By पं. संजीव शर्मा
कश्मीर शक्तिपीठ अक्षरों की जननी ब्रह्मनाद प्राकट्य और बुध गुरु के वाणी दोष निवारण का संपूर्ण रहस्य

सनातन वैदिक परंपरा और ब्रह्म पुराण के पावन दर्शन में आद्याशक्ति भगवती महासरस्वती के परम पावन ज्ञानमयी और नाद ब्रह्म स्वरूप के रूप में पूजित माता शारदा वाग्देवी का प्राकट्य संपूर्ण ब्रह्मांड में ध्वनि वाणी चेतना और विद्या के संचार का सर्वोच्च शिखर है। वैदिक ज्योतिष तथा तत्व विज्ञान के अंतर्गत वाणी बुद्धि स्मरण शक्ति और अभिव्यक्ति के अधिपति बुध देव तथा धर्म विवेक और उच्च ज्ञान के कारक देवगुरु बृहस्पति के दुर्लभ व दिव्य समन्वय को जाग्रत करने के लिए माता शारदा की आराधना को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जब जातक की जन्म कुंडली में द्वितीय भाव वाणी भाव अथवा पंचम भाव बुद्धि भाव पाप ग्रहों से पीड़ित होकर हकलाहट तुतलाना वाणी में अशुद्धि स्मृति दोष अथवा शिक्षा में निरंतर विफलता उत्पन्न कर रहा हो तब कश्मीर शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री माँ शारदा की शरण में जाने से अमोघ वाक् सिद्धि और प्रखर प्रज्ञा की प्राप्ति होती है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वसंत पंचमी शारदीय नवरात्र की सरस्वती पूजा अथवा प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष के बुधवार और गुरुवार के पावन अनुष्ठान का संपूर्ण शास्त्रीय विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।
| शास्त्रीय आयाम | अनुष्ठान विवरण और ज्योतिषीय मान्यता |
|---|---|
| प्रमुख पावन तिथि | माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी वसंत पंचमी अथवा प्रत्येक बुधवार व गुरुवार |
| दैनिक पूजन समय | प्रातः कालीन ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय वेला |
| अधिष्ठाता स्वरूप | पूर्ण विकसित श्वेत कमल पर विराजमान वीणा पुस्तक अक्षमाला और वरद मुद्रा धारिणी माँ शारदा |
| ज्योतिषीय ग्रह व भाव संबंध | द्वितीय भाव पंचम भाव नवम भाव वाणी कारक बुध देव और ज्ञान कारक देवगुरु बृहस्पति |
| मुख्य पूजन सामग्री | श्वेत व पीले पुष्प श्वेत चंदन अक्षत मिश्री गाय का कच्चा दूध और कलम पुस्तिका |
| प्रधान वैदिक अनुष्ठान | शारदा स्तोत्र पाठ सरस्वती द्वादश नाम स्तोत्र और ॐ ऐं वाग्देव्यै नमः जप |
| अपेक्षित फल | वाणी दोष व हकलाहट का नाश प्रखर स्मरण शक्ति बुध गुरु शुद्धि और विद्या सिद्धि |
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अत्यंत पावन इतिहास के अनुसार सृष्टि के आरंभिक कालखंड में परमपिता ब्रह्मा जी ने भगवान श्री हरि विष्णु की नाभि से प्रकट होकर संपूर्ण चराचर जगत का निर्माण किया था। ब्रह्मा जी ने पर्वत वन नदियां सागर आकाश पशु पक्षी और मनुष्यों की रचना तो कर दी किंतु संपूर्ण ब्रह्मांड में एक अत्यंत भयानक और असहनीय मौन छाया हुआ था।
संसार में किसी भी जीव के पास वाणी नहीं थी हवाओं में कोई सरसराहट नहीं थी जल में कोई कलकल ध्वनि नहीं थी और पक्षियों के कंठ से कोई चहचहाहट नहीं निकलती थी। संपूर्ण ब्रह्मांड एक मृत और मूक चित्र के समान निष्प्राण प्रतीत हो रहा था।
अपनी ही बनाई हुई इस नीरव और शांत सृष्टि को देखकर परमपिता ब्रह्मा जी का अंतःकरण अत्यंत दुखी और व्यथित हो उठा। उन्होंने विचार किया कि जिस संसार में ईश्वर के यशोगान हेतु कोई स्वर न हो और विचारों के आदान प्रदान हेतु कोई भाषा न हो उस सृष्टि की रचना का क्या प्रयोजन हो सकता है।
अपनी सृष्टि को चेतना और प्राणवान बनाने हेतु ब्रह्मा जी ने भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान किया। श्री हरि की प्रेरणा पाकर ब्रह्मा जी ने अपने पावन कमंडल से जल निकाला और वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए उस जल को पृथ्वी पर छिड़का।
