By पं. नीलेश शर्मा
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी योग (सूर्य चंद्रमा बुध) का 12 राशियों पर गहरा आध्यात्मिक और बौद्धिक प्रभाव जानें।

ब्रह्मांड के पन्नों पर कुछ तारीखें सुनहरे अक्षरों में लिखी जाती हैं। 28 से 30 जनवरी 2025 की अवधि भारतीय वैदिक ज्योतिष में एक ऐसा ही दुर्लभ और अत्यंत शक्तिशाली संयोग लेकर आ रही है। इन दिनों सूर्य चंद्रमा और बुध ग्रह मकर राशि में एक साथ आकर एक त्रिपल युति (तीन ग्रहों का मिलन) का निर्माण करेंगे। यह संरेखण मौनी अमावस्या के पवित्र पर्व के साथ हो रहा है जिससे इसका आध्यात्मिक और व्यक्तिगत महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह संयोग त्रिवेणी योग (या त्रिग्रही योग) का निर्माण करेगा जो बुधादित्य योग से भी संयुक्त है।
यह त्रिपल युति शनि द्वारा शासित मकर राशि में होगी। यह गोचर विशेष रूप से श्रवण नक्षत्र में घटित हो रहा है।
युति की प्रमुख तिथियाँ और योग:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| युति काल | 28 जनवरी 2025 से 30 जनवरी 2025 |
| अमावस्या तिथि | मौनी अमावस्या, 29 जनवरी 2025 (सुबह 7:36 बजे IST) |
| स्थान | मकर राशि (शनि द्वारा शासित) |
| नक्षत्र | श्रवण नक्षत्र (चंद्रमा द्वारा शासित) |
| प्रमुख योग | त्रिवेणी योग (सूर्य + चंद्रमा + बुध), बुधादित्य योग, नवपंचम राजयोग (मिथुन से बृहस्पति का नवम पहलू) |
यह संरेखण मौनी अमावस्या के दौरान हो रहा है, जिसे हिंदू पंचांग में सबसे अधिक आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अमावस्या में से एक माना जाता है। यह समय समाप्ति नई शुरुआत और गहन आत्मनिरीक्षण का प्रतीक है।
तीन प्रमुख ग्रहों का एक ही राशि में आना ऊर्जा के एक शक्तिशाली मिश्रण को जन्म देता है।
सूर्य, जो आत्मा सत्ता और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, मकर राशि में अनुशासित महत्वाकांक्षा रणनीतिक सोच और जिम्मेदार नेतृत्व पर जोर देता है। यह यहाँ स्थिर और गंभीर ऊर्जा प्रदान करता है।
चंद्रमा मन भावनाओं और मानसिक शांति का प्रतीक है। सूर्य के साथ मकर राशि में चंद्रमा अमावस्या का निर्माण करता है। इस समय मन कमजोर होता है। शनि द्वारा शासित होने के कारण मन को नकारात्मक विचारों से बचने के लिए मौन और चिंतन की आवश्यकता होती है।
बुध बुद्धि संचार और विश्लेषणात्मक कौशल का ग्रह है। मकर राशि में यह व्यावहारिक सोच संरचित संचार और लक्ष्य-उन्मुख वाणी का समर्थन करता है।
सूर्य चंद्रमा और बुध की यह युति त्रिवेणी योग या त्रिग्रही योग का निर्माण करती है। यह योग आत्मा की ऊर्जा (सूर्य) भावनात्मक बुद्धिमत्ता (चंद्रमा) और बौद्धिक क्षमता (बुध) का एक दुर्लभ मिश्रण है।
त्रिवेणी योग के प्रभाव:
अतिरिक्त शुभ योग: इस युति को बुधादित्य योग (बुद्धि और आत्मविश्वास में वृद्धि) और नवपंचम राजयोग (भाग्य और सम्मान) से अतिरिक्त बल मिलता है।
यह युति विशेष रूप से श्रवण नक्षत्र (मकर में 10°00' से 23°20') में हो रही है जिसके स्वामी चंद्रमा हैं और पीठासीन देवता भगवान विष्णु हैं।
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का पालन किया जाता है। अमावस्या पर चंद्रमा सबसे कमजोर होता है जिससे मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक स्पष्टता प्रभावित होती है।
मौन क्यों आवश्यक है? शनि (मकर का स्वामी) और चंद्रमा का संरेखण ठीक नहीं होता है जिससे मन नकारात्मक सोच के प्रति संवेदनशील हो जाता है। बुध के अस्त होने से मानसिक तनाव और अनावश्यक विचार आ सकते हैं। मौन का पालन करने से मन और वाणी शांत होती है अवांछित वाणी को रोका जाता है और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।
मकर राशि में सूर्य चंद्रमा और बुध की त्रिपल युति 28 से 30 जनवरी 2025 तक बुद्धि अधिकार और भावना के सामंजस्य के लिए एक अद्वितीय अवसर प्रदान करती है। श्रवण नक्षत्र में यह संयोग दिव्य मार्गदर्शन और अंतर्ज्ञान को सुनने की शक्ति को बढ़ाता है। मौनी अमावस्या के साथ इसका मेल मन और आत्मा को शुद्ध करने आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक विकास के लिए आदर्श समय बनाता है। इस समय मौन ध्यान और दान जैसे पारंपरिक उपायों का पालन करके व्यक्ति इस असाधारण ग्रह मिलन की पूरी परिवर्तनकारी शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।
इस त्रिपल युति को वैदिक ज्योतिष में त्रिवेणी योग या त्रिग्रही योग कहा जाता है। यह युति ज्ञान अधिकार और भावनाओं के दुर्लभ मिश्रण का प्रतीक है।
यह त्रिवेणी योग श्रवण नक्षत्र में बन रहा है और यह मौनी अमावस्या (29 जनवरी 2025) के पवित्र अवसर के साथ मेल खाता है।
मौनी अमावस्या पर चंद्रमा कमजोर होता है और मन अस्थिर हो सकता है। मौन व्रत मन और वाणी को शांत करता है, नकारात्मक विचारों को रोकता है और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में सहायता करता है।
इस युति से मकर कर्क तुला वृषभ और कन्या राशियाँ सबसे अधिक लाभान्वित होंगी। इन्हें करियर साझेदारी और वित्तीय क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।
बुध के अस्त होने से मानसिक तीव्रता आ सकती है परंतु बुधादित्य योग और त्रिवेणी योग के कारण यह तीक्ष्ण बुद्धि कूटनीतिक संचार नेतृत्व क्षमता और भावनाओं को तर्क के साथ एकीकृत करके ठोस निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।
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