By पं. अभिषेक शर्मा
आत्मचिंतन और अध्यात्म की दिशा में निर्णायक परिवर्तन

केतु, जिसे वैदिक ज्योतिष में रहस्यमय ग्रह माना गया है, आत्मचिंतन, अध्यात्म और वैराग्य का कारक है। जब यह 18 मई 2025 को दोपहर 4 बजकर 30 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करेगा तब यह आत्मविश्लेषण, कर्मजन्य परिणाम और आंतरिक परिवर्तन का काल आरंभ करेगा। यह गोचर तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में शुभ फलदायक होता है और शेष भावों में गहरी आध्यात्मिक परीक्षाएँ लाता है।
केतु का प्रभाव व्यक्ति को सांसारिक आसक्तियों से अलग कर आत्मजागरण की दिशा में ले जाता है। जहां यह शुभ स्थानों में होता है, वहां कर्मोन्नति, साहस और प्रतिष्ठा देता है, वहीं अन्य भावों में भ्रम, संबंधों में दूरी और मानसिक बेचैनी उत्पन्न कर सकता है। यह समय आत्मसंयम, ध्यान और विनम्रता अपनाने का है।
पंचम भाव में केतु अध्यात्म, ज्योतिष, तंत्र या पुरातत्व जैसे विषयों की ओर आकर्षित करेगा। विद्यार्थियों के लिए शुभ, पर प्रेम जीवन में दूरी और गलतफहमियाँ संभव। संतान स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
केतु गृहस्थ जीवन में अस्थिरता लाता है। घर के वातावरण में मतभेद या मां की तबियत को लेकर चिंता संभव। फेफड़ों या छाती से जुड़ी तकलीफों से बचें।
तीसरे भाव में केतु साहस, परिश्रम और आध्यात्मिक दृष्टिकोण बढ़ाएगा। भाई-बहनों के साथ सहयोग रहेगा, यात्राओं से लाभ मिलेगा। किसी संपत्ति या व्यवसाय में जोखिम लेकर सफलता संभव।
दूसरे भाव में केतु वाणी में रहस्य लाता है, जिससे गलतफहमियाँ बढ़ सकती हैं। बचत में कठिनाई और परिवार से दूरी संभव। दंत एवं मुख स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
केतु का आपकी ही राशि में आगमन स्वास्थ्य, चिंता और वैवाहिक दूरी का कारण बन सकता है। जीवनसाथी से अविश्वास या ठंडापन महसूस हो सकता है। निर्णयों में विशेषज्ञ सलाह लें।
केतु द्वादश भाव में खर्च और स्वास्थ्य चिंताएँ बढ़ाता है। आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा, ध्यान और तीर्थयात्राएँ लाभ देंगी। स्वास्थ्य और वित्त पर नियंत्रण रखें।
ग्यारहवें भाव में केतु आय और लक्ष्यों की पूर्ति में सहायक होगा। मित्रों से सहयोग मिलेगा पर प्रेम संबंधों में खटास संभव। वरिष्ठों से संबंध बेहतर होंगे।
दसवें भाव में केतु मिश्रित परिणाम देगा। पिता के स्वास्थ्य या करियर में उतार-चढ़ाव संभव। कार्यालयीय राजनीति से सावधानी रखें।
धार्मिक यात्राएँ, साधना और एकांतप्रियता बढ़ेगी। स्थानांतरण या नौकरी में परिवर्तन संभव। परिवार का सहयोग तनाव कम करेगा।
अचानक लाभ या खर्च, दोनों संभव। ज्योतिष या गूढ़ विषयों में रुचि बढ़ेगी। खानपान संयम रखें, पित्त संबंधी रोगों से बचें।
सप्तम भाव में केतु वैवाहिक और व्यावसायिक संबंधों में तनाव ला सकता है। अहंकार और गलतफहमियों से दूरी रखें। जीवनसाथी आध्यात्मिकता की ओर झुक सकता है।
छठे भाव में केतु सफलता, शत्रुनाश और कार्यस्थल पर प्रगति दिलाएगा। स्वास्थ्य में असामान्य समस्याएँ हो सकती हैं, वित्त प्रबंधन सावधानी से करें।
तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में केतु शुभ होता है, अन्य भावों में आत्मपरीक्षा देता है।
संबंध, स्वास्थ्य, धन और आध्यात्मिक उन्नति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
श्वसन, मानसिक तनाव और पाचन संबंधी दिक्कतों पर ध्यान दें।
ध्यान, दान और गुरु या माता-पिता की सेवा श्रेष्ठ उपाय हैं।
मिथुन, तुला और मीन राशि के जातकों को केतु शुभ परिणाम देगा।
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