हनुमान जी की पूंछ का अलौकिक रहस्य

By पं. नरेंद्र शर्मा

जानिए प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान जी के विग्रह और उनकी अंतहीन पूंछ का आध्यात्मिक सत्य

टे हुए हनुमान जी की पूंछ का रहस्य ज्योतिषीय सत्य

सनातन धर्म की पावन वैचारिक चेतना और वैदिक दर्शन के विशाल वांग्मय में संकटमोचन श्री हनुमान जी का स्वरूप अदम्य बल, निश्छल भक्ति और अद्वितीय सामर्थ्य का एक ऐसा जाज्वल्यमान प्रकाश स्तंभ है जिसकी महिमा चराचर ब्रह्मांड में व्याप्त है। भचक्र के समस्त ज्योतिषीय विन्यासों और उच्च आध्यात्मिक साधनाओं का अंतिम लक्ष्य भी मनुष्य के भीतर छिपी हुई उसी सुप्त आत्मबल को जाग्रत करना है जिसे सामान्यतः लोग सांसारिक भटकाव के कारण विस्मृत कर देते हैं। प्रयागराज की पावन त्रिवेणी संगम के अत्यंत निकट स्थित लेटे हुए बड़े हनुमान जी का मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह तो एक ऐसे अलौकिक रहस्य को अपने भीतर समेटे हुए है जिसे विज्ञान और तार्किक बुद्धि आज तक सुलझाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। इस अद्भुत संकेत स्थल पर बजरंगबली की कोई खड़ी या उड़ती हुई प्रतिमा विद्यमान नहीं है बल्कि वे साक्षात लेटी हुई मुद्रा में प्रतिष्ठित हैं। इस विस्मयकारी विग्रह की सबसे बड़ी विशेषता उनकी वह दिव्य पूंछ है जिसके विषय में यह दृढ़ मान्यता है कि वह पाताल लोक की गहराइयों तक विस्तृत है। भूतकाल में कई बार इस पूंछ के अंतिम छोर को खोजने के लिए भूमि की गहरी खुदाई करने के प्रयास किए गए परंतु प्रत्येक प्रयास केवल एक रहस्य बनकर ही रह गया। यह अलौकिक घटनाक्रम प्रत्येक तार्किक मस्तिष्क को यह सोचने पर विवश करता है कि क्या यह केवल अंधविश्वास है या कोई ऐसा परम सत्य जो आज भी मानवीय बुद्धि की संकीर्ण सीमाओं से सर्वथा परे है।

इस पावन प्रसंग के आध्यात्मिक महत्व और बड़े हनुमान जी के इस विस्मयकारी स्वरूप को गहराई से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका का अवलोकन करना आवश्यक है जो इस अलौकिक घटनाक्रम के मुख्य आयामों का एक स्पष्ट ज्योतिषीय और दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

मुख्य आध्यात्मिक घटक सूक्ष्म दार्शनिक स्वरूप ज्योतिषीय एवं आत्मिक संबंध
लेटी हुई मुद्रा (विग्रह स्वरूप) पूर्ण विश्राम और परम मानसिक शांति चंद्रमा की चंचलता पर नियंत्रण और आत्मिक स्थिरता
अनंत पूंछ (अमापनीय छोर) पाताल लोक तक असीमित विस्तार राहु जनित भ्रम का नाश और केतु द्वारा मोक्ष की प्राप्ति
त्रिवेणी संगम सानिध्य गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन कुंडली के कालसर्प और पितृ दोषों का समूल शमन
गंगा बाढ़ का अभिषेक प्रकृति द्वारा साक्षात ईश्वर का वंदन जल तत्व का पूर्ण शोधन और मानसिक अवसाद से मुक्ति
पाताल विजय कथा कड़े कर्मों और आसुरी शक्तियों का दमन मंगल के साहस और सूर्य के आत्मतेज का प्रकर्ष

महाबली हनुमान जी की दुर्लभ और अलौकिक लेटी हुई मुद्रा

साधारणतः संपूर्ण विश्व में हनुमान जी की मूर्तियां वीर मुद्रा में खड़ी हुई, गदा धारण किए हुए या आकाश मार्ग में संजीवनी पर्वत लेकर उड़ते हुए ही निर्मित की जाती हैं। परंतु प्रयागराज के इस प्राचीन मंदिर में मारुति नंदन को विश्राम की मुद्रा में लेटे हुए प्रदर्शित किया गया है जो संपूर्ण चराचर ब्रह्मांड में अपने प्रकार का एकमात्र विग्रह है। यह प्रतिमा केवल पत्थरों को तराश कर नहीं बनाई गई है बल्कि यह तो त्रेतायुग के एक अत्यंत विशिष्ट कालखंड के कर्मायन को अपने भीतर जीवंत किए हुए है।

