By पं. अमिताभ शर्मा
हनुमान जी के बारह नामों का जप मन को स्थिरता और आत्मबल प्रदान करता है

आज की तेज़ रफ़्तार जीवनशैली में हर व्यक्ति आध्यात्मिक शांति की खोज में है, परंतु समय और परिस्थितियाँ अक्सर गहराई से पूजन या ध्यान के लिए अनुमति नहीं देतीं। सनातन धर्म की विशेषता यही है कि यह हर युग के लिए सरल साधन प्रस्तुत करता है जिससे व्यक्ति व्यस्त जीवन के बीच भी परमात्मा से जुड़ा रह सके। ऐसी ही एक अद्भुत साधना है हनुमान द्वादश नाम स्तोत्र अर्थात् हनुमान जी के बारह पवित्र नामों का जप। यह संक्षिप्त परंतु अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है जिसे कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है और इसका प्रभाव मन और आत्मा दोनों पर पड़ता है।
आराम से बैठें, सांस को शांत करें और ध्यानपूर्वक इन नामों का उच्चारण करें। प्रत्येक नाम के बाद कुछ क्षण उस रूप का ध्यान करें। यह अभ्यास आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने वाला दीपक बन जाता है जो भीतर की स्थिरता और शक्ति को फिर से सक्रिय कर देता है।
“हनुमान” नाम का अर्थ है “जो बलवान जबड़े वाला है।” यह नाम उनके बाल रूप से जुड़ा है जब उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया था और इंद्र के वज्र से उनके जबड़े पर चोट आई। तब से उन्हें हनुमान कहा गया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि असली शक्ति संयम में निहित होती है। यह नाम बोलने और कार्य करने में विवेक की याद दिलाता है और आत्मसंयम की साधना सिखाता है।
हनुमान माता अंजना के पुत्र हैं जो दिव्य लोक की साधिका थीं। जब उन्हें पुत्र के रूप में हनुमान प्राप्त हुए तब से यह नाम भक्ति और मातृत्व की मधुरता का प्रतीक बन गया। इस नाम का ध्यान करने से व्यक्ति को याद रहता है कि मानव जीवन केवल भौतिक अस्तित्व नहीं बल्कि एक दिव्य उद्देश्य का परिणाम है।
हनुमान वायु देव के भी पुत्र माने जाते हैं। वायु ही प्राण का कारक है, इसलिए यह नाम जीवन और चेतना का प्रतीक है। जब साधक “वायुपुत्र” नाम का जप करता है तब भीतर की ऊर्जा पुनः प्रवाहित होती है। यह नाम हमें अपने श्वास और शक्ति से जोड़ता है जो योग साधना का मूल है।
“महाबल” का अर्थ है “अत्यंत बलशाली।” इस नाम का ध्यान करते समय हनुमान जी को सागर पार करते हुए, मजबूत और स्थिर रूप में कल्पना करें। यह केवल शारीरिक बल का नहीं बल्कि मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक दृढ़ता का प्रतीक है। यह नाम परिस्थितियों में अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
हनुमान को “रामेष्ट” कहा गया है, अर्थात जो श्रीराम के प्रिय हैं। इस नाम के ध्यान में भगवान राम को हनुमान को गले लगाते हुए देखें। यह नाम निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण का परिचायक है। श्रीराम ने स्वयं कहा था कि वह हनुमान की सेवा का प्रतिदान नहीं दे सकते। यह नाम विनम्रता और सेवा के भाव को जगाता है।
महाभारत युद्ध में अर्जुन को फल्गुन कहा गया और हनुमान उनके रथ के ऊपर ध्वज पर स्थापित रहे। “फल्गुनसखा” नाम हमें यह स्मरण कराता है कि जब जीवन में संघर्ष आता है तब अदृश्य दिव्य शक्तियाँ भी हमारे साथ होती हैं। यह संबंध निष्ठा और धर्म से जुड़ी मित्रता का संदेश देता है।
