By पं. अमिताभ शर्मा
17 फरवरी 2026 को सूर्य ग्रहण और पाँच ग्रहों का संगम, आंतरिक परिवर्तन और नई शुरुआत

फरवरी 2026 का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील और परिवर्तनकारी माना जा सकता है। 17 फरवरी 2026 को कुम्भ राशि में लगने वाला सूर्य ग्रहण उस समय और अधिक प्रभावशाली हो जाता है, जब एक ही राशि में पांच ग्रह एक साथ आकर विशेष योग बना रहे हों। यह योग पुराने ढर्रे से बाहर निकालकर जीवन में नई शुरुआत, गहरी सीख और भीतर से बदलाव की दिशा में बढ़ने का अवसर दे सकता है।
यह सूर्य ग्रहण शनि की राशि में घटित हो रहा है, इसलिए यह केवल घटनाओं की सतह नहीं बल्कि भीतर की सोच, अनुशासन और विनम्रता को भी छूता है। जो लोग धैर्य और सहनशीलता के साथ इस समय को जीते हैं, उनके लिए यह चरण आंतरिक रूपांतरण, karmic सीख और नई दिशा की शुरुआत बन सकता है।
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को कुम्भ राशि में घटित होगा। इस दिन कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय तत्व एक साथ सक्रिय रहते हैं।
कुम्भ राशि शनि की राशि मानी जाती है, जो बदलाव, सुधार और व्यवस्था में नए प्रयोग की ओर इशारा करती है। ऐसे में सूर्य ग्रहण के साथ पंचग्रही योग का बनना जीवन के कई क्षेत्रों में पुराने ढांचे को तोड़कर नई परिस्थितियों के लिए जगह बनाने जैसा संकेत देता है।
इस सूर्य ग्रहण के समय कुम्भ राशि में बुध, शुक्र, राहु, सूर्य और चंद्रमा एक साथ आकर पंचग्रही योग बनाते हैं। यह संयोजन कई स्तरों पर असर डाल सकता है।
कुम्भ राशि स्वयं परिवर्तन, नवीनता और नए नियम बनाने से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए
यह सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग हर चंद्र राशि पर अलग ढंग से काम करेगा, इसलिए इसका फल भी अलग अलग हो सकता है।
फरवरी 2026 का प्रभाव केवल 17 फरवरी के सूर्य ग्रहण तक सीमित नहीं रहता। 25 फरवरी 2026 के आसपास भी कुम्भ राशि में ग्रहों का एक और विशेष समूह सक्रिय होता है।
सूर्य ग्रहण के बाद जब चंद्रमा कुम्भ राशि से आगे बढ़ चुके होंगे तब
इस नए संयोजन का प्रभाव भी कुम्भ राशि के मूल स्वभाव के अनुरूप परिवर्तन, तेज गति और नए अवसर की दिशा में काम करता है, परंतु
फरवरी का यह महीना
दुनिया के स्तर पर भी
अब देखते हैं कि चंद्र राशि के आधार पर यह सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग किस प्रकार असर डाल सकते हैं।
नीचे दी गई व्याख्याएं चंद्र राशि पर आधारित हैं। प्रत्येक राशि के लिए यह बताया गया है कि यह संयोजन किस भाव को सक्रिय करता है और जीवन के किस क्षेत्र में अधिक असर दिख सकता है।
इस सूर्य ग्रहण के समय मेष राशि वालों के लिए यह असर ग्यारहवें भाव को सक्रिय करता है, जो आय, लाभ और सामाजिक दायरे का भाव माना जाता है।
इस समय
आर्थिक रूप से यह समय योजना बदलने और आय से जुड़ी सोच को अपग्रेड करने की दिशा में प्रेरित कर सकता है।
वृषभ राशि के लिए यह ग्रहण और पंचग्रही योग दसवें भाव को प्रभावित करता है, जो कर्म, कार्यक्षेत्र और सामाजिक मान प्रतिष्ठा से जुड़ा है।
यह समय वृषभ जातकों के लिए
दे सकता है।