  • शास्त्रों के अनुसार लंका विजय के उपरांत जब हनुमान जी अत्यधिक शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके थे तो माता सीता के कहने पर उन्होंने इस पवित्र त्रिवेणी तट पर विश्राम किया था।
  • यह रूप प्रचंड ऐश्वर्य और अदम्य बल के प्रदर्शन के बाद मिलने वाली परम आत्मिक शांति को दर्शाता है।
  • यह विस्मयकारी मुद्रा प्रत्येक साधक के भीतर यह जिज्ञासा उत्पन्न करती है कि जो पवनपुत्र संपूर्ण जगत को गति प्रदान करते हैं वे स्वयं यहाँ पूरी तरह शांत क्यों हैं।
  • यही वह बिंदु है जहां से मनुष्य की चेतना बाह्य कोलाहल को छोड़कर अंतर्मुखी होना आरंभ करती है और उस परम सत्ता के सानिध्य का अनुभव करती है।

वह दिव्य पूंछ जिसे मापने में भौतिक विज्ञान पूरी तरह विफल रहा

इस मंदिर की सबसे विस्मयकारी मान्यता हनुमान जी की पूंछ की लंबाई से जुड़ी हुई है जिसके विषय में यह कहा जाता है कि इसका कोई अंतिम छोर ही नहीं है। ऐतिहासिक अभिलेखों और ब्रिटिश काल के दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि उस समय के कुछ अधिकारियों ने इस कथा को एक कपोल कल्पित कहानी मानकर इसकी सत्यता जांचने के लिए प्रतिमा के समीप गहरी खुदाई करवाने का आदेश दिया था।

श्रमिकों ने कई फीट नीचे तक खुदाई की परंतु हनुमान जी की पूंछ का सिरा कहीं भी समाप्त होता हुआ दिखाई नहीं दिया। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ती गई वैसे-वैसे वहां से जल की धाराएं फूट पड़ीं और अंततः उस प्रयास को विवश होकर बीच में ही रोकना पड़ा। यह प्रामाणिक घटना आज भी नास्तिकों और बुद्धिजीवियों के लिए एक बहुत बड़ा कौतूहल बनी हुई है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूंछ का यह अंतहीन विस्तार इस बात का साक्षात संकेत है कि हनुमान जी की शक्तियां अनंत हैं और वे पाताल लोक के भी अधिपति हैं। कुछ सत्यों को भौतिक उपकरणों से मापा नहीं जा सकता है बल्कि उन्हें केवल निष्कपट श्रद्धा के माध्यम से ही अनुभव किया जा सकता है।

गंगा की प्रलयंकारी बाढ़ जो कभी इस पावन ज्योति को बुझा नहीं पाती है

प्रयागराज में जब भी वर्षा ऋतु के समय मां गंगा और यमुना अपने उग्र रूप में प्रकट होती हैं तो संपूर्ण क्षेत्र जलमग्न हो जाता है और बाढ़ का पानी इस प्राचीन मंदिर के गर्भगृह तक पहुँच जाता है। यह प्रकृति का एक अत्यंत अद्भुत और अलौकिक नियम है कि प्रत्येक वर्ष मां गंगा स्वयं आगे बढ़कर लेटे हुए हनुमान जी के चरणों का स्पर्श करती हैं और उनका पवित्र अभिषेक संपन्न करती हैं।

इस भयंकर बाढ़ के समय भी मंदिर के भीतर प्रज्वलित रहने वाली अखंड ज्योति कभी भी शांत नहीं होती है जो जल तत्व के ऊपर अग्नि तत्व की विजय को प्रदर्शित करती है। ज्योतिष शास्त्र में जल को भावनाओं का कारक माना गया है और जब गंगा का पानी हनुमान जी का अभिषेक करता है तो वह इस बात का साक्षात प्रतीक बनता है कि ईश्वर हमारी सभी अशांत भावनाओं को शांत करके हमें मानसिक आरोग्यता प्रदान करते हैं। जब तक गंगा मैया हनुमान जी के चरणों को पूरी तरह से धो नहीं लेती हैं तब तक बाढ़ का पानी वापस अपनी सीमाओं में नहीं लौटता है। यह दृश्य प्रकृति और परमात्मा के बीच होने वाले उस मूक संवाद को दर्शाता है जो मनुष्य को यह सिखाता है कि इस संसार में सब कुछ एक सर्वोच्च विधान के अनुसार ही संचालित हो रहा है।

