विश्वकर्मा पूजा व्रत कथा और उच्च पद प्राप्ति का आशीर्वाद

By पं. संजीव शर्मा

कार्य में सफलता और सम्मान पाने के लिए विश्वकर्मा पूजा का महत्व

विश्वकर्मा पूजा व्रत कथा और सफलता का आशीर्वाद

विश्वकर्मा जयंती के दिन भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा करने और उनकी व्रत कथा श्रवण करने का विधान है। मान्यता है कि इस तिथि पर श्रद्धा से विश्वकर्मा पूजा करने वाले साधक के कर्म शुद्ध होते हैं, कार्यक्षेत्र में प्रगति होती है और उसे समाज में सम्मान तथा ऊँचा पद प्राप्त होता है। इस दिन की गई पूजा कथा सहित ही संपन्न मानी जाती है, इसलिए कथा श्रवण को अनिवार्य अंग माना गया है।

विश्वकर्मा पूजा सामान्यतः अमावस्या तिथि को या सूर्य के कन्या राशि में गोचर के आसपास की तिथि पर की जाती है, जहाँ पारंपरिक रूप से औजार, कार्यस्थल, मशीनें और शिल्प से जुड़े साधन भी धूप, दीप और अक्षत के साथ पूजित होते हैं। इस दिन के व्रत, पूजा और कथा का उद्देश्य केवल बाहरी सफलता नहीं बल्कि कर्म के प्रति श्रद्धा और धर्मसम्मत कार्य शैली को विकसित करना भी है।

विश्वकर्मा पूजा की मूल व्रत कथा

सूतजी ने प्राचीन समय की एक महत्वपूर्ण घटना का वर्णन करते हुए यह व्रत कथा सुनाई। उस समय मुनि विश्वामित्र के आमंत्रण पर अनेक मुनि और संन्यासी एक स्थान पर सभा के लिए एकत्र हुए। सभी के मन में एक ही चिंता थी कि यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में बार बार विघ्न आ रहा है।

सभा में मुनि विश्वामित्र ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि आश्रमों में निवास करने वाले दुष्ट राक्षस यज्ञ करने वाले हमारे लोगों को अपना भोजन बना लेते हैं। वे यज्ञों को नष्ट कर देते हैं, हवन सामग्री और वेद मंत्रों से युक्त आहुतियों को बिगाड़ देते हैं, जिसके कारण पूजा, पाठ और ध्यान सब में बड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है। अब समय आ गया है कि उनके कुकृत्यों से बचने का कोई प्रभावी उपाय किया जाए।

वशिष्ठ मुनि की स्मृति और ब्रह्माजी के पास जाने का निर्णय

विश्वामित्र की बात सुनकर वशिष्ठ मुनि ने बताया कि इस प्रकार का संकट पहले भी आ चुका है। उस समय भी राक्षसों के कारण यज्ञ बाधित हुए थे और ऋषि मुनि बहुत कष्ट में थे। तब सभी ने मिलकर ब्रह्माजी की शरण में जाने का निर्णय लिया था और वहीं से उन्हें मार्गदर्शन मिला था।

वशिष्ठ की बात सुनकर सभा में उपस्थित ऋषि मुनि सहमत हो गए कि जब देवताओं का भी रक्षक वे ही हैं तो इस समय भी उनके पास जाना उचित होगा। सभी ने कहा कि ब्रह्मदेव ही इस संकट से उबरने का सच्चा उपाय बता सकते हैं।

यह निश्चय करके समस्त मुनि और संन्यासी स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर ब्रह्मा जी के लोक में पहुंचे।

ब्रह्मा जी की प्रतिक्रिया और विश्वकर्मा की शरण की सलाह

मुनियों का दुःख सुनकर ब्रह्मा जी को आश्चर्य हुआ, साथ ही राक्षसों की उग्रता का चित्र उनके सामने स्पष्ट हो गया। ब्रह्मा जी ने कहा कि राक्षसों से तो स्वयं स्वर्ग में रहने वाले देवता भी भयभीत रहते हैं, फिर मनुष्य लोक के साधकों की स्थिति तो और कठिन हो जाती है जो वृद्धावस्था और मृत्यु के दुख से भी घिरे रहते हैं।