कई लोग खुद को अधिक जीवंत और रोमांचप्रिय महसूस कर सकते हैं। करियर और निजी जीवन दोनों में अधिक सक्रिय और कर्मप्रधान दृष्टिकोण विकसित हो सकता है। कुल मिलाकर यह अवधि वृषभ राशि वालों के लिए प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ाने वाली कही जा सकती है।
मिथुन राशि वालों के लिए यह सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग नवम भाव को सक्रिय करता है, जो भाग्य, उच्च शिक्षा और धर्म से जुड़ा होता है।
इस समय
पिता, गुरु या किसी मार्गदर्शक से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देना उचित रहेगा। उनकी सेहत और मनःस्थिति दोनों की जिम्मेदारी इस समय थोड़ी बढ़ सकती है।
कर्क राशि के लिए यह सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग अष्टम भाव में असर डालता है, जो गहरी भावनाओं, अचानक घटनाओं और अंतरचेतना से जुड़ा होता है।
इस अवधि में
इस समय
स्वास्थ्य के स्तर पर रीढ़, कमर और आसपास के हिस्सों की देखभाल जरूरी रहेगी। भावनात्मक स्तर पर यह समय कर्क राशि वालों को अपने भीतर से कमजोरियों को पहचानकर उन्हें बदलने का अवसर देता है।
सिंह राशि वालों के लिए यह संयोजन सप्तम भाव को सक्रिय करता है, जो साझेदारी, विवाह और व्यावसायिक समझौतों से जुड़ा होता है।
विवाह और प्रेम संबंधों के लिए भी यह समय
हो सकता है।
सिंह राशि वालों के लिए
हालांकि ये स्थितियां चुनौतीपूर्ण दिखेंगी, लेकिन अंततः यही समय सिंह राशि वालों को अपने रिश्तों और साझेदारी को बेहतर ढंग से समझने और स्वयं के स्वभाव में सुधार लाने का मौका भी देता है।
कन्या राशि के लिए यह पंचग्रही योग और सूर्य ग्रहण षष्ठ भाव को प्रभावित करता है, जो कार्य दिनचर्या, रोग और शत्रुओं से जुड़ा है।
इस समय
साथ ही
स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। पेट, पाचन और रक्त से जुड़े मामलों में समय पर जांच और सावधानी जरूरी रहेगी।
तुला राशि वालों के लिए यह संयोजन पंचम भाव को सक्रिय करता है, जो संतान, सृजनात्मकता और प्रेम संबंधों से जुड़ा है।
इस समय
कुल मिलाकर यह समय तुला राशि वालों के लिए भावनात्मक और रचनात्मक दोनों स्तरों पर सकारात्मक संकेत देता है, बशर्ते अति भावुक निर्णयों से बचा जाए।
वृश्चिक राशि के लिए यह ग्रहण और पंचग्रही योग चतुर्थ भाव में असर डालता है, जो घर, सुख और मानसिक शांति से जुड़ा होता है।
इस समय
हालांकि
यह समय भीतर की शांति को महत्व देने और अपने निजी जीवन को मजबूत करने का अवसर देता है।
धनु राशि वालों के लिए यह संयोजन तृतीय भाव को सक्रिय करता है, जो संवाद, छोटे भाई बहन और प्रयास से जुड़ा होता है।
इस समय
अत्यधिक बोलना, बहस में उलझना या अनावश्यक टिप्पणी करना विवाद बढ़ा सकता है। शब्दों की शक्ति इस समय बहुत बढ़ी होगी, इसलिए उसका सदुपयोग करना ही धनु राशि वालों के लिए सबसे बड़ा उपाय है।
मकर राशि के लिए सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग द्वितीय भाव में असर डालता है, जो धन, वाणी और पारिवारिक मूल्य से जुड़ा है।
इस समय
वाणी पर संयम रखकर चलना जरूरी रहेगा। किसी बात को कठोर तरीके से कहने की बजाय समझदारी से कहना रिश्तों को बेहतर बना सकता है। कुल मिलाकर यह समय मकर राशि वालों के लिए आर्थिक और पारिवारिक रूप से मजबूत आधार बनाने वाला माना जा सकता है।
