By पं. अमिताभ शर्मा
जानिए राहु केतु के मंदिरों में सीधी दिशा में परिक्रमा करने का वास्तविक आध्यात्मिक और दार्शनिक रहस्य

सनातन धर्म की पावन वैचारिक चेतना और वैदिक ज्योतिष के विशाल वांग्मय में छाया ग्रह राहु और केतु को कर्मायन का परम नियामक माना गया है। भचक्र के समस्त ज्योतिषीय विन्यासों और उच्च आध्यात्मिक साधनाओं का अंतिम लक्ष्य भी मनुष्य के मस्तिष्क को राहु जनित भ्रम और केतु के अलगाववाद से मुक्त करना है। लौकिक जगत में इन दोनों छाया ग्रहों की पूजा पद्धति और मंदिर वास्तुकला को लेकर अनेक भ्रांतियां फैली हुई हैं। बहुत से मनुष्यों का ऐसा मानना है कि राहु और केतु के मंदिरों में परिक्रमा हमेशा उल्टी दिशा में अर्थात वामावर्त दिशा में करनी चाहिए। परंतु सूक्ष्म वैदिक सिद्धांतों और आगम शास्त्रों के गहन दार्शनिक धरातल पर जाकर देखा जाए तो यह धारणा पूरी तरह से निराधार और शास्त्र विरुद्ध सिद्ध होती है। सत्य तो यह है कि चराचर ब्रह्मांड के प्रत्येक जाग्रत देवस्थान की भांति राहु और केतु की परिक्रमा भी सदा सीधी दिशा में अर्थात दक्षिणावर्त दिशा में ही करनी अनिवार्य है। इस अविनाशी रहस्य को समझे बिना जीव के कर्माशय का शोधन होना सर्वथा असंभव माना गया है। नीचे दी गई तालिका के माध्यम से परिक्रमा के मुख्य आयामों, उनके सूक्ष्म दार्शनिक सिद्धांतों और ज्योतिषीय प्रभावों का एक स्पष्ट विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है जो चेतना के इस स्तर को पूरी तरह स्पष्ट करता है।
| परिक्रमा का आयाम | शास्त्रसम्मत दिशा विन्यास | सूक्ष्म दार्शनिक एवं आत्मिक प्रभाव |
|---|---|---|
| दक्षिणावर्त परिक्रमा | सीधी दिशा (Clockwise) | ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखण और मानसिक शांति |
| वामावर्त परिक्रमा | उल्टी दिशा (Counter Clockwise) | शास्त्र विरुद्ध आचरण और आत्मिक लाभ का समूल ह्रास |
| कुशा और जल का अर्पण | शुद्धि और संकल्प | राहु के भयंकर मतिभ्रम और संशयों का नाश |
| काले तिल और दीप दान | कर्मायन का शोधन | केतु के माध्यम से अंतर्मुखी चेतना और परम मोक्ष |
लौकिक संसार में लोग अक्सर यह तर्क देते हैं कि चूंकि राहु और केतु भचक्र में सदा वक्री गति से चलते हैं इसलिए उनकी परिक्रमा भी विपरीत दिशा में होनी चाहिए। परंतु प्राचीन संहिताओं और शिल्प शास्त्र के ग्रंथों के अनुसार यह सोच पूर्णतः त्रुटिपूर्ण है।
इस पावन नियम का आदर करने से ही जातक को पूजा का संपूर्ण सात्विक फल प्राप्त होता है और राहु केतु की क्रूर रश्मियाँ शांत होकर शुभत्व में परिवर्तित हो जाती हैं।
वैदिक दर्शन में परिक्रमा को केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं माना गया है बल्कि यह तो साक्षात नाद ब्रह्म और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित होने की एक अत्यंत सूक्ष्म आध्यात्मिक कीमिया है। जब मनुष्य सीधी दिशा में कदम आगे बढ़ाता है तो उसका दाहिना भाग सदा देव विग्रह की ओर रहता है जो परम आदर और आत्मसमर्पण का साक्षात सूचक है।
यह गति जातक के भीतर स्थित सुषुम्ना नाड़ी को झंकृत करती है जिससे विचारों का कोलाहल स्वतः ही शांत होने लगता है। इसके विपरीत की गई उल्टी परिक्रमा मनुष्य के आभामंडल को दूषित करती है और कर्मायन के शुभ फलों को पूरी तरह से घटा देती है। यही मुख्य कारण है कि जब भी कोई मनुष्य अपने जीवन की यात्रा में स्वयं को मानसिक रूप से व्याकुल, अवसाद से ग्रसित या भ्रमित महसूस करता है तो उसे सही विधि से नवग्रह की शरण ग्रहण करनी चाहिए।
