By पं. सुव्रत शर्मा
जो मन सीधा निष्कपट और बिना दिखावे के हो वही हनुमान के सबसे करीब पहुँचता है

राम के अनन्य भक्त हनुमान को लोग बल बुद्धि और वीरता के लिए याद करते हैं लेकिन उनके हृदय के सबसे करीब जो एक गुण आता है वह है सरलता। सरलता यहाँ केवल साधारण कपड़ों या कम साधनों का नाम नहीं बल्कि ऐसा सीधा निष्कपट और बेदाखली मन है जो सीधे सत्य और भक्ति की ओर झुकता है। जो भक्त बिना घुमावदार बातें किए बिना दिखावे और शर्तों के प्रेम के साथ अपनी बात रखता है वह स्वभावतः हनुमान के बहुत निकट माना जाता है।
इस सरलता ने ही हनुमान को आदर्श दूत योद्धा मित्र और सलाहकार बनाया। उन्हीं की कथाएँ बताती हैं कि जटिल परिस्थितियों के बीच भी उनका मन साफ रहा इरादा सीधा रहा और यही गुण उन्हें राम की दृष्टि में भी अद्वितीय बनाता है।
हनुमान के जीवन की एक सबसे बड़ी पहचान यह है कि वे कभी अपने पराक्रम का ढोल नहीं पीटते। लंका दहन के बाद सीता को संदेश देकर लौटते समय वे चाहें तो अपनी उपलब्धियों का विस्तृत बखान कर सकते थे पर जब वे राम के सामने आते हैं उनकी भाषा सीधी और विनम्र रहती है। वे केवल यह बताते हैं कि संदेश पहुँचा दिया गया सीता सुरक्षित हैं और शेष सब राम की कृपा है।
यह व्यवहार दिखाता है कि उनकी सरलता वस्तुतः गहरी विनम्रता है। वे अपने बल को अपना नहीं मानते उसे राम की देन मानते हैं। वे जानते हैं कि काम में सफलता मिलने पर अहंकार तुरंत बीच में आ सकता है इसलिए वे जानबूझकर स्वयं को पीछे और राम को आगे रखते हैं। ऐसी सरल अहंकार रहित प्रवृत्ति ही वह गुण है जो किसी भी भक्त को हनुमान के स्वभाव के करीब लाती है।
हनुमान की भक्ति की एक खास बात यह है कि उसमें कोई सौदेबाजी नहीं। वे राम से यह नहीं कहते कि यदि आप मुझे यह देंगे तो मैं आपके लिए यह करूँगा। जब भी राम ने उन्हें कोई काम सौंपा उनका सीधा उत्तर रहा आज्ञा। न उन्होंने शर्त रखी न बहाना बनाया न विकल्प सुझाए। जो कहा गया बस वही करना है यही उनका सरल सूत्र था।
उनकी भक्ति में तर्क बहस या लाभ हानि का हिसाब बीच में नहीं आता। वे सवाल पूछते हैं तो केवल काम को ठीक से समझने के लिए न कि आदेश से बचने के लिए। यह सीधी भक्ति जिसमें मन कहीं और नहीं भटकता सरलता का ही एक रूप है। भक्त के लिए इसका संदेश साफ है जितना कम मन शर्तों और उलझनों में फँसेगा उतना ही वह हनुमान जैसी भक्ति के निकट जाएगा।
सरलता का अर्थ यह नहीं कि हनुमान के पास कौशल की कमी थी। समुद्र पार करना सीता की खोज रावण की सभा में निर्भीक वाणी और युद्ध में रणनीति इन सबमें उन्होंने असाधारण समझ और बुद्धि का परिचय दिया। फिर भी उनके तरीकों में अनावश्यक जटिलता नहीं दिखती।
जब उन्हें समुद्र लाँघने का काम सौंपा गया उन्होंने लंबा तर्क नहीं किया केवल अपने भीतर की शक्ति को जगाया और सीधा छलाँग लगा दी। जब रावण के सामने खड़े होकर सत्य कहने का समय आया उन्होंने चापलूसी या जटिल भाषा का सहारा नहीं लिया सीधे और स्पष्ट शब्दों में धर्म का पक्ष रखा। उनके कौशल की यही सरलता काम को असरदार बनाती है और दिखाती है कि सच्ची बुद्धिमानी अक्सर सीधी और पारदर्शी होती है।
हनुमान के निर्णयों में नैतिकता की दृष्टि से कोई धुंधलापन नहीं दिखता। उनके लिए धर्म और अधर्म दो धुंधले सिरे नहीं दो स्पष्ट दिशाएँ हैं। सीता की पीड़ा देखकर वे तुरंत समझ जाते हैं कि उनकी सेवा और रक्षा करना ही सही है। रावण की शक्ति लंका की समृद्धि या अपने लिए किसी लाभ की संभावना उनके निर्णय को नहीं डिगा पाती।
