By पं. संजीव शर्मा
कुंडली के भावों की दिशा, करियर, विवाह, घर, स्थान परिवर्तन, प्रश्न कुंडली और शुभ मुहूर्त में दिशा आधारित निर्णय का विस्तृत मार्गदर्शन

जन्म कुंडली को यदि केवल ग्रहों और राशियों की गोल आकृति न मानकर एक जीवित मानचित्र की तरह देखा जाए, तो हर भाव केवल जीवन क्षेत्र नहीं रहता। वह किसी न किसी दिशा की छाप भी लेकर चलता है। गंभीर वैदिक ज्योतिष में यह मान लिया जाता है कि हर भाव एक दिशा को भी दर्शाता है और वही दिशा बताती है कि घटना कहाँ घट सकती है, अवसर किस ओर से आ सकते हैं और किस दिशा में बढ़ने से भाग्य अधिक सहयोग कर सकता है।
जो भी ज्योतिषी गहराई से पढ़ाई करता है, वह हाउस की दिशा को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं मानता। इसी पर आधारित होकर ऐसे प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं जैसे
कुंडली का हर भाव अपने साथ एक दिशा संकेत लेकर चलता है। उसी भाव में बैठे ग्रह, उनकी दशा, गोचर और दृष्टि यह दिखा देते हैं कि वह विषय अधिकतर किस दिशा से जीवन में प्रकट होगा।
नीचे एक सारणी में कुछ प्रमुख भाव और उनसे जुड़ी दिशाओं को रखा जा सकता है, जिनका उपयोग व्यवहारिक भविष्यवाणी में सबसे अधिक होता है।
| भाव | दिशा | मुख्य जीवन क्षेत्र |
|---|---|---|
| चतुर्थ भाव | उत्तर | घर, भूमि, वाहन, परिवार |
| सप्तम भाव | पश्चिम | विवाह, साझेदारी, जीवनसाथी |
| नवम भाव | दक्षिण पश्चिम | धर्म, भाग्य, उच्च अध्ययन, दूर यात्रा |
| दशम भाव | दक्षिण | करियर, पद, कर्मक्षेत्र |
| एकादश भाव | दक्षिण पूर्व | लाभ, मित्र, समूह, संपर्क |
इन्हीं संकेतों के आधार पर दिशा आधारित विश्लेषण की बुनियाद बनती है।
जब कोई भाव अपनी दिशा के साथ दशा या गोचर से सक्रिय हो जाता है, तो उस भाव से जुड़े विषय अक्सर उसी दिशा से जुड़कर सामने आते हैं। यही बात भविष्यवाणी को अधिक सटीक बना देती है।
दशम भाव कर्म, पद और सार्वजनिक जीवन का भाव है। इसकी दिशा दक्षिण मानी जाती है। यदि किसी कुंडली में दशम भाव मजबूत हो, या उस भाव के स्वामी की दशा चल रही हो, तो कामकाज से जुड़ी घटनाएं अक्सर दक्षिण दिशा से संबंध रखती दिखाई देती हैं।
ऐसे समय में
इसीलिए करियर संबंधी प्रश्नों में दशम भाव और दक्षिण दिशा को साथ देखकर विश्लेषण किया जाता है।
सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का भाव है। इसकी दिशा पश्चिम मानी जाती है। जब इस भाव पर महादशा, अंतर्दशा या महत्वपूर्ण गोचर का प्रभाव हो, तो जीवनसाथी की दिशा कई बार पश्चिम से जुड़कर सामने आती है।
ऐसे योग में
जब परिवार यह जानना चाहता है कि जीवनसाथी किस दिशा से आएगा तब सप्तम भाव, उसके स्वामी और पश्चिम दिशा के संकेतों को एक साथ देखना जरूरी हो जाता है।
चतुर्थ भाव घर, माता, अचल संपत्ति और वाहन का भाव है। इसकी दिशा उत्तर मानी जाती है। यदि इस भाव में कोई अशुभ ग्रह कष्टकारी स्थिति में बैठा हो और उसी ग्रह की दशा चल रही हो, तो
यदि यही चतुर्थ भाव शुभ ग्रहों से समर्थ हो, तो उत्तर दिशा से घर खरीदने, संपत्ति बढ़ने या वाहन के माध्यम से सुख मिलने के योग बनते हैं।
एकादश भाव लाभ, मित्र, संपर्क और इच्छाओं का भाव है। इसकी दिशा दक्षिण पूर्व मानी जाती है। जब यह भाव शुभ ग्रहों से बलवान हो या इसकी दशा चल रही हो, तो
इसलिए जब लाभ और संपर्क से जुड़े परिणाम देखे जाते हैं, तो एकादश भाव के साथ दक्षिण पूर्व दिशा पर भी ध्यान दिया जाता है।
नवम भाव धर्म, भाग्य, गुरु, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राओं का भाव है। इसकी दिशा दक्षिण पश्चिम मानी जाती है। यदि इस भाव पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो या वही ग्रह यहां बैठा हो और उसकी दशा चल रही हो, तो
ऐसे समय में शिक्षा या धर्म संबंधी निर्णय लेते समय इस दिशा में खुले अवसरों पर विशेष ध्यान देना लाभकारी साबित हो सकता है।
