By पं. नरेंद्र शर्मा
शिव भक्ति और पारिवारिक कल्याण के लिए व्रत का महत्व

सावन का आगमन हर भक्त के जीवन में एक पावन क्रांति ला देता है। वनस्पतियां हरी भरी हो जाती हैं। नदियां उफान मारती हैं। हृदय में शिव भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ता है। यह मास दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है। सावन सोमवार व्रत रखने से जीवन की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। कुंवारी कन्याएं राजसी वैभव वाले वर की कामना रखती हैं। गृहस्थ महिलाएं सुखी दांपत्य और संतान प्राप्ति के लिए निष्ठापूर्वक व्रत करती हैं। पुरुष भी परिवार कल्याण हेतु इसमें भाग लेते हैं। सावन की यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
श्रावण मास हिंदू पंचांग का पांचवां और अत्यंत पुण्यप्रद मास है। प्रकृति का हर कण शिव को नमन करता प्रतीत होता है। पुराण ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि सावन में भगवान शिव की आराधना से असंभव भी संभव हो जाता है। अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत वरदान समान है। वे सावन सोमवार व्रत से गुणवान, धनवान और सौम्य स्वभाव वाले पति प्राप्त करती हैं। विवाहित स्त्रियां पति की दीर्घायु, संतान सुख और गृह लक्ष्मी बनने की कामना रखती हैं।
यह व्रत आध्यात्मिक जागरण का माध्यम है। नियमित पालन से मन की अशांति दूर होती है। एकत्रित सकारात्मक ऊर्जा जीवन को दिशा प्रदान करती है। परिवार में प्रेम और एकता बढ़ती है। आर्थिक बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं मिट जाती हैं। शिव की कृपा से नौकरी, व्यापार में उन्नति होती है।
एक प्राचीन कथा प्रसिद्ध है। एक गांव की गरीब कन्या ने सावन के सभी सोमवार व्रत निष्ठा से रखे। वह किसी राजकुमार से प्रेम करती थी किंतु जाति भेद से विवाह असंभव था। व्रत के प्रभाव से राजकुमार स्वयं उसके द्वार आया। विवाह संपन्न हुआ। वे सुखी जीवन जिए। ऐसी अनगिनत कहानियां इस व्रत की महिमा गान करती हैं। भक्तों के अनुभव यही सिद्ध करते हैं कि सावन सोमवार व्रत चमत्कारिक है।
सावन सोमवार व्रत की नींव समुद्र मंथन की अमर कथा पर टिकी है। प्राचीन काल में देवताओं को अमरत्व की इच्छा हुई। उन्होंने असुरों से संधि की। मंदराचल पर्वत को मथनी बनाया। वासुकि नाग को रस्सी बनाकर सागर मंथन आरंभ किया। घंटों प्रयास के बाद चमत्कारिक रत्न प्रकट होने लगे। पहले धन्वंतरि चिकित्सक रूप में आए। फिर कामधेनु गाय। उसके बाद उच्चैःश्रवा घोड़ा। ऐरावत हाथी। कौस्तुभ मणि। अप्सराएं। वरुणलोक। पर्वत। नंदन वन। फिर चंद्रमा। और अंत में अमृत कलश।
लेकिन मंथन के बीच में भयावह हलाहल विष उबल पड़ा। यह विष सृष्टि का संहार करने वाला था। विष का धुआं चारों ओर फैल गया। सभी प्राणी मृत्यु के साये में आ गए। देवता ब्रह्मा विष्णु के पास गए। लेकिन कोई उपाय न सूझा। तब सृष्टि रक्षक भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने करुणा पूर्वक विष ग्रास किया। विष उनके कंठ में अटक गया। कंठ नीला पड़ गया। देवताओं ने स्तुति की। माता पार्वती ने भी सहयोग किया। इस घटना ने शिव को नीलकंठ नाम दिया। यह लीला सावन मास में ही घटी। इसलिए भक्त सावन के सोमवार इस बलिदान की स्मृति में सावन सोमवार व्रत रखते हैं। कथा पाठ से हृदय में श्रद्धा का दीप प्रज्ज्वलित हो जाता है।
सावन सोमवार व्रत की विधि सरल किंतु गहन निष्ठा वाली है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में जागें। शुद्ध जल से स्नान करें। पीले या सफेद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गोबर से लीपें। गंगाजल छिड़कें। शिवलिंग को स्थापित करें। प्रथम जलाभिषेक करें। फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद, शर्करा मिलाएं। बिल्वपत्र तीन पत्तियों वाले चढ़ाएं। लाल चंदन तिलक लगाएं। बेलफल, आम, केला अर्पित करें। धूप, दीप, अगरबत्ती प्रज्ज्वलित करें। रुद्राक्ष माला से जप करें। महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