राम के प्रति निष्ठा और सत्य के प्रति सम्मान उनकी नैतिक सरलता का आधार हैं। वे ऐसे समय में भी सीधा सत्य बोलते हैं जब सामने शक्तिशाली शत्रु हो। यह नैतिक स्पष्टता उन्हें वह शक्ति देती है कि वे किसी भी अन्याय के सामने बिना डरे खड़े हो सकें। भक्त के लिए यह सीख है कि जब मूल्य स्पष्ट हों तो जीवन के जटिल प्रश्न भी सरलता से निर्णय योग्य हो जाते हैं।
हनुमान के पास शक्ति भी है कीर्ति भी और देवों का सम्मान भी फिर भी वे केवल एक छोटी सी जगह चाहते हैं राम के चरणों के पास। वे किसी सिंहासन पद या स्वतंत्र साम्राज्य की इच्छा नहीं रखते। उन्हें सबसे बड़ा सम्मान यही लगता है कि वे सदा राम के दास और सखा के रूप में याद किए जाएँ।
यह संतोष ही उनकी सरलता का पाँचवाँ आयाम है। वे संग्रह नहीं करते न अनुयायियों की भीड़ जुटाने की चिंता करते हैं। उनका मानना है कि यदि राम के चरणों की सेवा मिल जाए तो यही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक समय के लिए यह संदेश बहुत सीधा है सच्ची सफलता का माप यह नहीं कि बाहर कितना जमा किया बल्कि यह कि भीतर कितना निर्मल और संतुष्ट हुआ।
हनुमान के चरित्र को यदि एक सूत्र में बाँधना हो तो कहा जा सकता है कि वे महान शक्ति के साथ महान सरलता का उदाहरण हैं। वे दिखाते हैं कि जो मन सीधा हो बिना दिखावे के हो अहंकार और जालसाजी से दूर हो वह चाहे जितना शक्तिशाली क्यों न हो फिर भी नम्र रह सकता है और वही मन ईश्वर के सबसे करीब पहुँचता है।
जो भक्त हनुमान की कृपा और निकटता चाहते हैं उनके लिए मार्ग भी इसी सरलता से शुरू होता है। अपने आप को जितना कम जटिल बनाएँगे उतना अधिक सहजता से भक्ति बह पाएगी। बिना आवश्यकता के बड़ी बड़ी बातें दिखावा चापलूसी और उलझी हुई चालें छोड़कर यदि कोई केवल इतना कह सके मैं जैसा हूँ वैसा ही तुम्हारे सामने हूँ बस तुम्हारी शरण चाहता हूँ तो यही हनुमान को सबसे प्रिय भेंट है।
1 क्या हनुमान के लिए सरलता का मतलब केवल साधारण जीवन शैली है
सरलता का बाहरी रूप साधारण जीवन हो सकता है लेकिन हनुमान के संदर्भ में इसका मुख्य अर्थ है निष्कपट मन सीधी भाषा और बिना दिखावे के भक्ति।
2 क्या सरल होना कमजोर होना है
नहीं हनुमान दिखाते हैं कि सरलता और शक्ति साथ साथ चल सकते हैं। वे अत्यंत वीर हैं पर उनके निर्णय और व्यवहार सीधे और विनम्र हैं।
3 आज के जटिल समय में सरलता कैसे अपनाई जाए
अपनी बात साफ रखना अनावश्यक चालाकी से बचना जहाँ तक हो सके सच बोलना और अपने इरादों को सेवा और भलाई की ओर मोड़ना यही आधुनिक सरलता के व्यावहारिक रूप हैं।
4 क्या केवल सरल स्वभाव वाला व्यक्ति ही हनुमान का प्रिय भक्त बन सकता है
हर मनुष्य अपने भीतर की जटिलता कम करने की दिशा में बढ़ सकता है। जैसे जैसे हम दिखावे अहंकार और छल से दूरी बनाते हैं हमारा स्वभाव स्वतः सरल होता जाता है और हम हनुमान के स्वभाव के अधिक अनुरूप हो जाते हैं।
5 हनुमान की सरलता से जुड़ी सबसे बड़ी सीख क्या है
कि महान शक्ति का सही उपयोग तभी होता है जब वह सरल विनम्र और निष्कपट मन के साथ जुड़ी हो। जो व्यक्ति भीतर से साफ और बाहर से सीधा है वही सच्चे अर्थ में धर्म भक्ति और सेवा का वाहक बन सकता है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें