सरल विपरीत राजयोग: संकटों से सफलता

By पं. अमिताभ शर्मा

जानिए कैसे आठवें भाव का यह रहस्यमयी राजयोग जीवन में अचानक भारी धन लाभ और संकटों से पार पाने की शक्ति देता है

सरल विपरीत राजयोग क्या है: अर्थ और प्रभाव

अंधकार से प्रकाश की रहस्यमयी यात्रा

भारतीय ज्योतिष में नवग्रहों और बारह भावों के संयोजन से अनगिनत योग निर्मित होते हैं। इनमें से कुछ योग व्यक्ति को जन्म से ही भाग्यशाली बनाते हैं जबकि कुछ योग कड़े संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों के बाद अप्रत्याशित सफलता प्रदान करते हैं। इसी दूसरी श्रेणी में एक अत्यंत गहरा और परिवर्तनकारी सिद्धांत आता है जिसे विपरीत राजयोग कहा जाता है।

किसी भी जन्म पत्रिका में आठवां भाव सबसे रहस्यमयी गहरा और अचानक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है। यह भाव अचानक आने वाले संकटों छिपे हुए रहस्यों लंबी बीमारियों और जीवन मरण के चक्र का प्रतिनिधित्व करता है। सामान्य रूप से इस भाव और इसके स्वामी को शुभ नहीं माना जाता।

लेकिन महर्षि पाराशर के वैदिक सिद्धांतों के अनुसार जब इस नकारात्मक भाव का स्वामी विपरीत परिस्थितियों के नियम के अंतर्गत अपने ही त्रिक भावों में बैठता है तो एक अद्भुत ऊर्जा का निर्माण होता है। इस विशेष खगोलीय स्थिति को सरल विपरीत राजयोग कहा जाता है।

इस योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह व्यक्ति को सीधे सादे रास्ते से सफलता नहीं देता। यह पहले व्यक्ति को किसी बड़े संकट या गहरे बदलाव के दौर से गुजारता है और फिर अचानक उसे समाज के शीर्ष पर लाकर खड़ा कर देता है। सरल विपरीत राजयोग इस बात का प्रमाण है कि जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य अक्सर सबसे बड़े दुर्भाग्य के वेश में आता है।

सरल विपरीत राजयोग का निर्माण

यह रहस्यमयी राजयोग कुंडली में तीन विशिष्ट स्थितियों के आधार पर क्रियाशील होता है। जब आठवें भाव का स्वामी जिन्हें अष्टमेश कहा जाता है इन तीन में से किसी एक अवस्था में होता है तो यह योग फलित होता है।

अष्टमेश का आठवें भाव में होना

जब आठवें घर का स्वामी अपने ही घर में बैठा हो तो यह स्थिति उस ग्रह को अत्यंत बलवान बनाती है। इससे व्यक्ति की आंतरिक शक्ति और संकटों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। व्यक्ति किसी भी संकट के आगे हार नहीं मानता।

अष्टमेश का छठे भाव में होना

कुंडली का छठा भाव शत्रुओं मुकदमों और बाधाओं का है। यहाँ बैठकर आठवें भाव का स्वामी अपनी प्रबल ऊर्जा से जीवन की रुकावटों को ही शांत कर देता है। ऐसे में व्यक्ति के शत्रु चाहकर भी उसका अहित नहीं कर पाते।

अष्टमेश का बारहवें भाव में होना

बारहवां भाव नुकसान अलगाव और खर्च का है। यहाँ अष्टमेश की उपस्थिति संकटों के प्रभाव को ही पूरी तरह समाप्त या व्यय कर देती है। जातक के जीवन में आने वाले संकट हानि पहुँचाने से पहले ही क्षीण हो जाते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से आठवें भाव की ऊर्जा एक गहरे समुद्र की तरह है। जब यह ऊर्जा बाहर के शुभ भावों को प्रभावित नहीं करती बल्कि अशुभ या त्रिक भावों में ही सिमटकर रह जाती है तो यह व्यक्ति के लिए एक अदृश्य सुरक्षा कवच बन जाती है।

मुख्य विशेषताएं और जीवन पर व्यावहारिक प्रभाव

सरल विपरीत राजयोग से प्रभावित व्यक्ति का व्यक्तित्व आम लोगों से काफी अलग और बहुत गहरा होता है। यह योग व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। इसके मुख्य फल जीवन के कई क्षेत्रों में देखे जाते हैं।

