By पं. नीलेश शर्मा
क्षीरसागर की महालक्ष्मी चार श्वेत गजों का अभिषेक और शुक्र ग्रह के अकूत ऐश्वर्य का संपूर्ण रहस्य

सनातन वैदिक परंपरा और शाक्त श्रीकुल आगम दर्शन में आद्याशक्ति भगवती महामाया के दस महाविद्या स्वरूपों में दशम और पूर्णता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजित माता कमला का प्राकट्य असीम ऐश्वर्य भौतिक समृद्धि दरिद्रता के समूल नाश और परम आध्यात्मिक पोषण का सर्वोच्च शिखर है। वैदिक ज्योतिष तथा तत्व विज्ञान के अंतर्गत सौरमंडल के सर्वाधिक शुभ सौंदर्य व ऐश्वर्य प्रदाता शुक्र देव के समस्त दोषों को शांत करने तथा जन्म कुंडली के द्वितीय भाव संचित धन व कुटुंब तथा एकादश भाव नियमित आय व लाभ को जाग्रत करने के लिए भगवती कमला की उपासना को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जब जातक की जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह नीच राशि कन्या में स्थित होकर अथवा पाप ग्रहों से पीड़ित होकर घोर दरिद्र योग ऋण संकट व्यापार में भारी घाटा अथवा दांपत्य कलह उत्पन्न कर रहा हो तब क्षीरसागर की स्वामिनी माँ कमला की शरण में जाने से सभी 64 प्रकार के ऐश्वर्य और स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। शरद पूर्णिमा दीपावली और इस पावन साधना की तिथि समय तथा शास्त्रीय घटकों का संपूर्ण विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।
| शास्त्रीय आयाम | अनुष्ठान विवरण और ज्योतिषीय मान्यता |
|---|---|
| प्रमुख पावन तिथि | आश्विन मास की शरद पूर्णिमा कार्तिक कृष्ण अमावस्या अथवा प्रत्येक मास का शुक्रवार |
| दैनिक पूजन समय | प्रातः कालीन सूर्योदय वेला अथवा सायंकालीन गोधूलि प्रदोष काल |
| अधिष्ठाता स्वरूप | पूर्ण विकसित कमल पर विराजमान चार श्वेत गजों द्वारा स्वर्ण कलश से अभिषिक्त देवी |
| ज्योतिषीय ग्रह व भाव संबंध | द्वितीय भाव एकादश भाव ऐश्वर्य कारक शुक्र देव और रोहिणी व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र |
| मुख्य पूजन सामग्री | श्वेत व गुलाबी कमल पुष्प गाय का शुद्ध घी केसर युक्त खीर मखाने और कमलगट्टे की माला |
| प्रधान वैदिक अनुष्ठान | श्री सूक्त पाठ कनकधारा स्तोत्र लक्ष्मी सूक्त और ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः जप |
| अपेक्षित फल | घोर दरिद्र योग शांति स्थायी लक्ष्मी वास 64 ऐश्वर्यों की प्राप्ति और अकूत धन लाभ |
श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण के अत्यंत पावन आख्यानों के अनुसार प्राचीन काल में एक बार देवराज इंद्र के प्रमाद और अहंकार के कारण महर्षि दुर्वासा ने देवताओं को श्री हीन होने का भयंकर शाप दे दिया था। उस शाप के प्रभाव से स्वर्ग की समस्त संपदा माता लक्ष्मी और तीनों लोकों का वैभव समुद्र की अतल गहराइयों में समा गया। देवता निर्बल हो गए और दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। तब भगवान श्री हरि विष्णु के परामर्श पर देवताओं और दानवों ने मिलकर मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को नेती बनाकर क्षीरसागर का विशाल समुद्र मंथन आरंभ किया।
उस महामंथन से जब हलाहल विष और अनेक दिव्य रत्न निकले तब समुद्र के मध्य से एक अत्यंत अलौकिक सुगंध और स्वर्णिम प्रकाश प्रस्फुटित हुआ। उस दिव्य प्रकाश पुंज के मध्य एक सहस्र पंखुड़ियों वाले पूर्ण विकसित कमल के ऊपर साक्षात जगत जननी माँ कमला प्रकट हुईं। उनका शारीरिक वर्ण प्रातः कालीन उदित होते हुए सूर्य के समान स्वर्णिम था। उनके अंगों से निकलने वाली कांति समस्त ब्रह्मांड को प्रकाशित कर रही थी। उनके मुखमंडल पर असीम वात्सल्य और मंद मुस्कान थी।
