वास्तु टिप्स घर में मंदिर किस दिशा में बनाएँ इस दिशा की पूरी जानकारी

By पं. सुव्रत शर्मा

घर का मंदिर सही दिशा में होने से ही पूजा का असर मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है गलत जगह रखने से वही स्थान भारी और अस्थिर वातावरण दे सकता है

घर के मंदिर की सही दिशा वास्तु नियम क्या करें और क्या न करें

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मंदिर केवल सजावट नहीं पूरे घर की सूक्ष्म ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। सही दिशा और स्थान पर मंदिर स्थापित करने से मन जल्दी एकाग्र होता है नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होती है और घर में शांति और सौहार्द बढ़ता है। गलत स्थान पर मंदिर रखने से चाहे पूजा कितनी भी हो मन भारी या विचलित रह सकता है।

इसलिए मंदिर बनाते या रखते समय कुछ मूल बातें ध्यान में रखना ज़रूरी है ताकि पूजा-स्थल सचमुच शुद्ध शांत और ऊर्जा से भरा स्थान बन सके।

1 मंदिर किस दिशा में बनाएँ

  • घर के मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) सबसे शुभ मानी जाती है।
  • यदि उत्तर-पूर्व उपलब्ध न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी पूजा-स्थल बनाया जा सकता है।
  • इन दिशाओं को आध्यात्मिकता ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है इसलिए यहाँ बैठकर जप-ध्यान करना सहज लगता है।

मंदिर को घर के बिलकुल मध्य (ब्रहमस्थान) के पास भी रखा जा सकता है बशर्ते वहाँ से पैरों की रौंदन और शोर कम हो और स्थान साफ-सुथरा रहे।

2 किन स्थानों पर मंदिर न रखें

मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ जगहों से विशेष रूप से बचना चाहिए

  • बाथरूम या टॉयलेट के पास दीवार से सटे या बिल्कुल ऊपर-नीचे मंदिर रखने से बचें।
  • सीढ़ियों के नीचे यह स्थान भारी और दबाव वाला माना जाता है पूजा के लिए उपयुक्त नहीं।
  • स्टोर रूम या जंकर वाले कोने जहाँ पुराना सामान धूल-कचरा और अव्यवस्था हो वहाँ मंदिर न रखें।
  • मंदिर के ऊपर सीधे शौचालय या पानी की टंकी जैसी चीज़ें भी वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं मानी जातीं।

इन जगहों पर नमी गंध और भारीपन अधिक रहते हैं जो मानसिक शांति और ध्यान के विपरीत माने गए हैं।

3 बेडरूम में मंदिर क्यों न रखें

  • विशेष रूप से दंपति के बेडरूम में मंदिर रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
  • बेडरूम आराम निजता और दांपत्य के निजी क्षणों का स्थान होता है जबकि मंदिर पूर्ण पवित्रता और जागरूकता का प्रतीक है।
  • दोनों ऊर्जाएँ विपरीत दिशा में खिंच सकती हैं जिससे मन में हल्का अपराधबोध असहजता या ऊहापोह बना रह सकता है।

यदि घर में स्थान की बहुत कमी हो और बेडरूम में छोटा-सा पूजा-स्थल रखना मजबूरी हो तो कोशिश करें कि

  • मंदिर सीधे पलंग के सामने न हो
  • सोते समय पैरों की दिशा मंदिर की ओर न रहे
  • पूजा-स्थल को पर्दे या छोटी-सी अलमारी से अलग-सा बना दें।

4 पूजा करते समय किस दिशा की ओर मुख करें

  • पूजा-पाठ करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।
  • यदि देवता पूर्व की ओर मुख किए हों तो आप पश्चिम की ओर बैठकर पूजेंगे और यदि देवता पश्चिम की ओर हों तो आप पूर्व की ओर बैठ जाएँ ताकि आपका मुख पूर्व/उत्तर दिशा की ओर रहे।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके साधारण पूजा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

