीं वही व्यक्ति बहुत संयमित दिखाई देता है। वैदिक ज्योतिष यही बताता है कि ग्रहों के गोचर का प्रभाव मन शरीर और करियर के हर स्तर पर लहर की तरह चलता रहता है जिसे पहचानकर जीवन को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।
गोचर का प्रभाव समझने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि ग्रह गोचर क्या होता है। जन्म के समय ग्रह जिस स्थिति में रहते हैं वह जन्म कुंडली में स्थिर हो जाती है। इसके बाद जीवन भर वही नक्शा रहता है जबकि आकाश में ग्रह आगे बढ़ते रहते हैं। इन चलती स्थितियों का जन्म कुंडली से बनता संबंध ग्रह गोचर कहलाता है। जब यह गोचर मन से जुड़े भावों या कर्म से जुड़े भावों को छूता है तो मानसिक स्वास्थ्य करियर और निर्णय क्षमता पर प्रत्यक्ष असर दिखाई देता है।
प्राचीन ऋषियों ने गोचर का अर्थ केवल धार्मिक विश्वास के रूप में नहीं लिया। उनका मानना था कि जो ग्रह पृथ्वी पर ज्वार भाटा मौसम और चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करते हैं वही मानव शरीर के सूक्ष्म तंत्र पर भी असर डाल सकते हैं। आधुनिक न्यूरोलॉजी और खगोल विज्ञान भी स्वीकार करते हैं कि अलग अलग खगोलीय स्थितियां नींद के पैटर्न तनाव हार्मोन और मूड को प्रभावित कर सकती हैं।
जब ग्रह गोचर प्रतिकूल भावों से गुजरता है तो कई लोग बिना बाहरी कारण के भी बेचैनी चिड़चिड़ापन या थकान महसूस करते हैं। इसके विपरीत अनुकूल गोचर के दौरान अचानक आत्मविश्वास बढ़ जाता है और वही काम सरल लगने लगता है जो पहले बोझ लग रहा था। इसीलिए गोचर का प्रभाव केवल घटनाओं तक सीमित नहीं होता बल्कि सीधे मस्तिष्क और हार्मोन तंत्र तक पहुंचता है।
| ग्रह | गोचर का मुख्य क्षेत्र | सकारात्मक पक्ष | चुनौतीपूर्ण पक्ष |
|---|---|---|---|
| चंद्र | भावनाएं और नींद | अंतर्ज्ञान, करुणा | मूड स्विंग, अनिद्रा |
| शनि | तनाव और जिम्मेदारी | धैर्य, संरचना | बोझ, चिंता |
| मंगल | ऊर्जा और उग्रता | साहस, प्रेरणा | गुस्सा, चिड़चिड़ापन |
| बुध | सोच और संचार | स्पष्टता, सीखने की क्षमता | उलझन, गलतफहमी |
| सूर्य | आत्मविश्वास | नेतृत्व, स्वीकृति | आत्म संदेह, थकान |
अब हर ग्रह के गोचर को थोड़ा विस्तार से देखा जा सकता है।
चंद्रमा जल तत्व और भावनात्मक जगत का प्रतिनिधि है। समुद्र के ज्वार भाटा पर चंद्रमा का प्रभाव सब जानते हैं। शरीर में भी जल का अनुपात अधिक है इसलिए चंद्रमा के गोचर का प्रभाव मन और भावनाओं पर स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है।
पूर्णिमा के आसपास बहुत से लोग अनुभव करते हैं कि संवेदनशीलता बढ़ गई है। छोटी बात भी दिल को गहराई से छूने लगती है। यह केवल कल्पना नहीं है। चंद्रमा की स्थिति मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को प्रभावित कर सकती है जिससे मूड में तीव्र उतार चढ़ाव आते हैं। अमावस्या के समय उलट प्रक्रिया में थकान या खालीपन का अनुभव हो सकता है।