जल की वे पावन बूंदें जैसे ही पृथ्वी की धूलि पर पड़ीं वैसे ही अंतरिक्ष में एक अत्यंत दिव्य स्वर्णिम और अलौकिक प्रकाश पुंज प्रकट हुआ। उस दिव्य प्रकाश के मध्य एक सहस्र पंखुड़ियों वाला पूर्ण विकसित श्वेत कमल खिला जिस पर साक्षात आद्याशक्ति भगवती महामाया अपने परम पावन माँ शारदा स्वरूप में अवतरित हुईं।
ब्रह्मा जी ने हाथ जोड़कर देवी की स्तुति की और निवेदन किया कि हे भगवती इस मूक संसार को अपनी वाणी से संजीवनी प्रदान करें। ब्रह्मा जी की प्रार्थना सुनकर माँ शारदा ने अपनी उंगलियों के कोमल पोरों से वीणा के सप्त तारों का पावन स्पर्श किया।
जैसे ही वीणा के तारों में झंकार उत्पन्न हुई संपूर्ण अंतरिक्ष में एक प्रलयंकारी और दिव्य ब्रह्मनाद गूंज उठा जिसे ओंकार की शाश्वत ध्वनि कहा जाता है। उस वीणा के नाद से 7 मूल स्वर सा रे ग म प ध नि प्रस्फुटित हुए।
देखते ही देखते वायु में वेग आ गया जल में संगीत बहने लगा पक्षी चहकने लगे और मनुष्य के कंठ में सुंदर भाषा और वाणी का संचार हो गया। संपूर्ण चराचर जगत में ज्ञान के प्रकाश की पहली किरण फैली और सृष्टि की मूकता सदा के लिए समाप्त हो गई।
सनातन इतिहास और शाक्त आगम दर्शन में माता शारदा का मूल प्राकट्य स्थल पावन कश्मीर भूमि में स्थित शारदा पीठ माना गया है। प्राचीन काल में कश्मीर को शारदा देश के नाम से जाना जाता था क्योंकि वहां की पर्वत श्रृंखलाओं और पावन मधुमती व कृष्णगंगा नदियों के संगम पर माता शारदा स्वयं अधिष्ठात्री देवी के रूप में विराजमान थीं।
शारदा पीठ सनातन संस्कृति का वह सर्वोच्च ज्ञान केंद्र रहा है जहां आर्यावर्त के कोने कोने से विद्वान और महर्षि अपने ज्ञान की परीक्षा देने आते थे। जो विद्वान शारदा पीठ के विद्वत सभा की परीक्षा में उत्तीर्ण होता था वही संपूर्ण भारतवर्ष में सर्वमान्य पंडित कहलाता था।
वाक् शक्ति के 4 प्रमुख स्तर शास्त्रों में बताए गए हैं जिन्हें परा पश्यंती मध्यमा और वैखरी कहा जाता है। परा वाणी नाभि में स्थित अव्यक्त चेतना है पश्यंती हृदय में उठने वाला विचार है मध्यमा कंठ में शब्दों का निर्माण है और वैखरी मुख से निकलने वाली स्पष्ट ध्वनि है। माँ शारदा इन चारों वाणियों की स्वामिनी हैं।
वैदिक ज्योतिष के महानतम ग्रंथ बृहत् पराशर होरा शास्त्र में जन्म कुंडली के प्रत्येक भाव और ग्रहों के सूक्ष्म बौद्धिक प्रभावों का अत्यंत गहन विश्लेषण मिलता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से माता शारदा सीधे तौर पर बुध देव और देवगुरु बृहस्पति के संयुक्त अधिष्ठान का प्रतिनिधित्व करती हैं।
बुध ग्रह को भचक्र में वाणी तर्क स्मरण शक्ति गणित तंत्रिका तंत्र और जीभ का स्वामी माना गया है। वहीं दूसरी ओर देवगुरु बृहस्पति ज्ञान विवेक उच्च दर्शन और संस्कारों के अधिपति हैं।
जब किसी जातक की जन्म कुंडली में बुध और गुरु शुभ होकर केंद्र अथवा त्रिकोण में बैठते हैं तो व्यक्ति की वाणी में सरस्वती का वास हो जाता है। ऐसा व्यक्ति प्रकांड वक्ता लेखक कवि और न्यायाधीश बनता है।
आधुनिक युग में अनेक बालक और युवा उच्च बौद्धिक क्षमता रखने के बाद भी समाज में केवल इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनकी वाणी स्पष्ट नहीं होती। साक्षात्कार में भय के कारण शब्दों का न निकलना हकलाना अथवा तुतलाना व्यक्ति के भीतर एक गहरी हीन भावना और अवसाद उत्पन्न कर देता है। कई बार बच्चे विद्यालय में पाठ याद करने के उपरांत भी शिक्षक के सम्मुख बोल नहीं पाते जिससे उनका आत्मविश्वास टूट जाता है।
चिकित्सा विज्ञान इसे तंत्रिका तंत्र की दुर्बलता मानता है किंतु वैदिक तत्व दर्शन के अनुसार यह वाक् शक्ति की अधिष्ठात्री माँ शारदा के आशीर्वाद का अभाव है। शास्त्रों में स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि जिस प्रकार माँ शारदा ने वीणा के तारों को छूकर संपूर्ण मूक सृष्टि को स्वर प्रदान किया था उसी प्रकार जो जातक श्रद्धा भाव से शारदा स्तोत्र का नियमित पाठ करता है उसके कंठ की समस्त जड़ता समाप्त हो जाती है।
