By पं. नरेंद्र शर्मा
उन दुर्लभ नामों पर प्रकाश डालिए, जो शिव की चैतन्यता, योग तथा विभिन्न गुणों का परिचय देते हैं

सनातन धर्म में शिव केवल देवता नहीं बल्कि अनंत, निराकार और साक्षात् चेतना का सिद्धांत हैं। प्रसिद्ध नामों के अतिरिक्त वेदों और प्राचीन स्तोत्रों में शिव के ऐसे दुर्लभ नाम मिलते हैं जो उनके सूक्ष्म और गूढ़ स्वरूपों को दर्शाते हैं।
‘हृ’ धातु से बना हरा शब्द पाप, अहंकार और अज्ञान का नाशक है। साधना में ये अविद्या हटाकर मोक्ष का मार्ग खोलने वाला है।
श्रीरुद्रम में वर्णित भव सृष्टि की जड़ है। शिव केवल संहारक नहीं बल्कि समस्त जीवन का आरंभ-बिंदु हैं।
शर्व वह प्रचंड शक्ति है जो पुरानी संरचनाओं को समाप्त कर नव-सृष्टि का अवसर बनाती है। युद्धों में इसका जाप होता था।
उमा के पति के रूप में शिव का यह नाम योग, प्रेम और पूरकता के सिद्धांत को दर्शाता है।
मृत्युंजय मंत्र से जुड़े इस नाम का अर्थ है मृत्यु भय का नाश और मोक्ष प्रदान करना।
शिव चंद्रमा को धारण करते हैं, जो मन, भाव और कालचक्र का प्रतीक है। यह नाम मानसिक स्थिरता और शीतलता का संकेत है।
काशी विश्वनाथ के रूप में प्रसिद्ध, यह नाम शिव को जगत के स्वामी और व्यवस्था के सूत्रधार के रूप में दिखाता है।
अज शिव का अजन्मा और अनादि रूप है, जो जन्म–मरण के चक्र से परे है।
स्थाणु वह केंद्र है जहाँ सब परिवर्तन स्थिर होकर एकता पाते हैं।
महेश्वर शिव को समस्त अस्तित्व के सर्वश्रेष्ठ स्वामी के रूप में प्रतिष्ठित करता है, जिनके गुण ज्ञान, वैराग्य और करुणा हैं।
| नाम | अर्थ और भूमिका |
|---|---|
| हरा | भ्रम और पापों का नाशक |
| भव | सृष्टि का आधार |
| शर्व | संहारक, परिवर्तनकारी शक्ति |
| उमापति | उमा के पति, शक्ति-सहधर्मी |
| मृत्युंजय | मृत्यु का संहारक, भयमुक्ति |
| चंद्रपाल | मन के नियंत्रक, चंद्रधारी |
| विश्वेश्वर | ब्रह्माण्ड के स्वामी |
| अज | अजन्मा, अनादि |
| स्थानु | स्थिर, अचल |
| महेश्वर | सर्वोच्च स्वामी |
इन दुर्लभ नामों का जाप शिव के सूक्ष्म स्वरूप को समझने और साधना को गहन बनाने में सहायक है। शिव अनेक रूपों का महासंगम हैं, जिनका बोध मनुष्य को सरल, सशक्त और आध्यात्मिक बनाता है।
1.क्या ये सभी नाम वेदों और प्राचीन स्तोत्रों में मिलते हैं?
हाँ, अधिकांश नाम श्रीरुद्रम, उपनिषदों और पुराणों में वर्णित हैं।
2.क्या इन नामों के जप का कोई विशेष लाभ है?
हाँ, प्रत्येक नाम एक विशिष्ट ऊर्जा और भाव जागृत करता है, जैसे मृत्युंजय भय नाशक है और हरा अविद्या का नाशक।
3.क्या शिव के ये नाम ध्यान के समय उपयोग किए जा सकते हैं?
बिल्कुल, ये नाम ध्यान को गहराई और स्थिरता प्रदान करते हैं।
4.क्या उमापति नाम शक्ति सिद्धांत से जुड़ा है?
हाँ, यह नाम शिव–शक्ति की अभिन्न एकता का प्रतीक है।
5.क्या स्थानु नाम का अर्थ सचमुच स्थिरता है?
हाँ, स्थानु शिव का अचल और अटूट रूप है जो परिवर्तन के बीच स्थिरता का आधार है।
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