वैज्ञानिक अध्ययन यह संकेत करते हैं कि पूर्णिमा के दिनों में कई लोगों की नींद की गुणवत्ता घट जाती है। गहरी नींद में जाने में देर लगती है और रात में बार बार जागने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। जब नींद ठीक न हो तो अगला दिन मानसिक रूप से अस्थिर होता है। इससे चिड़चिड़ापन ध्यान की कमी और हल्का अवसाद जैसा भाव उभर सकता है। इस तरह चंद्रमा के गोचर का प्रभाव सीधे भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर दर्ज होता है।
इन सरल उपायों से चंद्र गोचर की तीव्रता कम महसूस होती है और भावनात्मक उतार चढ़ाव थोड़ा संतुलित हो सकता है।
शनि को वैदिक ज्योतिष में अनुशासन कठिनाई और कर्मफल का प्रतीक माना गया है। जब शनि किसी मुख्य भाव से गोचर करता है या साढ़ेसाती जैसे चरण में आता है तो जीवन अचानक गंभीर दिखाई देने लगता है। काम बढ़ जाते हैं अवसर कम दिखते हैं और जिम्मेदारियों का बोझ अधिक महसूस होता है।
भावनात्मक स्तर पर शनि का गोचर व्यक्ति को अंदर से कठोर प्रश्नों के सामने खड़ा कर देता है। यह पूछता है कि कौन सा काम केवल आदत से हो रहा है और कौन सा काम वास्तव में आवश्यक है। इस पूछताछ से बचने की कोशिश तनाव को और बढ़ा देती है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो लंबे समय तक तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। कोर्टिसोल की अधिकता से चिंता बेचैनी उच्च रक्तचाप और अनिद्रा जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं।
शनि के प्रभाव वाले समय में यदि व्यक्ति समय प्रबंधन अनुशासन और शरीर की देखभाल पर ध्यान दे तो यही काल आंतरिक मजबूती की नींव बन सकता है। पर यदि केवल शिकायत और डर में यह समय निकल जाए तो मानसिक थकावट गहरी हो सकती है।
इन उपायों से शनि की कठोरता धीरे धीरे स्थिरता में बदली जा सकती है।
मंगल ऊर्जा साहस और क्रिया का ग्रह है। मंगल का गोचर जब अनुकूल हो तो व्यक्ति के भीतर नई शक्ति और उत्साह जागता है। लंबे समय से टल रहे कार्य पूरे होने लगते हैं। जोखिम लेने का साहस बढ़ता है और लक्ष्य स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। यह पक्ष गोचर का सकारात्मक प्रभाव कहलाता है।
पर वही मंगल यदि कुंडली के संवेदनशील स्थानों से प्रतिकूल रूप में गुजर रहा हो तो उग्रता और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। छोटी सी बात पर बहस शुरू हो जाती है। मस्तिष्क में एड्रेनालिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन बढ़ने से शरीर सतर्क अवस्था में चला जाता है। यदि इस ऊर्जा को सही दिशा न मिले तो यह आक्रामक व्यवहार या तनावपूर्ण संबंधों में बदल सकती है।
इस समय व्यक्ति को लगता है कि हर बात तत्काल और तेज जवाब मांगती है। वहीं यदि थोड़ी देर रुककर सांस पर ध्यान दिया जाए या शरीर को किसी मेहनती कार्य में लगाया जाए तो वही अतिरिक्त ऊर्जा सफलता का साधन बन सकती है।
इससे शरीर में उठती गर्मी संतुलित होती है और गुस्सा स्वतः कुछ कम हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के साथ साथ करियर भी ग्रहों के गोचर से गहराई से प्रभावित होता है। वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह को किसी न किसी करियर गुण से जोड़ा गया है। जब वही ग्रह करियर से जुड़े भावों से गुजरते हैं तो नौकरी व्यापार और पेशेवर पहचान में बदलाव दिखने लगते हैं।