कुम्भ राशि के लिए यह सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग लग्न भाव में बन रहा है, जो स्वयं, व्यक्तित्व और जीवन की मुख्य दिशा से जुड़ा होता है।
इस अवधि में
कुम्भ राशि वालों के लिए
स्वास्थ्य के प्रति सावधानी, नियमित दिनचर्या और तनाव से दूरी इस समय के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेगी।
मीन राशि के लिए यह संयोजन द्वादश भाव को सक्रिय करता है, जो विदेश, खर्च और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा है।
साथ ही
आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय
सही संतुलन के साथ यदि यह समय जिया जाए, तो मीन राशि वालों के लिए यह अवधि भीतर की मजबूत नींव बनाने में सहायक हो सकती है।
17 फरवरी 2026 का कुम्भ राशि वाला सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग यह संदेश देता है कि ऊर्जा में हो रहा यह परिवर्तन केवल बाहरी घटनाओं तक सीमित नहीं है। यह
की दिशा में एक गहरा आमंत्रण है।
जो लोग इस समय
उनके लिए यह चरण आगे चलकर स्थिरता और प्रगति का मजबूत आधार बना सकता है।
1. 17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण किस राशि में लगेगा और इसकी खास बात क्या है
यह सूर्य ग्रहण कुम्भ राशि में लगेगा और उसी समय कुम्भ में बुध, शुक्र, राहु, सूर्य और चंद्रमा के मिलने से पंचग्रही योग बनेगा। साथ ही यह फाल्गुन अमावस्या का दिन होगा और सूर्य धनिष्ठा नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जो इसे और प्रभावशाली बना देता है।
2. पंचग्रही योग कुम्भ राशि में बनने से सामान्य रूप से क्या संकेत मिलते हैं
कुम्भ राशि के स्वभाव के अनुसार यह संयोजन बदलाव, नई सोच और पुराने ढांचे को छोड़कर आगे बढ़ने का संकेत देता है। यह समय जीवन में नए नियम, नए लक्ष्य और नए दृष्टिकोण की स्थापना कराने वाला हो सकता है, खासकर वहां जहां पुरानी स्थितियां अब बोझ महसूस हो रही थीं।
3. यह सूर्य ग्रहण किन राशियों के लिए अधिक गहरा असर ला सकता है
जो राशियां कुम्भ राशि से कendra या trik भावों में स्थित हैं, उनके लिए असर अपेक्षाकृत अधिक गहरा हो सकता है। विशेष रूप से कुम्भ के साथ साथ कर्क, सिंह, वृश्चिक और मकर चंद्र राशि वालों को भावनात्मक और कर्म क्षेत्र दोनों स्तरों पर बदलाव अधिक महसूस हो सकते हैं।
4. इस समय क्या सावधानियां रखना अधिक उपयोगी रहेगा
इस अवधि में आवेश में आकर बड़े निर्णय लेने से बचना, नए समझौते या अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले विचार करना और स्वास्थ्य के संकेतों को हल्के में न लेना बेहद जरूरी रहेगा। अनावश्यक बहस, विवाद और जोखिम भरे कदम इस समय विपरीत असर दे सकते हैं।
5. साधना और आत्म निरीक्षण की दृष्टि से यह समय कैसा है
सूर्य ग्रहण और पंचग्रही योग के दौरान ध्यान, प्रार्थना, जप और आत्म चिंतन बेहद फलदायी रह सकते हैं। यह समय भीतर झांकने, अपनी कमजोरियों और आदतों को समझने और उन्हें सुधारने के लिए संकल्प लेने का है। जो लोग सचेत भाव से इस समय को जीएंगे, उनके लिए यह चरण आने वाले वर्षों की दिशा तय करने में मदद कर सकता है।
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