उन्होंने बताया कि उन राक्षसों का नाश करने में भगवान विश्वकर्मा ही पूर्ण रूप से समर्थ हैं। वे देवताओं के दिव्य निर्माता, शिल्पकार और रचनाकार हैं। इसलिए उन्होंने मुनियों से कहा कि वे विश्वकर्मा भगवान की शरण में जाएँ और वहीं से इस संकट का समाधान प्राप्त करें।

ब्रह्मा जी ने यह भी बताया कि उस समय पृथ्वी पर अग्नि देव के पुत्र, मुनि अगिंरा यज्ञों में श्रेष्ठ पुरोहित के रूप में प्रतिष्ठित हैं और वे स्वयं भगवान विश्वकर्मा के भक्त हैं। वही आपके दुःख दूर करने में मार्गदर्शक बन सकते हैं, अतः आप सबसे पहले उन्हीं के पास जाएँ।

मुनि अगिंरा के पास ऋषियों का आगमन

सूतजी ने आगे बताया कि ब्रह्मा जी की आज्ञा से सभी मुनि मुनि अगिंरा के आश्रम में पहुँचे। उन्होंने आदरपूर्वक उन्हें प्रणाम किया और यज्ञों में उत्पन्न विघ्नों, राक्षसों के अत्याचार और ब्रह्मा जी से प्राप्त सलाह के बारे में बताया।

अगिंरा मुनि ने उनकी बात ध्यान से सुनी और कहा कि हे मुनियों, आप लोग क्यों व्यर्थ में यहाँ वहाँ भटक रहे हैं। दुःखों को दूर करने में विश्वकर्मा भगवान के अतिरिक्त और कोई समर्थ नहीं है। वे ही सच्चे रचनाकार हैं, वे ही रक्षा के उपाय भी जानते हैं।

अगिंरा ने स्पष्ट किया कि जब तक विश्वकर्मा भगवान की शरण नहीं ली जाएगी तब तक यज्ञों पर पड़ने वाले राक्षसी आक्रमणों से स्थायी मुक्ति नहीं मिल सकती। इसलिए वे उन्हें एक विशिष्ट व्रत और पूजा का उपाय बताते हैं।

अमावस्या की पूजा और विश्वकर्मा कथा श्रवण का महत्व

अगिंरा मुनि ने सभी ऋषियों से कहा कि अमावस्या के दिन अपने सामान्य कर्मों को रोककर पूर्ण श्रद्धा से विश्वकर्मा भगवान की कथा सुनें और उनकी उपासना करें। उन्होंने निर्देश दिया कि उस दिन सभी मुनि एकत्र होकर यज्ञ करें और यज्ञ में विश्वकर्मा का पूजन करें।

अमावस्या आने पर ऋषियों ने स्नान कर, शुद्ध वस्त्र धारण कर यज्ञ वेदी तैयार की। मंत्रोच्चार के साथ अग्नि प्रज्वलित की गई। यज्ञ में विश्वकर्मा भगवान का स्मरण करते हुए आहुतियाँ दी गईं, उनके नाम का जप किया गया और यज्ञ के मध्य श्री विश्वकर्मा कथा का श्रवण किया गया।

कथा और पूजा के साथ साथ सभी मुनियों ने अपने भीतर भी विनम्र भाव से यह स्वीकार किया कि रचना शक्ति और रक्षा शक्ति दोनों ही ईश्वर के हाथ में हैं और विश्वकर्मा इस दिव्य शक्ति के प्रतिनिधि हैं।

राक्षसों का नाश और यज्ञों की रक्षा

विश्वकर्मा भगवान के नाम से किए गए इस यज्ञ, कथा श्रवण और पूजा से अद्भुत परिणाम सामने आया। जैसे ही व्रत और पूजा पूर्ण हुई, राक्षसों की शक्ति क्षीण होने लगी। जो राक्षस यज्ञों में विघ्न डालते थे, वे कालाग्नि से दग्ध होकर भस्म हो गए।