लंका दहन की दिव्य अग्नि और त्रिवेणी के पावन जल का संबंध

इस जाग्रत मंदिर की पौराणिक कथा सीधे रामायण काल के उस गौरवशाली प्रसंग से जुड़ी है जब हनुमान जी ने अपनी पूंछ से संपूर्ण रावण की लंका को भस्म कर दिया था। उस भीषण युद्ध और दहन के पश्चात हनुमान जी की पूंछ की अग्नि पूरी तरह शांत नहीं हुई थी और उसकी तपन से व्याकुल होकर वे माता सीता के निर्देशानुसार इस त्रिवेणी संगम पर पहुँचे थे।

  • जैसे ही उन्होंने अपनी जलती हुई पूंछ को इस पवित्र जल में डुबाया तो वहां का जल पूरी तरह से वाष्पीकृत होने लगा।
  • ऐसा माना जाता है कि उस अग्नि की प्रचंडता को शांत करने के लिए ही उनकी पूंछ पाताल लोक की अगाध गहराइयों तक चली गई।
  • यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब भी धर्म की रक्षा के लिए क्रोध या अग्नि का प्राकट्य होता है तो उसे शांत करने के लिए साक्षात प्रकृति अपने तत्वों को समर्पित कर देती है।
  • यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल एक पत्थर की मूर्ति के दर्शन नहीं करते हैं बल्कि वे रामायण काल के उस जीवंत इतिहास को स्पर्श करते हैं जो उनकी चेतना को शुद्ध कर देता है।

तार्किक प्रमाणों से सर्वथा परे केवल आत्मिक श्रद्धा का साम्राज्य

लौकिक संसार में प्रत्येक वस्तु को सिद्ध करने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों और तार्किक प्रमाणों की आवश्यकता होती है परंतु अध्यात्म का मार्ग इन सभी भौतिक सीमाओं से सर्वथा परे है। इस मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह कोई शोध का विषय नहीं है कि पूंछ की लंबाई कितनी है या बाढ़ के पानी में दीपक कैसे जलता रहता है।

वे यहाँ केवल उस परम ऊर्जा का अनुभव करने आते हैं जो उनके दुखों को दूर करती है और उनके मन में अटूट विश्वास का संचार करती है। सुंदर चौपाइयों का गान और बजरंगबली के चरणों का सिंदूर मनुष्य के अंतर्मन पर जमे हुए संचित पापों के मैल को पूरी तरह से धो देता है। जब मनुष्य तार्किकता के अहंकार को छोड़कर पूर्ण समर्पण के साथ इस पावन धरा पर बैठता है तो उसके भीतर की सभी व्याकुलताएं स्वतः ही शांत हो जाती हैं। लोग यहाँ से केवल प्रश्नों के उत्तर लेकर नहीं जाते बल्कि एक ऐसी दिव्य शांति लेकर लौटते हैं जो संसार के किसी भी कोने में प्राप्त होना सर्वथा असंभव है।

FAQ

प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन का क्या ज्योतिषीय महत्व है
वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस जाग्रत मंदिर में दर्शन करने से शनि देव की साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु केतु के अशुभ प्रभाव से होने वाले भयानक मानसिक कष्ट स्वतः ही शांत हो जाते हैं और मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास का संचार होता है।

क्या ब्रिटिश काल में सचमुच हनुमान जी की पूंछ को खोजने के लिए खुदाई की गई थी
हां ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार अंग्रेजी शासन के दौरान इस मंदिर की दिव्यता को चुनौती देने के लिए प्रतिमा के पास गहरी खुदाई की गई थी परंतु पूंछ का छोर न मिलने और पानी निकलने के कारण अंग्रेजों ने हार मान ली थी।

गंगा नदी प्रतिवर्ष हनुमान जी का अभिषेक क्यों करती हैं इसके पीछे क्या पौराणिक कथा है
धार्मिक कथाओं के अनुसार गंगा नदी भगवान विष्णु के चरणों से निकली हैं और हनुमान जी शिव के अवतार होने के साथ-साथ विष्णु के अनन्य भक्त हैं इसलिए गंगा प्रत्येक वर्ष बाढ़ के माध्यम से उनके चरणों को धोकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हैं।

लेटे हुए हनुमान जी की यह पवित्र प्रतिमा कितनी पुरानी मानी जाती है
इस प्रतिमा को त्रेतायुग कालीन माना जाता है जब भगवान श्री राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौट रहे थे तो भारद्वाज ऋषि के आश्रम में आते समय हनुमान जी ने इसी स्थान पर विश्राम किया था।

इस मंदिर में नित्य की जाने वाली विशेष पूजा का क्या नियम है
यहाँ बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने का विशेष नियम है और जो भी भक्त यहाँ हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ पूरी निष्ठा से करता है उसके जीवन के सभी अमंगल दूर हो जाते हैं।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

पं. नरेंद्र शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ

500+

USERS

100K+

TRUSTED ASTROLOGERS

20K+

DOWNLOADS