पूर्व दिशा को ज्ञान उगते सूर्य और नई शुरुआत से और उत्तर दिशा को अवसर और समृद्धि से जोड़ा जाता है इसलिए इन दिशाओं में बैठकर जप-ध्यान अधिक अनुकूल माना जाता है।

5 टूटी-फूटी मूर्तियाँ और भीड़भाड़ से बचें

  • मंदिर में टूटी चटकी या क्षतिग्रस्त मूर्ति रखना अशुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति दिखे तो विनम्रता से जल में विसर्जन या किसी पवित्र स्थान पर सम्मानपूर्वक रखकर अलग कर दें।
  • बहुत अधिक मूर्तियाँ फोटो और सामान एक छोटे-से मंदिर में भर देने से ऊर्जा बिखरी और भारी लगने लगती है।

बेहतर है कि

  • एक-दो मुख्य देवताओं की मूर्ति या चित्र रखें
  • बाकी को घर के अन्य हिस्सों में सजावटी रूप में लगाएँ न कि सब कुछ पूजा-स्थान में भर दें।

सादा शांत और सुव्यवस्थित मंदिर मन को जल्दी एकाग्र करता है।

6 सफ़ाई शांति और सादगी बनाए रखें

  • मंदिर के आस-पास का स्थान हमेशा साफ सूखा और सुगंधित रखें।
  • पूजा-स्थल के पास जूते-चप्पल गंदे कपड़े बिल पर्स या अन्य रोज़मर्रा का सामान न रखें।
  • पूजा के समय मोबाइल ज़ोर-ज़ोर की चर्चा या टीवी के शोर से बचें ताकि वह समय सचमुच “साँस लेने” जैसा लगे।

छोटा-सा मंदिर भी यदि रोज़ साफ रखा जाए दीपक नियमित जले और वहाँ थोड़ी देर मौन जप-ध्यान हो तो पूरा घर हल्का और शांत महसूस होने लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. घर में मंदिर के लिए सबसे शुभ दिशा कौन-सी है
सबसे श्रेष्ठ दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) मानी जाती है। यदि यह उपलब्ध न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी मंदिर रखा जा सकता है पर दक्षिण दक्षिण-पश्चिम और बाथरूम-सीढ़ी के पास मंदिर रखने से बचना चाहिए।

2. क्या बेडरूम में छोटा-सा मंदिर बना सकते हैं
संभव हो तो नहीं बनाना ही बेहतर है खासकर पति-पत्नी के कमरे में। यदि मजबूरी हो तो मंदिर को एक अलग अलमारी या ऊँचे शेल्फ पर रखकर पर्दा कर दें ताकि निजी क्षणों और पूजा-स्थल में सीधा टकराव न हो।

3. पूजा करते समय किस दिशा की ओर बैठना चाहिए
आम तौर पर पूर्व की ओर मुख करके बैठना सबसे शुभ माना जाता है और विकल्प के रूप में उत्तर दिशा भी ठीक है। दक्षिण की ओर मुख करके दैनिक पूजा करने की सलाह नहीं दी जाती।

4. मंदिर में कितनी मूर्तियाँ रखना उचित है
कोशिश करें कि 1-3 मुख्य देवताओं की मूर्ति/चित्र से अधिक न हों। बहुत अधिक मूर्तियाँ-फोटो एक ही छोटे स्थान पर रखने से ध्यान बिखरता है और जगह भारी महसूस होती है।

5. टूटे या पुराने फोटो-फ्रेम और मूर्तियों का क्या करें
टूटी चटकी या काफ़ी क्षतिग्रस्त मूर्ति या फोटो को मंदिर में न रखें। उन्हें किसी साफ कपड़े में लपेटकर या तो बहते जल में शांतिपूर्वक विसर्जित करें या किसी पवित्र वृक्ष/स्थान के पास सम्मान से रख दें और मंदिर में केवल अच्छी अवस्था वाली मूर्ति-चित्र रखें।

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लेखक

पं. सुव्रत शर्मा

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