By पं. संजीव शर्मा
बुध वक्री होकर तुला में पुनः प्रवेश: संवाद, विवेक और संतुलन का संगम

बुध ग्रह बुद्धि, विवेक और संवाद का प्रतीक है। यह तर्क, व्यापार, विश्लेषण और अनुकूलन की क्षमता को नियंत्रित करता है। जब यह शुभ अवस्था में होता है तब व्यक्ति को वाक्पटुता, निर्णय क्षमता और व्यावसायिक सफलता प्रदान करता है। किंतु यदि यह दुर्बल या पाप प्रभाव में हो तो निर्णय में भ्रम, चिंता, या तंत्रिका व त्वचा संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। 23 नवंबर 2025 को सायं 7:58 बजे बुध वक्री अवस्था में पुनः तुला राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र की राशि तुला में इसका यह प्रवेश बुद्धि में सौंदर्य, कलात्मक अभिव्यक्ति और संवाद कौशल को निखारेगा।
बुध का तुला में प्रवेश तर्क और कूटनीति का संतुलन स्थापित करता है। यह गोचर विचारशीलता, न्यायप्रियता और सहयोगी व्यवहार को बढ़ाता है। हालांकि, वक्री बुध भ्रम, देरी या गलतफहमी भी उत्पन्न कर सकता है, अतः किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले पुनर्विचार आवश्यक रहेगा।
बुध तृतीय और षष्ठ भाव का स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेगा। यह विवाह, साझेदारी और पेशेवर संबंधों में संवाद का समय है। सहकर्मियों या जीवनसाथी से गलतफहमी संभव है, इसलिए संयम आवश्यक है। व्यावसायिक यात्राएँ मध्यम परिणाम देंगी। खर्च बढ़ सकता है, अतः वित्तीय सावधानी रखें।
उपाय: प्रतिदिन 41 बार "ॐ नमो नारायणाय" का जप करें।
द्वितीय और पंचम भाव के स्वामी बुध का षष्ठ भाव में गोचर व्यय और तनाव बढ़ा सकता है। बच्चों या आश्रितों से जुड़ी चिंताएँ संभव हैं। कार्यस्थल पर वरिष्ठों से मतभेद से बचें। स्वास्थ्य में नेत्र या दाँत संबंधी तकलीफ हो सकती है।
उपाय: गुरुवार को बृहस्पति ग्रह के लिए यज्ञ-हवन करें।
लग्न और चतुर्थ भाव के स्वामी बुध पंचम भाव से गोचर करेगा। यह रचनात्मकता, प्रेम और संतान से सुख प्रदान करेगा। कार्य में नए अवसर मिलेंगे और धन की स्थिरता बढ़ेगी। प्रेम संबंधों में निकटता आएगी।
उपाय: शनिवार को शनि ग्रह के लिए यज्ञ-हवन करें।
बुध तृतीय और द्वादश भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेगा। पारिवारिक तनाव और कार्यस्थल पर दबाव बढ़ सकता है। संवाद में सावधानी रखें, अन्यथा मतभेद संभव हैं। व्यापार में स्थिरता बनाए रखें।
उपाय: शनिवार को राहु ग्रह के लिए यज्ञ-हवन करें।
द्वितीय और एकादश भाव के स्वामी बुध तृतीय भाव से गोचर करेगा। नेटवर्किंग और संवाद से सफलता मिलेगी। व्यापार में उन्नति और आय में वृद्धि संभव है। यात्राएँ शुभ रहेंगी।
उपाय: प्रतिदिन 19 बार "ॐ सूर्याय नमः" का जप करें।
लग्न और दशम भाव के स्वामी बुध द्वितीय भाव से गोचर करेगा। यह पदोन्नति और आर्थिक स्थिरता का समय है। व्यापारी वर्ग के लिए लाभ और सफलता के योग हैं। पारिवारिक जीवन सौहार्दपूर्ण रहेगा।
उपाय: प्रतिदिन 11 बार "ॐ बुधाय नमः" का जप करें।
नवम और द्वादश भाव के स्वामी बुध लग्न में स्थित होगा। आत्मबल और विवेक बढ़ेगा, किंतु वक्री प्रभाव से निर्णय में विलंब संभव है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं। वित्तीय योजना सावधानीपूर्वक करें।
उपाय: प्रतिदिन 11 बार "ॐ भर्गवाय नमः" का जप करें।
अष्टम और एकादश भाव के स्वामी बुध द्वादश भाव से गोचर करेगा। कार्यक्षेत्र में अस्थिरता और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वित्तीय हानि का योग है, सावधानी रखें। संबंधों में धैर्य और समझ आवश्यक है।
उपाय: शुक्रवार को वृद्ध महिलाओं को भोजन कराएँ।
सप्तम और दशम भाव के स्वामी बुध एकादश भाव से गोचर करेगा। पदोन्नति, आय वृद्धि और समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। व्यवसाय में लाभ और नए अवसर मिलेंगे।
उपाय: प्रतिदिन 11 बार "ॐ गुरवे नमः" का जप करें।
षष्ठ और नवम भाव के स्वामी बुध दशम भाव में गोचर करेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता और पदोन्नति के योग हैं। व्यवसाय विस्तार संभव है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
उपाय: प्रतिदिन 21 बार "ॐ शिव ओं शिव ओं शिव" का जप करें।
पंचम और अष्टम भाव के स्वामी बुध नवम भाव से गोचर करेगा। आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा। निवेश में संयम रखें। संबंधों में अहं त्यागकर संवाद बनाए रखें।
उपाय: प्रतिदिन 21 बार "ॐ नमः शिवाय" का जप करें।
चतुर्थ और सप्तम भाव के स्वामी बुध अष्टम भाव से गोचर करेगा। करियर में दबाव और आर्थिक अस्थिरता रहेगी। जीवनसाथी के साथ स्पष्ट संवाद आवश्यक है।
उपाय: शनिवार को राहु ग्रह के लिए यज्ञ-हवन करें।
23 नवंबर 2025 को बुध का तुला राशि में गोचर संवाद, संतुलन और विवेक का समय है। यह काल हमें बुद्धि और भावनाओं में सामंजस्य सिखाता है। सफलता उन्हीं को मिलेगी जो निर्णय में संयम, वाणी में शालीनता और विचार में संतुलन रखेंगे।
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