By पं. सुव्रत शर्मा
बुध का दोहरा गोचर: परिवर्तन, रणनीति और संवाद की नई दिशा

बुध का वृश्चिक राशि में प्रवेश वर्ष 2025 के अंत में दो चरणों में होगा - पहली अवधि 24 अक्टूबर से 23 नवम्बर तक (इसके बाद वक्री होकर तुला में प्रवेश) और दूसरी अवधि 6 दिसम्बर (रात्रि 8:34 बजे) से 29 दिसम्बर तक। यह गोचर परिवर्तन, रहस्य, गहन सोच और रणनीतिक संवाद का प्रतीक होगा। बुध का वक्री होना इस गोचर को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा, जिससे सभी राशियों पर इसके परिणाम विस्तारित रूप से दिखाई देंगे।
| अवधि | प्रारंभ तिथि | समाप्ति तिथि | विशेष स्थिति |
|---|---|---|---|
| प्रथम चरण | 24 अक्टूबर 2025 | 23 नवम्बर 2025 | वक्री होकर तुला में प्रवेश |
| द्वितीय चरण | 6 दिसम्बर 2025 | 29 दिसम्बर 2025 | सीधी गति में वृश्चिक में स्थिति |
वृश्चिक में बुध गहराई से सोचने, रहस्यमय बातों को समझने और कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ से कार्य करने की क्षमता देता है। यह समय रणनीति, अनुसंधान, मनोविज्ञान, गूढ़ विद्याओं, वित्तीय विश्लेषण और संवाद के क्षेत्र में सफलता लाने वाला रहेगा। किन्तु वक्री स्थिति में निर्णयों को लेकर भ्रम और संबंधों में गलतफहमी की संभावना भी बढ़ेगी।
आठवें भाव में बुध का गोचर अचानक लाभ और रहस्यों को सुलझाने का अवसर देगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, परंतु धैर्य से सफलता मिलेगी।
उपाय: बुधवार को हरे मूंग का दान करें।
सातवें भाव में बुध का गोचर दाम्पत्य और साझेदारी में चुनौतियाँ ला सकता है। विवाहित जातकों को संवाद में संयम रखना चाहिए।
उपाय: माता-पिता का आशीर्वाद लेकर कार्य प्रारंभ करें।
छठे भाव में बुध का प्रवेश लाभकारी रहेगा। स्वास्थ्य, प्रतियोगिता और तर्कशक्ति में वृद्धि होगी।
उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएँ।
पाँचवें भाव में बुध का गोचर रचनात्मकता बढ़ाएगा पर मानसिक अस्थिरता संभव है। बच्चों से संवाद मधुर रखें।
उपाय: हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
चतुर्थ भाव में बुध का प्रभाव संपत्ति, परिवार और निवेश के लिए शुभ रहेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा।
उपाय: माँ दुर्गा की आराधना करें।
तृतीय भाव में बुध आत्मविश्वास बढ़ाएगा। यात्राएँ होंगी और नए मित्र मिल सकते हैं।
उपाय: बुद्ध ग्रह के मंत्र “ॐ बुं बुधाय नमः” का जाप करें।
द्वितीय भाव में बुध का प्रभाव वाणी और धन लाभ में सहायक रहेगा। परिवार में प्रसन्नता बनी रहेगी।
उपाय: जरूरतमंदों को वस्त्र दान करें।
लग्न में बुध का गोचर आत्मविश्वास बढ़ाएगा, पर स्वास्थ्य और विवादों में सतर्कता जरूरी है।
उपाय: वाहन चलाते समय सावधानी रखें।
द्वादश भाव में बुध का प्रभाव खर्च बढ़ा सकता है। विदेश संबंधी कार्यों में सफलता संभव है।
उपाय: पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाएँ।
एकादश भाव में बुध लाभ, मित्रता और समाज में प्रतिष्ठा देगा। प्रतियोगिता में विजय संभव है।
उपाय: हरी सब्जियाँ दान करें।
दशम भाव में बुध का गोचर करियर में उन्नति देगा। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।
उपाय: घर में तुलसी का पौधा लगाएँ।
नवम भाव में बुध का प्रभाव मिश्रित रहेगा। भाग्य और यात्रा से लाभ मिलेगा, पर जल्दबाज़ी से बचें।
उपाय: गुरुजनों का सम्मान करें और बुधवार को उपवास रखें।
वृश्चिक में बुध का यह दोहरा गोचर रणनीतिक सोच, गोपनीयता और गहन संवाद की ऊर्जा प्रदान करेगा। जो जातक सजग, संयमित और धैर्यवान रहेंगे, वे छिपे अवसरों को पहचानकर सफलता प्राप्त करेंगे।
यह गोचर वित्त, संवाद, साझेदारी और गूढ़ विषयों से जुड़े क्षेत्रों में परिवर्तन लाता है।
जो जातक योजनाबद्ध और विवेकपूर्ण कार्य करेंगे, उनके लिए यह अत्यंत फलदायी रहेगा।
गोपनीय जानकारी साझा करने में सावधानी रखें और जल्दबाजी में निर्णय न लें।
वक्री बुध भ्रम और संदेह बढ़ाता है, इसलिए इस दौरान निर्णय सोच-समझकर लें।
बुधवार को हरे वस्त्र पहनें, गाय को हरा चारा खिलाएँ और बुद्ध मंत्र का जाप करें।
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