वैदिक ज्योतिष में राहु को मतिभ्रम, अज्ञात भय और मायावी महत्वाकांक्षाओं का कारक माना गया है तथा केतु को वैराग्य, अंतर्मुखी चेतना और मोक्ष का संवाहक स्वीकार किया गया है। जब मनुष्य पूरी निष्ठा के साथ शास्त्रसम्मत विधि से परिक्रमा पूर्ण करता है तो उसकी चेतना का शोधन बहुत तीव्र गति से संपन्न होता है।
जब आधुनिक मनुष्य इस सत्य को आत्मसात कर लेता है तो उसके भीतर से प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव जाग्रत होता है और वह अंधविश्वासों के जाल से बाहर निकलकर वास्तविक आत्मज्ञान के पावन मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।
कलयुग के इस अशांत वातावरण में जब मनुष्य अपनी भौतिक महत्वाकांक्षाओं के पीछे भागते भागते मानसिक रूप से पूरी तरह टूट जाता है तो प्रकृति उसे ऐसे पावन अवसर प्रदान करती है जहां वह ठहर कर अपनी आत्मा का शोधन कर सके। राहु और केतु की यह सात्विक आराधना श्रद्धालुओं के लिए केवल एक रूढ़िवादी अनुष्ठान नहीं है बल्कि यह तो स्वयं को जाग्रत करने का एक महान ब्रह्मांडीय मुहूर्त है।
इस दिन बाहरी कोलाहल को छोड़कर अंतर्मुखी हो जाइए, अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कीजिए और महादेव की शरणागति ग्रहण कीजिए क्योंकि वे ही इन छाया ग्रहों के सर्वोच्च नियंत्रक हैं। संशय और अहंकार की परतों को हटाकर जब मनुष्य पूरी निष्ठा के साथ इस पावन परिक्रमा के नियमों का पालन करता है तो उसका जीवन एक लौकिक उत्सव में बदल जाता है। यह विधान हमें यह अटूट विश्वास दिलाता है कि हमारे जीवन में होने वाली प्रत्येक घटना और संघर्ष वास्तव में उस ब्रह्मांडीय काल चक्र का ही एक हिस्सा है जो हमें पूर्णता की ओर ले जा रहा है।
क्या राहु और केतु की परिक्रमा अलग से करनी चाहिए या पूरे नवग्रह मंडल के साथ
शास्त्रों के अनुसार राहु और केतु की स्वतंत्र परिक्रमा करने के स्थान पर पूरे नवग्रह मंडल की सामूहिक रूप से दक्षिणावर्त परिक्रमा करना ही सबसे अधिक फलदायी और शास्त्रसम्मत माना गया है।
यदि कोई भूलवश राहु केतु की उल्टी परिक्रमा कर ले तो इसका क्या प्रभाव होता है
भूलवश की गई विपरीत परिक्रमा से मंदिर के भीतर विद्यमान ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह के साथ घर्षण उत्पन्न होता है जिससे आत्मिक लाभ पूरी तरह घट जाता है और मानसिक भ्रम की स्थिति बन सकती है।
राहु और केतु के दोषों को शांत करने के लिए परिक्रमा के समय किस मंत्र का मानसिक जप करना चाहिए
परिक्रमा के समय शांत मन से राहु के लिए ॐ रां राहवे नमः और केतु के लिए ॐ कें केतवे नमः का मानसिक सुमिरन करना अत्यंत कल्याणकारी और सुरक्षात्मक सिद्ध होता है।
क्या महिलाओं और पुरुषों के लिए परिक्रमा के नियमों में कोई विशेष ज्योतिषीय अंतर है
बिल्कुल नहीं शास्त्रों के अनुसार आत्मा की कोई लैंगिक पहचान नहीं होती है इसलिए परिक्रमा के सात्विक नियम, दिशा विन्यास और मानसिक स्पष्टता की आवश्यकता दोनों के लिए पूरी तरह समान हैं।
राहु केतु की परिक्रमा पूर्ण करने के पश्चात मंदिर में किस वस्तु का दान करना सर्वोत्तम माना गया है
परिक्रमा की पूर्णता के पश्चात तांबे के पात्र, काले तिल, कंबल, सात प्रकार के अनाज और सात्विक दीप का गुप्त दान करना राहु केतु जनित संतापों को शांत करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ
500+
USERS
100K+
TRUSTED ASTROLOGERS
20K+
DOWNLOADS