By पं. अमिताभ शर्मा
2026 में कुंभ राशि में मंगल का प्रवेश, ऊर्जा, करियर और संबंधों में बदलाव

वैदिक ज्योतिष में मंगल को कर्म, साहस, शक्ति और दृढ़ निश्चय का ग्रह माना जाता है। जब भी मंगल राशि बदलता है तब ऊर्जा, प्रेरणा और निर्णय लेने की प्रवृत्ति में साफ बदलाव महसूस होते हैं। वर्ष 2026 में कुंभ राशि में मंगल गोचर एक अलग प्रकार की स्थिति बनाता है, जहाँ मंगल की सीधी, मुखर ऊर्जा कुंभ की प्रगतिशील, स्वतंत्र और अनूठी प्रकृति के साथ मिलती है।
यह ग्रह स्थिति लोगों को कठोर ढर्रों से बाहर निकलने, अलग तरह से सोचने और स्वतंत्रता की प्रबल इच्छा के साथ काम करने के लिए प्रेरित करती है। यदि भावनाओं पर नियंत्रण न रखा जाए तो यही समय भीतर बेचैनी, अधीरता और विद्रोही व्यवहार भी बढ़ा सकता है। वास्तविक प्रभाव हर व्यक्ति की राशि और जन्म कुंडली पर निर्भर करता है, इसीलिए राशिवार विश्लेषण के साथ उपाय समझना बहुत उपयोगी रहता है।
किसी ग्रह के गोचर का सही समय जानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसी के आधार पर योजना, उपाय और महत्वपूर्ण कदम ठीक तरह से तय किए जा सकते हैं।
यह पूरा समय सक्रियता, स्वतंत्र सोच और सामूहिक दृष्टि को बढ़ाने वाला है। जो जातक संयम के साथ इस अवधि का उपयोग करते हैं, उनके लिए मंगल गोचर कार्य क्षेत्र, संबंध और आत्मविश्वास तीनों स्तर पर महत्वपूर्ण मोड़ बना सकता है।
मंगल को अग्नि स्वभाव वाला, पुरुष ऊर्जा से युक्त ग्रह माना जाता है। यह साहस, आत्मविश्वास, शारीरिक ऊर्जा, महत्वाकांक्षा, भूमि और संपत्ति, निर्माण कार्य, रक्षा सेवाओं, शल्य चिकित्सा और नेतृत्व क्षमता से जुड़ा होता है। जब जन्म कुंडली में मंगल मजबूत हो तो व्यक्ति में सहनशक्ति, पहल करने की शक्ति और चुनौतियों का सामना करने का साहस स्पष्ट दिखता है।
कुंभ शनि की वायु राशि मानी जाती है, जो तर्क, नवीनता, सामाजिक जागरूकता और स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करती है। जब मंगल कुंभ में गोचर करता है तो
यदि यह ऊर्जा संतुलित न हो तो अधीरता, अहं टकराव और अचानक कठोर व्यवहार भी उभर सकता है। इसीलिए इस गोचर के दौरान अनुशासन, स्पष्टता और नियंत्रित कार्रवाई बहुत आवश्यक होती है।
मंगल का कुंभ राशि में गोचर हर राशि की जन्म कुंडली में अलग भाव को सक्रिय करता है। इसी से यह तय होता है कि कार्य, धन, संबंध और स्वास्थ्य पर इसका स्वरूप कैसा रहेगा। नीचे बारहों राशियों के लिए विस्तृत और व्यावहारिक संकेत दिए जा रहे हैं।
मेष राशि के लिए मंगल कुंभ में ग्यारहवें भाव से गोचर करता है, जो लाभ, अभिलाषा और सामाजिक नेटवर्क से जुड़ा है। यह समय निरंतर प्रयास से कार्य क्षेत्र में पहचान और प्रगति दिला सकता है। समूह कार्य, मित्रों की सहायता या नेटवर्क के माध्यम से कार्य क्षेत्र में नया अवसर मिलने के योग बनते हैं।
आर्थिक रूप से आय में वृद्धि के संकेत हैं, हालांकि बढ़ती आमदनी के साथ खर्च भी बढ़ सकते हैं। व्यापार कर रहे जातक प्रतियोगी माहौल में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। निजी जीवन में मित्रों और जीवनसाथी के साथ संबंध सामान्य रूप से सहयोगपूर्ण रह सकते हैं, जिससे भावनात्मक संतोष मिलेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से ऊर्जा अच्छी रह सकती है, बशर्ते गुस्से और अधीरता पर नियंत्रण रखा जाए।
उपाय प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें, इससे भीतर संतुलन और शांत शक्ति बढ़ेगी।
वृषभ राशि के लिए मंगल कुंभ में दसवें भाव से गुजरता है, जो कार्य क्षेत्र, दायित्व और सार्वजनिक छवि का भाव है। यह अवधि काम के दबाव और जिम्मेदारियों को बढ़ा सकती है, परंतु अनुशासित और धैर्यपूर्ण प्रयास दीर्घकालिक स्थिरता और सम्मान दिला सकते हैं। उच्च पदाधिकारियों की नजर में स्थिति मजबूत हो सकती है।