यह साधना जीभ की नाड़ियों को शुद्ध करती है और फेफड़ों से निकलने वाली वायु को कंठ के साथ संतुलित करती है। जिन बालकों की वाणी देर से फूटती है अथवा जो हकलाहट से पीड़ित हैं उनके लिए माता शारदा की आराधना साक्षात संजीवनी बूटी के समान सिद्ध होती है।
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह पीड़ित हो वाणी में हकलाहट अथवा तुतलाहट हो स्मरण शक्ति कमजोर रहती हो अथवा पढ़ाई में मन न लगता हो तो शास्त्रों में माता शारदा की प्रसन्नता हेतु अत्यंत प्रामाणिक वैदिक उपाय बताए गए हैं।
| क्या अवश्य करें | किन गलतियों से सर्वथा दूर रहें |
|---|---|
| प्रतिदिन प्रातः काल उठकर विद्या की अधिष्ठात्री माँ शारदा का स्मरण करें | पुस्तकों कलम अथवा अध्ययन सामग्री पर कभी भी अपने पैर न लगाएं |
| अध्ययन आरंभ करने से पूर्व अपनी वाणी और मन को पूर्णतः शांत रखें | अपनी वाणी से कभी भी किसी का उपहास अपशब्द अथवा मिथ्या भाषण न करें |
| बुधवार और गुरुवार के दिन पूर्ण स्वच्छता ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार लें | तामसिक भोजन मदिरा और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से सर्वथा दूर रहें |
| अपनी विद्या और ज्ञान का उपयोग सदैव समाज के कल्याण और सेवा में करें | अपने ज्ञान बुद्धि अथवा परीक्षा परिणामों का कभी भी झूठा अहंकार न करें |
| पूजा में शुद्ध श्वेत चंदन पीतल अथवा चांदी के बर्तन और गाय के घी का प्रयोग करें | बिना स्नान किए अथवा अशुद्ध अवस्था में अध्ययन कक्ष में जाने से बचें |
भगवती शारदा का पावन अवतार संपूर्ण मानव जाति को यह सनातन शिक्षा प्रदान करता है कि इस संसार में भौतिक संपदा नष्ट हो सकती है किंतु आत्मा के भीतर प्रज्वलित ज्ञान का आलोक कभी क्षीण नहीं होता। वीणा के सुर यह संदेश देते हैं कि जीवन का प्रत्येक कर्म सुर ताल और मर्यादा में बंधा होना चाहिए। श्वेत कमल पर उनका वास यह सिखाता है कि सांसारिक ज्ञान के बीच रहते हुए भी अंतःकरण को निष्कलंक और वासना मुक्त बनाए रखना ही सच्ची विद्या है। बुध की तीक्ष्ण बुद्धि जब गुरु के पावन विवेक और शारदा के ब्रह्मनाद से जुड़ जाती है तब मनुष्य की वाणी साक्षात अमृत वर्षा करने लगती है। ऐसी वाणी समाज को नई दिशा देती है और राष्ट्र का निर्माण करती है। माता शारदा का नित्य स्मरण मनुष्य के जीवन से समस्त अज्ञान वाणी दोषों और बौद्धिक संतापों को समाप्त करके उसे एक तेजस्वी यशस्वी और विद्वान व्यक्तित्व बनाकर अंततः परम पद की प्राप्ति कराता है।
माता शारदा का प्राकट्य किस मुख्य उद्देश्य हेतु हुआ था? ब्रह्मा जी द्वारा रचित मूक और निष्प्राण सृष्टि को वाणी भाषा स्वर और ज्ञान की चेतना प्रदान करने हेतु माता शारदा का प्राकट्य हुआ था।
माँ शारदा का मूल प्राकट्य स्थल और ऐतिहासिक शक्तिपीठ कहां स्थित है? माँ शारदा का मूल प्राकट्य स्थल और ऐतिहासिक ज्ञान पीठ कश्मीर में कृष्णगंगा और मधुमती नदी के तट पर स्थित शारदा पीठ माना गया है।
माता शारदा के हाथों में स्थित वीणा और पुस्तक किस बात का प्रतीक हैं? वीणा सृष्टि के नाद ब्रह्म और संगीत का प्रतीक है जबकि पुस्तक वेदों और 64 कलाओं के संपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है।
ज्योतिष में माता शारदा का संबंध किन प्रमुख ग्रहों से माना जाता है? वैदिक ज्योतिष में माता शारदा का सीधा संबंध वाणी व बुद्धि के कारक बुध ग्रह और ज्ञान व विवेक के अधिपति देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है।
हकलाहट और वाणी दोष से मुक्ति पाने हेतु किस पाठ को सर्वोत्तम माना गया है? वाणी दोषों हकलाहट और विद्या में आने वाली रुकावटों को दूर करने हेतु प्रतिदिन प्रातः काल पावन शारदा स्तोत्र का पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