By अपर्णा पाटनी
100 वर्षों के सूखे का अंत शताक्षी के नयन और रोहिणी नक्षत्र के अन्न पोषण का संपूर्ण वैदिक रहस्य

सनातन वैदिक परंपरा और शाक्त आगम दर्शन में आद्याशक्ति भगवती महामाया के अत्यंत करुणामयी वात्सल्यमयी और संहारक स्वरूप के रूप में पूजित माता शाकंभरी का प्राकट्य अकाल निवारण समस्त जीवों के प्राण पोषण 100 वर्षों के भीषण सूखे के अंत और चेतना के परम जागरण का सर्वोच्च शिखर है। वैदिक ज्योतिष तथा तत्व विज्ञान के अंतर्गत जल तत्व के अधिपति और मन के कारक चंद्र देव के समस्त दोषों को शांत करने पोषण व कृषि के कारक रोहिणी नक्षत्र के शुभ प्रभाव को जाग्रत करने तथा जन्म कुंडली के द्वितीय भाव संचित धन व अन्न तथा चतुर्थ भाव भूमि व कृषि संपदा के दोषों को नष्ट करने के लिए भगवती शाकंभरी की उपासना को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जब जातक की जन्म कुंडली में चंद्रमा नीच राशि वृश्चिक में स्थित होकर अथवा पाप ग्रहों से पीड़ित होकर अन्न संकट धन हानि अकाल मृत्यु का भय मानसिक अवसाद अथवा कृषि कार्यों में भारी नुकसान उत्पन्न कर रहा हो तब शत नयनों से अमृत वर्षा करने वाली माँ शाकंभरी की शरण में जाने से अमोघ अन्न समृद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से आरंभ होकर पौष पूर्णिमा तक चलने वाले शाकंभरी नवरात्र तथा इस पावन साधना की तिथि समय और शास्त्रीय घटकों का संपूर्ण विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।
| शास्त्रीय आयाम | अनुष्ठान विवरण और ज्योतिषीय मान्यता |
|---|---|
| प्रमुख पावन तिथि | पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा शाकंभरी जयंती अथवा पौष नवरात्र |
| दैनिक पूजन समय | प्रातः कालीन सूर्योदय वेला अथवा सायंकालीन गोधूलि वेला |
| अधिष्ठाता स्वरूप | शत नयनों वाली हरित वर्णा शाक फल कंद मूल और बाण धारिणी माँ शाकंभरी |
| ज्योतिषीय ग्रह व भाव संबंध | द्वितीय भाव चतुर्थ भाव जल व मन कारक चंद्र देव और रोहिणी नक्षत्र |
| मुख्य पूजन सामग्री | ताजी हरी सब्जियां मौसमी फल 64 प्रकार की औषधियां गंगाजल और कच्चा दूध |
| प्रधान वैदिक अनुष्ठान | श्रीदुर्गा सप्तशती मूर्ति रहस्य पाठ शताक्षी कवच और ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं शाकंभर्यै नमः जप |
| अपेक्षित फल | अकाल व दरिद्रता का नाश अन्न धान्य प्रचुरता चंद्र दोष शांति और पोषण |
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण और श्रीदुर्गा सप्तशती के मूर्ति रहस्य के अत्यंत पावन इतिहास के अनुसार प्राचीन काल में रुरु वंश में दुर्गम नामक एक अत्यंत भयानक और क्रूर दैत्य उत्पन्न हुआ जिसे संसार दुर्गमासुर के नाम से जानता है। उसने विचार किया कि समस्त देवताओं की शक्ति का मूल आधार वेदों में वर्णित यज्ञ और आहुतियां हैं। यदि पृथ्वी से वेदों और मंत्रों का लोप कर दिया जाए तो देवता स्वतः शक्तिहीन होकर नष्ट हो जाएंगे। इस कुत्सित विचार के साथ दुर्गमासुर ने हिमालय के एकांत शिखर पर जाकर परमपिता ब्रह्मा जी की 1000 वर्षों तक अत्यंत कठोर तपस्या आरंभ की।