आर्थिक रूप से आय स्थिर रह सकती है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। निजी जीवन में काम का तनाव संबंधों पर असर डाल सकता है, इसलिए धैर्य और स्पष्ट संवाद की आवश्यकता है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, परंतु थकान और तनाव को अनदेखा न करना ही उचित होगा।
उपाय अधिकारियों और बड़ों का सम्मान करें तथा नियमित दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखें।
मिथुन राशि के लिए मंगल कुंभ में नवें भाव से गोचर करता है, जो भाग्य, उच्च शिक्षा, मान्यताओं और दूर यात्रा का भाव है। यह समय धीरे धीरे कार्य क्षेत्र में प्रगति ला सकता है, विशेष रूप से शिक्षा, प्रशिक्षण या यात्रा से जुड़े अवसरों के माध्यम से।
आर्थिक रूप से लाभ संभव है, लेकिन उसके लिए प्रयास और धैर्य दोनों की आवश्यकता होगी। संबंधों में विचारों का अंतर या मान्यताओं में टकराव सामने आ सकता है, इसलिए संवाद में लचीलापन रखकर ही सामंजस्य बनेगा। स्वास्थ्य सामान्य रूप से ठीक रह सकता है, परंतु मानसिक थकान और अत्यधिक सोच से बचने के लिए विश्राम पर ध्यान देना जरूरी होगा।
उपाय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का नियमित जप करें।
कर्क राशि के लिए मंगल कुंभ में अष्टम भाव में स्थित होता है, जो परिवर्तन, गुप्त विषय, साझा संसाधन और अचानक घटनाओं से जुड़ा है। यह समय कार्य क्षेत्र में धीमी और गहन प्रक्रिया जैसा महसूस हो सकता है। अक्सर चीजें सीधे दिखाई न देकर भीतर ही भीतर बदलती रहती हैं, इसलिए धैर्य रखना आवश्यक है।
आर्थिक रूप से अचानक खर्च, ऋण या अप्रत्याशित देनदारी सामने आ सकती है, इसलिए योजनाबद्ध वित्तीय प्रबंधन जरूरी है। संबंधों में भावनात्मक परिपक्वता की आवश्यकता होगी, नहीं तो गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य के लिए तनाव, थकान और प्रतिरोधक क्षमता पर विशेष ध्यान देना होगा।
उपाय प्रतिदिन “ॐ दुर्गाय नमः” मंत्र का जप करें, इससे भीतर मजबूती और सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
सिंह राशि के लिए मंगल कुंभ में सप्तम भाव से गोचर करता है, जो साझेदारी, विवाह और सहयोग का भाव है। यह समय कार्य क्षेत्र में साझेदारी आधारित कार्य, ग्राहकों से व्यवहार और संयुक्त योजनाओं को सक्रिय कर सकता है। सही सहयोगी और सही व्यवहार के साथ प्रगति की संभावना बढ़ जाती है।
आर्थिक रूप से संयुक्त प्रयासों से लाभ धीरे धीरे बढ़ सकता है। निजी जीवन में जीवनसाथी के साथ संबंध सम्मान और समझ पर टिके रहेंगे तो यह गोचर संबंधों को मजबूत बना सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रूप से सहायक रहेगा, हालांकि अहं टकराव और बहस से बचना लाभकारी होगा।
उपाय प्रतिदिन सूर्य का स्मरण करें और संबंधों में विनम्रता तथा नम्र व्यवहार का अभ्यास करें।
कन्या राशि के लिए मंगल कुंभ में छठे भाव से गोचर करता है, जो प्रतिस्पर्धा, सेवा, रोग और दैनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है। यह समय संघर्षों से जूझने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता को मजबूत कर सकता है। कार्य क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाने और सेवा भाव से काम करने के अवसर मिल सकते हैं।
आर्थिक रूप से खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट और वित्तीय अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण होगा। संबंधों में काम का दबाव तनाव ला सकता है, जिससे दूरी या खटास उत्पन्न हो सकती है। स्वास्थ्य विशेष ध्यान मांगता है, खासकर पाचन तंत्र और अत्यधिक काम से होने वाली थकान के संदर्भ में।