इसके बाद यज्ञ विघ्न रहित हो गए। न तो राक्षसों का भय रहा, न किसी प्रकार की बाधा। ऋषि मुनियों के सभी कष्ट दूर हो गए और आश्रमों में पुनः शांति, सुरक्षित साधना और गहन तपस्या का वातावरण स्थापित हो गया।

सूतजी ने स्पष्ट किया कि जो मनुष्य भक्ति भाव से विश्वकर्मा भगवान की पूजा करता है, अमावस्या या विश्वकर्मा जयंती के दिन उनकी कथा सुनता और सुनाता है, वह संसार में सुख प्राप्त करता हुआ ऊँचे पद और सम्मान तक पहुँच सकता है।

भगवान विश्वकर्मा की कृपा से जीवन में प्रगति

विश्वकर्मा पूजा केवल देव शिल्पकार की उपासना नहीं बल्कि अपने स्वयं के कर्म की शुद्धि और कुशलता की साधना भी है। विश्वकर्मा की कथा यह सिखाती है कि जब कर्म धर्म के मार्ग पर होते हैं और उनमें देव शक्ति की स्मृति जुड़ती है तब उसी कर्म से रक्षा, प्रतिष्ठा और प्रगति का मार्ग खुलता है।

भक्तजन अपने औजारों, मशीनों, कार्यस्थलों, कारखानों और कार्यालयों में भी विश्वकर्मा पूजा करते हैं ताकि कार्यक्षेत्र में दुर्घटना कम हों, समृद्धि बढ़े और मेहनत का फल स्थिर रूप से प्राप्त हो। कथा यह संकेत भी देती है कि सच्चे अर्थ में बड़ा पद वही है जहाँ कर्म, कौशल और विनम्रता तीनों साथ उपस्थित हों।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वकर्मा जयंती या विश्वकर्मा पूजा के दिन कथा सुनना क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
इस दिन की पूजा कथा सहित ही पूर्ण मानी जाती है। मुनि अगिंरा द्वारा बताए गए उपाय में भी अमावस्या के दिन विश्वकर्मा कथा का श्रवण प्रमुख था, जिसके फलस्वरूप राक्षस नष्ट हुए और यज्ञ सुरक्षित हो गए।

मुनि विश्वामित्र और अन्य ऋषि ब्रह्मा जी के पास क्यों गए थे?
राक्षसों द्वारा यज्ञ नष्ट किए जाने और साधकों को भोजन बनाकर मार देने की स्थिति में उन्हें कोई उपाय न सूझा। तब वशिष्ठ मुनि ने पूर्व अनुभव के आधार पर सुझाव दिया कि इस संकट से मुक्ति के लिए ब्रह्मा जी की शरण लेना ही श्रेष्ठ होगा।

ब्रह्मा जी ने विश्वकर्मा भगवान का नाम क्यों लिया?
ब्रह्मा जी ने कहा कि राक्षसों को नष्ट करने और यज्ञों की रक्षा करने की वास्तविक क्षमता विश्वकर्मा में है। वे देवों के दिव्य निर्माणकर्ता और संरक्षक शक्ति के भी प्रतीक हैं, इसलिए उन्होंने मुनियों को विश्वकर्मा की शरण में जाने का निर्देश दिया।

अगिंरा मुनि ने ऋषियों को कौन सा उपाय बताया?
अगिंरा मुनि ने कहा कि अमावस्या के दिन सभी मुनि अपने सामान्य कर्म रोककर भक्ति पूर्वक विश्वकर्मा भगवान की कथा सुनें, यज्ञ करें और उनकी उपासना करें। यही उपाय राक्षसों से मुक्ति और यज्ञों की रक्षा के रूप में सामने आया।

विश्वकर्मा पूजा करने वाले साधक को किस प्रकार का फल प्राप्त होता है?
कथा के अनुसार जो मनुष्य भक्ति भाव से विश्वकर्मा भगवान की पूजा करता है और उनकी कथा सुनता है, वह संसार में सुख प्राप्त करता है, विघ्नों से बचा रहता है और अपने कार्यक्षेत्र में ऊँचे पद और सम्मान तक पहुँच सकता है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ

500+

USERS

100K+

TRUSTED ASTROLOGERS

20K+

DOWNLOADS