दिशा आधारित ज्योतिष केवल घर के कमरों तक सीमित नहीं रहती। वही तर्क मोहल्ला, शहर, राज्य और देश तक फैला हुआ देखा जा सकता है।
घर के भीतर भी
इस तरह दिशा आधारित कुंडली व्यक्ति के लिए एक सूक्ष्म जीवन मानचित्र बन जाती है।
प्रश्न कुंडली में किसी प्रश्न के समय की कुंडली बनाई जाती है। उसमें जिस भाव से प्रश्न जुड़ा हो, उसकी दिशा भी उत्तर का हिस्सा बन जाती है।
यदि प्रश्न कुंडली में खोई वस्तु को द्वितीय भाव से दर्शाया गया हो और वही भाव सक्रिय हो, तो
यदि प्रश्न में लग्नेश चतुर्थ भाव में बैठा हो, तो उत्तर दिशा के कमरों, अलमारियों और परिवार से जुड़े स्थानों में खोज करने की सलाह दी जा सकती है।
किसी शुभ मुहूर्त में भी दिशा की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस तरह प्रश्न और मुहूर्त दोनों में हाउस की दिशा, ग्रहों की स्थिति और विषय की प्रकृति को जोड़कर निर्णय किए जाते हैं।
भूमि, घर, स्थान परिवर्तन और व्यवसाय विस्तार जैसे निर्णयों में भी हाउस डायरेक्शन से मार्गदर्शन लिया जाता है।
यदि कोई व्यक्ति बृहस्पति की महादशा में हो और बृहस्पति नवम भाव में स्थित हो, तो दक्षिण पश्चिम दिशा वाले प्रदेश, शहर या देश में पढ़ाई या आध्यात्मिक साधना के अवसर अधिक अनुकूल दिख सकते हैं। यदि दशम भाव दक्षिण दिशा में मजबूत हो, तो करियर हेतु दक्षिण दिशा में स्थित शाखाओं, कार्यालयों या शहरों की तरफ देखने से मदद मिल सकती है।
नीचे एक सारणी में कुछ भावों और उनकी दिशा आधारित उपयोगिता को एक साथ रखा जा सकता है।
| भाव | दिशा | उपयोग |
|---|---|---|
| द्वितीय | उत्तर पूर्व | खोई वस्तु, धन और घर के पास की वस्तुएं |
| चतुर्थ | उत्तर | घर, भूमि, वाहन, निवास |
| सप्तम | पश्चिम | जीवनसाथी की दिशा, विवाह स्थल |
| नवम | दक्षिण पश्चिम | उच्च शिक्षा, धर्म यात्रा, गुरु का स्थान |
| दशम | दक्षिण | कार्यालय, काम की दिशा, पद |
| एकादश | दक्षिण पूर्व | मित्र, समूह, लाभ देने वाले संपर्क |
1. क्या हर जन्म कुंडली में हाउस की दिशा एक जैसी रहती है
हाँ। दिशा भाव से जुड़ी रहती है, राशि से नहीं। प्रथम भाव हमेशा पूर्व, चतुर्थ उत्तर, सप्तम पश्चिम और दशम दक्षिण दिशा से जुड़े माने जाते हैं। लग्न बदलने से यह धांचा नहीं बदलता।
2. क्या जीवनसाथी की दिशा वास्तव में कुंडली से देखी जा सकती है
जब सप्तम भाव, उसका स्वामी और महत्वपूर्ण गोचर एक ही दिशा के संकेत दें, तो जीवनसाथी की दिशा का अच्छा अनुमान लगाया जा सकता है। यदि पश्चिम दिशा से जुड़े संकेत प्रबल हों, तो जीवनसाथी अक्सर उसी दिशा वाले क्षेत्र से आता है।
3. क्या दिशाओं के आधार पर स्थान परिवर्तन की दिशा तय करना उचित है
दिशा केवल संकेत देती है कि किस ओर से कौन से विषय अधिक सक्रिय हो सकते हैं। यदि नवम या दशम भाव मजबूत हों, तो उनकी दिशा में शिक्षा, करियर या भाग्य से जुड़े अवसर अधिक मिल सकते हैं। किन्तु अंतिम निर्णय हमेशा स्थिति, कर्तव्य और विवेक से ही लेना चाहिए।
4. क्या खोई वस्तु की खोज में दिशा वास्तव में मदद करती है
जब प्रश्न कुंडली में वस्तु से जुड़ा भाव स्पष्ट हो और उसकी दिशा भी साफ दिखे तब उसी दिशा में खोज करने से वस्तु मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ग्रहों की प्रकृति से यह भी समझा जा सकता है कि वस्तु खुली जगह पर है या छिपे स्थान पर।
5. क्या हर व्यक्ति को केवल अपनी शुभ दिशा की ओर ही जाना चाहिए
हर दिशा कुछ अवसर और कुछ परीक्षाएं साथ लेकर आती है। हाउस की दिशा यह दिखाती है कि किस ओर कौन से विषय मजबूत होंगे। किस दिशा में जाना है, यह निर्णय व्यक्ति को अपने धर्म, परिस्थिति और आंतरिक तैयारी के आधार पर लेना चाहिए। दिशा मार्गदर्शन देती है, बंधन नहीं बनाती।
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