By पं. नरेंद्र शर्मा
बृहस्पति का मिथुन गोचर धर्म, शिक्षा और करियर में विस्तार लाएगा

5 दिसंबर 2025, शुक्रवार दोपहर 3:38 बजे बृहस्पति देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर ज्ञान, संस्कृति और विवेक की दिशा में ऊर्जा का विस्तार लाता है। इस अवधि में सभी राशियों पर शुभ प्रभाव तो रहेगा, परंतु बृहस्पति के अस्त काल* में शुभ कार्य जैसे विवाह या मांगलिक आयोजन वर्जित रहेंगे। मिथुन, तुला, धनु और कुम्भ राशियों पर इसका विशेष अनुकूल प्रभाव रहेगा।
| तिथि | वार | समय |
|---|---|---|
| 5 दिसंबर 2025 | शुक्रवार | 3:38 अपराह्न (IST) |
यह गोचर धर्म, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों को सशक्त करेगा। व्यक्ति के जीवन में विचारों की परिपक्वता, आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सौहार्द बढ़ेगा। परंतु आलस्य, अहंकार या असंतुलन से लाभ में विलंब हो सकता है।
बृहस्पति का गोचर तृतीय भाव में होगा। संवाद, यात्रा और भाई-बहनों के संबंध सक्रिय रहेंगे। आलस्य से हानि हो सकती है, अतः परिश्रम आवश्यक है। धार्मिक कार्यों में भागीदारी और व्यापारिक विस्तार संभव है। दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी।
उपाय: गुरुवार को सोने की अंगूठी में पुखराज धारण करें।
द्वितीय भाव में बृहस्पति परिवार और वाणी को बल देगा। वाणी से कार्य सिद्ध होंगे। धन संग्रह में कठिनाई आ सकती है, परंतु परिवारिक सहयोग मिलेगा। पारिवारिक व्यवसाय में उन्नति होगी।
उपाय: पीपल वृक्ष को बिना छुए जल अर्पित करें।
लग्न में बृहस्पति का प्रवेश आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ाएगा। शिक्षा, विवाह और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव रहेगा, अतः संयम रखें।
उपाय: गुरुवार को मंदिर में चने की दाल दान करें।
बारहवें भाव में बृहस्पति खर्च और परोपकार बढ़ाएगा। धार्मिक यात्राएँ और आध्यात्मिक शांति संभव है। विदेश से लाभ होगा, पर स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय: गुरुवार को श्रीहरि विष्णु की आराधना करें।
एकादश भाव में बृहस्पति लाभ, सम्मान और प्रेम जीवन में सुधार लाएगा। बच्चों और भाई-बहनों से शुभ समाचार मिलेंगे। गुप्त धन लाभ संभव है।
उपाय: गुरुवार को केसर या हल्दी का तिलक लगाएँ।
दशम भाव में बृहस्पति कार्यक्षेत्र और प्रतिष्ठा को बल देगा। पदोन्नति के योग बनेंगे। पारिवारिक प्रेम बढ़ेगा, पर अहंकार से बचें।
उपाय: मंदिर में घी का दीपक जलाएँ।
नवम भाव में बृहस्पति भाग्यवृद्धि और शिक्षा में सफलता देगा। यात्रा और धर्म-कर्म से लाभ मिलेगा। पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
उपाय: गुरुवार को व्रत रखें।
अष्टम भाव में बृहस्पति का गोचर सावधानी की मांग करता है। वित्तीय मामलों में सतर्कता आवश्यक है। आध्यात्मिक अनुभव और विदेश से लाभ संभव।
उपाय: गुरुवार को श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
सप्तम भाव में बृहस्पति संबंधों में मिठास लाएगा। व्यापारिक निर्णयों में सफलता मिलेगी। अक्टूबर से आध्यात्मिक अनुभव बढ़ेंगे।
उपाय: गुरुवार को बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें।
षष्ठ भाव में बृहस्पति कार्य और प्रतियोगिता में सफलता देगा। खर्च बढ़ेंगे और स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।
उपाय: केले के वृक्ष की पूजा करें।
पंचम भाव में बृहस्पति धन, शिक्षा और संतान से सुख देगा। कार्यस्थल पर उन्नति और निर्णय क्षमता में सुधार।
उपाय: विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।
चतुर्थ भाव में बृहस्पति परिवारिक सौहार्द और पेशेवर स्थिरता देगा। खर्च बढ़ेंगे पर शुभ कार्यों हेतु।
उपाय: गुरुवार को बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें।
मिथुन, तुला, धनु और कुम्भ राशियों के लिए यह काल अत्यंत लाभदायक रहेगा।
शिक्षा, धर्म, परिवार और करियर में उन्नति के योग बनेंगे।
बृहस्पति के अस्त काल में नहीं। अन्य समय में किया जा सकता है।
धन में वृद्धि और पदोन्नति के योग हैं, पर व्यय भी बढ़ेगा।
गुरुवार को पूजा, पीपल को जल और पुखराज धारण करना लाभकारी रहेगा।
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