नीचे सारणी में कुछ प्रमुख ग्रह और करियर से जुड़ा उनका गोचर का प्रभाव रखा जा सकता है।
| ग्रह | करियर में मुख्य भूमिका | अनुकूल गोचर का प्रभाव | प्रतिकूल गोचर की चुनौती |
|---|---|---|---|
| सूर्य | आत्मविश्वास, नेतृत्व | पदोन्नति, पहचान, अवसर | आत्म संदेह, थकान |
| बुध | संचार, निर्णय क्षमता | इंटरव्यू और व्यापार वार्ता में सफलता | गलतफहमी, कागजी उलझन |
| शनि | मेहनत और स्थायित्व | दीर्घकालिक पद और स्थिरता | रुकावट, बोझ, जिम्मेदारी |
| मंगल | पहल और प्रतियोगिता | नए प्रोजेक्ट की शुरुआत | विवाद और अधीरता |
| गुरु | ज्ञान और मार्गदर्शन | अच्छे सलाहकार और अवसर | निर्णय में ढिलाई |
अब इन ग्रहों के गोचर को करियर के संदर्भ में विस्तार से देखा जा सकता है।
सूर्य आत्मा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। जब सूर्य का गोचर किसी व्यक्ति की कुंडली में अनुकूल भाव से गुज़रता है तो भीतर से एक नया भरोसा महसूस होता है। बैठकों में बोलने में झिझक कम हो जाती है। जिम्मेदारी लेने का मन करता है। कई बार इसी समय प्रमोशन इंटरव्यू या पद परिवर्तन के अवसर सामने आते हैं।
यदि सूर्य प्रतिकूल स्थिति में गोचर कर रहा हो तो उलट स्थिति दिखाई दे सकती है। निर्णय लेने में संदेह बढ़ जाता है। काम करते हुए थकान जल्दी महसूस होती है। आलोचना का असर बहुत गहरा जाता है। ऐसे समय में सूर्य से जुड़े कुछ साधारण उपाय जैसे सुबह सूर्य को जल अर्पित करना सूर्य नमस्कार करना और दिनभर थोड़ा अनुशासन रखना आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक होते हैं। यह गोचर का उपाय करियर के लिए भी सहारा बनता है।
बुध का गोचर सीधे सोचने बोलने लिखने और सुनने की क्षमता पर असर डालता है। करियर में यह प्रभाव इंटरव्यू मीटिंग ईमेल और प्रस्तुतियों के माध्यम से दिखाई देता है। अनुकूल बुध गोचर में शब्द स्पष्ट रूप से निकलते हैं। विचारों को क्रमबद्ध करना आसान होता है। व्यापारिक सौदे अपेक्षा से बेहतर बन सकते हैं।
बुध का प्रतिकूल गोचर अक्सर संचार में रुकावटें बढ़ा देता है। संदेश गलत समझे जाते हैं। ध्यान भटकता है। दस्तावेज़ों में त्रुटियां बढ़ती हैं। इस समय यदि व्यक्ति खास ध्यान से पढ़े और बोले तो बहुत सी समस्याओं से बचा जा सकता है। हरे रंग के वस्त्र या भोजन का संतुलित उपयोग और शांत मन से निर्णय लेना बुध गोचर के प्रभाव को कोमल करने वाले गोचर का उपाय माने जा सकते हैं।
शनि का गोचर करियर के लिए सबसे अधिक गहरा माना जाता है क्योंकि यह ग्रह स्थायित्व और कर्म को संचालित करता है। जब शनि अनुकूल भावों से गुजरता है तो भले ही परिणाम धीरे आएं पर जो बनता है वह लंबे समय तक टिकता है। व्यक्ति में जिम्मेदारी की समझ और भी मजबूत हो जाती है। संस्थान या संगठन को भी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कायम करने में आसानी होती है।
प्रतिकूल शनि गोचर के समय पद में रुकावट या काम में बोझ अधिक हो सकता है। पर यही समय कौशल सीखने और धैर्य की परीक्षा के रूप में देखा जाए तो आगे चलकर यही अनुभव करियर का सबसे बड़ा आधार बनते हैं। जरूरतमंदों की सहायता करना ईमानदार मेहनत करना और अनैतिक shortcuts से दूर रहना शनि सम्बन्धी गोचर का उपाय के रूप में करियर को सुरक्षित रखता है।
