By पं. अमिताभ शर्मा
जानिए कैसे शनि का चौथे भाव में होना आपकी भावनात्मक स्थिरता, पारिवारिक सुख और करियर को प्रभावित करता है

चौथा भाव माँ भावनाएं मानसिक शांति घर संपत्ति और बचपन से जुड़ा होता है। इस भाव में शनि जैसे गंभीर और न्यायप्रिय ग्रह का स्थान जातक के जीवन में स्थिरता का निर्माण करता है लेकिन प्रारंभिक जीवन में बाधाएं भी दे सकता है। शनि यहाँ जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण पाठ सिखाता है: “भावनाओं में गहराई और कर्म में जिम्मेदारी।”
कुंडली का पंचम भाव: विद्या, संतान और पूर्व जन्म के पुण्य का प्रतीक
शुरुआती संघर्ष लेकिन बाद में स्थिरता।
रियल एस्टेट कृषि सामाजिक सेवा शिक्षा भूमि वाहन व्यापार सरकार और परोपकार से जुड़े क्षेत्र अनुकूल रहते हैं।
मानसिक थकान अवसाद हड्डियों के रोग पाचन और हृदय संबंधी समस्याएं यदि अन्य ग्रह भी अशुभ हों।
ॐ शं शनैश्चराय नमः
हनुमान चालीसा
काले तिल तेल लोहा और कंबल का दान।
कौवों को रोटी डालना पितृ संतोष हेतु शुभ।
धैर्य संतुलन और घर परिवार के साथ संवाद बनाए रखें।
ध्यान और योग से भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है।
शनि चौथे भाव में जीवन को गहराई से परखना सिखाता है।
यह स्थिति कहती है: “सच्चा घर वह है जहां शांति और प्रेम हो।”
कठिनाइयों से ही परिपक्वता और जिम्मेदारी जन्म लेती है।
क्या चौथे भाव में शनि हमेशा पारिवारिक तनाव देता है?
यदि शनि अशुभ हो तो हाँ, लेकिन शुभ स्थिति में परिवार अत्यंत सहयोगी होता है।
क्या माँ के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है?
हाँ माता के स्वास्थ्य या उनसे दूरी के योग बन सकते हैं।
क्या संपत्ति लाभ मिलता है?
दीर्घकाल में अवश्य लाभ मिलता है, शुरुआत में कठिनाइयाँ संभव।
क्या मानसिक तनाव बढ़ता है?
हाँ शनि भावनात्मक गहराई देता है जो कभी तनाव में बदल सकती है।
क्या उपाय करने से प्रभाव कम होता है?
नियमित मंत्र दान और संयमित जीवन से शनि अत्यंत अनुकूल हो जाता है।
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