जैसे ही भगवती कमला प्रकट हुईं वैसे ही दिशाओं के दिग्गजों ने उनकी वंदना की। स्वर्ग की अप्सराएं नृत्य करने लगीं और गंधर्वों ने नाद ब्रह्म का गान किया। महर्षियों ने वैदिक ऋचाओं से माता का स्तवन किया। माता कमला ने अपने हाथों में दो खिले हुए कमल पुष्प धारण कर रखे थे और उनके अन्य दो हाथ वरद और अभय मुद्रा में स्थित थे जो संपूर्ण ब्रह्मांड को अभय और समृद्धि प्रदान कर रहे थे। उन्होंने देवताओं और असुरों की विशाल सभा में केवल भगवान विष्णु का वरण किया और उनके वक्षस्थल पर वैजयंती माला अर्पित करके उनके हृदय में स्थायी निवास स्थापित किया।
शाक्त प्रतिमा विज्ञान और तंत्र चित्रों में भगवती कमला का विग्रह अत्यंत मनोहारी भव्य और गहरा दार्शनिक संदेश देने वाला है। देवी के चारों ओर चार विशाल श्वेत गज अर्थात हाथी खड़े हैं जो अपनी सूंड में रत्नों और सोने से जड़े हुए स्वर्ण कलश लेकर देवी का निरंतर पावन जल और अमृत से अभिषेक कर रहे हैं।
यह दृश्य केवल एक बाह्य चित्रण नहीं है अपितु यह सनातन दर्शन के सर्वोच्च सत्यों को उद्घाटित करता है। चार श्वेत हाथी मानव जीवन के चार परम पुरुषार्थों धर्म अर्थ काम और मोक्ष के साक्षात प्रतीक हैं।
हाथियों द्वारा स्वर्ण कलश से किया जाने वाला निरंतर अभिषेक यह दर्शाता है कि जिस व्यक्ति के जीवन में माँ कमला की कृपा होती है उसके घर में दैवीय ऊर्जा ज्ञान और धन का प्रवाह कभी नहीं रुकता। श्वेत वर्ण पवित्रता और सात्विकता का सूचक है जो यह स्पष्ट करता है कि अनीति छल और अधर्म से कमाया गया धन कभी स्थायी नहीं हो सकता। शुद्ध आचरण से अर्जित लक्ष्मी ही साधक के कुल में पीढ़ियों तक स्थिर रहती है।
शाक्त आगम परंपरा में 10 महाविद्याओं की यात्रा चेतना के क्रमिक विकास का अत्यंत वैज्ञानिक मार्ग है। प्रथम महाविद्या भगवती महाकाली से यह यात्रा आरंभ होती है जो काल संहार और अज्ञान के अंधकार को नष्ट करने वाली शक्ति हैं। इसके पश्चात तारा भुवनेश्वरी और त्रिपुरसुंदरी जैसी देवियों से होते हुए यह साधना जब अपने अंतिम सोपान पर पहुंचती है तब दशम महाविद्या के रूप में भगवती कमला का साक्षात्कार होता है।
महाकाली यदि बीज हैं तो माँ कमला उस बीज से उत्पन्न हुआ पूर्ण पल्लवित और पुष्पों से लदा हुआ विशाल कल्पवृक्ष हैं। महाकाली वैराग्य और संहार का रूप हैं जबकि माँ कमला संपूर्ण ऐश्वर्य और जीवन के आनंद का उत्सव हैं।
वैदिक ज्योतिष के महान आधार ग्रंथ बृहत् पराशर होरा शास्त्र में ग्रहों के ऐश्वर्य और धन भावों का अत्यंत सूक्ष्म विवेचन मिलता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से माँ कमला सीधे तौर पर शुक्र ग्रह और जन्म कुंडली के द्वितीय भाव तथा एकादश भाव की सर्वोच्च अधिष्ठात्री महाशक्ति हैं।
शुक्र देव को ज्योतिष में भौतिक सुख साधन वाहन आभूषण सौंदर्य कला कामुकता और जीवन के समस्त आनंदों का अधिपति माना गया है। वहीं दूसरी ओर जन्म कुंडली का द्वितीय भाव संचित धन कोष कुटुंब और वाणी का केंद्र है जबकि एकादश भाव लाभ नियमित आमदनी और समस्त कामनाओं की सिद्धि का स्थान है।
आधुनिक युग में मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह निरंतर आर्थिक असुरक्षा और ऋण के बोझ तले दबा हुआ जीवन व्यतीत करता है। कई बार व्यापार में अचानक भारी मंदी आ जाती है नौकरी छूट जाती है अथवा संचित पूंजी नष्ट हो जाती है। व्यक्ति अनेक उपाय करता है किंतु जब तक उसके कर्मों की दरिद्रता समाप्त नहीं होती तब तक लक्ष्मी का स्थायी वास नहीं हो पाता।
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि दरिद्रता केवल धन का अभाव नहीं है अपितु वह अंतःकरण की एक नकारात्मक ऊर्जा है जिसे अलक्ष्मी कहा जाता है। माँ कमला साक्षात अलक्ष्मी का संहार करने वाली पराशक्ति हैं। जिस प्रकार सूर्य के उदय होते ही घोर अंधकार का अस्तित्व समाप्त हो जाता है उसी प्रकार जब साधक के घर में श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र की ध्वनि गूंजती है तब वहाँ से दरिद्रता रूपी अंधकार सदा के लिए पलायन कर जाता है। माँ कमला अपने साधक को कभी किसी के सामने हाथ फैलाने नहीं देतीं और उसे समाज में राजा के समान मान सम्मान और वैभव प्रदान करती हैं।