मंगल अनुकूल गोचर में प्रतियोगिता और चुनौती से जुड़े क्षेत्रों के लिए वरदान की तरह होता है। सेना पुलिस खेल स्टार्टअप या किसी भी क्षेत्र में जहाँ तेज निर्णय और साहस की आवश्यकता हो वहाँ मंगल का अनुकूल गोचर नई ऊँचाइयाँ दे सकता है।
गुरु का गोचर ज्ञान और दृष्टिकोण को बढ़ाता है। शिक्षा अनुसंधान अध्यापन कंसल्टेंसी जैसे क्षेत्रों में गुरु अनुकूल हो तो मार्गदर्शक सही समय पर मिल जाते हैं। करियर दिशा को सुधारने के अवसर सामने आते हैं। कठिन परिस्थिति में भी सही निर्णय संभव हो पाता है।
इन दोनों ग्रहों के गोचर का प्रभाव सकारात्मक हो तब व्यक्ति को चाहिए कि नए प्रोजेक्ट या कोर्स की शुरुआत में अधिक देर न करे। यही समय है जब गोचर का प्रभाव आगे बढ़ने में सहायक बन सकता है।
गोचर का प्रभाव जब अधिक महसूस होने लगे तो केवल डरना या सब कुछ भाग्य पर छोड़ देना उचित नहीं है। ग्रह बदलाव का संकेत देते हैं और गोचर का उपाय वह पुल है जो स्थिति को संभालने में मदद करता है।
इन उपायों से गोचर का प्रभाव दिशा पाता है और व्यक्ति धीरे धीरे समय के साथ तालमेल बैठा पाता है।
जब कोई व्यक्ति समझ लेता है कि गोचर का प्रभाव कैसे काम करता है तो कई प्रकार की उलझनें स्वयं ही कम हो जाती हैं। हर उतार चढ़ाव को केवल अपनी गलती या अपनी योग्यता की कमी के रूप में देखना बंद हो जाता है। यह समझ आती है कि समय की लहरें भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।
यह समझ भाग्य के भरोसे बैठा देने के लिए नहीं बल्कि सही प्रयास करने के लिए है। शुभ गोचर से अधिकतम लाभ उठाना और कठिन गोचर के समय स्वयं को संभालकर चलना यही ज्योतिष का वास्तविक उपयोग है। इस दृष्टिकोण से ग्रहों का गोचर तनाव का कारण नहीं बल्कि आत्म विकास का सहायक बन जाता है।
गोचर का प्रभाव कब से महसूस होने लगता है
धीमी गति वाले ग्रह जैसे शनि गुरु राहु और केतु का प्रभाव महीनों पहले से महसूस होने लगता है। तेज ग्रह जैसे चंद्र मंगल बुध कुछ ही दिनों में असर दिखा सकते हैं।
क्या केवल गोचर देखकर निर्णय लेना सही है
केवल गोचर देखने से संकेत मिलते हैं। सही निर्णय के लिए जन्म कुंडली और चल रही दशा को साथ लेकर देखना अधिक उचित होता है।
क्या गोचर का उपाय करने से कठिन समय पूरी तरह टल जाता है
उपाय से कठिनाई की तीव्रता कम हो सकती है और मन मजबूत हो सकता है। पर जो सीख आवश्यक है वह किसी न किसी रूप में आएगी ही। उपाय उस सीख को सहज रूप से स्वीकारने में मदद करते हैं।
मानसिक तनाव बढ़ जाए तो क्या केवल ज्योतिषीय उपाय काफी हैं
यदि तनाव बहुत अधिक हो तो चिकित्सा परामर्श और काउंसलिंग भी आवश्यक है। ज्योतिषीय उपाय मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर सहारा दे सकते हैं पर चिकित्सा की जगह नहीं लेते।
गोचर का प्रभाव हर व्यक्ति पर समान होता है या कुंडली पर निर्भर करता है
गोचर समान राशि पर तो समान होता है पर हर कुंडली में राशि अलग भाव में बैठती है। इसलिए एक ही गोचर किसी के लिए करियर में परिवर्तन लाएगा तो किसी के लिए परिवार या स्वास्थ्य में बदलाव।
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