By पं. सुव्रत शर्मा
घर का मंदिर सही दिशा में होने से ही पूजा का असर मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है गलत जगह रखने से वही स्थान भारी और अस्थिर वातावरण दे सकता है

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मंदिर केवल सजावट नहीं पूरे घर की सूक्ष्म ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। सही दिशा और स्थान पर मंदिर स्थापित करने से मन जल्दी एकाग्र होता है नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होती है और घर में शांति और सौहार्द बढ़ता है। गलत स्थान पर मंदिर रखने से चाहे पूजा कितनी भी हो मन भारी या विचलित रह सकता है।
इसलिए मंदिर बनाते या रखते समय कुछ मूल बातें ध्यान में रखना ज़रूरी है ताकि पूजा-स्थल सचमुच शुद्ध शांत और ऊर्जा से भरा स्थान बन सके।
मंदिर को घर के बिलकुल मध्य (ब्रहमस्थान) के पास भी रखा जा सकता है बशर्ते वहाँ से पैरों की रौंदन और शोर कम हो और स्थान साफ-सुथरा रहे।
मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ जगहों से विशेष रूप से बचना चाहिए
इन जगहों पर नमी गंध और भारीपन अधिक रहते हैं जो मानसिक शांति और ध्यान के विपरीत माने गए हैं।
यदि घर में स्थान की बहुत कमी हो और बेडरूम में छोटा-सा पूजा-स्थल रखना मजबूरी हो तो कोशिश करें कि
पूर्व दिशा को ज्ञान उगते सूर्य और नई शुरुआत से और उत्तर दिशा को अवसर और समृद्धि से जोड़ा जाता है इसलिए इन दिशाओं में बैठकर जप-ध्यान अधिक अनुकूल माना जाता है।
बेहतर है कि
सादा शांत और सुव्यवस्थित मंदिर मन को जल्दी एकाग्र करता है।
छोटा-सा मंदिर भी यदि रोज़ साफ रखा जाए दीपक नियमित जले और वहाँ थोड़ी देर मौन जप-ध्यान हो तो पूरा घर हल्का और शांत महसूस होने लगता है।
1. घर में मंदिर के लिए सबसे शुभ दिशा कौन-सी है
सबसे श्रेष्ठ दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) मानी जाती है। यदि यह उपलब्ध न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी मंदिर रखा जा सकता है पर दक्षिण दक्षिण-पश्चिम और बाथरूम-सीढ़ी के पास मंदिर रखने से बचना चाहिए।
2. क्या बेडरूम में छोटा-सा मंदिर बना सकते हैं
संभव हो तो नहीं बनाना ही बेहतर है खासकर पति-पत्नी के कमरे में। यदि मजबूरी हो तो मंदिर को एक अलग अलमारी या ऊँचे शेल्फ पर रखकर पर्दा कर दें ताकि निजी क्षणों और पूजा-स्थल में सीधा टकराव न हो।
3. पूजा करते समय किस दिशा की ओर बैठना चाहिए
आम तौर पर पूर्व की ओर मुख करके बैठना सबसे शुभ माना जाता है और विकल्प के रूप में उत्तर दिशा भी ठीक है। दक्षिण की ओर मुख करके दैनिक पूजा करने की सलाह नहीं दी जाती।
4. मंदिर में कितनी मूर्तियाँ रखना उचित है
कोशिश करें कि 1-3 मुख्य देवताओं की मूर्ति/चित्र से अधिक न हों। बहुत अधिक मूर्तियाँ-फोटो एक ही छोटे स्थान पर रखने से ध्यान बिखरता है और जगह भारी महसूस होती है।
5. टूटे या पुराने फोटो-फ्रेम और मूर्तियों का क्या करें
टूटी चटकी या काफ़ी क्षतिग्रस्त मूर्ति या फोटो को मंदिर में न रखें। उन्हें किसी साफ कपड़े में लपेटकर या तो बहते जल में शांतिपूर्वक विसर्जित करें या किसी पवित्र वृक्ष/स्थान के पास सम्मान से रख दें और मंदिर में केवल अच्छी अवस्था वाली मूर्ति-चित्र रखें।
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