By अपर्णा पाटनी
जानें रावण के बहुआयामी ज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष और शिवभक्ति पर आधारित दुर्लभ सच

रावण का नाम सुनते ही मन में दशमुखी राक्षस राजा की छवि उभरती है, जिसने सीता माता का हरण किया और भगवान राम से युद्ध किया। आम जनमानस में उन्हें अधर्म, अहंकार और अंधविश्वास का प्रतीक माना जाता है, परंतु इससे परे उनका व्यक्तित्व अत्यंत गहरा और बहुआयामी है। रावण को केवल खलनायक कहना उनके ज्ञान, तप, भक्ति और विद्या के विशाल भंडार को नकारने जैसा है।
रावण का नाम 'भयंकर ध्वनि उत्पन्न करने वाला' अर्थ देता है। यद्यपि वे राक्षस कुल में जन्मे, पर उनके कुलगुरु ऋषि पुलस्त्य थे, जिसके कारण वे ब्राह्मण वंशीय थे। वे वेद, आयुर्वेद और आध्यात्म में गहन निपुण थे।
आयुर्वेद में उनका योगदान अद्वितीय है। रावण संहिता उनके द्वारा रचित मानी जाती है, जिसमें हर्बल औषधियों, चिकित्सा पद्धतियों और निदान के गहन सिद्धांत वर्णित हैं। आयुर्वेद में दोषों, दवाओं और उपचारों की गहरी समझ रावण को विशिष्ट स्थान देती है।
मान्यता है कि रावण 64 कलाओं में निपुण थे—संगीत, नृत्य, साहित्य, ज्योतिष, राजनीति और आध्यात्मिक साधनाएँ। उनकी प्रतिभा देवताओं और ऋषियों द्वारा भी स्वीकार की जाती थी।
आयुर्वेद की तरह ही ज्योतिष में भी रावण की विद्वता विलक्षण थी।
ज्योतिष रावण के लिए केवल भविष्यवाणी नहीं बल्कि समय, ग्रह और मानव-भाग्य की अंतःक्रिया का विज्ञान था। रावण संहिता में कई ज्योतिषीय सिद्धांत मिलते हैं, जो चिकित्सा और ब्रह्मांडीय विज्ञान को एक सूत्र में जोड़ते हैं।
वेदों का गहन अध्ययन उन्हें ब्रह्मज्ञानी बनाता था।
रावण शिव के अनन्य भक्त थे। उनकी तपस्या और भक्ति के फलस्वरूप वे शिव से अनेक वरदान प्राप्त कर सके। शिव पुराण में वर्णित है कि रावण ने एक बार कैलाश पर्वत उठा लिया था, जिसे शिव ने उंगली दबाकर रोक दिया।
रावण संगीतकार भी थे और वीणा बजाकर शिव की स्तुति करते थे।
रामायण में रावण अधर्म का प्रतीक हैं, पर सनातन धर्म व्यक्ति को जन्म या रूप से नहीं, उसके कर्म और ज्ञान से तौलता है।
उनका जीवन दर्शाता है कि एक ही व्यक्ति में महानता और त्रुटि दोनों निहित हो सकते हैं।
उनका पतन अहंकार और वासनाओं का परिणाम था। सीता हरण उनका सबसे बड़ा अपराध था।
उनके चरित्र से मिलती शिक्षाएँ—
भारत और श्रीलंका के कई क्षेत्रों में रावण को न्यायप्रिय राजा के रूप में भी पूजा जाता है।
आयुर्वेद और ज्योतिष में रावण संहिता का अध्ययन आज भी होता है।
उनकी विरासत हमें इतिहास को गहराई से समझने की प्रेरणा देती है।
रावण केवल खलनायक नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, आध्यात्म और कला का एक विस्तृत अध्याय हैं।
उनका जीवन यह बताता है कि दिव्यता के अनेक रूप होते हैं और मनुष्य में गुण-दोष दोनों विद्यमान रहते हैं।
क्या रावण वास्तव में ब्राह्मण थे?
हाँ, उनका वंश ऋषि पुलस्त्य से जुड़ा था।
क्या रावण संहिता प्रामाणिक आयुर्वेदिक ग्रंथ है?
इसे परंपरागत आयुर्वेदिक ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
क्या रावण ज्योतिष में भी निपुण थे?
हाँ, उनकी ज्योतिषीय विद्या अत्यंत गहरी मानी जाती है।
रावण का सबसे बड़ा दोष क्या माना जाता है?
सीता हरण और अहंकार उनका प्रमुख पतन-कारक था।
क्या रावण को कहीं पूजा भी जाता है?
हाँ, भारत और श्रीलंका के कई क्षेत्रों में उन्हें विद्वान राजा रूप में पूजा जाता है।
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