By पं. नरेंद्र शर्मा
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, व्रत, हनुमान चालीसा, राम नाम जप और विशेष उपायों से सुरक्षा और साहस बढ़ाने की संपूर्ण विधि

सप्ताह का दूसरा दिन मंगलवार परंपरागत रूप से हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। इस दिन की ऊर्जा साहस, कर्मशक्ति और रक्षा से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए जो व्यक्ति स्वयं को नज़र, बाधा, शत्रुता या अदृश्य भय से घिरा महसूस करता है, उसके लिए मंगलवार की हनुमान उपासना विशेष सहारा बन सकती है।
हनुमान जी को बल, पराक्रम, भक्ति और अटूट संकल्प का देवता माना जाता है। उन्हें बजरंगबली और संकट मोचन कहा जाता है, जो सच्ची श्रद्धा से पुकारने पर हर प्रकार के संकट और भय को काटने की क्षमता रखते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से भी मंगल और शनि से जुड़ी चुनौतियों में हनुमान साधना को एक महत्वपूर्ण संरक्षण कवच माना जाता है।
पुराणों में हनुमान को चिरंजीवी यानी अष्ट अमरों में गिना गया है। इसका संकेत यह है कि उनका तत्त्व काल से परे रहकर भी साधकों को आज तक संरक्षण देता है। परंपरा मानती है कि
तो हनुमान स्वयं उसकी रक्षा का दायित्व अपने ऊपर लेते हैं।
यह “रक्षा” केवल बाहरी संकट से नहीं बल्कि
से भी होती है। मंगलवार के दिन किया गया संकल्पबद्ध उपासना क्रम इस तत्त्व को अधिक सक्रिय करता है।
किसी भी सच्चे संरक्षण की शुरुआत भीतर से होती है।
यह आंतरिक क्लेंजिंग हनुमान साधना का पहला और अनिवार्य चरण है।
यह सब करते समय मन में केवल एक भाव रहे - “संकट मोचन के चरणों में अपने डर और बाधाएं सौंप रहा हूं, बाकी वह जाने।”
मंगलवार की शाम को यदि संभव हो तो नज़दीकी हनुमान मंदिर अवश्य जाना शुभ माना जाता है।
मंदिर में
सब मिलकर एक सामूहिक ऊर्जा क्षेत्र बनाते हैं, जिसमें बैठना स्वयं में ही मानसिक सुरक्षा कवच जैसा कार्य करता है।
हनुमान चालीसा को हनुमान उपासना का सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रभावी स्तोत्र माना गया है।
महत्व संख्या से अधिक भाव का है।
यही चालीसा को “सुरक्षा मंत्र” की तरह सक्रिय करता है।
कई लोग हनुमान चालीसा का उच्चारण ठीक से न कर पाने के कारण झिझक महसूस करते हैं। ऐसे में सबसे सरल और सशक्त मार्ग राम नाम का जप है।
का सतत जप हनुमान को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। हनुमान की भक्ति का केंद्र ही राम तत्त्व है।
मन ही मन राम नाम चलता रहे, यह स्वयं में अदृश्य रक्षा कवच जैसा असर देता है।
सुंदरकांड में हनुमान की लंका यात्रा, अदम्य साहस, विवेक और भक्ति का समन्वित चित्र मिलता है।
कई स्थानों पर मंगलवार या विशेष अवसरों पर हनुमान चोला चढ़ाने की परंपरा है।
से हनुमान विग्रह को सजाया जाता है।
परंपरा के अनुसार
चोला चढ़ाने से यह भाव मजबूत होता है कि
मंगलवार को हनुमान उपासना के साथ
की कड़ी सलाह दी जाती है।
यह केवल बाहरी नियम नहीं बल्कि यह संदेश है कि
हनुमान जी का रूप वानर से जुड़ा है, इसलिए मंगलवार के दिन बंदरों को भोजन कराना
की संयुक्त अभिव्यक्ति माना जाता है।
सुरक्षा और शक्ति की साधना के साथ कुछ संयम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। मंगलवार के दिन विशेष रूप से यह निर्देश दिए जाते हैं
इन नियमों का उद्देश्य यह है कि
जितना हल्का मन रहेगा, उतनी ही गहराई से प्रार्थना भीतर उतर सकेगी।
| समय | साधना / कार्य | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| सुबह | स्नान, स्वच्छ वस्त्र, मन का संकल्प | आंतरिक शुद्धि और साधना के लिए तैयारी |
| प्रातःकाल | घर के मंदिर में दीपक, भोग, छोटी प्रार्थना | हनुमान तत्त्व से जुड़ाव |
| दिन के समय | राम नाम जप, संयम, सकारात्मक व्यवहार | मन की रक्षा और नकारात्मकता से दूरी |
| शाम | मंदिर दर्शन, प्रसाद, हनुमान चालीसा पाठ | सामूहिक भक्ति और सुरक्षा कवच की अनुभूति |
| रात्रि | सुंदरकांड या पुनः चालीसा / राम नाम जप | दिन भर की साधना को समर्पित करना |
यदि कोई मंगलवार को पूरा उपवास न रख सके, तो क्या केवल साधना से भी लाभ होगा
हां, लाभ के लिए उपवास अनिवार्य नहीं। अधिक महत्वपूर्ण यह है कि भोजन सादा, सात्त्विक और संयमित हो और दिन भर का आचरण हनुमान जी के गुणों - साहस, सेवा और विनम्रता - के अनुरूप रखने की कोशिश की जाए।
हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना उचित है
संख्या साधक की क्षमता और समय पर निर्भर करती है। न्यूनतम 1 बार भी श्रद्धा से किया गया पाठ फलदायी होता है। कई साधक मंगलवार को 7, 11 या 21 बार का संकल्प लेते हैं, पर सबसे जरूरी है स्पष्ट उच्चारण और मन की एकाग्रता।
क्या महिलाएं मंगलवार को हनुमान साधना और चोला चढ़ा सकती हैं
महिलाएं हनुमान चालीसा, राम नाम जप, सुंदरकांड पाठ और हनुमान मंदिर दर्शन पूरी श्रद्धा से कर सकती हैं। कई परंपराओं में विशेष रूप से चोला चढ़ाने का कार्य पुरुषों तक सीमित रखा गया है, क्योंकि हनुमान को ब्रह्मचारी स्वरूप में देखा जाता है। पर स्त्रियों की भक्ति, जप और सेवा पर कोई रोक नहीं।
यदि किसी को उच्चारण में कठिनाई हो तो कौन सा मंत्र सबसे सरल रहेगा
ऐसे साधक के लिए “श्री राम” का निरंतर जप सबसे सरल और शक्तिशाली मार्ग है। इसके अतिरिक्त “ॐ हनुमते नमः” जैसा छोटा मंत्र भी रोज़मर्रा के काम करते हुए मन ही मन जपा जा सकता है।
हनुमान की मंगलवार साधना से सुरक्षा कितने समय में महसूस हो सकती है
यह व्यक्ति विशेष, कर्म स्थिति और साधना की गहराई पर निर्भर है। कई बार तुरंत मानसिक हल्कापन और साहस महसूस होने लगता है, कई बार बाहरी परिस्थितियों में परिवर्तन समय लेकर आता है। महत्वपूर्ण यह है कि साधक धैर्य, नियमितता और ईमानदार जीवन शैली के साथ इस मार्ग पर चलता रहे।
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