By पं. अभिषेक शर्मा
हर दिन की ग्रह ऊर्जा अलग मानी जाती है इसलिए बाल धोना भी मन शरीर और भाग्य पर प्रभाव डालने वाला सूक्ष्म कर्म माना गया

हिन्दू धर्मशास्त्र और ज्योतिष की परंपरा में बाल धोना केवल शारीरिक स्वच्छता भर नहीं माना गया इसे शरीर की प्राण ऊर्जा मन की स्थिरता और ग्रहों की सूक्ष्म तरंगों से जोड़कर देखा गया है। हर वार किसी न किसी ग्रह से जुड़ा है और विश्वास है कि उस दिन सिर पर जल डालने से उस ग्रह की ऊर्जा या तो संतुलित होती है या अनावश्यक रूप से विचलित। इसलिए पुराने समय में लोग अपने सप्ताह का “हेयर रूटीन” भी पंचांग और ग्रह वार के हिसाब से सेट करते थे।
वैदिक दृष्टि से बालों को प्राण और ओज का भंडार माना गया है जो सीधे मस्तिष्क नाड़ियों और सहस्रार क्षेत्र से जुड़ा है। अचानक ठंडा पानी बार बार धोना या गलत दिन में सिर धोना सूक्ष्म स्तर पर संतुलन बिगाड़ सकता है इस भावना से इन नियमों को बनाया गया। आज इन्हें कठोर बंदिश नहीं बल्कि शरीर मन और ग्रह ऊर्जा के बीच संतुलन बनाए रखने वाला सांस्कृतिक मार्गदर्शन समझना अधिक व्यावहारिक है।
सोमवार चंद्र और भगवान शिव का दिन माना जाता है। चंद्र मन भावनाओं और जल तत्व का कारक है इसलिए सोमवार को बाल धोना शीतलता और भावनात्मक संतुलन के लिए शुभ माना जाता है। सप्ताह की शुरुआत एक तरह के “रीसेट” के साथ करने के लिए यह दिन आदर्श माना गया है।
कई परंपराओं में सोमवार के दिन स्नान करके शिव पूजा अभिषेक और साफ सुथरी अवस्था में दिन शुरू करने की सलाह दी जाती है। सिर की सफाई और मानसिक हल्केपन के बीच जो कनेक्शन महसूस होता है उसे चंद्र की शांत ऊर्जा से जोड़ा गया है।
मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है जो अग्नि साहस रक्त और तेज से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन बाल धोने से मंगल की उष्ण ऊर्जा और उग्र हो सकती है जिससे चिड़चिड़ापन क्रोध अचानक खर्च चोट या थकान जैसी अवस्थाएँ बढ़ सकती हैं। खासकर महिलाओं के लिए कई परंपराएँ मंगलवार को बाल धोना वर्जित मानती हैं।
मंगल को संतुलित रखने के लिए इस दिन संयम अनुशासन Hanuman या Skanda की पूजा और लाल वस्तुओं या मसूर गुड़ आदि के दान को बेहतर उपाय माना गया है। विचार यह है कि शरीर और सिर को शांत रखकर मंगल की शक्ति को सही दिशा में काम करने दिया जाए।
बुधवार बुध ग्रह का दिन है जो बुद्धि वाणी व्यापार और संचार का प्रतिनिधि है। कई परंपरागत मत बुधवार को बाल धोने के लिए शुभ मानते हैं खासकर विद्यार्थियों लेखकों और मानसिक कार्य से जुड़े लोगों के लिए।
स्वच्छ ठंडा और हल्का सिर बुध की तेज लेकिन सूक्ष्म ऊर्जा के लिए अनुकूल माना जाता है जिससे सोच में स्पष्टता और बिना अनावश्यक तनाव के काम करने की क्षमता बढ़ती है। कुछ मतों के अनुसार अविवाहित कन्याओं के लिए बुधवार और शुक्रवार को बाल धोना घर की समृद्धि और शुभ विवाह के योग के लिए अच्छा संकेत माना जाता है हालाँकि यह क्षेत्र के हिसाब से बदल भी सकता है।
गुरुवार गुरु विष्णु और लक्ष्मी नारायण का दिन माना जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार इस दिन बाल धोना नाखून काटना या शेविंग करना गुरु और लक्ष्मी दोनों की कृपा में हस्तक्षेप जैसा माना जाता है।
कहा जाता है कि इससे गुरु की शुभ शक्ति कमजोर हो सकती है जिसका असर ज्ञान धन विवाह संतान सुख और आध्यात्मिक उन्नति पर पड़ सकता है। इसलिए कई घरों में यदि सप्ताह के केवल एक दिन बाल न धोने का नियम हो तो वह गुरुवार ही होता है। विशेष रूप से गुरु मंत्र विवाह योग या करियर में स्थिरता से जुड़े संकल्पों के समय इस दिन बाल धोने से बचने की सलाह दी जाती है।