दिन भर निर्जला या एक समय फलाहार करें। फलाहार में केला, सेब, अनार, दूध, पूरनपोली शामिल करें। सायंकाल सूर्यास्त पूर्व स्नान कर पुनः पूजा करें। आरती उतारें। शिव चालीसा पाठ करें।
विशेष व्रत प्रकार निम्न हैं।
| व्रत प्रकार | विवरण |
|---|---|
| सावन सोमवार व्रत | सावन मास के प्रत्येक सोमवार को एकल व्रत। पूर्ण निष्ठा से पालन करें। |
| सोलह सोमवार व्रत | सावन से प्रारंभ कर अगले सावन तक सोलह लगातार सोमवार। महान फलदायी। |
| सौम्य प्रदेश | सावन भर सायंकाल तक फलाहार या निर्जला व्रत। शिव प्रसन्न होते हैं। |
घर पर शिव मंदिर जैसा स्थान बनाएं। सावन सोमवार व्रत कथा या सोलह सोमवार व्रत कथा का श्रवण करें। कथा में शिव-पार्वती विवाह, पार्वती तपस्या वर्णित है। पूजा समाप्ति पर प्रसाद वितरित करें। हलवा, लड्डू, पूरनपोली, फल दें। पड़ोसियों, मित्रों, गरीबों को दान करें। कांवड़ यात्रा में भाग लें। गंगा जल धार पर लाकर शिवलिंग अभिषेक करें। रात्रि में शिव भजन गाएं। जागरण करें। अगले दिन पारण करें।
अन्य अनुष्ठान जैसे शिव विवाह पूजा, कान्यकुब्ज ब्राह्मण पूजा लाभकारी हैं। मंदिर दर्शन प्रातः ही करें। भीड़ से बचें। भक्ति भाव से सब करें।
सावन सोमवार व्रत के फल अतुलनीय हैं। यह व्रत संपूर्ण जीवन को परिवर्तित कर देता है। मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। कुंवारी कन्याओं को धनी, सुंदर, धर्मपरायण पति मिलता है। विवाहितों को पति-पत्नी में प्रेम बढ़ता है। संतान सुख प्राप्त होता है। गर्भिणियां स्वस्थ संतान पाती हैं।
आर्थिक क्षेत्र में उन्नति होती है। नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में लाभ। स्वास्थ्य लाभ असाधारण। पुरानी बीमारियां मिट जाती हैं। मानसिक शांति मिलती है। नींद गहरी आती है। शिव कृपा से शत्रु नष्ट होते हैं। न्यायिक मामले सुलझते हैं।
मुख्य लाभ:
भक्तों के अनुसार नियमित व्रत से जीवन में स्थायी परिवर्तन आता है।
सावन मास शिव भक्ति का उत्सव है। भक्त कांवड़ियां सजाते हैं। पैरों में चिमटियां बांधकर गंगा माई का जल लाते हैं। सड़कें हर हर महादेव ध्वनि से गूंजती हैं। मंदिरों पर भंडारे सजे रहते हैं। ब्राह्मणों को दान। गरीबों को भोजन। यह दृश्य अद्भुत होता है। सावन सोमवार व्रत इसी महाभक्ति का अभिन्न अंग है।
आवश्यक पूजा सामग्री:
इनका उपयोग करने से पूजा सिद्ध होती है। फल तुरंत प्राप्त होता है। सावन में बरसात का आनंद लें। प्रकृति के संग भक्ति करें।
सावन सोमवार व्रत किसे रखना चाहिए जानें विस्तार से?
कुंवारी कन्याओं, विवाहित स्त्रियों, पुरुषों को। सभी मनोकामना पूर्ति हेतु।
सावन सोमवार व्रत की मुख्य कथा कौन सी सुनें अवश्य?
समुद्र मंथन, नीलकंठ लीला। शिव पार्वती तपस्या विवाह कथा।
सावन सोमवार व्रत निर्जला कैसे रखें सही तरीके से?
हां। विशेष फलदायी। कमजोर व्यक्ति फलाहार करें।
सोलह सोमवार व्रत सावन सोमवार से कैसे पूरा करें पूरी विधि?
सावन सोमवार से आरंभ। लगातार सोलह सोमवार निष्ठा से। संकल्प लें।
सावन सोमवार व्रत में कौन सा प्रसाद वितरित करें विशेष रूप से?
हलवा, लड्डू, पूरनपोली, फल। ब्राह्मण, गरीबों को दान करें।
क्या पुरुष भी सावन सोमवार व्रत रख सकते हैं लाभ सहित?
निश्चय ही। परिवार कल्याण, धन प्राप्ति हेतु लाभकारी।
सावन सोमवार व्रत पारण का शुभ समय क्या है बताएं?
सायंकाल सूर्यास्तोत्तर। प्रसाद ग्रहण करें।
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