ब्रह्मा जी जब उसकी तपस्या से संतुष्ट होकर प्रकट हुए तब उस धूर्त दैत्य ने यह वरदान मांग लिया कि देवलोक और भूलोक में जितने भी वेद शास्त्र और मंत्र विद्यमान हैं वे सब विस्मृत होकर उसके अधीन हो जाएं और देवताओं का संपूर्ण बल क्षीण हो जाए। ब्रह्मा जी ने एवमस्तु कहकर उसे वरदान दे दिया। वरदान प्राप्त करते ही संपूर्ण ब्रह्मांड से वेदों का ज्ञान विलुप्त हो गया।
भूमि की उर्वरता नष्ट हो गई और नदियां सरोवर तथा कुएं पूरी तरह सूखकर पाषाण बन गए। वनस्पति और वृक्ष जलकर भस्म हो गए जिससे अन्न और जल का घोर अभाव उत्पन्न हो गया। भूख और प्यास की भयानक ज्वाला से व्याकुल होकर लाखों पशु पक्षी और मनुष्य तड़प तड़प कर मरने लगे। संपूर्ण धरा कंकालों के ढेर में परिवर्तित हो गई और सृष्टि के अस्तित्व पर महाविनाश का अंधकार छा गया।
जब भूख और प्यास से व्याकुल जीवित बचे हुए समस्त महर्षि मुनि और तपस्वी अपने जीवन की रक्षा का कोई उपाय न देख सके तब वे अपने प्राण बचाने हेतु हिमालय की दुर्गम और पवित्र कंदराओं में एकत्र हुए। महर्षियों ने विचार किया कि जब समस्त देवता और सांसारिक साधन निष्फल हो जाते हैं तब केवल जगज्जननी आद्याशक्ति भगवती पराशक्ति ही चराचर जगत का उद्धार कर सकती हैं।
समस्त ऋषियों ने हाथ जोड़कर अश्रुपूर्ण नेत्रों से आद्याशक्ति की स्तुति आरंभ की। महर्षियों का वह करुण रुदन और व्याकुल पुकार संपूर्ण अंतरिक्ष में गूंज उठी। ऋषियों की उस दारुण अवस्था और पृथ्वी के समस्त प्राणियों के असहनीय संताप को देखकर कैलाश वासिनी भगवती जगदंबा का कोमल मातृ हृदय द्रवित हो उठा। समस्त चराचर जगत की रक्षा हेतु भगवती पराशक्ति ने एक अत्यंत दिव्य अलौकिक और विस्मयकारी स्वरूप धारण किया।
भगवती के उस दिव्य शरीर पर सहस्रों नहीं अपितु पूरे 100 नेत्र सुशोभित थे। सौ नेत्र धारण करने के कारण ही संपूर्ण ब्रह्मांड में उनका नाम शताक्षी पड़ा। उन 100 पावन नयनों से भगवती ने पृथ्वी के उस भयानक सूखे और मरते हुए प्राणियों को देखा। अपनी संतानों की ऐसी दारुण पीड़ा देखकर माता के उन सौ नेत्रों से करुणा के अश्रुओं की अविरल धारा बहने लगी।
भगवती शताक्षी के नयनों से लगातार 9 रातों तक आंसुओं की मूसलाधार अमृत वर्षा हुई। वह अश्रु जल कोई साधारण जल नहीं था अपितु वह जीवनदायिनी दिव्य शक्ति का साक्षात प्रवाह था। देखते ही देखते पृथ्वी की तपन शांत हो गई नदियां और सरोवर पुनः शीतल जल से लबालब भर गए और 100 वर्षों से चला आ रहा वह भयानक सूखा एक ही क्षण में समाप्त हो गया।
सूखे के समाप्त होने के पश्चात भी पृथ्वी पर अन्न का घोर अभाव बना हुआ था क्योंकि बीज और वनस्पतियां नष्ट हो चुकी थीं। तब दयामयी भगवती शताक्षी ने संपूर्ण मानव जाति और मूक पशु पक्षियों के जीवन की रक्षा हेतु अपने ही दिव्य शरीर से एक और परम चमत्कार प्रकट किया।
भगवती ने अपने पावन अंगों से सहस्रों प्रकार के स्वादिष्ट अन्न पौष्टिक कंद मूल सुस्वादु फल ताजी हरी शाक सब्जियां और जीवन रक्षक दिव्य औषधियां उत्पन्न करना आरंभ किया। देवी के हाथों और शरीर से अमृतमयी शाक का ऐसा अनंत भंडार प्रस्फुटित हुआ जिसने संपूर्ण ब्रह्मांड के प्राणियों की क्षुधा को तत्क्षण शांत कर दिया।
इसके पश्चात जब पापी दुर्गमासुर ने अपनी विशाल आसुरी सेना के साथ देवी पर आक्रमण किया तब माँ शाकंभरी ने अपने तीक्ष्ण बाणों से दुर्गमासुर की अक्षौहिणी सेना का संहार कर दिया। देवी ने अपने त्रिशूल से उस महाबली दैत्य की छाती को चीरकर उसका वध किया और उसके अधिकार से समस्त चारों वेदों को मुक्त कराकर पुनः महर्षियों को सौंप दिया। दुर्गमासुर का संहार करने के कारण ही माता का एक अत्यंत प्रसिद्ध नाम दुर्गा भी हुआ।
वैदिक ज्योतिष के महानतम ग्रंथ बृहत् पराशर होरा शास्त्र में ग्रहों के पोषण कारकत्व और मानव जीवन पर उनके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण मिलता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से माँ शाकंभरी का पावन स्वरूप सीधे तौर पर भगवान चंद्र देव और भचक्र के सर्वाधिक उर्वर नक्षत्र रोहिणी का प्रतिनिधित्व करता है।
चंद्रमा को ज्योतिष में जल तत्व औषधियों के रस मानसिक शांति और मातृत्व का स्वामी माना गया है। रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है जिसके अधिष्ठाता साक्षात प्रजापति ब्रह्मा हैं। रोहिणी नक्षत्र का सीधा संबंध पृथ्वी की उर्वरा शक्ति कृषि विज्ञान बीजों के अंकुरण और हरी वनस्पतियों के पोषण से है।
आधुनिक युग में अनेक परिवार कठोर परिश्रम करने के उपरांत भी निरंतर आर्थिक तंगी ऋण संकट और घर में बरकत न होने की समस्या से पीड़ित रहते हैं। कई बार किसान भाइयों की फसलें प्राकृतिक आपदाओं अथवा सूखे के कारण नष्ट हो जाती हैं जिससे उनका संपूर्ण जीवन संकट में पड़ जाता है।
माँ शाकंभरी साक्षात प्रकृति और कृषि की प्राण शक्ति हैं। जिस प्रकार माता ने अपने शरीर से अन्न और शाक उत्पन्न करके 100 वर्षों के अकाल को दूर किया था उसी प्रकार जो साधक श्रद्धा भाव से माँ शाकंभरी का स्मरण करता है उसके भंडार सदा के लिए भर जाते हैं। यह साधना घर से अकाल मृत्यु भूख और दरिद्रता रूपी दुर्गमासुर को समूल नष्ट कर देती है। जो व्यक्ति होटल रेस्टोरेंट कृषि अनाज के व्यापार अथवा खाद्य पदार्थों के व्यवसाय से जुड़े हैं उनके लिए शाकंभरी साधना व्यवसाय में अभूतपूर्व उन्नति और स्थायी लाभ प्रदान करने वाली सिद्ध होती है।
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में चंद्रमा निर्बल हो घर में निरंतर आर्थिक तंगी रहती हो अथवा अन्न का अपव्यय होता हो तो शास्त्रों में माँ शाकंभरी की प्रसन्नता हेतु अत्यंत प्रामाणिक वैदिक उपाय बताए गए हैं।
| क्या अवश्य करें | किन गलतियों से सर्वथा दूर रहें |
|---|---|
| प्रतिदिन भोजन करने से पूर्व अन्न देवता और माँ शाकंभरी का आभार व्यक्त करें | भोजन की थाली में कभी भी अन्न का एक भी दाना जूठा न छोड़ें |
| घर में आने वाले किसी भी अतिथि अथवा भिक्षुक को कभी भूखा न लौटने दें | बासी सड़ी गली अथवा अशुद्ध सब्जियों को पूजा में अर्पित न करें |
| शाकंभरी नवरात्र और पूर्णिमा के दिन पूर्ण सात्विक और फलाहारी भोजन लें | तामसिक भोजन मदिरा और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से दूर रहें |
| अपने खेत अथवा घर के बगीचे में तुलसी और फलदार वृक्षों का संरक्षण करें | कभी भी किसी निर्बल किसान अथवा मजदूर का पारिश्रमिक न रोकें |
| पूजा में शुद्ध गंगाजल ताजे फल और हरी पत्तेदार शाक ही अर्पित करें | बिना सोचे समझे किसी पर क्रोध करने अथवा अन्न का अनादर करने से बचें |
भगवती शाकंभरी का पावन अवतार संपूर्ण मानव जाति को यह सनातन शिक्षा प्रदान करता है कि प्रकृति और परमात्मा एक दूसरे से भिन्न नहीं हैं। जब मनुष्य प्रकृति का दोहन अपनी वासनाओं की पूर्ति हेतु करने लगता है और वेदों की मर्यादाओं का उल्लंघन करता है तब समाज में अकाल और विनाश का जन्म होता है। माता के 100 नयनों से बहे आंसू हमें यह सिखाते हैं कि सृष्टि का प्रत्येक जीव जगन्माता की संतान है और उनकी रक्षा करना हमारा परम धर्म है। अपने शरीर से अन्न और औषधियां उत्पन्न करके माता ने यह प्रमाणित कर दिया कि सच्चा मातृत्व वही है जो अपने प्राणों का उत्सर्ग करके भी दूसरों की भूख शांत करे। चंद्रमा की शीतलता और रोहिणी नक्षत्र की उर्वरा शक्ति जब मनुष्य के जीवन में उतरती है तब उसके समस्त अभाव दूर हो जाते हैं। माँ शाकंभरी का नित्य स्मरण मनुष्य के जीवन से समस्त भूख दरिद्रता और ग्रह दोषों को समाप्त करके उसे अन्न धान्य से परिपूर्ण एक तेजस्वी सुखी और सम्मानित व्यक्तित्व बनाकर अंततः परम शांति की प्राप्ति कराता है।
माँ शाकंभरी का प्राकट्य किस मुख्य संकट के निवारण हेतु हुआ था? दुर्गमासुर द्वारा वेदों के हरण के पश्चात पृथ्वी पर पड़े 100 वर्षों के भीषण सूखे अकाल और भूख प्यास से तड़पते जीवों के प्राणों की रक्षा हेतु माता का प्राकट्य हुआ था।
माँ जगदंबा को शताक्षी नाम किस कारण से दिया गया था? अकाल के समय समस्त मुनियों की पुकार सुनकर देवी ने अपने शरीर पर 100 नयन धारण किए थे जिनसे 9 रातों तक आंसुओं की वर्षा हुई इसलिए उन्हें शताक्षी कहा गया।
देवी को शाकंभरी क्यों कहा जाता है? अपने पावन शरीर से अन्न फल कंद मूल और जीवन रक्षक शाक सब्जियां उत्पन्न कर संसार की भूख शांत करने के कारण देवी को शाकंभरी कहा जाता है।
ज्योतिष में माँ शाकंभरी का संबंध किस ग्रह और नक्षत्र से माना जाता है? वैदिक ज्योतिष में माँ शाकंभरी का सीधा संबंध जल व मन के कारक चंद्र देव और कृषि व पोषण के अधिष्ठाता रोहिणी नक्षत्र से माना जाता है।
अन्न संकट और घर की दरिद्रता दूर करने हेतु किस मंत्र का जाप करना चाहिए? घर में अन्न की प्रचुरता और दरिद्रता नाश हेतु प्रतिदिन ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं शाकंभर्यै नमः अथवा शाकंभरी स्तोत्र का 108 बार जाप करना सर्वोत्तम माना गया है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