हनुमान की आँखें “पिंगाक्ष” कही जाती हैं, अर्थात हल्की सुर्ख सुनहरी आभा वाली। वे दृष्टि केवल साधारण नहीं बल्कि अंतर्दृष्टि हैं। इन आँखों में एकाग्रता और निर्णय शक्ति झलकती है। इस नाम का ध्यान करने से मन की चंचलता शांत होती है और ध्यान की गहराई बढ़ती है।
“अमितविक्रम” का अर्थ है “असीम साहस वाला।” इस नाम का स्मरण करते हुए हनुमान को युद्धभूमि में निर्भीक और अजेय रूप में देखें। यह नाम हमें धर्म के प्रति निष्ठा और सही कार्य के प्रति निर्भीकता का मार्ग दिखाता है।
“उदधिक्रमण” का अर्थ है “जो सागर को पार करे।” जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका की ओर उड़ान भरते हैं तब वह केवल एक भौतिक समुद्र नहीं बल्कि भय और संशय के सागर को पार कर रहे होते हैं। यह नाम सिखाता है कि जब उद्देश्य पवित्र हो और विश्वास दृढ़ हो तब कोई कठिनाई असंभव नहीं रहती।
हनुमान ने लंका में माता सीता को आशा और विश्वास दिलाया जब उन्होंने उन्हें श्रीराम की अंगूठी दी। उसी क्षण उनका शोक मिट गया। “सीताशोकविनाशन” नाम करुणा और आशा का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची उपस्थिति और संवेदना किसी का भी दुःख हर सकती है।
जब युद्ध में लक्ष्मण अचेत हो गए तब हनुमान संजीवनी पर्वत उठा लाए। यह प्रसंग “लक्ष्मणप्राणदाता” नाम को जन्म देता है। यह नाम जीवन में पुनरुज्जीवन, आशा और सेवा भावना का प्रतीक है। यह हमें प्रेरित करता है कि संकट में दूसरों की सहायता करना ही सच्ची भक्ति है।
रावण दशमुख अहंकार का प्रतीक था और हनुमान ने उसे धर्म के मार्ग पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब राम विजय हुए तब यह नाम “दशग्रीवदर्पहा” अमर बन गया। यह नाम हमे अपने भीतर के अहंकार को जीतने की प्रेरणा देता है। यह विनम्रता, सत्य और न्याय का प्रकाशक है।
इन बारह नामों का जप दो मिनट का साधन है, परंतु इसका प्रभाव अनंत है। प्रतिदिन इन नामों का चिंतन मन और आत्मा को ऊर्जा से भर देता है। चाहे घर हो, कार्यस्थल हो या यात्रा के क्षण, इन नामों का स्मरण हनुमान की उपस्थिति का अनुभव कराता है। यह अभ्यास आत्मबल, निष्ठा और भक्ति से जोड़ता है।
1. हनुमान द्वादश नाम स्तोत्र क्या है?
यह हनुमान जी के बारह नामों का संक्षिप्त परंतु प्रभावशाली स्तोत्र है जो मन को स्थिरता और शक्ति प्रदान करता है।
2. इन बारह नामों का जप कब करना चाहिए?
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या रात में सोने से पहले शांत वातावरण में करना सर्वोत्तम है।
3. इन नामों का अभ्यास कैसे किया जाता है?
आराम से बैठकर प्रत्येक नाम का उच्चारण करें और उसके रूप का ध्यान करें। यह ध्यान आत्मबल बढ़ाता है।
4. क्या इन नामों से डर और चिंता कम होती है?
हाँ, यह नाम मन को स्थिर करते हैं और आत्मविश्वास को पुनः जागृत करते हैं।
5. क्या यह साधना बहुत समय लेती है?
नहीं, इसे केवल दो मिनट में किया जा सकता है और इसका प्रभाव दिनभर के लिए शांति प्रदान करता है।
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