शुक्रवार शुक्र ग्रह और देवी लक्ष्मी का दिन है। शुक्र सौंदर्य आकर्षण कला प्रेम और भोग की सूक्ष्म ऊर्जा का कारक है। शुक्रवार को बाल धोना सुसज्जित होना और अच्छी सुगंध लगाना अत्यंत शुभ माना गया है खासकर उन लोगों के लिए जो अपने व्यक्तित्व आकर्षण और सामाजिक जीवन को बेहतर महसूस करना चाहते हों।
कई परंपराओं में अविवाहित कन्याओं और विवाहित महिलाओं को शुक्रवार को बाल धोकर स्वच्छ सज्जित होकर लक्ष्मी नारायण की पूजा करने की सलाह दी जाती है। इस संयोजन को गृह लक्ष्मी की कृपा सौंदर्य सम्पन्नता और वैवाहिक आनंद के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना गया है।
शनिवार शनि देव का दिन है जो कर्मफल विलंब अनुशासन और गहरे सबक से जुड़ा है। इस दिन बाल काटना शेविंग और सिर धोना कम से कम करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि सिर पर जल डालकर बार बार “फ्लो” बदलना शनि की गंभीर और स्थिर ऊर्जा के साथ मेल नहीं खाता और इससे अनावश्यक रुकावटें सुस्ती या मानसिक बोझ बढ़ सकता है।
शनिवार को सादगी संयम दान तेल अभिषेक शनि मंत्र और ध्यान की ओर झुकाव को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। विचार यह है कि शनि की ऊर्जा को छेड़ने के बजाय नम्रता से स्वीकार कर उसे संतुलित किया जाए।
रविवार सूर्य का दिन है जो तेज आत्मबल अहं और आग से जुड़ा है। बहुत सी परंपराएँ रविवार को बाल धोने को पूरी तरह मना नहीं करतीं लेकिन इसे “कम पसंदीदा” विकल्प मानती हैं। तर्क यह है कि सूरज की तेज ऊष्मा वाले दिन सिर पर ठंडा पानी खासकर बार बार सिरदर्द थकान या रोग प्रतिरोधक शक्ति में कमी जैसी समस्याएँ बढ़ा सकता है।
कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि रविवार को बार बार बाल धोने से घर में तुनकमिजाजी और झगड़े की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इसलिए यदि विकल्प हो तो सिर धोने के लिए सोमवार बुधवार या शुक्रवार को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
1. क्या सचमुच हर मंगलवार गुरुवार और शनिवार को बाल नहीं धोना चाहिए
ये नियम परंपरा से आए हैं कानून नहीं हैं। इनके पीछे ग्रह वार और शरीर को एक निश्चित रिद्म देने का विचार है लेकिन यदि स्वास्थ्य काम या स्वच्छता की ज़रूरत हो तो इन्हें लचीले तरीके से अपनाया जा सकता है।
2. अगर मैं सप्ताह में दो ही दिन बाल धो सकता हूँ तो कौन से दिन चुनूँ
ज्यादातर मान्यताएँ सोमवार और शुक्रवार को प्राथमिकता देती हैं सोमवार मन की शांति और चंद्र की शीतल ऊर्जा के लिए और शुक्रवार सौंदर्य आकर्षण और लक्ष्मी कृपा के लिए। अगर तीसरा दिन जोड़ना हो तो बुध के लिए बुधवार अच्छा विकल्प है।
3. गुरुवार को बाल धोना इतना बड़ा “ना” क्यों माना जाता है
क्योंकि गुरुवार गुरु विष्णु और लक्ष्मी से जुड़ा है और इसे ज्ञान विवाह धन और धर्म के लिए मुख्य दिन माना गया है। बाल धोने कटवाने या नाखून काटने को इस दिन गुरु की सूक्ष्म ऊर्जा में अनावश्यक हस्तक्षेप जैसा देखा गया इसलिए उसे सख्ती से टालने की परंपरा बनी।
4. मेरी नौकरी या रूटीन के कारण मुझे इन्हीं वर्जित दिनों में बाल धोने पड़ते हैं तब क्या करूँ
ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता देना सही है। आप चाहें तो उसी ग्रह से जुड़ा छोटा मंत्र प्रार्थना या थोड़ी सी दान भावना रखकर संतुलन बना सकते हैं ताकि काम भी हो और मन में अपराधबोध भी न रहे।
5. क्या इन नियमों का कोई वैज्ञानिक आधार भी है या यह सिर्फ अंधविश्वास है
सीधा वैज्ञानिक डेटा कम है लेकिन पुराने नियम अक्सर मौसम पानी का तापमान कामकाजी पैटर्न और शरीर की रिकवरी को ध्यान में रखकर बने थे। आज इन्हें शुद्ध वैज्ञानिक कानून की तरह नहीं बल्कि शरीर और मन की लय के लिए बनी सांस्कृतिक सलाह मानना अधिक व्यावहारिक है ताकि न स्वच्छता से समझौता हो न पूरी परंपरा को नजरअंदाज करना पड़े।
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