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह पीड़ित हो घोर आर्थिक संकट चल रहा हो कर्ज का बोझ निरंतर बढ़ रहा हो अथवा व्यापार ठप हो गया हो तो शास्त्रों में माँ कमला की प्रसन्नता हेतु अत्यंत प्रामाणिक वैदिक उपाय बताए गए हैं।
| क्या अवश्य करें | किन गलतियों से सर्वथा दूर रहें |
|---|---|
| प्रतिदिन प्रातः काल और सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं | घर के भीतर कभी भी अंधेरा दुर्गंध अथवा गंदगी जमा न होने दें |
| माँ कमला को सदैव ताजे कमल पुष्प केसर की खीर और मखाने अर्पित करें | स्त्रियों कन्याओं और माता का कभी भी अनादर अथवा अपमान न करें |
| शुक्रवार के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य स्वच्छता और सात्विक फलाहार का पालन करें | तामसिक भोजन मदिरा जुआ और किसी भी अनैतिक आचरण से सर्वथा दूर रहें |
| अपने धन का कुछ अंश सदैव अनाथों निर्धनों और गौशालाओं में दान करें | अपने धन संपत्ति अथवा आभूषणों का समाज में कभी भी झूठा अहंकार न करें |
| पूजा में शुद्ध गाय के घी का दीपक और कमलगट्टे की माला का ही प्रयोग करें | बिना सोचे समझे किसी से कटु वचन बोलने अथवा छल कपट करने से बचें |
भगवती कमला का पावन अवतार संपूर्ण मानव जाति को यह सनातन शिक्षा प्रदान करता है कि सांसारिक संपदा और समृद्धि का तिरस्कार करना धर्म नहीं है अपितु उसे पवित्र और ईश्वरीय बनाकर जीना ही सच्चा अध्यात्म है। धन अपने आप में बुरा नहीं है यदि वह धर्म और सेवा के मार्ग पर लगाया जाए तो वही धन साक्षात लक्ष्मी बन जाता है। चार गजों का अभिषेक हमें यह सिखाता है कि जब हमारे विचार वाणी कर्म और संकल्प चारों दिशाओं से पवित्र हो जाते हैं तब परमात्मा का संपूर्ण ऐश्वर्य हमारे जीवन में उतर आता है। कीचड़ में खिले कमल की भांति जो मनुष्य संसार के विकारों से अछूता रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है उसके घर में स्थायी लक्ष्मी का वास सदा के लिए हो जाता है। माँ कमला का नित्य स्मरण मनुष्य के जीवन से समस्त दरिद्रता कर्ज और हीन भावना को समाप्त करके उसे 64 प्रकार के ऐश्वर्यों से परिपूर्ण एक तेजस्वी धर्मनिष्ठ और सम्मानित व्यक्तित्व बनाकर अंततः मोक्ष की प्राप्ति कराता है।
माँ कमला को दसमहाविद्याओं में कौन सा स्थान प्राप्त है? माँ कमला शाक्त आगम और तंत्र परंपरा के अंतर्गत दसमहाविद्याओं में दशम अर्थात अंतिम महाविद्या के रूप में पूजित हैं जो साधना की पूर्णता का प्रतीक हैं।
माँ कमला के दोनों ओर खड़े चार श्वेत हाथियों का क्या रहस्य है? चार श्वेत हाथी मानव जीवन के चार परम पुरुषार्थों धर्म अर्थ काम और मोक्ष के प्रतीक हैं जो स्वर्ण कलश से अमृत रूपी संपदा की निरंतर वर्षा करते हैं।
ज्योतिष में माँ कमला का संबंध किन प्रमुख भावों और ग्रहों से है? वैदिक ज्योतिष में माँ कमला का सीधा संबंध सौंदर्य व ऐश्वर्य के कारक शुक्र ग्रह और जन्म कुंडली के द्वितीय भाव संचित धन व एकादश भाव लाभ से है।
घोर आर्थिक दरिद्रता और कर्ज मुक्ति के लिए किस स्तोत्र का पाठ सर्वश्रेष्ठ है? आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति पाने हेतु प्रतिदिन प्रातः काल आदि शंकराचार्य विरचित कनकधारा स्तोत्र और श्री सूक्त का पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
माँ कमला और सामान्य महालक्ष्मी स्वरूप में क्या मुख्य अंतर है? माँ कमला महालक्ष्मी का ही सर्वोच्च तांत्रिक और स्वतंत्र विग्रह हैं जो पूर्ण विकसित कमल पर बैठकर साधक को तांत्रिक सिद्धि और भौतिक ऐश्वर्य दोनों प्रदान करती हैं।
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