By पं. नीलेश शर्मा
अंगारक योग का सिंह राशि में निर्माण: 12 राशियों के लिए अहंकार, संघर्ष और कर्मिक शुद्धि पर गहरा प्रभाव।

वैदिक ज्योतिष में अंगारक योग को ग्रहों के सबसे तीव्र और अस्थिर संयोजनों में से एक माना जाता है। 7 जून से 28 जुलाई 2025 तक मंगल (Mars) और केतु (Ketu) ग्रह सिंह राशि में एक साथ आएंगे। यह अग्निमय संरेखण ऊर्जा को चरम पर ले जाने, अस्थिरता पैदा करने और कर्मिक परिवर्तन लाने के लिए जाना जाता है। इस गोचर में व्यक्तिगत जीवन वैश्विक घटनाओं और सामूहिक चेतना दोनों के लिए विघटनकारी और शुद्धि दोनों तरह की क्षमताएँ हैं।
यह युति सिंह राशि (Simha Rashi) में हो रही है, जो सूर्य द्वारा शासित एक स्थिर अग्नि तत्व की राशि है। सिंह राशि अहंकार अधिकार नेतृत्व और व्यक्तिगत इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
युति की प्रमुख तिथियाँ और स्थिति:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| युति काल | 7 जून 2025 से 28 जुलाई 2025 तक |
| स्थान | सिंह राशि (अग्नि तत्व, सूर्य द्वारा शासित) |
| योग का नाम | अंगारक योग (विस्फोटक, संघर्ष और शुद्धि का प्रतीक) |
| ऊर्जा का स्वभाव | मंगल की आक्रामकता, केतु का अप्रत्याशित बल और सिंह की राजसी ऊर्जा मिलकर एक तीव्र त्रि-अग्नि प्रभाव बनाते हैं |
यह गोचर अधिकार और अहंकार के मामलों को विशेष रूप से आवेशित करता है।
यह मंगल-केतु युति संघर्ष क्रोध दुर्घटनाओं आग के खतरों और अप्रत्याशित बाधाओं का कारण बनने वाला अशुभ योग है। हालाँकि, जो लोग आध्यात्मिक पथ पर हैं, उनके लिए यही अग्नि बाधाओं को दूर करती है और शेष कर्मिक बोझ को तेजी से जला देती है, यदि अनुशासन और आत्म-नियंत्रण का अभ्यास किया जाए।
| राशि (Rashi) | प्रभावों का सारांश | मुख्य विषय और सलाह |
|---|---|---|
| सिंह | मूल व्यक्तित्व परिवर्तन, अहंकार की चुनौतियाँ, स्वास्थ्य जोखिम | अहंकार की परीक्षा, नई पहचान, स्वास्थ्य अनुशासन |
| मेष | संतान, बुद्धि और अटकलों में जोखिम, रचनात्मक घाव | जोखिम भरी अटकलों से बचें, रचनात्मकता को पोषित करें |
| वृषभ | घरेलू कलह, संपत्ति पर तनाव, आंतरिक भावनात्मक मंथन | पारिवारिक तर्कों से बचें, संपत्ति की मरम्मत पर ध्यान दें |
| मिथुन | नाटकीय संचार चरण, भाई बहनों के विवाद | सावधानी से गाड़ी चलाएँ, आक्रामकता से बचें |
| कर्क | अचानक खर्च, धन की अस्थिरता, वित्तीय अनुशासन | वित्तीय अनुशासन और न्यूनतमवाद अपनाएँ |
| कन्या | हानि, विरक्ति, आध्यात्मिक सफलताओं के लिए सर्वोत्तम | साधना के लिए अच्छा है, जोखिम भरे निर्णय टाल दें |
| तुला | छोड़ने से लाभ, बुजुर्गों से जुड़े मुद्दे | नेटवर्क में परिवर्तन, परिपक्व मित्रता बनाएँ |
| वृश्चिक | करियर में उथल पुथल, प्रसिद्धि बनाम अपमान | कार्यस्थल की प्रतिद्वंद्विता, सतर्क नेतृत्व |
| धनु | विदेशी यात्रा, कानूनी आश्चर्य, अपेक्षित यात्राएँ | अपेक्षित यात्राएँ, आध्यात्मिक चिंतन |
| मकर | अचानक सामाजिक और पेशेवर बदलाव | लक्ष्यों पर पुनर्विचार, समूह से विरक्ति |
| कुंभ | रिश्तों में उथल पुथल, सार्वजनिक छवि में बदलाव | सार्वजनिक और साझेदारी मामलों में कूटनीतिक रहें |
| मीन | स्वास्थ्य सतर्कता, ऊर्जा संरक्षण | विश्राम, मन शरीर सामंजस्य, अति से बचें |
इस तीव्र अवधि में शांति और शुद्धि प्राप्त करने के लिए:
सिंह राशि में मंगल-केतु की युति 7 जून से 28 जुलाई 2025 तक उथल-पुथल और आध्यात्मिक अवसर की एक तीव्र अवधि है - जो आत्म-नियंत्रण विनम्रता और लचीलेपन की माँग करती है। अंगारक योग संघर्ष और आवेग को ट्रिगर कर सकता है, लेकिन इसकी गहरी क्षमता शुद्धि और जागरूकता के रूप में है, खासकर जब ध्यान अग्नि अनुष्ठानों और सचेत विरक्ति के माध्यम से इसे चैनलाइज़ किया जाता है। अहंकार की चुनौतियों का सामना करने और प्रामाणिक आध्यात्मिक शक्ति की ओर बढ़ने के लिए इस अवधि का उपयोग करें।
1. मंगल और केतु की सिंह राशि में युति कब से कब तक रहेगी?
यह युति 7 जून 2025 से शुरू होकर 28 जुलाई 2025 तक सिंह राशि में रहेगी।
2. इस संयोजन को "अंगारक योग" क्यों कहा जाता है?
अंगारक योग मंगल (अग्नि/आक्रामकता) और केतु (विस्फोटक बल/कटौती) के मिलने से बनता है। यह संघर्ष क्रोध दुर्घटनाओं और आवेग को बढ़ाता है, जिससे जीवन में अचानक उथल-पुथल आती है।
3. सिंह राशि (नेतृत्व की राशि) पर इस युति का क्या प्रभाव पड़ेगा?
सिंह राशि (स्वयं, अहंकार) पर इसका सबसे गहरा प्रभाव पड़ेगा। यह अहंकार की परीक्षा स्वास्थ्य जोखिम और पहचान परिवर्तन लाएगा। नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों को अचानक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
4. अंगारक योग के दौरान व्यक्तिगत स्तर पर कौन सी दो मुख्य सावधानियाँ आवश्यक हैं?
व्यक्तिगत स्तर पर आत्म-नियंत्रण विनम्रता और माइंडफुलनेस आवश्यक है। जल्दबाजी या अहंकार-प्रेरित निर्णयों से बचें और भावनात्मक विस्फोटों से बचें।
5. इस योग के नकारात्मक प्रभावों को आध्यात्मिक रूप से कैसे कम किया जा सकता है?
नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा करें, मंगलवार को व्रत रखें और "ॐ केतवे नमः" मंत्र का जाप करें। यह अग्नि ऊर्जा को आध्यात्मिक शुद्धि की ओर मोड़ देता है।
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