उपाय अनुशासित जीवन शैली अपनाएं और प्रतिदिन कुछ समय ध्यान के लिए निकालें।
तुला राशि के लिए मंगल कुंभ में पंचम भाव से गोचर करता है, जो रचनात्मकता, शिक्षा, बच्चों और प्रेम संबंधों का भाव है। यह अवधि बौद्धिक कार्य, अध्ययन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा दे सकती है, हालांकि परिणामों में थोड़ा समय लग सकता है।
आर्थिक रूप से लाभ के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन निर्णय लेते समय सावधानी बरतना जरूरी है, विशेषकर अनुमान आधारित निवेश में। संबंधों में मिले जुले परिणाम संभव हैं, इसलिए भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। स्वास्थ्य सामान्य रूप से ठीक रह सकता है, बशर्ते मानसिक शांति और नियमित दिनचर्या पर ध्यान रखा जाए।
उपाय प्रतिदिन सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें, इससे जीवन शक्ति और संतुलन दोनों मजबूत होते हैं।
वृश्चिक राशि के लिए मंगल कुंभ में चतुर्थ भाव में आता है, जो घर, माता, आंतरिक शांति और भावनात्मक सुरक्षा से जुड़ा है। पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और घर से संबंधित निर्णयों में समय लग सकता है।
कार्य क्षेत्र में प्रगति स्थिर लेकिन धीमी रह सकती है। आर्थिक स्थिति धीरे धीरे मजबूत हो सकती है, परंतु अचानक बड़े बदलाव की अपेक्षा न रखना बेहतर है। संबंधों में भावनात्मक समझ और धैर्य की विशेष आवश्यकता होगी, ताकि घर का वातावरण शांत बना रहे। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, पर मानसिक तनाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उपाय प्रतिदिन पूर्व दिशा में एक दीपक प्रज्वलित करें और घर की शांति के लिए प्रार्थना करें।
धनु राशि के लिए मंगल कुंभ में तृतीय भाव से गोचर करता है, जो साहस, संवाद, छोटी यात्राओं और स्वयं के प्रयासों का भाव है। यह समय नई पहल करने, कौशल विकसित करने और कार्य क्षेत्र में स्वयं आगे बढ़कर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
आर्थिक रूप से स्थिरता निरंतर प्रयास से बढ़ सकती है। जो जातक लेखन, संवाद, मीडिया या मार्गदर्शन कार्य से जुड़े हैं, उन्हें विशेष लाभ महसूस हो सकता है। संबंधों में खुला और ईमानदार संवाद ही मजबूती लाएगा। स्वास्थ्य ऊर्जा से भरपूर रह सकती है, हालाँकि अत्यधिक थकान और अधिक काम से बचना जरूरी है।
उपाय प्रतिदिन “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें।
मकर राशि के लिए मंगल कुंभ में द्वितीय भाव से गोचर करता है, जो वाणी, धन, परिवार और मूल्यबोध से संबंधित है। यह समय कार्य क्षेत्र में जिम्मेदारी और मेहनत के साथ पहचान दिला सकता है, लेकिन इसके साथ ही आर्थिक प्रबंधन की आवश्यकता भी बढ़ेगी।
आर्थिक रूप से आय के साथ खर्च भी बढ़ने की संभावना है, इसलिए संतुलित योजना जरूरी है। पारिवारिक जीवन में संवाद बहुत महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि कठोर शब्द या अधैर्य संबंधों में दूरी ला सकता है। स्वास्थ्य संतुलित रह सकता है, यदि भोजन, नींद और दैनिक आदतों को सुव्यवस्थित रखा जाए।
उपाय मंगलवार को अन्न या भोजन सामग्री का दान करें और बोलचाल में सजगता रखें।
कुंभ राशि के लिए मंगल का गोचर प्रथम भाव में होता है, जो स्वयं, व्यक्तित्व और नेतृत्व प्रवृत्ति से जुड़ा है। यह अवधि आत्मविश्वास और निर्णायक स्वभाव को बढ़ा सकती है। व्यक्ति अपने लक्ष्य और जीवन दिशा को लेकर अधिक सीधा और स्पष्ट हो सकता है।