  • अदम्य इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प इस योग के नाम में भले ही सरल शब्द लिखा हो लेकिन इसका व्यावहारिक प्रभाव व्यक्ति को बेहद मजबूत और जुझारू बनाता है। ऐसे लोग जीवन के सबसे कठिन दौर जैसे भारी आर्थिक मंदी या व्यक्तिगत संकट में भी कभी घबराते नहीं हैं। विपरीत परिस्थितियां इनके संकल्प को तोड़ने के बजाय उसे और निखार देती हैं।
  • रहस्यमयी विद्याओं और शोध में गहरी रुचि आठवां भाव छिपी हुई चीजों और गहराइयों का है। इसलिए सरल योग वाले व्यक्ति गहरे विचारक शोधकर्ता वैज्ञानिक या उत्कृष्ट ज्योतिषी बनते हैं। इन्हें उन विषयों में गहरी रुचि होती है जिन्हें आम लोग आसानी से नहीं समझ पाते जैसे गूढ़ विज्ञान मनोविज्ञान या खोजी कार्य।
  • अप्रत्याशित और अचानक भारी धन लाभ इस योग का सबसे चमत्कारी पक्ष अचानक धन लाभ है। व्यक्ति को जीवन में कई बार ऐसे स्रोतों से धन मिलता है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होती। इसमें पैतृक संपत्ति वसीयत बीमा का पैसा या अचानक व्यापार में आए किसी बड़े बदलाव से मिलने वाला भारी लाभ शामिल है।
  • रहस्यमयी और अत्यंत गंभीर व्यक्तित्व ऐसे लोगों के मन में क्या चल रहा है इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल होता है। ये अपनी योजनाओं को तब तक पूरी तरह गुप्त रखते हैं जब तक कि वे सफल न हो जाएं। इनकी यही खामोशी इनके विरोधियों को हमेशा भ्रम और भय में रखती है।

इस राजयोग के फलित होने के सूक्ष्म नियम

कुंडली में सरल विपरीत राजयोग का केवल दिखाई देना ही पर्याप्त नहीं है। एक अनुभवी ज्योतिषी इसके पूर्ण और शुद्ध फल के लिए कई सूक्ष्म ज्योतिषीय कसौटियों का परीक्षण करता है।

लग्नेश का परम बलवान होना अनिवार्य

किसी भी विपरीत राजयोग का सबसे बुनियादी नियम यह है कि जातक का लग्न और लग्नेश अत्यंत मजबूत स्थिति में होने चाहिए। चूंकि आठवां भाव भारी मानसिक या शारीरिक दबाव देता है इसलिए उस भारी दबाव को झेलने के लिए जातक के शरीर और आत्मबल का मजबूत होना जरूरी है। यदि लग्नेश खुद कमजोर अस्त या पीड़ित है तो व्यक्ति राजयोग का फल मिलने से पहले ही परिस्थितियों के आगे घुटने टेक सकता है।

शुभ ग्रहों के हस्तक्षेप से पूर्ण मुक्ति

इस योग को बनाने वाले ग्रहों पर गुरु शुक्र या कुंडली के अन्य शुभ भावों के स्वामियों की युति या दृष्टि नहीं होनी चाहिए। अगर कोई शुभ ग्रह इस ऊर्जा से जुड़ जाता है तो वह अपनी शुभता खो देता है और विपरीत राजयोग खंडित हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति को सफलता कम और परेशानियां अधिक देखनी पड़ती हैं।

दशा चक्र का सही समय पर आना

इस राजयोग का जादुई और क्रांतिकारी असर व्यक्ति को तब देखने को मिलता है जब उसकी सक्रिय आयु में अष्टमेश ग्रह की महादशा या अंतर्दशा आती है। इस अवधि में व्यक्ति अचानक किसी बड़े संकट से बाहर निकलता है और सफलता के एक बिल्कुल नए स्तर पर पहुँच जाता है। यह समय जीवन में सबसे बड़ा बदलाव लेकर आता है।

आपदा में छिपा हुआ महा अवसर

सरल विपरीत राजयोग भारतीय ज्योतिष का वह दिव्य सूत्र है जो यह प्रमाणित करता है कि प्रकृति में कोई भी संकट व्यर्थ नहीं है। यदि समय ऊर्जा और दृष्टिकोण का सही तालमेल हो तो दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल सकता है। यह योग जातक को सिखाता है कि जीवन की वास्तविक सफलता वह है जिसे भयंकर तूफानों के बीच से खोज कर निकाला जाए। एक शुद्ध सरल विपरीत राजयोग व्यक्ति को जीवन के हर युद्ध में अजेय योद्धा बना देता है।

FAQ

सरल विपरीत राजयोग क्या है जब कुंडली के आठवें भाव का स्वामी छठे आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है और शुभ ग्रहों से मुक्त रहता है तो यह राजयोग बनता है।

सरल राजयोग का सबसे बड़ा लाभ क्या है यह योग व्यक्ति को अदम्य इच्छाशक्ति देता है और वसीयत या बीमा जैसे माध्यमों से अचानक भारी धन लाभ कराता है।

क्या सरल राजयोग हमेशा शुभ फल देता है यह योग तभी शुभ फल देता है जब जन्म पत्रिका में लग्न और लग्नेश बहुत बलवान हों ताकि व्यक्ति शुरुआती संकटों को सह सके।

आठवें भाव के स्वामी का बारहवें भाव में क्या प्रभाव होता है जब आठवें भाव का स्वामी बारहवें भाव में होता है तो व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकट और उनका प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाता है।

इस राजयोग का फल जीवन में कब प्राप्त होता है जातक को इस महायोग का वास्तविक लाभ तब मिलता है जब उसके जीवन काल में आठवें भाव के स्वामी ग्रह की महादशा या अंतर्दशा आती है।

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पं. अमिताभ शर्मा

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