आर्थिक रूप से व्यावहारिक योजना और आत्म अनुशासन से लाभ मिल सकता है। संबंधों में धैर्य और विनम्रता की आवश्यकता होगी, क्योंकि अत्यधिक कठोर या हावी व्यवहार टकराव पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रूप से अच्छा रह सकता है, बशर्ते क्रोध और तनाव पर नियंत्रण रखा जाए।
उपाय दिन की शुरुआत मंगल को मानसिक रूप से प्रार्थना करके करें और व्यवहार में धैर्य का अभ्यास करें।
मीन राशि के लिए मंगल कुंभ में द्वादश भाव में आता है, जो व्यय, एकांत, विदेश और आत्म चिंतन से जुड़ा है। यह समय बाहरी उपलब्धियों से अधिक भीतर की यात्रा और शांत कार्यों की ओर ले जा सकता है। कार्य क्षेत्र में परदे के पीछे किए जाने वाले कार्य, शोध या विदेश संबंधी गतिविधियों से प्रगति हो सकती है।
आर्थिक रूप से खर्च बढ़ने के संकेत हैं, इसलिए सुनियोजित वित्तीय योजना बनाना आवश्यक होगा। संबंधों में संवेदनशीलता और गलतफहमी से बचने के लिए धैर्य और समझ जरूरी है। स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त विश्राम, ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास बहुत सहायक होंगे।
उपाय नियमित रूप से दान करें और प्रतिदिन कुछ समय ध्यान या प्रार्थना में लगाएं।
कुंभ राशि में मंगल का यह गोचर ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाने का निमंत्रण देता है। यह समय नवीन सोच, रणनीतिक कदम और दीर्घकालिक योजना के लिए बहुत सहायक है, बशर्ते इसके साथ अनुशासन और धैर्य भी जोड़ा जाए।
इस अवधि में
बहुत फायदेमंद रहेगा। जब मंगल की तीव्र ऊर्जा को संयम, जागरूकता और सही दिशा के साथ जोड़ा जाता है तब यह गोचर लंबे समय तक स्थिर विकास और मजबूत आत्मविश्वास का आधार बन सकता है।
जब जन्म कुंडली में मंगल कमजोर या पीड़ित होता है तब गोचर के समय उसकी ऊर्जा व्यक्ति के स्वभाव और निर्णयों में उथल पुथल ला सकती है। ऐसे में सही मार्गदर्शन के बाद रत्न धारण करना मददगार हो सकता है। मंगल का प्रमुख रत्न मूँगा माना जाता है। उचित ज्योतिषीय सलाह के बाद इसे धारण करने से साहस, सहनशक्ति, नेतृत्व क्षमता और मानसिक मजबूती में वृद्धि हो सकती है।
यदि मंगल के कारण कार्य क्षेत्र में अस्थिरता, आत्मविश्वास की कमी या परिणामों में देरी महसूस हो रही हो तो सही प्रकार का मूँगा सहायक हो सकता है। फिर भी यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मंगल अग्नि प्रधान ग्रह है, इसलिए बिना कुंडली देखे मूँगा धारण करने से कभी कभी गुस्सा, आवेग और टकराव भी बढ़ सकते हैं। रत्न संबंधी निर्णय हमेशा जन्म कुंडली, दृष्टि, अवस्था और वर्तमान गोचर को ध्यान में रखकर ही लिए जाने चाहिए।
जब सही परामर्श के बाद कोई रत्न चुना जाता है तो वह व्यक्ति के जीवन में स्पष्टता, स्थिरता, आत्मविश्वास और नियंत्रित ऊर्जा लाने का माध्यम बन सकता है।
कुल मिलाकर कुंभ राशि में मंगल गोचर 2026 सभी राशियों के लिए स्वतंत्रता, नवीनता और कर्म शक्ति को नए ढंग से समझने का समय है। कुछ जातकों के लिए यह कार्य क्षेत्र में विकास, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता के अवसर लेकर आएगा, जबकि अन्य के लिए यह धैर्य, योजना और आत्म नियंत्रण सीखने की घड़ी बन सकता है।
जो लोग इस गोचर के संकेतों को समझ कर अपने कार्य, संबंध और निर्णयों में जागरूकता, संयम और स्पष्ट लक्ष्य जोड़ते हैं, वे इस अवधि में मिली ऊर्जा को लंबे समय तक टिकाऊ उपलब्धियों में बदल सकते हैं। यही इस मंगल गोचर का वास्तविक उद्देश्य है, जो केवल बाहरी परिस्थितियां नहीं बल्कि भीतर की दिशा और शक्ति दोनों को संतुलित करना सिखाता है।
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